मेरी दीदी की ननद की चुदाई कहानी – 2

didi ke nanad ki chudai kahani हम दोनो काफ़ी उत्तेजित हो गये थे. उस ने आँखें बंद कर दी थी. मुझे यहाँ तक याद है की अपनी बाहें लंबी कर उस ने मुझे अपने बदन पर खींच लिया था, इस के बाद क्या हुआ और कैसे हुआ वो मुझे याद नहीं. वो जब चीख पड़ी तब मुझे होश आया की मैं उस के उपर लेटा था और मेरा लंड झिल्ली तोड़ कर आधा चूत में घुस गया था. वो मुझे धकेल कर कहती थी : उतर जाओ, उतर जाओ, बहुत दर्द होता हैमैने उस के होठ चूमे और कहा : ज़रा धीरज धर , अभी दर्द कम हो जाएगा.वो बोली : तू क्या कर रहा है ?

मुझे चोद रहा है ?मैं : ना, हम एक दूजे को चोद रहें हें.पारो : मुझे गर्भ लग जाएगा तो ?मैं : कब आई थी तेरी माहवारी ?पारो : आज कल में आनी चाहिए.मैं : तब तो डर ने की कोई बात नहीं है कैसा है अब दर्द ?पारो : कम हो गया हैमैं : बाक़ी रहा लंड डाल दूं अब ?वो घबड़ा कर बोली : अभी बाक़ी है ? फिर से दुखेगा ?मैं : नहीं दुखेगा. तू सर उठा कर देख, मैं होले होले डाल उंगा.मैं हाथों के बल अध्धर हुआ. वो हमारे पेट बीच देखने लगी हलका दबाव से मैने पूरा लंड उस की चूत में उतार दिया.अब हुआ क्या की मेरी एक्सात्मेंट बहुत बढ़ गयी थी. दीदी के घर आ कर मुठ मार ने का मौक़ा मिला नहीं था. बड़ी मुश्किल से मैं अपने आप को झड़ ने से रोक रहा था.

ऐसे में पारो ने चूत सिकोडी. मेरा लंड डब गया. फिर क्या कहना ? धना धन धक्के शुरू हो गये मैं रोक नहीं पाया. पारो की परवाह किए बिना मैं चोद ने लगा और आठ दस धक्के में झड़ पड़ा.उस ने पाँव लंबे किया और मैं उतरा. उस ने भोस पर पेंटी दबा दी. चूत से ख़ून के साथ मिला हुआ ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा. बाथरूम में जा कर हम ने सफ़ाई कर लीवो रो ने लगी मैने उसे बाहों में भर लिया, मुँह चूमा और गाल पर हाथ फ़िरया. वो मुज़ से लिपट कर रोती रही.मैं : क्यूं रोती हो ? अफ़सोस है मुझ सेचुदाई की इस बात का ?मेरे चहेरे पर हाथ फिरा कर बोली : ना , ऐसा नहीं हैमैं : बहुत दर्द हुआ ? अभी भी है ?पारो : अभी नहीं है उस वक़्त बहुत दर्द हुआ. मुझे लगा की मेरी —- मेरी —— चूत फटी जा रही है लेकिन तू इतनी जल्दी में क्यूं था ?

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तेरा बदन अकड गया था और तू ने मुझे भिंस डाला था. और — तेरा ये — ये — लंड कितना मोटा हो गया था ? क्या हुआ था तुझे ?मैं : इसे ओर्गाझम कहते हें, जिस वक़्त आदमी सब कुछ भूल जाता है और अदभुत आनंद मेहसूस करता हैपारो : लड़कियों को ओर्गाझम नहीं होता ?में : क्यूं नहीं. तुझे मझा ना आया ?पारो : तू चोद ने लगा तब भोस में गुदगुदी होने चली थी, लेकिन तू रुक गया.मैं : अगली बार चोदेन्गे तब मैं तुझे ओर्गाझम करवा उंगा.पारो : अभी करो ना. देखो तेरा ये फिर से खड़ा होने लगा हैमैं : हाँ लेकिन तेरी चूत का घाव अभी हरा है मिट ने तक राह देखेंगे, वरना फिर से दर्द होगा और ख़ून निकलेगा.मेरा लंड फिर टन गया था. पारो ने उसे मुट्ठि में थाम लिया और बोली : होने दो जो हॉवे सो. मुझे ये चाहिए ——मैं ना कैसे कहूँ भला ? मुझे भी चोद ना था.

मैने किताब निकली. इन में एक फ़ोटू ऐसा था जिस में आदमी नीचे लेटा था और औरत उस की जांघें पर बैठी थी. मैने ये फ़ोटू दिखा कर कहा : तू ऐसा बैठ सकोगी ?पारो : हाँ , लेकिन इस में आदमी का वो कहाँ है ?मैं : वो औरत की चूत में पूरा घुसा है इस लिए दखाई नहीं देता. आ जा.मैं चित लेट गया. अपने पाँव चौड़े कर वो मेरी जांघें पर बैठ गयी मैने लंड सीधा पकड़ रक्खा, उस ने चूत लंड पर टिकाई. आगे सीखा ने की ज़रूरत ना थी. कुले गिरा कर उस ने लंड चूत में ले लिया. लंड और चूत दोनो गिले थे इस लिए कोई दिक्कत ना हुई. पूरा लंड घुस जाने पर वो रुकी. लंड ने ठुमका लगाया. उस ने चूत सिकोडी. नितंब उठा गिरा कर वो चोद ने लगीचौड़े किए गये भोस के होठ और बीच में टटार क्लैटोरिस मैं देख सकता था. मैने अंगूठा लगा कर क्लैटोरिस सहलाई.

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आठ दस धक्के में वो थक गयी और मुझ पर ढल पड़ी.लंड को चूत में दबाए रख कर मैने उसे बाहों में भर लिया और पलट कर उपर आ गया. तुरंत उस ने जांघें पसारी और उपर उठा ली. दो तीन धक्के मार कर मैने पूछा : दर्द होता है ?पारो ने ना कही. मैं धीरे गहरे धक्के से चोद ने लगा. पूरा लंड निकाल ता था और घकच से डाल देता था. पारो अपने नितंब हिला ने लगी और मुँह से सी सी सी कर ने लगी योनी में फटाके होने लगे. मैने धके की रफ़्तार बढ़ाई.वो बोली : उसस उसस मुझे कुछ हो रहा है रोहित, ज़ोर से चोदो मुझे.मैं घचा घच्छ, घचा घच्छ धक्के से उसे चोद ने लगा.अचानक उसे ओर्गाझम हो गया. ओर्गाझम दौरान मैं रुका नहीं, धके देता चला. वो बेहोश सी हो गयी ओर्गाझम शांत होने पर उस की चूत की पकड़ क़म हुई. मैने अब धीरे से पाँच सात गहरे धके लगाए और अंत में लंड को चूत की गहराई में पेल कर ज़ोर से झरा.

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