दीदी हुई स्टूडेंट के सामने नंगी

दोस्तों मैं थोर आपके लिए एक नयी हॉट सेक्स स्टोरी लेके आया हू. उमीद है आपको मेरी कहानी पसंद आएगी. ये कहानी मुझे अनुज ने भेजी है, जो देल्ही का रहने वाला है. चलिए कहानी शुरू करते है अनुज के शब्दों में.

दोस्तों मेरा नाम अनुज है, और मैं देल्ही का रहने वाला हू. मेरी उमर 20 साल है, और मैं कॉलेज में 2न्ड एअर में पढ़ता हू. मेरी फॅमिली में मेरे अलावा, मेरे मम्मी-पापा, और एक बड़ी बेहन है. मेरे दादा-दादी और चाचा-चाची भी है, लेकिन वो गाओं में रहते है, और वहाँ खेती करते है. ये कहानी मेरी दीदी की चुदाई की है, कैसे वो अपने एक स्टूडेंट से चुड गयी. तो चलिए शुरू करता हू.

मेरी दीदी मुझसे 5 साल बड़ी है, यानी की वो 25 साल की है. दीदी का रंग ठीक-ताक गोरा है, लेकिन फिगर सेक्सी और टाइट है. दीदी 36″ साइज़ की ब्रा पहनती है, और पनटी का भी सेम साइज़ है. कमर दीदी की कोई 30-32″ की होगी. पढ़ाई पूरी करने के बाद दीदी एक प्राइवेट फर्म में अकाउंट्स डिपार्टमेंट में जॉब कर रही थी. क्यूंकी दीदी ने कॉमर्स में पोस्ट ग्रॅजुयेशन की थी, तो वो अकाउंट्स में थी.

लेकिन जहाँ वो जॉब करती थी, वो जगह घर से बहुत डोर थी. अब शाम को दीदी को वापस आना होता था, तो अंधेरा हो जाता था. मम्मी को दर्र लगता था की कहीं अकेली लड़की के साथ कुछ ग़लत ना हो जाए, तो मम्मी ने दीदी की जॉब च्चूदवा दी.

अब दीदी घर पर फ्री बैठी रहती थी. वो कोई और जॉब ढूँढने का ट्राइ कर रही थी, लेकिन जो भी जॉब मिलती, वो काफ़ी डोर होती थी. फिर दीदी ने सोचा क्यूँ ना घर पर अकाउंट्स की टुटीओन्स पढ़ना शुरू करे, क्यूंकी कॉमर्स में सबसे ज़्यादा प्राब्लम स्टूडेंट्स को अकाउंट्स में ही आती है.

इस चीज़ के लिए दीदी को मम्मी-पापा से भी पर्मिशन मिल गयी. फिर दीदी ने एक टुटीओन का बोर्ड बनवाया, और घर के बाहर लगा दिया. उन्होने फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम पर भी रील बना कर डाल दी. कुछ दिन में दीदी के पास 3-4 स्टूडेंट्स आने लगे, और काम चल पड़ा. वो सारे स्कूल के स्टूडेंट्स थे.

दीदी उनको बहुत आचे तरीके से पढ़ती थी. फिर एक दिन एक अंकल का दीदी को फोन आया. वो हमारा घर ढूँढ रहे थे. दीदी ने उनको हमारी लोकेशन भेज दी. फिर थोड़ी देर में वो हमारे घर पहुँच गये. उनके साथ एक लड़का था, जो उनका बेटा था. लड़का काफ़ी हॅंडसम था, और अंकल काफ़ी रिच. और लड़का स्कूल में पढ़ने वाला नही लग रहा था.

उनकी बातें सुन कर पता चला की लड़के का नाम विवेक था, और अंकल उसकी टुटीओन दीदी के पास रखवाना चाहते थे. वो लड़का पढ़ाई में अछा नही था, और एक साल फैल भी हो चुका था. दीदी ने उनसे कहा-

दीदी: सिर मेरे पास स्कूल के ही बॅच है. अकेले लड़के को पढ़ना पासिबल नही होगा. हा गर 5-6 लड़के होते तो मैं बॅच बना कर पढ़ा देती.

