दोस्त की माँ ने चुदाई करवाई

दोस्तों आज की Antarvasna इस कहानी में मैं आप को बताऊंगा की कैसी मेरी और मेरे दोस्त की माँ की चुदाई का सेटिंग हुआ. मैं गुजरात से हूँ और कोलेज में पढता हूँ. मेरी हाईट 5 फिट 7 इंच हे और मैं दिखने में ठीक ठीक हूँ और बॉडी मेरी एवेरेज हे. मुझे भाभियों और बड़ी उम्र की आंटी के साथ चोदने का पसंद हे. क्यूंकि उन्हें सेक्स का अच्छा अनुभव रहता हे.

तो मैं जब कोलेज में एडमिशन लिया तो वहाँ सब कुछ नया था. मेरे सब दोस्त अलग अलग हो गए थे. और मैं जिस कोलेज में था वहां तो पुराने सर्कल से कोई था ही नहीं. अब नयी कोलेज में मैंने कुछ नए लडको को अपना दोस्त बना लिया.

एक नया दोस्त बना जो मेरे घर के करीब में ही रहता था. मैं डेली उसके साथ ही रहने लगा था दिन का काफी सारा समय. हम घर से साथ में ही कोलेज और घुमने फिरने और खेलने का काम करते थे. वो लोग काफी पैसे वाले थे और उसका घर भी काफी बड़ा था. उसके घर में उसकी मम्मी, डेडी, छोटी बहन, उसके अंकल, आंटी, दादी और दादा जी रहते थे. मेरे मोम की माँ बड़ी ही सेक्सी लगती थी. उसकी बड़ी गांड और बूब्स को देख के कसम से लंड खड़ा हो जाए ऐसी आंटी थी वो. उसे दिन की किसी भी वक्त देखो आप का लंड खड़ा हो ही जाए ऐसे थी वो!

मैं इस दोस्त के घर अक्सर जाता था. और अक्सर लेट नाईट तक वही पर होता था. और अगर लेट हो तो मैं अपने घर पर बता के दोस्त के घर पर ही सो भी जाता था. मेरे दोस्त का अपना प्राइवेट बेडरूम था इसलिए कोई टेंशन नहीं थी. ऐसे ही कोलेज का पहला साल पूरा हो गया. और मेरी और मेरे दोस्त की माँ की भी अच्छी बनने लगी थी. आंटी का नाम नीता हे. आंटी घर के अन्दर सलवार और कमीज पहनती थी. और काम करते हुए वो अपनी चुन्नी निकाल देती थी.

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बहुत बार आंटी के बूब्स मुझे दिख जाते थे. और मुझे ऐसे भी आंटी लोगों की बूब्स और गांड एकदम से आकर्षित करती हे. तो मेरी नजर उन्के बूब्स के ऊपर चली जाती थी. काफी बार नीता आंटी ने मुझे उन्के बूब्स देखते हुए देख भी लिया था. पर वो अभी तक मुझे कभी कुछ कही नहीं थी. अब मेरा मन और ईमान आंटी के प्रति बिगड़ने लगा था. अब मैं नीता आंटी को चोदने के खाव्ब देखने लगा था. और कई मैं आंटी के बड़े बूब्स और गांड के ख्याल कर के बहुत बार अपना लंड भी हिला चूका था.

एक दिन मैं मेरे दोस्त के कमरे में था. और मेरा दोस्त कुछ काम से बहार गया. उसके अंकल ने फोन कर के उसे कुछ काम बताया था इसलिए वो गया था. उसने बोला तू बैठ मैं जल्दी से वापस आता हूँ. वो बोला मुझे एक घंटे जैसे लगेगा. मैंने कहा ठीक हे तू हो आ. उसके जाने के कुछ देर बाद आंटी कमरे में आई और उसने पोछा हाथ में पकड़ रखा था. मैं बिस्तर के ऊपर चढ़ के बैठ गया और आंटी निचेफर्श के ऊपर पोछा करने लगी. आंटी झुक के काम कर रही थी और उसके बूब्स एस युसुअल मेरे को दिखने लगे थे. मेरी नजर को मैं कंट्रोल न कर सका और वो आंटी के बूब्स के ऊपर चली गई. मैं देखा नहीं की आंटी कब से देख रही थी की मैं उसकी चूचियां देख रहा था. आंटी ने मेरा नाम लिया तो मैंने उन्के सामने देखा.

आंटी: क्या देख रहे हो?

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मैंने कहा, कुछ भी तो नहीं आंटी.

आंटी: मुझे क्या पागल समझा हे की कुछ समझ नहीं आता हे. रुको आज आने दो तुम्हारे दोस्त को शिकायत लगाती हूँ तुम्हारी!

मैं जानता था की कोई माँ अपने बेटे को ये सब नहीं बताएगी. मैं ये जानता था की वो सिर्फ मुझे डराने के लिए ही ऐसा कह रही थी.

मैं: नहीं आंटी ऐसा कुछ मत करना प्लीज़! अगर आप को बुरा लगा हे तो मैं आप की माफ़ी मांगता हूँ. मैं दुबारा ऐसा नहीं करूँगा!

नीता आंटी ने कहा इट्स ओके और वो फिर से अपना काम करने लगी. पर मेरा मन और लंड भला कहा से मान जाता इतनी जल्दी से. मैंने तो वापस आंटी की चूचियां देखने लगा! और नीता आंटी ने मुझे फिर से पकड़ लिया!

अब की वो बोली: अरे ऐसा क्या हे मेरी छाती में की तुम देखते ही जा रहे हो!

उसका आवाज थोडा हेवी था.

मैं: सोरी आंटी, सोरी सोरी!

आंटी: तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है की नहीं की मुझे ऐसे देखते हो!

मैं: नहीं आंटी मेरी एक भी गर्लफ्रेंड नहीं हे, पहले थी लेकिन अब ब्रेकअप हो गया हे. अभी सिर्फ फ्रेंड्स हे!

नीता आंटी मेरे पास में आ के बैठ गई और बोलो: तुम मुझे देखते हो तो मुझे भी अच्छा लगता हे क्यूंकि मैं पिछले कुछ महीनो से किसी के साथ फिजिकल नहीं हूँ हूँ. तुम्हारे अंकल अपने काम में इतने बीजी हे की उन्हें मेरा कुछ ख्याल ही नहीं हे. और ये कह के आंटी ने अपने हाथ को मेरी जांघ के ऊपर रख दिया.

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