देवर-भाभी के प्यार और चुदाई की सेक्सी कहानी

मैं आपको अब कहानी में ले चलता हू. बात उस वक़्त की है, जब भाभी और मुझे एक-दूसरे के बिना अब एक दिन भी मुस्किल लगने लगा था. हम दोनो एक-दूसरे के काफ़ी क्लोज़ हो चुके थे, क्यूंकी हम दोनो के रिश्ते की शुरुआत भले ही सेक्स के बिनः पर हुई थी, पर अंदर ही अंदर हम दोनो एक-दूसरे को चाहने लगे थे.

जब की हम लोग ये आचे से जानते थे की हम लोगो का दूनयावी तौर से मिलन नही हो सकता. मतलब हम दोनो अब शादी नही कर सकते थे, और अगर करने का सोचते भी, तो मुझे भाभी को भगा कर ले जाना होगा. या फिर मेरे भाई को भाभी को डाइवोर्स देना होगा, जो आसान नही था.

तब हमने ये फैंसला किया की हमारा प्यार ऐसे ही चलता रहेगा. और इससे हम दोनो की ज़रूरत भी पूरी होगी, और हम लोग खुशी-खुशी भी रह सकेंगे.

बात उन दीनो की है, जब भाभी के एक चचे की बेटी की शादी थी, जिनका घर कोलकाता से 3 घंटे की दूरी पर था. वाहा भाभी को 1 हफ़्ता रहना था. पर मेरे भाई को शॉप भी चलानी थी, इसलिए वो वाहा एक हफ़्ता रुक नही सकता था.

लेकिन भाभी को इतनी डोर अकेला छ्चोढ़ भी नही सकते थे. क्यूंकी भाभी के साथ सिर्फ़ उनकी दो बहनो को जाना था, जिसमे उनकी बड़ी बेहन जिनके दो बच्चे थे, और एक छ्होटी बेहन जो अभी कंवारी थी.

ऐसे में मेरे भाई को एक ही ऑप्षन थी, और वो था मैं. भाभी के बोलने पर मेरे भाई ने मुझे इन लोगो के साथ जाने को कहा, जिस वजह से मेरी तो एईद हो गयी. क्यूंकी हफ़्ता भर मुझे भाभी के साथ रहने का मौका जो मिल रहा था, और भाभी भी बहुत खुश थी.

तो मैने भाई को बिना देर किए हुए हा कर दी, और दूसरे दिन सुबा 6 बजे हम लोग निकल गये. भाई ने कहा की वो शादी वाले दिन आ जाएगे, और कोशिश करेंगे की वो एक दिन पहले आ जाए.

ये बात हम लोग सुन रहे थे, और भाभी मेरे बगल में थी. तो उन्होने हल्के से कहा-

भाभी: अब आप नही भी आओगे तो मुझे कोई प्राब्लम नही है.

मैं ने ये बात सुन कर मस्ती में हस्स दिया. फिर हम लोग गाड़ी में बैठ कर स्टेशन पहुँचे, और वाहा से लोकल ट्रेन पकड़ कर गाओं चले आए. रास्ते में भाभी की छ्होटी बेहन को भाभी को मेरे साथ इतना क्लोज़ होते देख कर मेरे और भाभी पर शक हो रहा था, की हम दोनो में कुछ चक्कर तो नही.

हम लोग जब भाभी के चाचा के घर आ गये, तब वाहा मेरी काफ़ी इज़्ज़त हुई. मुझे बहुत अछा लगा. सुबा के 9:30 हो चुके थे, और हमे नाश्ते पर बैठने को कहा गया. फिर उनके चाचा चाची ने भाभी से पूछा-

चाचा-चाची: जमाई(दामाद) कहा है?

तो भाभी ने मुझे देखते हुए कहा: ये है तो है जमाई (दामाद).

सब लोग भाभी की बात को मस्ती समझ कर हासणे लगे. फिर भाभी ने मेरा इंट्रोडक्षन करवाया की मैं उनका देवर हू, और उनके हज़्बेंड शादी के दिन आएँगे.

