दीदी को चोद ने के लिए जीजू को बुद्धू बनाया

अगर आप नये हो तो आयेज के 3 पार्ट्स ज़रूर रेड कीजिएगा, तभी आपको पूरी स्टोरी समझ आएगी और मज़ा भी आएगा.

तो अब आयेज की स्टोरी शुरू करते हैं.

अगली सुबह अलार्म बाज रहा था. और दी मुझे उठा रही थी,

दी: जल्दी उठ, रेडी हो जा.

मे: क्या दीदी. मस्त सपना आ रहा था, अपने तोड़ दिया.

दी: अछा, क्या था सपने मैं?

मे: सपने मे हम दोनो सेक्स कर रहे थे. 69 की पोज़िशन मे, आप मेरा लंड और मे तुम्हारी छूट छत रहा था, और…

दी: बस, बस. नही सुननी तेरी बकवास. वैसे भी मैं तुझे अब सपनो मे ही मिलूंगी इसके लिए. (तोड़ा सा मुस्कुराते हुए)

मे: क्यूँ की आप को रियल मे तो बड़ा लंड चाहिए नही, भले ही छोटे लंड से आपकी प्यास ना बुजे.

दी: क्या मतलब ?

मे: कल देखा मैने आपको, जीजू तुम्हे छोड़ने के बाद सो गये, पर आप अधूरी गरम तवे पर लौट रही थी. फिर आप वॉशरूम मे चली गयी.

लगता हैं, आपने ज़रूर फिंगरिंग्स की होगी अंदर. अगर आप उस वक़्त जो बाहर वेल वॉशरूम मे आते, तो मे पक्का आपको पकड़कर छोड़ के सॅटिस्फाइड कर देता.

दी: (तोड़ा गुस्से से देखकर) अब जल्दी रेडी हो जा. (और वो रूम से बाहर चली गयी.)

सुबह को मे बहुत ही एग्ज़ाइटेड था. नहाने के बाद मैने त-शर्ट और स्ट्रेतछब्ले बर्म्यूडा पहन लिया, जानबूजकर अंदर अंडरवेर नही डाला था.

मैं लास्ट मैं नीचे गया तो दी और जीजू की थोड़ी बहस चल रही थी. दीदी को स्कर्ट और टॉप मे देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा, पर मैने उसे शांत कर दिया. मुझे पता चल गया की ये बहस सीट के रिगार्डिंग हैं.

दी: मैं कुछ सुनना नही चाहती, इस टीवी और स्पीकर को हटाओ कार मे से.

जीजू: अरे पर कुछ ही घंटो की तो बात हैं.

(मेरे वाहा जाने पर.)

दी: सच बता, ये टीवी का आइडिया तेरा था ना?

मे: मेरा…नही दी. ये तो जीजू का आइडिया था.

(दीदी जीजू की और गुस्से से देख रही थी, मैने पीछे से हाथ जोड़ते हुए जीजू को रिक्वेस्ट किया, की सिचुयेशन को शम्भाल ले.)

जीजू: हन…आइडिया तो मेरा ही था, पर अछा हैं ना, तुम्हे वाहा 2 से 3 दिन बोरियत महसूस नही होगी.

मे: हन दी, सही तो कह रहे हैं जीजू. ये सब तुम्हे सोच के ही प्लान किया हैं. और जीजू ने मुझे एक चान्स भी दिया हैं.(और मैने जीजू को इशारा किया)

जीजू: हन, मिने दिया इसे एक चान्स. मैं कहता हूँ की तुम भी इसे एक चान्स डियर देखो, ये तुम्हे निराश नही करेगा.

(ये सुनकर दी की आँखे फटी रह गयी.)

मे: जीजू, वो मैं गाते का लॉक मुझसे बाँध नही हो रहा, आप कर आओ ना ज़रा)

जीजू: ठीक हैं.

मे: देखो दी, अब तो जीजू ने भी मुझे चान्स दे दिया. अब तो आप डोगिना मुझे?

दी: मैं यहा तेरे साथ सीट नही शेर करूँगी.

