दोस्त मेरी पत्नी का ख्याल रखना

गर्मियों की छुट्टियों में जब हम लोग अपने गांव गए थे हमारे साथ हमारी 10 वर्ष की लड़की भी थी और हम लोग कुछ दिन गांव में ही रहने वाले थे। हम लोगों को अब शहर की आदत हो चुकी थी इसलिए गांव में एडजेस्ट करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था लेकिन फिर भी अपने पुश्तैनी मकान में इतने वर्ष बाद आने के बाद अच्छा लगा। हमारा घर पूरा मिट्टी का बना हुआ था इसीलिए घर में अब भी पुरानी चीजें रखी हुई थी मेरी पत्नी ममता कहने लगी केशव तुम्हें याद है जब हम लोग पहली बार नदी किनारे मिले थे। हमारे गांव से होकर ही नदी गुजरती है हमारा गांव बनारस के पास ही है और जब पहली बार मैं ममता से नदी किनारे मिला था तो वह लोग वहां पर कपड़े धो रहे थे। आज से कई वर्ष पुरानी बात है मेरी आंखों के सामने जैसे वही पुराना चलचित्र आ गया था जो कि पहले मेरे साथ हकीकत में हुआ था जब मैंने ममता को पहली बार देखा था।

जब पहली नजर में ही मेरे दिल से आवाज आई थी कि ममता के साथ मुझे शादी करनी है लेकिन जब मुझे ममता के बारे में पता चला तो मैंने अपने दिल से शादी का ख्याल निकाल दिया था क्योंकि ममता के पिताजी हमारे गांव के पास वाले गांव के एक बड़े जमींदार थे और मुझे नहीं लगता था कि ममता से कभी मेरी बात भी हो पाएगी। मैं उस वक्त पैदल ही गांव से बनारस कॉलेज पढ़ने के लिए जाया करता था और ममता ने भी उस वक्त अपने प्रथम वर्ष में दाखिला लिया। मैं ममता को हमेशा देखा करता था क्योंकि ममता के गांव से होकर ही मुझे पैदल जाना पड़ता था इसलिए जब भी ममता मुझे देखती तो वह शरमा जाती थी शर्म भी औरत का गहना होता है और वह शर्माती हुई बहुत अच्छी लगती थी। मैंने ममता को अपने दिल से स्वीकार कर लिया था और ममता से पहली बार मैंने अपने दिल की बात प्रेम पत्र के माध्यम से लिखी थी शायद ममता मेरा प्रेम पत्र पढ़कर अपने आपको ना रोक सकी और उसने अपनी सहेली के हाथ मुझे प्रेम पत्र भिजवाया। जब उसने अपनी सहेली के हाथ मुझे प्रेम पत्र भिजवाया तो उसमें लिखा था कि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं। उस पूरे पत्र को मैंने दो बार पलट कर देखा तो उसमें सिर्फ इतना ही लिखा था कि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं मैं अब ममता की प्रति पूरी तरीके से वफादार था और उससे मैं शादी करना चाहता था।

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हमारे आगे सिर्फ और सिर्फ ममता के पिताजी की वही पुरानी सोच आई गांव में अब हम दोनों के प्यार के चर्चे आग की तरह फैल चुके थे उस गांव में कोई मनोरंजन का साधन नहीं था तो इसलिए हम दोनों के प्यार के चर्चे ही पूरे गांव में चलते रहते थे। मैंने ममता को पाने के लिए ना जाने क्या-क्या किया लेकिन उसके पिताजी कभी भी मुझसे उसकी शादी कराना ही नही चाहते थे। आखिरकार एक दिन ममता के पिता जी मुझसे उसकी शादी कराने के लिए मान ही गए क्योंकि मेरी शहर में अच्छी नौकरी लग चुकी थी और उसके पिताजी को भी एहसास हुआ कि मैं ममता को खुश रखूंगा इसीलिए उन्होंने मुझसे ममता की शादी करवा दी। अब हम दोनों शादी के बंधन में बंध चुके थे तो मैंने ममता को अपने साथ शहर ले जाना ही मुनासिब समझा मेरे माता-पिता गांव में ही रहा करते थे मैं शहर में ममता के साथ रहने लगा था। उसके दो वर्ष बाद हमारी बेटी हुई हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे और मुझे ममता का साथ मिल चुका था कुछ ही समय बाद मैंने अपने माता पिता को भी अपने पास बुला लिया और मैंने शहर में ही एक मकान खरीद लिया। अब हम लोग वहीं रहते हैं लेकिन जब मैं गांव में आया तो अभी भी पुरानी यादें जैसे वही थी और पुरानी यादें जैसी ताजा होने लगी थी। मैं और ममता जब इस बारे में बात करते तो मुझे बहुत अच्छा लगता है और एक सुखद एहसास की अनुभूति होती ममता भी कहने लगी कि हम मां से मिल आते है। मैंने ममता से कहा ठीक है हम लोग कल उनसे मिलने चलेंगे आज तो काफी शाम हो चुकी है और अगले ही दिन हम लोग ममता की मां से मिलने के लिए चले गए। ममता के मां बाप घर में अकेले ही रहते है उनके दोनों लड़कों की शादी के बाद वह दोनों विदेश में चले गए इसलिए ममता की मां घर में अकेली रह गई हैं। उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है और घर में चार नौकर हैं लेकिन फिर भी मेरी सासु मां को अकेले पन का एहसास सताता रहता है और उन्होंने ना चाहते हुए भी मुझसे आखिरकार अपने दिल की बात कह ही दी कि मैं अकेली बहुत परेशान हो चुकी हूं।

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