और तब वो लोग मुझे और भी इज़्ज़त देने लगे. बहुत मज़ा आ रहा था. उन लोगों का प्यार और इज़्ज़त मुझे बहुत ही पसंद पड़ा.

भाभी सब से मिलने लगी, और सब जगह मुझे ले जेया रही थी, और सब से मेरी जान पहचान करवा रही थी. उन्होने मुझे चाचा की बेटियों से भी मिलवाया, और मेरे कान में ये भी बोली-

भाभी: इन लोगों से पट्ट मत जाना, तुम सिर्फ़ मेरे हो.

ऐसे करते-करते दिन गुज़र गया, और रात होने लगी. गाओं का माहौल मुझे बहुत पसंद आता है, और वाहा का खाना भी बहुत पसंद पड़ता है. वैसे भाभी ने मुझे रास्ते में एक जगह मेरे कान में बोला था-

भाभी: आज तुम बहुत हॅंडसम लग रहे हो. आज तुम्हे मैं छ्चोढने वाली नही हू.

रास्ते में भाभी ने ये बता दिया था की: यहा पर हम दोनो रोज़ सेक्स करेंगे. तुम रोज़ रात में रेडी रहना.

रात में खाना खाने के बाद मैं आँगन में बैठा था, और ये सोच रहा था की यहा हम सेक्स कैसे करेंगे. अगर हम लोग सोते है तो कों सा मुझे भाभी के साथ पर्सनल रूम मिलेगा. अगर रूम मिला भी तो उसमे भाभी की दोनो बहने भी होंगी.

फिर कुछ देर में हम लोगों को एक रूम में सोने की जगह देके सेट कर दिया गया, जहा सिर्फ़ हम लोग थे. मतलब भाभी और उनकी दोनो बहने, और हम थे.

उनके चाचा ने मुझे बोला: अगर आपको कोई परेशानी हो, तो आपके लिए एक रूम उपर भी है. आप वाहा अकेले सो जाना.

और वो एक चाबी मेरे हाथ में देकर सोने चले गये. गाओं में 9 बजे तक सब सोने चले जाते है, और मैं भाभी और उनकी बहनो से बातें कर रहा था. तभी बिजली भी ऑफ हो गयी, तो हम लोग समझ गये की ये गाओं का सिस्टम है, और यहा पर ऐसे ही होता है.

पर लाइन काट जाने से कोई ख़ास फराक नही पद रहा था. क्यूंकी बत्ती की ज़रूरत थी नही, और हवा मस्त आ रही थी घर में.

भाभी मेरे बगल में थी, और बार-बार अंधेरे का फ़ायदा उठा कर वो मेरे लंड को सहला रही थी. मुझे मज़ा भी आ रहा था, और दर्र भी लग रहा था की कही कोई देख ना ले.

पर अंधेरा होने की वजह से कोई देख तो नही पाया. मेरा लंड खड़ा हो गया था.

फिर रात के 11 बजे भाभी की बड़ी बेहन पलंग पर ही सो गयी, और साथ ही उनके बच्चे भी सो गये. और भाभी की छ्होटी बेहन उन बच्चो के बगल में लेती हुई थी, और भाभी मेरे साथ चारपाई पर बैठी थी.

छ्होटी मोबाइल चला रही थी. तब मैने भाभी से हल्की-हल्की आवाज़ में बात करते हुए कहा-

मैं: यहा हम लोग कैसे कर पाएँगे कुछ?

तो भाभी बोली: इतने अंधेरे में कों तुम्हे देखने जेया रहा है?

मैने कहा: यहा रिस्क है. ये लोग जाग गयी तो सब समझ जाएँगी.

तब भाभी को मैने कहा: मेरे पास उपर वाले कमरे की चाबी है. मैं वाहा जाता हू. तुम आ जाना वही.

वो मेरी बात को समझ गयी, और मुझे उपर जाने को कहा. मैं उपर जेया कर लेट गया, और भाभी का वेट करने लगा.

