दो देवर के बीच मे एक भाभी

हालाँकि मुझे डरर भी था कही दोनो मेरे जिस्म पीछे ही ना पद जाए. क्यूकी मेरी जवानी दिन पे दिन बदती जा रही थी. मेरा पेट और भी मुलयूं और कमर और भी चिकनी होती जा रही थी. सारी मे मेरी मोटी गांद भी उनका लंड खड़ा होने पर मजबूर कर देती थी.

मेरे चुचे मोटे होके और भी कस गये और दूध भी ज़्यादा बन रहा था. ब्लाउस मे से मेरी गोरी मुलयूं चिकनी च्चती चमकने लगी थी. अब मई कंट्रोल भी लू लेकिन मेरा ये मादक जिस्म मेरे दोनो जवान देवर को शांत नही रहने देगा. भला अपनी सनडर मादक भाभी का ऐसा जवान होता कामसीँ जिस्म देख कर उनकी हवस कैसे कम हो जाती भला.

अब हालत ऐसे होने लगे की मई आख़िर कैसे दोनो को रोकू. मेरा ये मादक जिस्म ही कमज़ोरी बनने लगा था. उपर से मनोज मुझे अपना मुलयूं पेट और नाभि भी ढकने नही देते थे तो मेरे दोनो देवर भी मेरे मुलयूं पेट को दिन भर घूरते और अब तो आप जानते ही हो उनकी हिम्मत और हवस बाद गयी थी और अब वो मेरे पेट को चूसना और जब मर्ज़ी पकड़ लेते थे.

मई भी शर्मा जाती अब बला मई क्या बोलती जब मुझे पता मेरा खुद का जिस्म ही इनको पागल कर रहा है. अब मेरे दोनो देवर की हिम्मत और भूक दोनो बादने लगी. उन्होने एकबार देख लिया कैसे उनके भैया मतलब् मनोज ऑफीस जाने से मेरा मुलयूं पेट और निपल शी से निचोड़ कर जाते है. लेकिन ये मुझे पता नही था.

तो अब उनको भी और कुछ चाहिए था. मनोज और सास ससुर कर जाने के बाद दोनो रसोई मे आए और मेरी कमर और पेट को घूर्ने लगे. मई शर्मा कर मुसाकुराने लगी. क्यूकी अपना पेट भी तो च्छूपा नही सकती थी मई.

जातीं- भाभी मेरा तो किस करने का मॅन कर रहा है.

मई जानती थी ये दोनो मेरे मुलयूं और नाभि को चूसने आए है. अब माना तो कर ही नही सकती थी ऐसे सांड़ जैसे 2 देवर को माना करना आछा आइडिया नही था. पर मुझे शरम आने लगी..

मई- ( शरमाते हुए) तुम लोग मनोगे नही बदमाश कही के..

लेकिन अब दोनो की हवस बद्ड गयी थी, इससे पहले मई कुछ बोलती जातीं ने पीछे से मेरी कमर मे हाथ डाला और मसालते हुए मेरे मुलयूं पेट मे उंगलिया गाड़ कर नोच लिया…उूुुुुउउम्म्म्ममम..मेरी आँख बंद हो गयी और सिसकिया निकल गयी..

मई- आअहहुऊम्म्म्ममममममममममममममम..हुहहुऊम्म्म्ममममममम..देवर जी…

जातीं- हुहह..हुहह..भाभी…बहोट मुलयूं हो तुम….उउंम्म…

मई- हुहह..हुहह..देवर जी…आहह..उउम्म्म्म..आहूहह..

दोनो देवर के सामने मई चाह कर भी सिसकिया कंट्रोल ना कर सकी और मुझे ऐसा करते देख वो मुसाकुराने लगे की भाभी के अंदर भी काफ़ी भूक है और अब उन्हे द्रने की कोई ज़रूरत नही. अब उन्हे और ज़्यादा हिम्मत मिल गयी और तभी नवीन ने भी हाथ आयेज करा और उसने भी मेरे पेट को नोच लिया और ज़ोर से खिचने लगा.

मई- आहहुह..हह..हुहह..हुहह..आआाआउऊच्च…बस करो…हुहहूहह…हह….देवर जी..

मेरा मुलयूं पेट दोनो ने अंदर तक नोच कर रख दिया मई हाफ़ गयी पूरी..

मई- देवर जी क्या आप भी…अपनी भाभी के साथ..इतनी बुरी तरह कों नोचता है..

जातीं- कोई बात नही भाभी. अभी आपके मुलयूं पेट को चूस कर हम सारा दर्द दूर कर देंगे.

नवीन- हन भाभी आपको भी तो आछा लगता है ना जब आपका मुलयूं पेट हम चुस्सक कर आपकी नाभि का र्ष्स पीते है..

