दोस्त की सेक्सी मम्मी को पटाने की तैयारी

ही दोस्तों, इस कहानी में आप पढ़ेंगे की कैसे मैने अपने दोस्त की मम्मी से शादी करके उसको ज़बरदस्त तरीके से रगड़ा. सबसे पहले मैं आप सब को अपना इंट्रोडक्षन दे देता हू. मेरा नाम महेश है. मेरी उमर 23 साल की है, और मैं गुजरात से हू.

मेरा कद 5’11” है. मेरे शरीर का रंग काला है. मेरा लंड 7 इंच का है, जो किसी भी औरत की छूट और गांद की धज्जियाँ उड़ा सकता है. मैं अपनी मम्मी के साथ अकेला रहता था गुजरात के आमेडबॅड शहर में. बचपन से ही मुझे बड़ी औरत को छोड़ने का चस्का चढ़ा था. और ये चस्का बहुत ज़्यादा था. बीच-बीच में मैं अपने पड़ोस की औंतीयों के बातरूम में झाक के उनको देखता था. मेरे पापा की बचपन में ही मौत हो गयी थी.

बहुत ग़रीबी में पाला बड़ा था. लेकिन स्कूल में पढ़ाई में बहुत अछा कर लेता था. मुझे पता था की कुछ बनने के लिए मुझे आचे से पढ़ाई करनी पड़ेगी. टीचर्स भी मेरी तारीफ करते थे. मुझे तो याद है कभी-कभी जब कोई टीचर आचे मार्क्स की वजह से गले लगती थी, तो मुझे उसके बूब्स की स्मेल सूंघ के बड़ा मज़ा आता था.

मेहनत करके देल्ही के एक आचे इंजिनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया. देखते-देखते जब मैं 3र्ड एअर में पहुँचा, तब हमारे कॉलेज में एक नया लड़का आया 1स्ट्रीट एअर में. उसका नाम मनीष था, और उसकी उमर 19 साल की होगी. वो कॉमर्स डिपार्टमेंट में था.

उसकी मुझसे बहुत अची दोस्ती हो गयी. हम हर शाम को क्रिकेट खेलने जाते थे. मनीष दुबला-पतला और तोड़ा सा छ्होटे कद का लड़का था, तो मैं उसको रॅगिंग से बचा लेता था. इससे हमारी दोस्त और बढ़ गयी. हम दोनो कभी-कभी एक-दूसरे के साथ सेक्सी-सेक्सी बातें भी करते थे, जैसे दोस्तों के बीच होती है.

हम अपने कॉलेज में जो लॅडीस फॅकल्टी थी, सब के बारे में सोच कर मूठ पेलते थे. बीच-बीच में मैं मनीष को बोलता था की अपने घर पर कब बुलाएगा मुझे. वो भी बात को ताल देता था. अब मुझे क्या मालूम था की एक दिन उसके घर में सोना मिलेगा मुझे.

एक दिन सनडे को हम दोनो क्रिकेट खेलने गये थे शाम को. अचानक उसको उसकी मम्मी ने फोन किया और समान मँगवाया, क्यूंकी उसके घर में रिश्तेदार आने वाले थे. मैं और मनीष मार्केट गये, और फिर वाहा से उसके घर गये.

जैसे ही उसकी घर की घंटी बजाई हमने, उसकी मम्मी ने दरवाज़ा खोला. मेरा तो उसकी मम्मी को देखते ही खड़ा हो गया. क्या कमसिन कामुक औरत थी. उसका रंग गोरा था. हाइट 5’8″, काले लंबे बाल, फिगर 38-36-39, बड़ी आँखें, चेहरा इतना सुंदर की देख के दिन भर मूठ मार के भी मॅन ना भरे.

उसकी मम्मी के बूब्स मैं देख पा रहा था बिना ब्रा के काससे हुए थे, जो की मुझे उसकी शर्ट के उपर से दिखाई दे रहा था. उसकी मम्मी जब चलती थी तब उसके चूतड़ मटक रहे थे, जो की देख के मज़ा आ रहा था. मैं तो सोच रहा था की उसकी मम्मी 38 साल की उमर में इतनी कड़क थी, पता नही जवानी के दीनो में कैसी कड़क रही होगी.