10 मिनिट के बाद भाभी भी आ गयी, और उनके आने से मैने उनसे पूछा-

मैं: छ्होटी सो गयी है क्या?

तो वो बोली: नही मैं उसको बोल कर आई हू की मैं विकी के पास जेया रही हू. क्यूंकी नयी जगह है कोई परेशानी ना हो उसको. और उपर सब सही सेट करके मैं आ जौंगी.

उसके बाद भाभी डोर को बंद करके मेरे बगल में आ कर लेट गयी. जहा हम लेते हुए थे, वो एक चौंकी थी. भाभी मेरे सीने पर सर रख कर मुझसे प्यार भारी बात करती है-

भाभी: काश तुम मेरी ज़िंदगी में पहले आते, तो आज मेरे हज़्बेंड तुम होते. और तुम्हे यहा सब अपना दामाद समझते.

मैने कहा: क्या हुआ, तब तुम मुझे अपना हज़्बेंड समझती हो ना, ये ही काफ़ी है मेरे लिए.

फिर भाभी ने कहा की मरते दूं तक मैं तुमको अपना हज़्बेंड मानूँगी. और फिर वो मुझे पकड़ कर किस करने लगी. वो मेरे पुर चेहरे को चूम रही थी, और मेरे कपड़े को खोलने लगी. मैं तो पहले से ही गरम था, और वो भी वाइल्ड होती जेया रही थी.

देखते-देखते उसने मुझे नंगा कर दिया, और मेरे सीने पर बीते करने लगी, जिस कारण मैं कंट्रोल से बाहर हो रहा था. ऐसे करते-करते वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर उसको किस करने लगी, और बोली-

भाभी: पता है शोना, आज दिन भर मुझे इस वक़्त का इंतेज़ार था.

और फिर वो मेरे लंड को अपने मूह में लेकर चूसने लगी, और मैं भी मदहोश हो कर भाभी के सर को पकड़ कर अपने लंड पर दबाने लगा. इस वजह से मेरा खड़ा लंड भाभी की हलाक तक चला जेया रहा था.

पता नही भाभी को उस दिन क्या हुआ था, की वो मेरे लंड को चूज़ जेया रही थी, और चूस्टे-चूस्टे भाभी ने मेरे लंड से माल निकाल दिया. वो मेरा पूरा माल पी गयी. मैं एक-दूं शांत हो गया, जैसे की कितना सुकून मिल गया हो मुझे.

उसके बाद भाभी ने कहा: शोना आज मुझे एक-दूं वाइल्ड तरीके से करना है. आज इतना छोड़ना मुझे की मैं चीखने लागू.

फिर मैं भाभी के कपड़े खोलने लगा, और आहिस्ते-आहिस्ते उनके जिस्म के सारे कपड़े खोल कर ज़मीन पर फेंक दिए. फिर भाभी को लिटा कर उनके दूध को दबाने लगा. उसके बाद मैं उनके दूध को अपने मूह में भर कर चूसने लगा.

कभी मैं उनके दूध के निपल्स पर काट-ता तो कभी गले पर दाँत से रगड़ता. ऐसा करने से वो और भी गरम हो गयी, पर मुझे भाभी की छूट को चूज़ बगैर डालने में मज़ा नही आता. तो मैं उनकी छूट के पास अपना मूह ले जाके उस पर किस करने लगा.

किस करते-करते मेरा लंड फिरसे खड़ा हो गया था, और मैं भाभी की छूट को किस करते-करते उनकी छूट को खाने लगा. इस कारण उनके मूह से आ आअहह की आवाज़ निकालने लगी, जिससे मैं और भी वाइल्ड होने लगा और अपनी एक उंगली उनकी छूट में डाल कर अंदर-बाहर करने लगा.

मैं उंगली रग़ाद रहा था, और भाभी की छूट पर अपनी ज़ुबान को लगा कर उनकी रस्स भी छूट चाट रहा था. वो एक-दूं मदहोश हो चुकी थी. तब मैने उनकी छूट से उंगली निकाल ली और अपना मूह लगा दिया. वो आहह आह आहह करते हुए मेरे मूह में सारा रस्स गिरा दी.

