ही, फ्रेंड्स. इस रटा सीरीस के पिछले 3 पार्ट्स को ढेर सारा प्यार देने के लिए शुक्रिया आप सभी का. कुछ फॅमिली इश्यूस की वजह से मैं आयेज की स्टोरी आपसे शेर नही कर पाया. पर अब ऐसा नही होगा. सो आप आयेज की स्टोरी एंजाय कीजिए, और अपने कॉमेंट्स मुझे एमाइल/गूगले छत पे भेज सकते है. तो चलिए, ज़्यादा वक़्त ना लेते हुए हम शुरू करते है.
जब शबनम मुझे उठाने आई, तब मैने उसको तसल्ली से देखा. जब वो मुझे उठाने आई तब उसके झुकने पर उसकी लूस त-शर्ट में से दिख रहे बूब्स, और उसकी बॉडी के शेप को मैं गौर से देखने लगा. मॅन में विचार आया की भले ही सग़ी बेहन हो, पर शबनम को छोड़ने पर मज़ा तो अछा आता होगा. उसने भी अपने बूब्स देखते हुए मुझे नोटीस किया, और वो हल्का सा शर्मा कर वहाँ से चली गयी.
मैं उसी बेड में बैठा हुआ पिछले कुछ दीनो में मेरे साथ जो हुआ, उसपे गौर करने लगा. पहले मों को वैसे देखना, जो सेक्सी आंटी की तरह लग रही थी. फिर उसके बाद मों को पापा का लंड लॉलिपोप के जैसे चूस्टे हुए देखना. फिर 5 मिनिट की चुदाई के बाद पता चलना की मों कितनी अनसॅटिस्फाइड थी अपनी सेक्स लाइफ में.
शायद ये भी उनके रूखे-पन्न का कारण हो सकता था. उसके बाद शबनम की चुदाई को देखना, की कैसे हस्स-हस्स कर वो मूह में और अपनी छूट में लंड ले रही थी. तो, इन दो दीनो में मैने अपनी घर की दोनो औरतों की चुदाई देखी. और आज तीसरी औरत को लेने जेया रहे थे. पता नही वो कैसी होगी?
फिर हम सब रेडी हो कर, बारात लेकर पहुँचे. वहाँ ताम-झाम अछा था, लड़कियाँ भी मस्त थी. एक से बढ़ कर एक रेडी हो कर आई थी, की जैसे आज किसी से चुड कर ही जाएँगी. पर मेरी आँखें तो उस दुल्हन को ढूँढ रही थी, जो मेरे भाई की दुल्हन बनाने वाली थी. जिसकी छूट आज रात को भैया मारने वाले थे.
आक्च्युयली, आपको तो पता ही है, की मों ने हमेशा भाई को ही ज़्यादा इंपॉर्टेन्स दी थी. सो मुझे कहीं ना कहीं भाई से जेलासी भी होती थी, जब मों उनको इतना प्यार करती थी. मुझे भी चाहिए था, की मों मेरी भी रेस्पेक्ट करे, मुझे भी प्यार की निगाहों से देखे, वो मुझे भी आडमाइर करे. और इसीलिए मैं चाहता था की भाभी उतनी सुंदर ना हो, क्यूंकी अगर भैया की शादी किसी पटाखा लड़की से हो जाती है, तो मेरी तो फिरे होने वाली थी.
पर मुझे यकीन था, की मों ने भाई के लिए लड़की को चूज़ किया था, तो वो लड़की सभी तरीके से मस्त होगी. क्यूंकी भाई मों का लाड़ला बेटा जो था. और यही सोच के मेरा जी बैठा जेया रहा था.
शबू को मैने इशारा किया अपने पास आने का. जब वो पास आई तो मैने उससे कहा की भाभी कों थी, दिखाए तो सही.
शबू: अर्रे वा भैया, बड़े भैया से ज़्यादा तो आप एग्ज़ाइटेड हो. लगता है हमे दूसरी भाभी भी ढूँढनी पड़ेगी.
मे: अर्रे ऐसी कोई बात नही. बस देखु तो सही की तुमने और मों ने मिल के भाई के लिए कों सी हूर को पसंद किया है?
शबू: ओह हेलो… ये जो पसंद है, वो मों की और भैया की है. मैने तो मों को इस लड़की के लिए माना…(उतने में सामने से दुल्हन निकली तो शबनम ने अपनी ही बात को आधी छ्चोढ़ कर मुझे लड़की दिखाई) वो देख लो… सामने ग्रीन ड्रेस में. वहीं है दुल्हन, तुम्हारी भाभी जान.
उस टाइम वो उल्टी खड़ी थी, मैं उसे देखता ही रहा, जैसे ही वो पलटी तो उसे देख कर मेरी धड़कने जैसे कुछ देर के लिए स्टॉप हो गयी. तमन्ना… मेरी वाली तमन्ना… और मैं वहाँ कुर्सी पे बैठ सा गया.
शबू: भैया, तुम रूको, मैं भाभी से मिल कर आती हू. आ कर बाकी बात करेंगे.
और वो चली गयी. मैं यहाँ कुर्सी पे बैठ कर अपनी पिछली लाइफ में खो गया. जिस तमन्ना की शादी भैया से होने वाली थी, वो मेरा फर्स्ट लोवे था. बोले तो लोवे अट फर्स्ट साइट वाला लोवे. मैं आपको फ्लॅशबॅक में ले चलता हू.