एसी बाते सुन्न कर मुझे शरम आने और मई मुसाकुरने लगी. अब मई क्या करती सिसकिया भी तो मेरी ही निकल रही थी तो वो तो समझ ही गये होंगे. अब क्या करती मई मेरी जवानी ही मेरी दुश्मन ब्ंटी जा रही थी. मुसाकुराने के अलावा और कोई रास्ता नही था.

मई- आछा चलो अब बाद मई, मुझे काम करने दो.

पार अगले ही सेकेंड मेरी बात को ह्वा मे उड़ा कर दोनो ने कसाके मेरी चिकनी कमर को उंगलिया गाड़ कर नोच लिया और अपना मूह मेरे मुलयूं पेट मे घुसा कर कुत्टो की तरह चूसने लगे..मेरी आँख बंद हो गयी और जिस्म आकड़ गया..

मई- आआआआआअहहुउऊम्म्म्ममममममममममममम..उउउफ्फ……उउम्म्म्मम..

मेरे मुलयूं पेट की खाल को दोनो देवर अपने दांतो से चबा कर काटने लगे और मेरी सिसकिया तेज होती गयी..

कककच..कककच..कच..स्पार्र..स्पार्र..पुच्छ..प्पुउच्च…प्प्प्ुउच..स्पार्र..स्पार्र..पर्रर…कुकच..

खच..कककच..ससपर्र..स्र्प्प..स्पर्ररर..कूच..ककुउच..प्पुच..प्पुकचहुऊम्म्म्म…

कककच..कककच..कच..स्पार्र..स्पार्र..पुच्छ..प्पुउच्च…प्प्प्ुउच..स्पार्र..स्पार्र..पर्रर…कुकच..

खच..कककच..ससपर्र..स्र्प्प..स्पर्ररर..कूच..ककुउच..प्पुच..प्पुकचहुऊम्म्म्म..

उउंम्म..भाभी…

मेरे हाथ दोनो ने पकड़ लिए थे और जिस्म आकड़ गया था. मई सिसकिया ले रही और दोनो मेरी नाभि और पेट को चबा कर चूस्ते रहे. 20 मिनिट तक दोनो ने मेरे पेट को चुस्स कर बहाल कर दिया…उनकी राल मेरे पेट पर स्न्न गयी थी और मेरी नाभि मे उनकी राल भर गयी थी.

मेरा मुलयूं पेट अब दाँत के निशान से लाल पद गया. दोनो का नाश्ता हो चुका था और मई उनके सामने हाफ़ रही थी.

नवीन- भाभी कैसा लगा..

मेरी सिसकिया सब बीटीये रही थी. दोनो मुसाकुराते हुए चले गये. अपना लाल पड़ा हुआ पेट देख कर मई मुसाकुराने लगी और फिर काम मे लग गयी. पहेले दिन मे एकबार लगने वाली उनकी भूक अब दिन मे 3 बार लगने लगी. डोफेर होते ही दोनो मेरे पास आई.

जातीं- भाभी देखो आपके लिए हम कमरबन्द लेके आए है. ये आपकी कमर पर बहोट आच लगेगा.

मई- अछा दिखाओ जरा.

नवीन- नही भाभी हूँकि आपकी कमर पर खुद इसको बाँधेगे.

मई- आरे दिखाओ तो..

जातीं- नही भाभी हम खुद ही इसको आपकी कमर पर पहनाएगे.

मुझे थोड़ी शरम आने लगी की मेरे दोनो देवर अब मेरी चींकी कमर पर मेरे पति की तरह कमरबन्द पहनाएगे. पर अब मई कर भी क्या सकती थी ये दोनो रुकने वेल है नही. मेरी कमर पर इसको बाँध कर रहेंगे.

दोनो नीचे बेत गये और मेरी कमर घूर्ने लगे..

नवीन- भाभी अपना पल्लू हटाओ ना.

ये सुन्न कर मेरी धडकन्न और तेज हो गयी और मुझे शरम आने लगी.

मई- ( शरमाते हुए) ये तो ऐसे ही हो जाएगे.

जातीं- नही भाभी आपको पल्लू हतना पड़ेगा तभी तो शी से पहना पाएँगे आपको ये कमरबन्द.

पीछे से मेरी चिकनी कमर की सलवट देख कर जातीं को शयड अब मेरा जिस्म शी से देखनी था. तभी दोनो ने मस्ती शुरू करदी.. जातीं ने मेरी कमर पर नोच लिया.

मई- आआआआआआाआउऊच..हुहह..हुहह..हह..

जातीं- चलो ना भाभी क्या आप भी इतना सोच रही हो, ज्लडी से हटाओ.

