डाइवोर्स बेटी और बाप की चुदाई कहानी

दोस्तों मेरा नाम कुसुम है, और मैं अपनी बाप-बेटी सेक्स कहानी आपके सामने पेश करने जेया रही हू. उमीद है कहानी की गर्माहट आपके लंड और छूट को मज़ा देगी, और आपका पानी निकाल देगी. चलिए अब मैं सीधे कहानी पर आती हू.

मेरी उमर 32 साल है, और मैं एक डाइवोर्स हू. ससुराल वालो के अत्याचार की वजह से मेरी मॅरेज टूट गयी. मेरी मॅरेज 26 साल की उमर में हुई थी. 6 महीने के अंदर मेरे ससुराल वालो ने मुझे इतना मेंटली टॉर्चर किया, की मैं बर्दाश्त नही कर पाई, और मैने अपने घर वालो को बता दिया.

उन्होने मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन मेरे ससुराल वाले समझने को तैयार नही थे. फाइनली डाइवोर्स का फैंसला ले लिया गया. डाइवोर्स के बाद मैं अपने घर वापस आ गयी.

मैं अपने पेरेंट्स की इक-लौटी बेटी हू. वापस आने के एक साल बाद मेरी मम्मी की डेत हो गयी. मैं और पापा अकेले रह गये, और हम बहुत दुखी थे. फिर वक़्त के साथ सब ठीक होने लगा. हम दोनो अपने-अपने काम में बिज़ी रहने लगे. लेकिन पिछले साल मेरी और पापा की चुदाई शुरू हो गयी. कैसे? चलिए बताती हू.

पहले मैं अपने बारे में बता डू. मेरा रंग ठीक-ठीक गोरा है, फिगर 34-30-36 है. नैन-नक्श आचे है. डाइवोर्स के बाद मम्मी-पापा ने मुझे काई बार दोबारा मॅरेज करने को बोला. लड़के भी मिल रहे थे अची फॅमिलीस के. लेकिन मेरा विश्वास टूट गया था मॅरेज से.

केटी तो मैं रह रही थी, लेकिन मेरी छूट की प्यास दिन-बा-दिन बढ़ रही थी. मैं रोज़ रात को फिंगरिंग करने लगी. कुछ दिन तो ठीक था, लेकिन उसके बाद फिंगरिंग ने काम करना बंद कर दिया. मैने डिल्डो मँगवाया ऑनलाइन, लेकिन वो किसी काम का नही निकला.

मैं लंड लेना चाहती थी, लेकिन शादी नही करना चाहती थी. किसी मर्द को सामने से अप्रोच करती, इतनी खुली नही हुई थी. फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ, जिससे ज़िंदगी चुदाई से भर गयी.

मेरे पापा अक्सर शराब पी कर घर आते थे. कभी-कभी तो थोड़ी सी पीते थे, लेकिन कभी-कभी ओवर ड्रिंक भी कर लेते थे. उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ. पापा घर पर पी कर आए. जैसे ही मैने दरवाज़ा खोला, पापा गिरने वाले थे. मैने उनको संभाला, और उनके रूम तक लेके जाने लगी.

रूम तक पहुच कर मैं उनके बेड तक लेके गयी, और वहाँ लिटा दिया. फिर मैने पापा के जूते उतार दिए. उसके बाद मैं उन पर चादर देने लगी. पापा ने कुर्ता-पाजामा पहना हुआ था. जब मैं उन पर चादर ओढ़ने लगी, तब मेरी नज़र उनके लंड पर पड़ी. पापा का लंड पूरा तन्ना हुआ था, और पाजामे में तंबू बनाया हुआ था.

मैने अपने पापा के बारे में कभी ऐसा-वैसा सोचा नही था. लेकिन उस दिन उनका खड़ा हुआ लंड देख कर पति नही क्यूँ मुझे अलग सा महसूस होने लगा. शायद ये मेरी छूट की प्यास थी, जो मुझे उस लंड की तरफ आकर्षित कर रही थी.

मैं ये जानती थी की पापा नशे में थे, और इस वक़्त उनके साथ कुछ भी किया जाए तो उनको पता नही चलेगा. तो मैने अपना हाथ उनके लंड पर रख दिया. उनका लंड लोहे की रोड के जैसा सख़्त था, और ये देख कर मेरे अंदर खलबली मच गयी. मेरा मॅन लंड देखने, और उसको अपने अंदर लेने का करने लगा.