मे: (दी की पिंकी को अपनी पिंकी से क्रॉस करते हुए). अपना पिंकी प्रॉमिस निभाओ, और मेरे साथ यहा बेत जाओ. और याद करो, इस प्रॉमिस मे मैं तुमसे ना ही तुम्हारी छूट माँग रहा हूँ, ना ही अपना लंड दे रहा हूँ, बस तुहे अपनी गोद मे बिता रहा हूँ कुछ घंटो के लिए.

दी: (गुस्से से) ठीक हैं. कहा मार गये वो?

मे: वैसे एक बात तो हैं, जीजू हैं तो महा कंजूस. कुछ पैसे बचाने के लिए तुम्हे मेरी गोद मे बिता दिया, वो भी इन शॉर्ट कपड़ो में, और तो और मुझे चान्स भी दे रहे हैं तुम्हारे साथ.

दी: (गुस्सा होते हुए) आने दो उन्हे. आज उन्हे मे दिखती हूँ.

जीजू जब वापस आए तब,

दी: देखिए, मुझे ये ठीक नही लग रहा, हम कुछ और सेट्टिंग करके बाद मे चले जाएँगे.

जीजू: कैसी बातें कर रही हो तुम?, सब कुछ तो सेट हो चुका हैं. कुछ ही घंटो की तो बात हैं, तोड़ा अड्जस्ट कार्लो. मुझे भी माइज़ॉयर ऑफीस मे सुबह जल्दी रिपोर्टिंग करना हैं.

दी: ये अड्जस्टमेंट आपको बाद मे महेंगा पड़ेगा, फिर मुझे मत कहिएगा.

जीजू: कोई बात नही, बाद में जो होगा वो देख लेंगे.

दी: ठीक हैं फिर, आओ अमित तुम बैठ जाओ पहले.

मे: ओक दी..आप टेन्षन मत लो, में आपको कोई तकलीफ़ नही होने दूँगा, और आपको आपकी मंज़िल तक पहुँचा दूँगा.

और मे आयेज की साइड सीट पे बैठ गया, और दी मेरी गोद मैं. वाह…क्या मखमली सा फील हो रहा था. सीन ये हुआ की मेरी गोद में अनु दी थी और बगल में जीजू ड्राइव कर रहे थे, और हुमारे बीच मे टीवी होने के कारण जीजू सिर्फ़ दी का आधा चेहरा ही देख पा रहे थे.

मैने हमारे साइड की विंडो पे वो स्टिक्किंग वाला ब्लॅक शॅडो लगा दिया, जिससे साइड मे से अंदर ना दिखे. कुछ आयेज जा कर गाड़ी मैं हाइवे पे आई, तो मैने जीजू को लाइट ऑफ करके कुछ सॉंग्स लगाने को कहा, जीजू ने वैसे किया.

जैसे ही लाइट ऑफ हुई, मेरी बॉडी मे कुछ हरकत हुई. मुझे दी की जिसम की खुश्बू मधहोश कर रही थी. जब आपकी सिस्टर टॉप और स्कर्ट में आपकी गोद मे बैठी हो, जिसके ऑलरेडी आप उपर उपर से मज़े ले चुके हो, और अंधेरे मे आपके लंड के उपर बैठी हो, तो आपका क्या हाल होता, बस वही हाल मेरा था.

मैने धीरे से अपने हाथो से दी की दोनो बाहों को सहलाने लगा, दी ने कुछ ऑब्जेक्षन नही किया, फिर कुछ देर बाद मैने जैसे ही दी की झंगो के उपर हाथ रखे, दी ने उन्हे झटक दिया.

मुझे यकीन था, की दी ऐसा ही कुछ करेगी. फिर मैने अपने दोनो हाथो को उसकी कमर पर रखकर दबाने लगा, दी ने कुछ नही कहा, मैं जैसे ही हाथ से उसका स्कर्ट नीचे करना चाहा, दी ने फिर से मेरा हाथ झटक दिया.

