दोस्त के साथ भागी रंडी मा

मों सेक्स स्टोरी
अब आयेज-

मैं लाते नाइट घर पे आया, बिल्कुल तका हुआ. जैसे ही अंदर घुसा, मा को अपने रूम में फोन पे बात करते सुना. गुस्से से पागल हो गया मैं. उसका फोन छ्चीन लिया और चिल्लाया, “कुछ भी हो जाए, मैं तुझे रिज़वान से नही मिलने दूँगा!”

मा ने गुस्सा नही किया, ना रोई, ना चिल्लाई. बस एक काम, जानने वाली स्माइल दी. उसकी ये स्माइल देख के मुझे शॉक लग गया. मैं अपने रूम में चला गया, गुस्से और कन्फ्यूषन में सोचता-सोचता सो गया.

अगली सुबह उठा तो मा को घर में ढूँदने लगा, मा कहीं नही थी. उसका मोबाइल भी गायब था. मैने बार-बार उसे कॉल किया, मेसेज किया, बुत वो मेरे फोन का कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी. मैने तोड़ा पॅनिक हो गया. फिर मैने फटाफट बिके निकली और सीधा रिज़वान के फ्लॅट पे पहुँचा. वाहा पहुँच के देखा तो ना वो था, ना मा. रवि भैया से पूछा तो उन्होने कहा, “रिज़वान सुबह से फ्लॅट पे नही दिखा.”

फिर मैने रिज़वान को बार-बार कॉल किया. बहुत बार ट्राइ करने के बाद, आख़िर उसने मेरा कॉल पिक उप किया.

मैं: “मदारचोड़, कहाँ है तू? मेरी मा कहाँ है?”

रिज़वान: “भोसदीके, तेरे बकवास सुन-सुन के तक गया. मुझे क्या पता तेरी मा कहाँ है?”

मैं: “सीधे-सीधे बोल! वो तेरे साथ है ना? बता, वरना पोलीस के पास जौंगा!”

रिज़वान: “धमकी मॅट दे, जा तुझे जो करना है कर ले. तेरी मा क्या कोई बच्ची है जो मैं गोद में उठा के भगा लूँगा?”

मैं: “मदारचोड़, गोद में उठा के छोड़ सकता है तो भगा भी सकता है! जल्दी बता कहाँ है तू और मेरी मा!”

रिज़वान: “भोसदिके, मुझे क्या पता! तुझसे परेशन होके या तो भाग गयी होगी, या स्यूयिसाइड कर लिया होगा. तेरे जैसे सेल्फिश बेटा वाली मा और क्या करेगी बेचारी?”

उसकी बात सुन के मैं घबरा गया, मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा.

रिज़वान: “और अगर स्यूयिसाइड किया तो तू ही ज़िम्मेदार होगा.”

इतना बोल के उसने कॉल काट दिया.
मैं वापस ट्राइ किया पर उसने मेरा कॉल आन्सर नही किया. फिर मैं फ्लॅट पे आया. बीच-बीच में मैं मा को कॉल करता रहा. अब मैने और घबरा गया पूरा दिन निकल गया था, ना कोई रिलेटिव था हेल्प के लिए, ना दोस्त.

आख़िर मैने रिज़वान को मेसेज किया: “सॉरी भाई, गुस्से में कुछ भी बोल गया. प्लीज़ एक बार कॉल रिसीव कर.”

थोड़ी देर में मैने फोन बजा.

रिज़वान: “हा बोल.”

मैं: “सॉरी भाई, मैं ग़लत था मा के साथ भी, तेरे साथ भी. प्लीज़ बता मा कहाँ है?” मैं रोने लगा.

रिज़वान: “रो मत. तेरी मा मेरे साथ है, बिल्कुल ठीक है.”

मैं खुश हो गया, और मुझे तोड़ा नॉर्मल फील हुआ.

मैं: “भाई, उससे बात करा प्लीज़!”

रिज़वान: “नही, वो तुझसे बात नही करना चाहती. और बात भी क्या करेगी तेरे साथ?”

मैं: “प्लीज़ यार, सॉरी बोलूँगा मा को भी, तुझे भी. मा को घर भेज दे प्लीज़!”

रिज़वान का फोन लाउडस्पिकर पे था. मा सब सुन रही थी.

मा की आवाज़ (बॅकग्राउंड से): “रिज़वान, उसे बोल दो, अब मैं घर नही अवँगी. अब से तेरे साथ रहूंगी. ना सूरज से मुझे मिलना है, और ना बात करनी है.”

रिज़वान: “सुन लिया ना? फोन रख अब, और डिस्टर्ब मत कर हमे. ऑलरेडी तुमने उसे बहुत परेशन किया है और बहुत तकलीफ़ दी है”

मैं (चिल्लाते हुए): “मा! ऐसा कैसे कर सकती हो आप मेरे साथ? प्लीज़ बात करो! सच में शर्मिंदा हू. वापस आ जाओ! तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा? प्लीज़ मा!”