अंकल: बेटा, मैं समझता हू अकेले स्टूडेंट को पढ़ने से तुम्हारा टाइम वेस्ट होगा. लेकिन मैं ऐसा नही होने दूँगा. तुमने कहा की 5-6 लड़के होंगे तो तुम पढ़ा डोगी. तो मैं तुम्हे 10 लड़कों की फीस पे करूँगा. बस तुम इस नालयक को पढ़ा दो.

मैने देखा जब अंकल ने अपने बेटे विवेक को नालयक बोला, तो विवेक तोड़ा मुस्कुराया. मैं समझ गया ये उस टाइप का लड़का था, जो अपने बाप के पैसे पे ऐश करना जानते है, मेहनत करना नही जानते.

अब दीदी को अंकल ने एक अछा ऑफर दिया था, तो वो माना कैसे करती. 10 लड़कों की फीस एक लड़के के लिए मिलने वाली थी, तो दीदी ने अंकल को एस बोल दिया.

फिर अगले दिन से विवेक टुटीओन पर आने लगा. मैने देखा वो पढ़ता कम था, और उसका ध्यान दीदी की तरफ ज़्यादा रहता था. दीदी टुटीओन पढ़ते हुए लूस त-शर्ट और पाजामा पहनती थी. त-शर्ट लूस होने की वजह से जब वो झुक कर नोटबुक पर कुछ समझती थी, तो उनकी क्लीवेज दिखने लगती थी. पीछे से पाजामे में दीदी की गांद मस्त लगती थी. विवेक इन्ही सीन्स का मज़ा लेता है.

विवेक मज़ाक बहुत आचे करता था. मैने दीदी को उसके साथ अक्सर बातें करते हुए हेस्ट हुए देखा था. अब तो ये हाल हो गया था की दोनो पूरा वक़्त बातें ही करते रहते थे. विवेक दीदी को बहुत हसता था. पढ़ाई तो पता नही कहाँ गायब हो गयी थी.

फिर एक दिन मैने कुछ ऐसा देखा, जिसको देख कर मैं हैरान हो गया. मेरे मम्मी-पापा उस दिन किसी फंक्षन पर गये हुए थे, और रात को आने वाले थे. उनके जाने के बाद दीदी ने मुझे कहा की उनके सर में दर्द था, तो वो आज टुटीओन की छुट्टी करने वाली थी. फिर वो अपने कमरे में आराम करने चली गयी.

उस दिन मेरा क्रिकेट मॅच था, जो दीदी को पता था (मैं हर वीक क्रिकेट खेलने जाता हू, और वहाँ पर 3-4 घंटे लग जाते है). फिर मैं भी घर से निकल गया. अब दीदी घर पर अकेली थी. मैं ग्राउंड जेया रहा था, तो आधे रास्ते मुझे पता चला की मैं अपने ग्लव्स घर पर भूल गया था. वैसे तो ग्राउंड में मैं किसी और के ग्लव्स ले सकता था. लेकिन मुझे अपने ग्लव्स मेरे लिए लकी लगते थे, इसलिए मैने सोचा की घर जाके ले आता हू.

फिर मैने उ-तुर्न मारा, और फुल स्पीड पर बिके घर की तरफ लेके जाने लगा. कुछ देर में मैं घर पहुँच गया. बाहर देखा तो एक बिके खड़ी थी. ये बिके विवेक की थी. मैने सोचा की आज तो दीदी ने टुटीओन पर से छुट्टी कर दी थी, तो विवेक की बिके घर के बाहर क्यूँ खड़ी थी? मुझे कुछ शक सा हुआ, तो मैने बिना आवाज़ किए अंदर जाने का सोचा.

मेरे पास दरवाज़े की चाबी थी, तो मैने धीरे से दरवाज़ा खोला, और अंदर चला गया. मैने नीचे रूम्स में देखा तो कोई नही था. ये देख कर मैं समझ गया की दीदी और विवेक दोनो दीदी के रूम में होंगे. दीदी का रूम उपर था. फिर मैं दीदी के रूम की तरफ दबे पावं गया.

दरवाज़ा खुला था, और मैने अंदर देखा. अंदर देखते ही मैने वो देखा, जो मैने कभी एक्सपेक्ट नही किया था. मेरी दीदी ब्रा पनटी में बिस्तर पर लेती थी, और विवेक सिर्फ़ अंडरवेर में बेड के पास खड़ा था.

इसके आयेज की कहानी आपको अगले पार्ट में पढ़ने को मिलेगी.

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