मैने फिरसे अपना हाथ कमर पर रखते हुए, उपर बूब्स की तरफ ले जा रहा था, दी ने कुछ नही कहा. मतलब की दी का इशारा सॉफ था, जो चीज़ मिल चुकी हैं, उसे ही एंजाय करो, नयी का लालच मत रखो.

मैने उसके टॉप मे हाथ डालकर ब्रा के उपर से ही उसके बूब्स को सहलाने लगा, मुझे पता था की अगर झोर से दबाया, तो गड़बड़ हो सकती थी. दी मस्त हो रही थी. फिर धीरे से एक एक करके मैने अपने दोनो हाथो को ब्रा के अंदर डालकर उसके नंगे बूब्स दबाने लगा.

दी अपने दाँत हल्के से भींच रही थी. फिर मैने एक हाथ को ब्रेस्ट से हटाकर फिरसे झांग के उपर रखा, तो दी ने उसे झटक दिया, पर ब्रेस्ट वेल दूसरे हाथ को उसने टच नही किया. मुझे गुस्सा आ रहा था अनु दी पे, की उसको दिक्कत क्या हैं देने मे.

मुझे किस्सिंग करवा चुकी हैं, खुद आधी नंगी होकर अपने बूब्स चुस्वा चुकी हैं, तो फिर अपनी छूट देने मे क्या दिक्कत हैं? सुहग्रत वेल दिन तो कुटिया बनकर मेरा लंड लेने को रेडी थी, तो अब उसकी नानी क्यू मारी जा रही हैं.?

इतना जुगाड़ करके उसको कार में अपनी गोद मे बितवाया, वो भी स्कर्ट पहनकर, और बीच मे टीवी भी सेट करवाया, जिससे जीजू देख ना सके. ये सब किस लिए? इसलिए नही की उसके बूब्स को दबा साकु, पर इसलिए की अनु दी की छूट मे आज अपना बड़ा सा लंड पेल साकु.

मुझे लगा की दी की छूट के लिए मुझे उसे तोड़ा उकसाना होगा, उसके ईगो को हर्ट करना होगा, जिसकी वजह से वो गुस्से मे मुझे अपनी छूट मरने दे. मैने उसके दोनो ब्रेस्ट को सहलाते हुए उसे उकसाना शुरू किया,

मे: जीजू, आपको अनु दी का एक सीक्रेट पता हैं..?

जीजू:कौनसा…?

मे: यही की दी की एक आदत हैं, वो जो चीज़ आपको एक बार हन कर दे फिर उसमे वो पीछे नही हटती, पर जो माना कर्दे तो फिर उसको मानना मुश्किल हैं.

जीजू: ये बात तो सच हैं. क्यू अनु?

दी: तो इसमे ग़लत क्या हैं?

जीजू: ये भी सही. पर इसमे सीक्रेट वाली कौनसी बात आई?

मे: वो इसके रिलेटेड ही हैं. दी हमेशा अपनी बड़ी चीज़ो को आसानी से इस्तेमाल करने की हन कर देती हैं, पर छोटी छोटी चीज़ो को माना कर देती हैं. (इस्पे दी ने मेरी और बड़ी आँखें करी)

जीजू: मतलब, में समझा नही.

मे: बचपन में जब मेरा बर्तडे था तब पापा चर्री वाली केक लाए थे, दी और मैं, हम उसी चर्री के लिए जगदा कर रहे थे, दी ने वो चर्री रख ली, और मैं गुस्से में पूरी केक खा गया, दी को कुछ नही दिया, पर चर्री उसने रख ली.

जीजू: ओह मी गोद. (और जीजू हासणे लगे.)

मे: ये तो बचपन का किस्सा था, जब में 10त में था तो पापा 2 बल्लपें लाए, पर उसमे से एक पेन हम दोनो को पसंद आई, उसे हम दोनो ही खिचने लगे, तो हुआ ये की पेन मेरे पास, और उसका कॅप(ढक्कन) दी के पास.

मैं उस पेन को बिना कॅप के इस्तेमाल करने लगा, पर दी ने मुझे वो नही दिया, बाद मे मैने दी से कहा की चलो दोनो इसे बरी बरी इस्तेमाल करती हैं, पर उसने मुझे कॅप नही दिया.