तभी मेरे दिमाग़ में ख़याल आया की वो मेरे पापा थे, और उनके बारे में ऐसा सोचना बहुत ग़लत था. लेकिन फिर मेरे दिल ने कहा की इस वक़्त वो होश में नही थे, तो इस चीज़ का फ़ायदा उठना चाहिए. मैने अपने दिमाग़ को साइड में रख कर दिल की सुनी.

मैने अपना हाथ आयेज बढ़ाया, और उनके पाजामे का नाडा खोल दिया. फिर पाजामा नीचे किया, और साथ में ही अंडरवेर भी नीचे कर दिया. अंडरवेर नीचे होते ही उनका लंड उछाल कर बाहर आ गया. मेरी आँखें चमकने लगी.

फिर मैने उनके लंड को अपने हाथ में लिया, और पापा की तरफ देखा. वो गहरी नींद सो रहे थे. मैने मूह खोला, और लंड को मूह में लेके चूसने लगी. वाह, क्या स्वाद था पापा के लंड का. मुझे मज़ा आने लग गया.

कुछ देर लंड चूसने के बाद जब लंड चिकना हो गया, तो मैने अपने कपड़े उतारने शुरू किए. मैं पूरी नंगी हो गयी, सिर्फ़ ब्रा रहने दी. पापा सीधे लेते थे, और मैं उनके उपर आ गयी. मैने अपनी छूट पर उनका लंड सेट किया, और उपर बैठने लगी.

मेरी छूट भीगी पड़ी थी, तो लंड आराम से अंदर जाने लगा. लंड मोटा था, तो मेरे मूह से आहें निकालने लगी. कुछ ही सेकेंड्स में पापा का पूरा लंड मेरी छूट में समा गया. उनका कड़क लंड छूट में लेके मैं तो सीधे जन्नत में पहुँच गयी.

फिर मैने धीरे-धीरे उपर नीचे होना शुरू किया. इससे लंड मेरी छूट के अंदर-बाहर होने लगा, और मुझे बहुत मज़ा आने लगा. मैं इतनी मदहोश हो गयी की मेरे मूह से आहें निकालने लगी. मुझे ये भी याद नही रहा, की मैं अपने पापा के लंड पर चढ़ि हुई थी, और वो नशे में सो रहे थे.

कुछ देर मैं ऐसे ही लंड पर उपर-नीचे होती रही. फिर कुछ ऐसा हुआ, जो मैने सोचा नही था. पापा ने अचानक अपने हाथ मेरी गांद पर रखे, और नीचे से मेरी छूट में धक्के मारने लगे. उन्होने आँखें खोली, और मेरी आँखों में देखने लगे. मैं बहुत घबरा गयी, लेकिन लंड पर उछालती रही. फिर मैं बोली-

मैं: पापा वो…

पापा ने मुझे टोकते हुए बोला: मैं जानता हू बेटी जिस्म की आग बहुत तड़पति है. तेरी मा के जाने के बाद मैं बहुत तडपा हू. मैने काई बार तुझसे बात करने की सोची, लेकिन कह नही पाया. अछा हुआ तूने अपने आप ही ये कर लिया. अब हम दोनो की प्यास बुझ जाएगी.

ये बोल कर पापा ने मेरे बूब्स पर हाथ रखे, और दबाते हुए मेरी ब्रा निकाल दी. उन्होने मुझे अपनी तरफ खींचा, और मेरे होंठ चूसने लगी. मैं भी उनका साथ देने लगी. वो मेरे बूब्स दबा रहे थे, और उनको चूस रहे थे. नीचे से धक्के लगते जेया रहे थे.

कुछ देर में पापा ने मुझे घोड़ी बनाया, और पीछे से छोड़ने लगे. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में पहुँच गयी थी. छूट के झड़ने से मेरी टाँगें काँप रही थी. एंड में पापा ने ज़ोर के धक्के मार कर मेरे अंदर ही अपना माल निकाल दिया. उस रोज़ शुरू हुआ सिलसिला आज भी चल रहा है.

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