मा: “रिज़वान, उससे बोल, अगर उसे मा चाहिए तो रिज़वान को भी आक्सेप्ट करना पड़ेगा.”

तब मैं समझ गया ये दोनो मिल के मुझे एमोशनल ब्लॅकमेल कर रहे थे. उन्हे पता था मेरे पास कोई ऑप्षन नही. मैं गिड़गिडया, सॉरी बोला, पर रिज़वान को आक्सेप्ट करूँगा ये मैने नही बोला. वो दोनो ताडे थे अपनी डिमॅंड पे और मा ने कॉल कट कर दिया. पूरी शाम निकल गयी, मैं उन्हे फिर से कॉल ट्राइ करता रहा, बुत उन्होने मेरा कॉल रिसीव नही किया.

आख़िर मैने Wहत्साप्प पे दोनो को मेसेज: “प्लीज़ घर आ जाओ. कुछ नही कहूँगा, डिस्टर्ब नही करूँगा. तुम्हारे रीलेशन का रेस्पेक्ट करूँगा. प्लीज़!”

दोनो ने वेट्स अप का मेसेज सीन किया था बुत नो रेस्पॉन्स. रात के कारेब 12 बजे थे. मैं अकेला घर में बैठा था तब घर का डोरबेल बजा. मैने दरवाज़ा खोला, रिज़वान डोर पे खड़ा था वो अकेला था. मैं शांत था. मैने उसे अंदर बुलाया और पूछा “मा कहाँ है?”.

“एयेए रही है. पहले हम बात करे?,” मैं शांत बैठ गया.

रिज़वान: “देख सूरज, तेरी हालत समझता हू. पर जब तेरे पापा हॉस्पिटल में थे, मा बहुत उदास थी. सपोर्ट चाहिए था उसे किसी का. मुझे वो तभी से अची लगने लगी थी, पता नही तब हम कैसे अपने आप क्लोज़ आ गये. मैं तुम्हे अभी क्लियर्ली बाताता हू, अगर तू उसे परेशन करेगा तो मैं उसे लेके दूसरे फ्लॅट चला जौंगा; और वो रेडी है. पर मैं तुम्हे भी अपना करीबी दोस्त मानता हू और तुम दोनो मा-बेटे को अलग नही करना चाहता. तो प्लीज़ हमे परेशन मत कर.”

मैं: “नही भाई, मेरी ग़लती थी. ओवर्रिक्ट किया मैने. सॉरी अगेन. मा को बुला प्लीज़, या मुझे बता कहाँ है मा, मैं उसे लेके आता हू.”

रिज़वान: “तू रुक यहाँ. वो कार में सोई है, दिन भर रो-रो के तक गयी बीचरी. मैं लाता हू उसे.”

मैं: “हा ठीक है.”

रिज़वान नीचे गया. मैने दरवाज़ा खुला रखा. बहुत टाइम हो गया था तो अपार्टमेंट में कोई नही जाग रहा था. लिफ्ट खुली तो मैं देखता रह गया. मा नींद में लड़खड़ाती चल रही थी. सुबह सारी में गयी थी घर से भागते टाइम, अब? फुल मेकोवर स्लीव्ले क्रॉप टॉप उसके कुवर्व्स को हग कर रहा था, टाइट जीन्स हिप्स दिखा रही, ट्रेंडी हेरकट, मेकप, हाइ हील्स.

रिज़वान उसको आराम से संभाल रहा था, एक मज़बूत हाथ उसकी कमर पे, जहाँ टॉप छ्होटा था वहाँ वाइट पेट और बेल्ली दिख रही थी. दूसरा हाथ उसका हाथ उसके कंधे पे. उसकी ब्रॉड, रिप्ड शोल्डर्स शर्ट के नीचे फ्लेक्स कर रहे थे, जैसे उसकी पर्सनल प्रॉपर्टी लेके आ रहा हो.

मेरे पास से जब दोनो गुज़रे तो शराब की बू आई. मैं समझ गया मा ने शराब पी थी और वो नशे में धुत हुई थी. ‘’मैं चुप रहा’’. रिज़वान ने मा को बेड रूम में जाके बेड पे लिटा दिया. मेरी हिम्मत नही हुई मा के पीछे बेडरूम तक जाने की. मैं डाइनिंग रूम में ही बैठा था.

तब से रिज़वान यहाँ रहता है, वीक में 4 दिन हमारे साथ. मा और वो जैसे हॉर्नी कपल, एक-दूसरे को करेस करते, प्यार करते, दिन-रात सेक्स और सेक्स की बातें. दोनो सेक्स के भूखे जानवर, मैं जैसे घर में हू या नही, उन्हे कोई फराक नही पड़ता.

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