दोस्त की मों के साथ सेक्स का रिस्क लेने की कहानी

मोहित मेरा फ्रेंड है, जो की क्लास 12 में पढ़ता है, और 19 साल का है. उसकी फॅमिली में उसके पापा संजय आगे 42, उसकी मों सुमन आगे 39 और उसकी सिस्टर मोनिका है. मोनिका मोहित से 3 महीने छ्होटी है. मोहित के पापा दुबई में जॉब करते है, तो साल में एक बार ही आते है.

मैं काफ़ी टाइम से मोहित की हेल्प करता रहता हू. हमारा घर मोहित के घर से तोड़ा डोर है, बुत आना जाना लगा रहता है. मोहित की मम्मी सुमन दिखने में काफ़ी सुंदर है. सुमन को देख कर हर कोई उससे बात करना चाहता है. सुमन सब से हस्स कर बात करती है.

एक दिन की बात है. मुझे बेज़ार जाना था तो मोहित को साथ लेकर जाना चाहता था. मैं मोहित के घर गया तो वाहा कोई दिखाई नही दिया. अंदर गया तो मोहित की मों अपनी ड्रेस चेंज कर रही थी. उसकी पूरी नंगी पीठ देख कर मेरे होश उडद गये. सुमन का गोरा बदन और पीछे से पूरी नंगी थी. उसने ब्रा भी नही पहन रखी थी.

सुमन को देख कर एक-दूं से मुझे झटका लगा. मैं वापस मूड गया. थोड़ी देर में वो बाहर आई, तो मैने देखा की उसके बूब थोड़े-थोड़े दिख रहे है. मेरा लंड खड़ा हो गया. सुमन को देख कर मूड बदल गया था. मैं उसके बूब्स की तरफ देख कर बात कर रहा था.

सुमन बात करने लगी थी. मैने उसको स्माइल दी तो वो भी स्माइल देने लगी. सुमन आज ज़्यादा ही मस्त लग रही थी. फिर मैं वापस घर आ गया. मैं सोचने लगा की सुमन को नंगी देख कर लंड खड़ा हो गया. सुमन का घर वाला संजय जब सुमन को छोड़ता होगा, तो उसको कितना मज़ा आता होगा.

फिर मुझे याद आया की ये तो एक साल बाद ही चुड़वति है. अब मैं रोज़ उसके घर जाता जब मोहित घर में नही होता. उसके बूब्स को घूर्णा स्टार्ट कर दिया मैने, और मुझे मज़ा भी आने लगा. सुमन रूम सॉफ करती तो उसके बूब काफ़ी दिखते थे.

मुझे मज़ा आने लगा

था. मैने सोच लिया था की अगर सुमन पट्ट गयी तो रोज़ उसकी छूट मिलेगी. वो दिखने में भी बहुत मस्त थी, और जवान भी है. मोहित और मोनिका के सोने के बाद हम आराम से चुदाई कर सकते थे.

मैं रोज़ ही उसके पास जाने लगा. उसके पास किचन में खड़ा होके बात करता था मैं. वो भी खूब हस्स कर बात करती थी. बुत अभी तक कोई बड़ी सफलता नही मिली थी.

मोहित से मिलने के बहाने सुमन से खूब बात हो जाती थी. सुमन दिखने में काफ़ी मस्त थी. उसके बूब की दरार देख कर तो हर किसी का लंड खड़ा हो जाता था. बूब भी काफ़ी आचे थे. सुबा के टाइम जाता तो उसकी निपल भी दिख जाती थी, क्यूंकी रात को वो ब्रा खोल कर सोती थी.

सुबा घर में पोछा लगते टाइम जब झुकती थी, तो बूब्स काफ़ी दिख जाते थे. बूब्स की दरार देख-देख कर लंड खड़ा हो जाता था. काई बार वो बेड पर बहुत पास ही बैठ जाती थी, तो बूब्स देख कर बहुत मज़ा आता था.

