दोस्त की मम्मी को ग्रूप मे चोदा

लास्ट पार्ट मे मैने आपको सुनाया कैसे मैने हुमारी कांवली राधा को अपनी रंडी बनाया.

इस बार हम किसी और किस्सा सुनेंगे, मेरे दोस्त विजय का किस्सा.

विजय का अड्डा तो याद ही होगा.

वो हुमरे गाओ की सबसे पॉपुलर जगह है. वाहा एक क्लब के साथ एक कोठा भी चलता है. पोलीस को ये पता है पर वो कुछ नही बोलते. वाहा 12 से ज़्यादा रंडिया काम करती है. इसी अड्डे का मलिक है विजय, मेरा दोस्त. उसकी फॅमिली ये धनदा बोहुत पहले से कर रही है पर विजय का अड्डा खोला विजय ने अपने दूं पर है. विजय और मई एक ही स्कूल मे थे तो बचपन से दोस्ती है.

हम टोटल 4 दोस्त है मई(राजू), विजय, रोहन और कार्तिक. हम सब कुछ एकसाथ करते थे और एकसाथ बारे हुए. अभी सब अपने अपने काम ए बिज़ी है पर कभी कभी विजय के अड्डे पे एकसाथ दारू पीते है.

वैसे हम चारो दोस्त की बहुत कहानियाँ है पर ये किस्सा विजय का है. और विजय का राज़ है जो बस हम चारो को ही पता है. विजय मदारचोड़ है, नही गाली नही दे रहा हू, विजय अपनी मा को छोड़ता है.

विजय की फॅमिली रंडियो को धनदा बोहुत पहले से करती है. उसकी मा और नानी दोनो रंडिया है. अभी उसकी नानी काम नही करती पर उसकी मा अभी भी विजय के अड्डे पे काम कार्की है. उसकी मा का नाम शारदा है और वो गोरी और हेल्ती है. शारदा के बूब बोहुत बारे है और गंद भी काफ़ी बरी है. वो हर रात का 1200 लेती है.

विजय जब 10त मे था हम सब को पता चल चुका था उसकी मा क्या करती है. तो हम उसको इस्बत को लेकर चीरते थे. वो भारक जाता पर हम इसको लेके ज़्यादा नही खिचते. तब विजय का अड्डा नही था पर एक छोटा रनदिखना था जहा उसकी मा काम करती थी.

जब हम थोरे बारे हुए हम पैसे बचके उसकी मारने जाते. और ये बात विजय को पता थी पर वो कुछ नही बोलता. जब हम सबने 12त पास की और कॉलेज की प्लॅनिंग कर रहे थे विजय ने कहा उसे कुछ और करना है पर हुमे नही पता था क्या क्िउकी उसने हुमे नही बताया था.

एक दिन विजय ने हुमे अपने घर बुलाया. तो हम टीन उसके घर के बाहर चले आए पर बुलाने पे वो बाहर नही आया. तो हुमे उसे कॉल लगाया तो उसने कहा वो अंदर ही है और उसके कमरे मे चले आने. हम उसकी बात सुन अंदर चले आए. उसके कमरे का दरवाज़ा बंद था. हुंने जब दरवाज़ा खोला तो हम डांग रहगए. वो अपनी बिस्तर पे सोया था और उसकी मा उसके खरे लंड के उपर कुऊद रही थी. इससे पहले हम कुछ बोल पेटी.

शारदा: आओ बेटा अंदर आओ शर्मा कीयू रहे हो.

हम सब विस्मय मे थे की क्या हो रहा है. हुंने विजय की मा को बोहुत बार पेला है. और वो एक भूखी रंडी है ये बात हुमको पता थी पर मा और बेटे के बीच यह सब देखना हुंने यकीन नही होरहा था. विजय का लंड ताना हुआ शारदा की ढीली छूट के अंदर जेया रहा था. विजय अपनी ही मा की छूट मार रहा था. दोनो मा और बेटे का पवितरा रिश्ता थॉर्न का आनंद ले रहे थे. पर यह ग़लत चीज़ होते देख भी हुमारा लंड खरा हो गया था.