जीजू: साची. बहुत जिद्दी हो अनु तुम यार.

दी: तो इसमे ग़लत क्या हैं? (मेरे हाथ अभी भी दी के बूब्स को सहला रहे थे.)
तुम अपने जीजू को पूरी स्टोरी बताओ ना. की तुम पूरा केक खाकर बीमार पद गये थे, और बिना कॅप वाली पेन की इंक से तुम्हारी शर्ट की जेब पूरी खराब हो गयी थी, और सब तुम पर हास रहे थे.

मे: अगर तुमने वो सब शेर किया होता, तो वो सब नही होता. हैं ना जीजू.

जीजू: रिघ्त. वैसे देखा जे तो इसमे थोड़ी ग़लती तुम्हारी भी हैं, तुम अगर चर्री और कॅप दे देती तो अमित के साथ बुरा ना होता, और तुम भी केक और पेन एंजाय कर सकती थी. आख़िर बड़ी बेहन जो हो.

मे: मैं भी यही तो कह रहा हूँ, दी आप छोटी चीज़ो को संभालना बाँध कीजिए, उसे शेर कीजिए, आपका भी फ़ायडा होगा.
(और मैने अपना हाथ उसकी छूट पे रखा, जिसे दी ने वापस झटक दिया)

जीजू: हन अनु, बात तो सही हैं.

दी: क्या सही बात, आपको पता भी हैं की ये क्या माँग रहा हैं?

जीजू: अरे कुछ भी माँग रहा हो, अपनी बड़ी बेहन से ही तो माँग रहा हैं. तो फिर तुम्हारा भी फ़र्ज़ बनता हैं ना अपने छोटे भाई की हेल्प करने का, उसे हॅपी करनेका.

(आक्च्युयली मैने कल जीजू को ये पट्टी पढ़ाई थी, की दी की फ्रेंड सीमा की छोटी बेहन पे मुझे क्रश हैं, और ये दी को पता हैं, दी ने मुझे उसकी फोटोस भेजी थी, पर उसका मोबाइल नंबर नही दे रही मुझे.)

तो जीजू इस चीज़ को उस बड़ी और छोटी चीज़ से कंपेर कर रहे थे, मैने जीजू को दी से डाइरेक्ट्ली मुझे मोबाइल नो. दे दो ऐसा बोलने से माना किया था.)

दी: पर आप को पता भी हैं…

जीजू: (दी की बात को बीच मे काटकर) एक बात बताओ, जो चीज़ तुम उसे डोगी उससे तुम्हारा कोई नुकसान होगा, मतलब की वो चीज़ तुम्हारे पास से चली जाएगी, क्या?

दी: नही.

जीजू: और तुम्हारे भाई को वो मिल गयी तो उसका फयडा होगा क्या? वो एंजाय करेगा?

दी: (तोड़ा सा रुक कर, सिर नीचे ज़ुका कर धीमी आवाज़ मे) हन,वो करेगा.

जीजू: तो इतना सोच क्या रही हो, दे दो उसको. मैं कह रहा हूँ दे दो उसे वो चीज़ जो उसे चाहिए.

मे: मान भी जाओ ना दी, अब तो जीजू भी पर्मिशन दे रहे हैं.

दी: अछा बाबा, दे देती हूँ उसे, फिर तुम मुझे दोष मत देना.

जीजू: नही दूँगा.

मे: थॅंक्स जीजू, तुम दुनिया के बेस्ट जीजू हो. जिस चीज़ के लिए मैं 2 सालो से तड़प रहा था, वो अपने 2 दिन मे दीलाड़ी.

जीजू: योउ’रे वेलकम, अब मुझे ड्राइव करने दे.

दी: चल, अमित. तू जीत गया. अब तुझे जो चाहिए वो ले ही ले. मे भी खमखा किसी की अमानत समझ कर बचा के रखी थी.

मे: नही दी, मुझे इतना तड़पाया हैं तो अब आप अपने हाथो से ही वो मुझे डोगी.