इस तरह से करीब 2 मंत तक चलता रहा. पर कोई खास बात नही बनी. मोहित भी काफ़ी जवान हो गया था. उसके घर में दो छूट थी. मोहित अगर अपनी मों और सिस्टर से सेट्टिंग करवा देता, तो बात बन सकती थी. मुझे पता था की मोहित भी सेक्स वीडियो देखता था.

मोहित की मों बहुत मस्त माल थी और सिस्टर भी अब काफ़ी मस्त दिखने लगी थी. उसके बूब थोड़े ही टाइम में काफ़ी बड़े हो गये थे. मोनिका भी कोई कम नही थी. मैं मों और बेटी दोनो को छोड़ने का प्लान करने लगा. एक पट्ट जाती तो फिर सब काम ईज़ी हो जाता. बुत कुछ भी नही हुआ.

एक दिन की बात है. मैं सुबा 10 बजे उनके घर गया. सुमन रूम में पोछा लगा रही थी. घर में कोई नही था. मोहित और मोनिका स्कूल गये हुए थे. मैं टीवी देखने लगा.

सुमन: अर्रे तुम हो क्या? कब आए?

राज: बस अभी आया था.

सुमन को देख कर मैने स्माइल दी तो वो भी खुश हो गयी.

सुमन: अभी तोड़ा काम है. फिर छाई बनौँगी. आज बहुत काम था. बस एक रूम बचा है.

फिर सुमन बाहर चली गयी. मेरा लंड सुमन को देख कर खड़ा हो गया था. पिछले कुछ दिन से मैने नोटीस किया था की सुमन मेरे साथ ज़्यादा फ्रेंड्ली नज़र आ रही थी. बुत चुदाई तक बात नही पहुचि थी.

तभी मैने धदम की आवाज़ सुनी. बाहर गया तो देखा की सुमन नीचे गिरी हुई थी. मैं भाग कर गया. सुमन ने मेरी तरफ देख कर खड़ी करने का इशारा किया. मैने सुमन को पकड़ लिया. सुमन के नाक पर खून आ रहा था.

सुमन: श, ज़ोर से लगी है. श, मम्मी याद आ गयी. मेरा पैर तार में उलझ गया था. ऑश दर्द हो रहा है.

मैने सुमन के कंधे के नीचे सर डाल कर उपर उठा लिया.

सुमन: ऑश रूको, मुझसे चला नही जेया रहा.

मैं: बेड पर चलो एक बार.

मैं सुमन को गोद में उठा कर झट से बेडरूम में ले आया. सुमन माना कर रही थी, बुत उसको गोद में उठा लिया. बेडरूम में आ कर वो मेरी तरफ देख रही थी. उसको अंदाज़ा नही था की मैं उसको गोद में उठा लूँगा.

सुमन: तुम तो काफ़ी बड़े हो गये हो.

मैं: अर्रे अब आराम से इलाज कारवओ अपना.

वो मुस्कुराइ.

मैं: ओह, नाक को सॉफ करता हू. क्या हुआ था? गिर कैसे गयी?

सुमन: वो मैने फन का तार नही देखा था. पैर में उलझ गया था, और मैं सामने की तरफ गिर गयी.

मैने उसका नाक सॉफ कर दिया और उसके घुटने को सहलाने लगा.

सुमन: मैं आज काफ़ी ताकि हुई थी, उपर से ये और हो गया. सोचा था की छाई पिएँगे तो ठीक हो जौंगी.

मैं: अर्रे दर्र क्यूँ रही हो आप? छाई भी पीला दूँगा.

फिर मैने सुमन को तोड़ा सा दूसरी तरफ किया, और उसके पैर दबाने लगा. सुमन को शायद अछा लगने लगा था.

सुमन: श आ, बहुत दर्द कर रहे है. श, काफ़ी अछा लग रहा है. बुत तुम रहने दो. कोई देख लेगा की मैं तुम से पैर डबवा रही हू. बस करो मैं कोई गोली खा लूँगी.