शारदा के बूब्स बहुत बारे थे और विजय के ढके लगाने की वजह से वो ज़ोर ज़ोर से झूल रहे थे. हुमे मज़ा आ रहा था यह देखने मे. पर अचानक से मेरी नज़र थोरी ढूंडली हुई और मुज़े कुछ पॅलो के लिए मेरी मा का चेहरा दिखा. और मेरा लंड पहले से ज़्यादा खरा हो गया. मई इसके बारे मे सोच पता उससे पहले विजय ने शारदा की जांघों को ज़ोर से पकरा ओर ज़ोर से अया की आवाज़ की. और उसने उसी कोख को अपने रस से भर दिए जिससे उसने जानम लिया था.

हम बस देखते रह गये. उंटनी देर मे उसने शारदा को बिस्तर पे लेटया. शारदा की छूट से विजय का रास तपाक रहा था. वो खरा हुआ और हुमारी और देखा.

विजय: मैने अपनी मा को सबसे चुड़ते हुए देखा. सबसे. मई कभी कभी चुप चुप के देखता और मुज़े जलन होती पर मुजसे और बर्दाश्त नही हुआ और मुज़े वो छूट वापस चाहिए थी जिसमे हुमरे गाओ के हर मर्द मे अपना लंड डाला है. मुज़े अभ पता है मुज़े अपनी ज़िंदगी मे क्या करना है.

इससे पहले की हम कुछ बोल पेटी.

विजय: मा की छूट अब बस मेरी है पर तुम मेरे सबसे आचे दोस्त हो और तुम लोगो ने मेरी मा को पहले भी छोड़ चुके हो कभी कभी तुम अपनी भूक मिटा सकते हो.

यह कहकर को कमरे से बाहर चला गया और शारदा उठकर बैठी तो हुमे समाज आ गया. हुंने अपने काप्रे उतरे और अपने खरे लंड लेकर भूखे कुत्टू की तरह शारदा पर झपट परे और उसके हर छेड़ को इतनी बार छोड़ा हुमे और गिनती याद नही. मैने सबसे पहले बिस्तर के उपर चारके शारदा के मूह मे अपना लंड डाल दिया और कार्तिक ने सीधा छूट पा निशाना लगाया.

शारदा की छूट अभी भी विजय के रस से गीली थी पर कार्तिक को कोई फ़र्क नही परा वो अपना ज़ोर लगाकर उसकी छूट मार रहा था. शारदा की छूट बोहुत ढीली है तो दिख रहा था. और शारदा अपने एक हाथ दे रोहन का लंड सहला रही थी. हुंने कुछ ही देर मे अपना लंड का रस चोर दिया. वो मेरा झट से निगल गयी और रोहन का रस अपने बारे झूलते होये बूब्स पे ले लिया.

और कार्तिक ने उसकी छूट भार्डी. हुंने बार बार जागे बदली और उसकी छूट मे रस चोर्ते गये. इतना की उसकी पेट मे हल्का सा दबाने से छूट से रस बाहर आता.

हम जब कमरे से ठक्कर बाहर आए शारदा रस से धकचुकी थी.

हुमे इतनी एनर्जी इश्स बात से मिल की हुँने कुछ टॅबू देखा था. एक ऐसी चेज़ जो हुमे नही करनी चाहिए. शायद इसी को कहते है फॉरबिडन प्लेषर.

इसके बाद विजय ने अपने फॅमिली के पैसो से विजय का अड्डा खोला और वो अभी हुमरे गाओ की सबसे माशूर जगह है. वाहा 12 ज़्यादा रंडिया तो है पर शारदा बस हुंसे चुड़ती है.

यह किस्सा था विजय, शारदा और विजय के अड्डे के बारे मे.

मिलते है अगले पार्ट मे

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