दी: अछा बाबा, ठीक हैं. (जीजू को लगा की दी अपने मोबाइल से मुझे वो मोबाइल नो. निकल के देगी. और उसी टाइम मैने जीजू को व्हातसपप किया: तांकष जीजू, नो. मिल गया. तांकष आ लॉट.)

यहा पे दी ने मेरे दोनो हाथो को पकड़ के उन्हे अपनी झंगो पे रख दिया. मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही रहा. मे उसकी झंगो को मसल रहा था. मेरा लंड जिसको मैने काफ़ी मुश्क़िल से सुला रखा था, अब वो खड़ा हो रहा था.

मे दी की घंड को भी दबाने लगा, वो भी फुल ओं लग रही थी. फिर मैने अपनी उंगलियो से उसकी छूट को टच करना चाहा, पर एकाड़ ही टच हो रही थी. दी को पता चला, तो वो तोड़ा उपर उठी, और अपनी स्कर्ट को उपर की और उठा दिया. मैने उसे हल्के से थॅंक योउ बोला.

अब मैने अपनी उंगलियो से उसकी मादक छूट को चुने लगा. पहली बार मुझे ये चुने को मिल रही थी, दी की पेंटी गीली सी थी, मतलब वो भी आज चूड़ने को रेडी हैं. मैने उसकी पेंटी मैं से उसकी छूट को टच किया. वाउ, फर्स्ट टाइम का टच, ये एहसास मे शब्दो मे बया नही कर सकता.

दी: सुनिए, तोड़ा सॉंग्स लगाइए, और आवाज़ भी ज़्यादा रखना. ट्रॅफिक के शोर से तो अछा हैं.

जीजू: ठीक हैं डार्लिंग.

अब दी की छूट मे मैं अपनी फिंगर्स अंदर बाहर कर रहा था. और दूसरे हाथ से उसकी झांगे सहला रहा था. और दी हल्के से मौन कर रही थी. दी को बर्म्यूडा के अंदर से मेरा खड़ा लंड महसूस हो रहा था.

उसने अपना हाथ अंदर डालकर मेरे लंड के सूपदे को सहलाने लगी. और बर्म्यूडा को नीचे उतरने लगी. मे उसका इशारा समझ गया, और अपना बर्म्यूडा मैने नीचे पैरो तक उतार दिया. मैने जान बुजकर आज अंडरवेर नही पहना था.

मेरे नंगे लंड को दी आयेज से और पीछे से टटोल रही थी. मैने दी की पेंटी को नीचे किया, पर हो नही रही थी. दी समझ गयी और तोड़ा उपर उठकर उसने एक हाथ से पेंटी नीचे कर दी, पर वो पेंटी दी के घुटनो तक ही आ सकी.

जीजू: कुछ प्राब्लम हैं, तो मे गाड़ी रोकता हूँ कही, तुम दोनो कॉंफिरतब्ले हो जाओ.

दी: अरे कुछ नही, वो तोड़ा पैर सुन्न हो जाता हैं, इसलिए थोड़ी थोड़ी देर मे उपर हो लेती हूँ.

मे: दी, तुम हिलती बहुत हो. तोड़ा शांत बेतो.

दी:ओक भाई, वैसे भी अब माइज़ॉयर ज़्यादा डोर नही हैं, मुझे इस पोज़िशन मे ज़्यादा देर तुम्हे नही बिताना होगा.

मैं दी का इशारा समझ गया, की ज़्यादा वक़्त नही हैं, मुझे जल्दी से छोड़ो. और मैं भी रिस्क नही लेना चाहता था, लास्ट टाइम की तरहा. क्यूंकी, आज अगर एक बार अनु दी को छोड़ दिया, तो बाद मे भी वो मुझे छोड़ने देगी.

मैं दी की छूट को खोलने के लिए उनके पैर फैलाए, पर उनकी घुटनो तक की पेंटी बीच मे आ रही थी, जिसे दी ने नीचे झुककर हटाना चाहा. पर उसके पहले मैने फाटक से उसकी पेंटी को नीचे कर दिया.