उसके बाद मैं उनको चौंकी के किनारे ले कर आया, और खुद ज़मीन में खड़ा हो गया. मैं उनके पावं को दोनो तरफ खोल कर अपने लंड को भाभी की छूट के च्छेद पर सेट करके भाभी की तरफ देखने लगा.

वो मेरी नज़र में नज़र मिला कर मुस्कुरा रही थी, की मानो वो मेरे साथ जन्नत में हो, और मैने उनके सेक्स से भरे चेहरे को देख कर एक झटके में अपना पूरा लंड उनकी छूट के अंदर धकेल दिया.

इससे उनकी चीख निकल गयी. भाभी की चीख सुन कर मैं तोड़ा रुक गया, तो भाभी ने मुझे बोला-

भाभी: विकी तुम रूको मत, ऐसे ही ज़ोर-ज़ोर से करो.

फिर क्या था मैं वैसे ही झटके देने लगा. मेरा लंड भाभी की छूट के जद्द तक जाता, और फिर मैं उसको आहिस्ते-आहिस्ते पीछे खींच कर लंड उपर करता, और फिर झटके में अपना लंड उनकी छूट की अंदर जद्द तक धकेल देता. भाभी हर झटके में आअहह आहह की आवाज़ निकालती रहती.

भाभी को मेरा झटका बहुत मज़ा दे रहा था. वो मेरे हर शॉट का जवाब अपनी कमर को उठा उठा कर दे रही थी, और 15 मिनिट के बाद वो झाड़ गयी. मुझे अब भी उनको छोड़ना था, क्यूंकी मेरा अभी गिरने वाला नही था.

भाभी के झड़ने के बाद वो अपनी तरफ से सुसताने लगी थी. तब मैं उनकी कमर को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा. वो सिसक रही थी.

फिर 20 मिनिट के वाइल्ड सेक्स के बाद मैने उनकी छूट के अंदर ही सारा माल गिरा दिया, और कुछ देर वैसे ही उनके अंदर डाल कर ही उनकी तरफ झुके हुए खड़ा रहा.

फिर मैं जब शांत हुआ, तो अपना लंड उनकी छूट से निकाल कर उनकी नाभि पर रखा, और रगड़ने लगा. उसके बाद हम दोनो बिस्तर पर लेट गये, और प्यार भारी बातें करते-करते हम दोनो सो गये. जब नींद खुली तो सुबा के 4:35 हो गये थे. भाभी चौंक कर उठी, और जल्दी से अपने कपड़े पहने, और मुझे किस करके बोली-

भाभी: शोना तुम अंदर से दरवाज़ा बंद कर लेना, मुझे जाना होगा. क्यूंकी छ्होटी अगर जागी हुई होगी, तो वो सब समझ जाएगी हमारे बारे में. अगर जल्दी सो गयी होगी, तो कोई बात नही.

भाभी: और यहा कोई दूसरे ने मुझे तुम्हारे साथ अकेले रात में एक साथ देख लिया, तो भी शक पैदा हो जाएगा. इसलिए मैं चलती हू. तुमको अगर नीचे आना हो, तो आ जाना कपड़े पहन कर. या यही आराम से सो सा जाओ. क्यूंकी जब तक यहा हू तुम से मेहनत करवाती रहूंगी.

तो मैने कहा: मैं यही सो जाता हू, तुम जा कर नीचे सो जाओ.

फिर वो निकल गयी रूम से, और मैं डोर क्लोज़ करके अपने ट्राउज़र को पह्न कर सो गया.

अब आयेज दूसरी स्टोरी में बतौँगा, की मैने भाभी के साथ एक हफ़्ता कैसे बिताया, और घर के अलावा मैने भाभी के साथ खेत में भी सेक्स किया.

ये कहानी कैसी लगी कॉमेंट्स में बताए, या मेरे एमाइल पर मुझे बताए

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