और मुझे ये भी लगा की साला मनीष का बाप लोदउ था एक नंबर का, जो ऐसी माल बीवी होते हुए भी विदेश में गांद मारा रहा है. अगर मेरी शादी सुमन से हुई होती, तो अभी मनीष के 3-4 भाई-बेहन और होते. दोस्तों आप ही बताए इतनी सुंदर औरत से एक बच्चा उसकी सुंदरता की तो तौहीन होती है.

मुझे बाद में पता चला उसकी मम्मी का नाम सुमन था. सुमन आंटी ने घर में सलवार और कुर्ता पहन रखा था, जैसे हाउसवाइव्स पहनती है. मगर उसमे भी वो कड़क लग रही थी. मैने फिर मनीष से उसके पापा के बारे में पूछा तो उसने बोला की उसके पापा फॉरिन में काम करते थे, और 2 साल में एक बार घर आते थे.

मेरे मांन में लड्डू फूटा की यार मेरा रास्ता तो सॉफ था. मैने बीच में उसकी मम्मी से जाके हिम्मत करके पूच लिया-

मैं: आंटी आप बहुत यंग लग रही हो. आपको आंटी बोलना अछा नही लगेगा. मैं आपको सुमन बूलौऊ?

तो उसकी मम्मी ने मुस्कुराते हुए बोला: नही.

मैं फिर अपने हॉस्टिल वापस आ गया और फ़ेसबुक पे मनीष की मम्मी की ईद सर्च की. मुझे उस ईद पे जो सब उसकी मम्मी की फोटोस मिली, सब का मैने स्क्रीनशॉट लिया, और रात भर उन्हे देख के अपने बड़े लंड से मूठ पेली.

मैने तन लिया की उसे अपना बना के रहूँगा. सुमन के गोरे-गोरे बदन को मैं अपना बना के ही रहूँगा. लेकिन उसके लिए मेरे पास नौकरी होनी ज़रूरी थी. अब 4त एअर चालू हो गया था, तो मैं प्लेसमेंट के लिए जी तोड़ मेहनत करने लग गया. मैं बीच-बीच में मनीष के घर भी जाता था. कभी-कभी उसको कोई कॉन्सेप्ट समझा देता था.

उसकी मम्मी के लिए गिफ्ट भी ला देता था. बीच-बीच में साथ-साथ में मेरे मार्क्स भी आचे आ रहे थे, और मेरा कॉन्फिडेन्स अपने चरम पे था. बीच में मनीष को एक लड़की भी पसंद आई थी, जो की 1स्ट्रीट एअर में थी. उसका नाम कोमल था. मैने मनीष से उसकी सेट्टिंग भी करा दी थी. मैं कोमल को बीच-बीच में बहू कह के बुलाता था, और मनीष को बेटा.

मनीष इन सब को मज़ाक समझता था, और वो भी मुझे मज़ाक-मज़ाक में पापा कह के बुला देता. दोस्तों इन सब की वजह से मैं सुमन को प्रपोज़ करने के लिए और तैयार हो गया था. मगर सबसे पहले मुझे मनीष को समझना था की मैं उसकी मम्मी से बहुत प्यार करता था, और उसको मैं बेटा मज़ाक में नही बल्कि सच में एक सीरीयस इरादे से बुलाता था.

तो दोस्तों अगले पार्ट में मैं आपको बतौँगा की कैसे मैने अपने दोस्त की मम्मी को अपनी बीवी बनाया, और ज़बरदस्त तरीके से सुहग्रात मनाई.

आप कॉमेंट करते रहिएगा दोस्तों. दोस्तों कहानी आपको जैसी भी लगे आप बस कॉमेंट कीजिए, और अगर कहानी खराब भी लगे, तो गाली बक दीजिए कॉमेंट में. कोई प्राब्लम नही है.

अगर आपको कहानी अची लगे, तो इसको अपने दोस्तों के साथ भी शेर करे. कहानी पढ़ने के लिए आप सब का धन्यवाद.

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