नमस्कार दोस्तों, मैं थोर आपके लिए बेहन की चुदाई कहानी लेके आया हू. उमीद है आपको कहानी पढ़ कर मज़ा आएगा, और आपका पानी निकल जाएगा. ये कहानी मुझे अभिषेक ने भेजी है देल्ही से. तो चलिए कहानी शुरू करते है अभिषेक के शब्दों में.
फ्रेंड्स मेरा नाम अभिषेक है, और मैं देल्ही से हू. मैं कॉलेज में 2न्ड एअर का स्टूडेंट हू. मेरी फॅमिली में मेरे अलावा मम्मी-डॅडी और एक बड़ी बेहन है. मेरी बड़ी बेहन मेरे से 6 साल बड़ी है, और उसकी शादी 2 साल पहले हो चुकी है. इस कहानी में मैं आपको बतौँगा की कैसे मैने दीदी की नौकर से चुदाई देखी. तो चलिए शुरू करते है.
3 महीने पहले मेरे दीदी के इन-लॉस कॅनडा जेया रहे थे. उनके जेठ-जेठानी कॅनडा में रहते थे, तो वो उनके पास जेया रहे थे. इसके लिए दीदी के हज़्बेंड, यानी की जीजा जी उनको मुंबई छ्चोढने जाने वाले थे, क्यूंकी कॅनडा जाने से पहले दीदी के ससुर अपने भाई से मिल कर जाना चाहते थे. इसलिए उन्होने टिकेट देल्ही से नही, बल्कि मुंबई से करवाई थी.
उन तीनो के जाने के बाद दीदी घर पर अकेली होने वाली थी, इसलिए उन्होने मम्मी को बोल कर मुझे एक रात के उनके घर बुला लिया. मुझे जब मम्मी ने ये बताया, तो मैने हामी भर दी.
तो मेरा प्रोग्राम कुछ इस तरह था, की मैं कॉलेज अपना समान साथ लेके जाने वाला था, और शाम को वहीं से दीदी के घर जाने वाला था. दीदी का घर कॉलेज से काफ़ी डोर था, तो ट्रॅफिक की वजह से वहाँ पहुँचते हुए मुझे कम से कम 2 घंटे लगने वाले थे. ये प्लान मैने दीदी को बता दिया.
उस दिन जब मैं सुबा कॉलेज गया, तो कॉलेज किसी वजह से बंद था. पहले मैने सोचा की घर वापस जौ, लेकिन फिर सोचा की दीदी के घर जल्दी जाके उनको सर्प्राइज़ देता हू. इसलिए मैने दीदी को नही बताया की मैं शाम की जगह सुबा ही आ रहा था.
फिर मैं निकल पड़ा, और 2 घंटे में दीदी के घर पहुँच गया. मैं ऑटो से उतरा, और उनकी गली में चला गया. अभी मैं उनके घर जेया ही रहा था, की मैने दीदी को घर की दहलीज़ पर खड़े देखा. वो किसी आदमी से बात कर रही थी. उस आदमी का मूह दूसरी तरफ था, तो उसका चेहरा मुझे दिखा नही.
तभी उस आदमी ने दीदी का हाथ पकड़ा, और उनको घर के अंदर ले गया. मुझे ये तोड़ा अजीब लगा. मैने सोचा ऐसे-कैसे कोई गैर मर्द उनका हाथ पकड़ सकता था. ज़्यादा हैरान मैं इसलिए हुआ, क्यूंकी दीदी ने भी उसको रोका नही, और उसके साथ चली गयी. मेरे मॅन में शक सा होने लगा, और मैने इसका पता लगाने का सोचा.
जब मैं घर के सामने पहुँचा, तो उन लोगों ने अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया था. मेरी दीदी ने मुझे एक बार उनके घर की बॅक एंट्रेन्स दिखाई थी. मुझे वो याद आई, और मैं साइड वाली गली में जाके उस एंट्रेन्स के पास पहुँचा. मैने दरवाज़े को धक्का दिया, तो वो खुल गया, और मैं आराम से अंदर चला गया.
मैं च्छूप कर दीदी के कमरे के पास पहुँचा, तो वो दोनो अंदर ही थे. मैने अंदर झाँका, तो आदमी उनका नौकर दयाल था. वो उनके बेड पर लेता हुआ था, और दीदी उसके पास बैठी थी. दीदी ने सलवार-कमीज़ पहना हुआ था. तभी दयाल बोला-
दयाल: मालकिन आपका भाई शाम में आने वाला है. आप आज बहाने बना रही हो, ताकि मैं कुछ ना करू. मेरे साथ अब मज़ा नही आता क्या आपको?