मैं: अर्रे अब 5 मिनिट आराम करो. कोई नही आएगा. तुमको मज़ा आ रहा है तो माना क्यूँ कर रही हो?

ये बात सुनते ही सुमन ने स्माइल दी. शायद उसको मज़ा आ रहा है, ये बात सुन कर अजीब लगा था. मैं उसके पैर दबाने लगा थोड़ी ही देर में. वो कुछ नही बोली, क्यूंकी उसको आराम आ रहा था.

मैं उसको उल्टा लिटा कर दबाने लगा. थोड़ी ही देर में उसकी गोरी बाहें भी दबाने लगा. उसकी गांद को पैर से दबाया था. वो कुछ नही बोली. फिर उसको बिता कर उसकी गर्दन भी दबाने लगा. मैं उसके बूब्स के दर्शन कर रहा था. मेरा लंड खड़ा होने लगा था. काफ़ी दर दबाने के बाद वो बोली-

सुमन: अब बस करो, कोई देख लेगा.

मेरा मॅन तो उसके बूब पर अटका हुआ था.

सुमन: श सच में बहुत अछा लग रहा है. 2-3 दिन से बहुत ताकि हुई थी. अब तो एक-दूं रीचार्ज हो गयी. बॉडी एक-दूं हल्की हो गयी. चलो अब छाई ले आती हू.

वो खड़ी हो कर छाई लेने चली गयी. मैं आराम से लेट गया. मेरा लंड पंत के अंदर खड़ा ही था. फिर वो मेरे सामने आ कर बैठ गयी.

सुमन: तुम घर में किसी को बोल मत देना, की तुमने मेरे पैर दबाए थे.

हम दोनो छाई पीने लगे, और हम दोनो की बात-चीत चलती रही. मुझे वो स्माइल दे रही थी. फिर जब वो खड़ी हुई, तो मैने अचानक से उसको पकड़ा, और लिप्स चूसने लगा. वो एक-दूं से हड़बड़ा गयी, और उसने मुझे डोर किया.

सुमन: श, ये क्या कर रहे हो? कोई देख लेता तो क्या होता? तुम मेरे बेटे के दोस्त हो, और दोस्त की मों के साथ ये सब कर रहे हो? मैने तुम्हे अछा समझा था.

मैं: तुम मुझे बहुत अची लगती हो.

सुमन: तुम भी तो आचे लगते हो मुझे. इसका मतलब ये तो नही की मैं तुमको किस करने लग जौ? कोई देख ले तो कितना बड़ा हंगामा हो जाएगा. ऐसे नही करना चाहिए.

मैं: श, ई आम सॉरी.

मुझे अब कुछ भी नही सूझा. सुमन जो मुझे हस्स-हस्स कर मज़ा दे रही थी, वो थोड़ी सी दर्र में ही गरम हो गयी थी. मुझे लगा की अब तो ये भी हाथ से गयी.

मैं चुप-छाप अपने घर चला आया. 2-3 दिन तक डरता रहा कही वो ये घर पर ना बोल दे. 3 दीनो तक मैं उनके घर नही गया. फिर अगले दिन रात को 8 बजे सुमन का फोन आया.

मैने फोन अटेंड नही किया. मगर कॉल पर कॉल आने लगी तो अटेंड किया.

फिर वो बोली: अभी मेरे घर आ जाओ, कोई काम है.

ये सब सुन कर मेरा दिल बैठ गया की अब क्या होगा? कही वो कोई शिकायत तो नही करने वाली थी. मैं मॅन मार कर उसके घर चला गया. उसके बाद जो घटना हुई, वो मैने सोची भी नही थी.

मोहित की मम्मी सुमन को छोड़ने की चाहत थी, मगर मेरे एक ग़लत कदम ने सब ख़तम कर दिया. वो बहुत प्यार से सब करती थी. मेरा मूड बहुत खराब था. मैं उनके घर की तरफ चल पड़ा.

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