अब सीन ये था, की दोनो के उपर टॉप+स्कर्ट/त-शर्ट था. मेरा बर्म्यूडा और दी की पेंटी हुमारे आंकल तक थी. अब असली खेल शुरू होने जा रहा था, उपर दी की नंगी छूट, और नीचे मेरा नंगा लंड, उसकी छूट मे जाने के लिए बेताब.

मैं अपने लंड को पकड़ के छूट मे डालने की नाकामियाब कोशिश कर रहा था. मेरा लंड दी की छूट के दाने को छू सकता था, पर अंदर नही जा रहा था. दी मेरी प्राब्लम समझ गयी.

दी: क्या हुआ भाई, क्यू इतना हिल रहे हो.

मे: दी, पैर सुन्न पद गया तोड़ा सा, इसलिए उंकॉंफिरतब्ले हो गया.

दी: क्या मैं कुछ कर सकती हूँ, जिससे तुम्हे कॉंफिरतब्ले लगे?

मे: हन, दी. आप एक बार बस उपर उठिए तोड़ा, तो मे अपने आप को आचे से नीचे सेट करलू एक बार. फिर आप उपर धीरे से आराम से बैठना.

दी मेरा इशारा समझ गयी की में अपने लंड को उसकी छूट मे सेट करने की बात कर रहा हूँ. दी ने अपनी कमर को उठाया, और मैने अपने लंड का सूपड़ा उसकी छूट के उपर सेट कर दिया.

मे: ओक दीदी, ऑल सेट. अब तुम धीरे धीरे करके नीचे बेतो, वरना तुम्हारी कमर अकड़ जाएगी.

दी: ठीक हैं भाई.

और अनु दी जैसे जैसे नीचे आ रही थी, वैसे वैसे मेरा लंड उसकी छूट की दीवारो को चीरता हुआ अंदर जाने लगा. दी बहुत टाइम बाद मोटा लंड अंदर ले रही थी, इसलिए उसके मूह से आ निकल गयी.

जीजू: क्या हुआ?

दी: अरे कुछ नही, लगता हैं की थोड़ी कमर अकड़ गयी, तुम ड्राइव करो, थोड़ी देर मे ये अपने आप ठीक हो जाएगी.

और जीजू कार को नेक्स्ट गियर मे डकार कार ड्राइव करने लगे, और मैं अपना गियर दी की छूट मे डाल के दीदी को ड्राइव कर रहा था.

दी ने मेरा आधा ही लंड अंदर लिया हुआ था, उसकी छूट टाइट सी लगी, मुझे लगा इससे ज़्यादा अंदर डालूँगा तो दी की चीख निकल जाएगी. तो मैने उसी जगह से दी की गांद को पकड़ा और उपर नीचे करने लगा, दी समझ गयी की उसे अभी इससे ही काम चलना होगा.

दी की टाइट छूट की दीवारे मेरे लंड को जैसे निचोड़ रही थी. दी भी अपना मूह भिच करके मेरे लंड के मज़े ले रही थी. बगल में हब्बी बैठा हो, और सगे भाई का लंड छूट मे हो, तो कोई भी लड़की सूपर एग्ज़ाइटेड होगी.

दी के मस्त मुलायम बूब्स और टाइट मखमली छूट मे मेरा लंड, मानो जी ते जी स्वर्ग का अनुभव हो रहा था. ऐसी चुदाई का तो हम दोनो मे से किसीने भी सपना नही देखा होगा.

मेरा एक हाथ दी की जाँघ पे और एक हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था. हम दोनो को लगा की माइज़ॉयर आने के बाद ही पूरा लंड अंदर लेने को मिलेगा. पर किस्मत मे कुछ और ही लिखा था.

क्या था किस्मत मैं….अगले पार्ट मे पढ़िएगा.

ये पार्ट कैसा लगा, कॉमेंट्स ज़रूर कीजिएगा.

यह कहानी भी पड़े  फटी हुई चूत लेके गयी डॉक्टर के पास

error: Content is protected !!