दीदी: तेरे साथ ही तो मज़ा आता है दयाल. तू ही तो है, जिसने मुझे वो सुख दिया जो मेरा पति मुझे नही दे पाता. अगर तू ना होता, तो मेरी छूट सूखी रह जाती, और शायद अब तक डाइवोर्स हो गया होता मेरा.
अपनी दीदी के मूह से ऐसी बातें सुन कर मैं हैरान था. मैं समझ गया था, की जीजू उनको खुश नही कर पाते थे.
फिर दयाल बोला: तो आओ ना मेरी जान, तुम्हारी छूट को फिर से गीला कर डू.
ये बोल कर उसने मेरी दीदी को अपने उपर खींच लिया, और दोनो किस करने लगे. वो नौकर मेरी दीदी के होंठो का रस्स पी रहा था, और दीदी भी उसका साथ दे रही थी. किस करते हुए वो दीदी के बदन पर अपने हाथ फेर रहा था.
कुछ देर की किस के बाद दीदी उपर उठी, और अपना कमीज़ और ब्रा निकाल दिए. अब दीदी उपर से नंगी थी, और उनके गोरे चुचे बाहर आ चुके थे. उनका मंगलसूत्रा उनके बूब्स के बीच में लटका हुआ था.
दयाल ने दोनो के दोनो चुचे पकड़ कर दबाए, जिससे उनकी आ निकल गयी. वो अपनी गांद आयेज-पीछे करके उसके लंड वाली जगह पर रगड़ने लगी. फिर दयाल ने घूम कर दीदी को बेड पर लिटा दिया, और उसके उपर आ गया. अब वो पागलों की तरह दीदी के चुचे चूसने लगा.
दीदी मदहोश हो रही थी, और आ आ करते हुए उसके मूह को अपने बूब्स में दबा रही थी. कुछ देर बूब्स चूसने के बाद दयाल दीदी का पेट चूमने लगा, और नाभि चाटने लगा. फिर वो नीचे गया, और दीदी की सलवार और पनटी साथ में निकाल दी.
अब दीदी एक गैर मर्द के सामने पूरी नंगी थी, और वो भी घर का नौकर. दीदी की छूट पर हल्के बाल थे, जिसको देखते ही नौकर ने उस पर अपना मूह लगा लिया, और उसको चाटने लगा. दीदी आह आ करने लगी. दयाल बड़ा स्वाद लेके छूट चाट रहा था.
कुछ देर छूट चाटने के बाद उसने अपने कपड़े उतारे, और नंगा हो गया. उसका लंड 7 इंच का काला साँप था. उसने लंड हिलाते हुए दीदी से कहा-
दयाल: चूसोगी.
दीदी: आज तक कभी चूसा है, जो आज चूसूंगई. तुम्हे पता है ना ये सब मुझे पसंद नही?
दयाल: मैने सोचा फिर भी पूच लू, क्या पता मॅन हो गया हो.
फिर वो दीदी की टाँगों के बीच आया, और अपना लंड छूट पर सेट करके ज़ोर का धक्का मारा. उसका लंड पूरा दीदी की छूट में गया, और दीदी के मूह से चीख बाहर आई. उसने दीदी के मूह को अपने मूह से बंद कर दिया, और दीदी को ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगा. ऐसा लग रहा था जैसे वो लंड ना चूज़ जाने का गुस्सा निकाल रहा हो.
कुछ देर तो दीदी दर्द में रही, लेकिन फिर गांद उठा-उठा कर चूड़ने लगी. तब दयाल ने दीदी के लिप्स रिलीस कर दिए. फिर दीदी बोली-
दीदी: कमीने! बोला था ना धीरे किए कर.
दयाल: साली रांड़, एक तो तुझे लंड का मज़ा दो. उपर से तेरा हुकुम भी मानो. च्चिनाल साली!
उसके ऐसा बोलने पर मुझे लगा दीदी गुस्सा करेंगी. लेकिन वो दोनो हासणे लगे. अब वो मज़े से चुदाई करने लगे. 1 घंटे तक कभी वो दीदी को घोड़ी बना कर छोड़ता, तो कभी उपर चढ़ा कर. दीदी भी उसकी रंडी बन कर चुड्ती रही. मैं ये देख कर शर्मिंदा हो गया, लेकिन अगर मैं कुछ भी करता, तो दीदी का घर खराब हो सकता था. इसलिए मैं वहाँ से वापस आ गया, और शाम को दोबारा चला गया.