मेरे दोनो देवर मुझे अपना पल्लू हटा कर अपनी गोरी च्चती दूध से भारी हुई देखना चाहते थे. अगर इन्होने मेरा जिस्म देख लिया तो मेरी खेर नही. तभी दोनो मस्ती करने लगे और मेरे मुलयूं पेट को नोचते हुए पल्लू खिचने लगे

मई- आरे..नही…देवर जी.. सुनो ना…हुहह…हुहह.. ऐसे ही ठीक है..

मई कोशिश कर रही थी अपना पल्लू किसी तरह शरमाते हुए रोकने की पार उनकी ताक़त के आयेज मई कुछ नही थी.

नवीन- ( मेरा पल्लू खिचते हुए) भाभी हताओ ना..भाभी…बस थोड़ी देर..

मई- ( शरमाते हुए) देवर जी ऐसे ही हो जाएगे…सुनो तो शी…रूको ना…आआआआवउुुुुुुुुुउउम्म्म्मम..

तभी जातीं ने पीछे से मेरे कमर मसलते हुए मेरा मुलयूं पेट कसाके नोच कर अंदर ड्बे दिया..मेरी आँख बंद हो गयी ओट झटके के साथ पल्लू च्छुत गया …..और यूयेसेस दिन पहली बार उन्होने मेरी आधे ब्लाउस से भर निकली हुई मेरी गोरी छ्चाटी देखी.

मेरे दूध से भरे हुए चिकने चुचो की लाइन देख देख कर वो वी रह गये. नवीन की आँखो मे भाभी का प्यार अब भाभी के लिए हवस मे बदल चुका था. मैने शरमाते हुए उसकी आँखो मे देखा तो उसकी लाल आँखे देख कर मैने शरम से नज़र झुका ली.

कुछ सेकेंड घूर कर वो नीचे बेत गया और पीछे से जातीं ने भी नंगी कमर देख कर अपना लंड मसलना शुरू कर दिया. मई जानती थी की मेरा ये जिस्म एक दिन मेरे लिए मुउसिबत बन जाएगे. पार क्या करू अपने इन्न देवर को खुश भी तो रखना था.

मैने महॉल ठीक करते हुए शर्मा कर मुसाकुरा दी और दोनो मेरी कमार पर चैन लगाने लगे.

जातीं- भाभी इश्स चैन के बाद आपका मुलयूं पेट चुऊँने मे और भी आच लगेगा.

मई शर्मा कर मुसाकुरा दी. मेरी सास बाद रही थी क ये दोनो सांड़ जैसे मर्द मेरे उपर भड़क ना जाए. दोनो नीचे बेत कर मेरी कमर पर कमरबन्ध लगाने लगे तो मैने रहट की सास ली. कमरबन्द लगाने के बाद जैसे ही मई पल्लू करने लगी दोनो ने मेरे हाथ पकड़ लिए.

और मेरी चिकनी कमर और मुलयूं पेट पर दाँत गाड़ कर कुत्टो की तरह चूसने लगे..

मई- आहहुउऊउउंम..मुंम्मी……आआआहहुऊम्म्म्मम…आहह…

मेरी सिसकिया निकल गयी..पीछे नवीन और आयेज जातीं मेरी कमर और पेट को कुत्टो की तरह चूसने लगे..और मई मादक जवान लड़की की तरह सिसकिया लेती रही…

स्प्सरर..प्पउक्च..प्पउक्च..स्पार्र..ससपर..प्पउक्च…पुउच्च..

कच..कककच..पुउच्च..कककच..प्पुउच्च..कककच…ससपर..

उउम्म्म्ममममममममम…कक्च…कक्च्छ..

मई- आआआआआआआआआअहह..मेरी नाभि..देवर जी…आआऔचह..उउफ़फ्फ़….आहह…आहहूऊम्म्म्म..

प्सरर..प्पउक्च..प्पउक्च..स्पार्र..ससपर..प्पउक्च…पुउच्च..

कच..कककच..पुउच्च..कककच..प्पुउच्च..कककच…ससपर..

यूयेसेस दिन पहली बार दोनो ने दिन मे दूसरी बार नही बल्कि 3-3 बार मेरे पेट और कमर को छहुउस छहुउस कर मेरी जान निकल दी. मई जितना रोकने की कोशिश करती दोनो और ज़्यादा ब्ड़क जाते. मई जानती थी अब ये रुकने वाले नही है. अपनी भाभी के जिस्म के ये दीवाने हो चुके है.

शाम तक मेरा पेट और कमर लाल पद चुके थे. रात को मनोज ने मेरा हाल देखा तो मुसाकुराने लगे.

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