जब मैं 1स्ट्रीट एअर में था, तब तमन्ना 2न्ड एअर में पढ़ रही थी. हम दोनो सेम कॉलेज में थे. मेरा क्लास का फर्स्ट दे था, और 2न्ड एअर के कुछ बाय्स गर्ल्स हमारी रॅगिंग टाइप इंट्रो वग़ैरा ले रहे थे. तभी पीछे से एक स्वीट आवाज़ आई, “अनन्या, इनको क्लास में जाने दो. ये यहाँ पढ़ने आए है, और तुम भी.” पीछे मूड कर देखा तो चेहरे पे गुस्से के भाव लिए हुए वो आयेज आई. तब मैने उसे पहली बार देखा.
वो गोल चेहरा, मीडियम सी बॉडी, मीडियम साइज़ बूब्स, और मस्त फिगर. गोरा सा चेहरा, गुलाब की पंखुड़ियों से उसके होंठ, और मस्त घने लंबे सुनहरे से बाल. पहली बार इस रूप में मैने देखा था मेरी तमन्ना को. उसका चेहरा उस वक़्त गुस्से से ताप रहा था. शायद उसे ये इंट्रो वग़ैरा अछा नही लगता था, सो.
फिर हम सब जब क्लास में जेया रहे थे, तब मैने उसे बुला के थॅंक्स बोला, “थॅंक योउ माँ, आपने आज बचा लिया.” तब जो चेहरा पहले गुस्से से लाल था, उन्ही कुछ ही सेकेंड्स में पिंक हो गया, और चेहरे पे स्माइल आई. उसने अपनी मीठी सी आवाज़ में कहा, “तमन्ना, कॉल में तमन्ना. आंड इट्स ओक. कोई भी अगर हेल्प चाहिए तो बता देना. अब क्लास मैं जाओ, और आचे से पढ़ाई करो.”
फर्स्ट टाइम मैने उसका फेस देखा, उसकी आवाज़ सुनी, और उसका दीवाना सा हो गया. हर रोज़ वो अपने फ्रेंड्स के साथ उनकी स्कूटी पे आती, और मैं उसे देखने के लिए वहाँ खड़ा रहता. वो भी जब मुझे देखती तब स्माइल करती. उसकी 2 से 3 फ्रेंड्स भी उसके साथ होती थी. फिर बाद में पता चला की वो भी मेरी कम्यूनिटी से ही बिलॉंग करती थी. और तो और हम दोनो का लास्ट नामे भी मॅचिंग था.
कुछ टाइम बाद हमारे कम्यूनिटी में किसी की शादी थी, तब वहाँ मैने पहले बार तमन्ना को आचे से देखा. कॉलेज में तो वो मोस्ट्ली यूनिफॉर्म में ही आती थी. पर यहाँ तो उसने जो कपड़े पहने थे, और हल्का सा मेकप किया था, तो पहली बार मैने तमन्ना को आचे से देखा.
उसके बूब्स, उसकी वेस्ट, उसका फिगर, क्या मस्त माल लग रही थी. मोस्ट्ली लड़कों की नज़र उसपे ही थी. उसकी बेस्ट फ्रेंड पिंाज़ भी उसके साथ ही थी. उस दिन उसे ऐसे देख कर मुझे मॅन में आया, की तमन्ना को पटना चाहिए. अभी गफ़ बनाने के लिए, और फ्यूचर में अपनी बीवी बनाने के लिए, वो पर्फेक्ट लड़की थी.
मैने दिमाग़ लगाया, की अगर वो मेरी क्लासमेट होती तो 2 यियर्ज़ का चान्स था. पर वो 2न्ड एअर में थी, और लास्ट के कुछ मंत्स तो एग्ज़ॅम की प्रेप में लग जाने थे. सो मुझे उसको अगर पटना था, तो टाइम वेस्ट नही करना चाहिए.
उस दिन शादी में जब वो अकेली दिखी, तो मैं उसके पास चला गया, और उससे बात करने का ट्राइ किया. मैं जैसे वहाँ पहुँचा, तो उसकी 2 से 3 फ्रेंड्स आ गयी, जो कॉलेज की नही थी, शायद उसके एरिया की होंगी. तो उन्होने आ कर मेरा मज़ाक करना शुरू कर दिया. उनको लगा की मैं तमन्ना पे ट्राइ मार रहा था, तो वो मेरा मज़ाक बनाने लगी. तमन्ना भी ये देख कर हल्का मुस्कुरा रही थी. और ये देख कर मेरा मूड ऑफ हो गया, और मैं वहाँ से चल दिया.
उसके बाद मैने नेक्स्ट 1 वीक तक उसको देखने के लिए कॉलेज में ना खड़ा रहा, ना ही उसको मैं कहीं दिखा. पर मैं उसे चुपके से देख रहा था, की शायद वो मुझे ढूँढ रही थी. फिर एक दिन जब रिसेस टाइम में सब स्टूडेंट्स खेल रहे थे, मैं उस टाइम लाइब्ररी में था. तब वो वाहा आई, और मुझे उस दिन के लिए सॉरी बोला, “यार, सॉरी. तुझे उस दिन मेरी फ्रेंड्स ने हर्ट किया.”
मैं: मज़े तो तुम भी ले रही थी ना.
तमन्ना : सॉरी यार, मुझे नही पता था की तू इतना जल्दी हर्ट हो जाएगा.
फिर उसने अपनी फ्रेंड्स प्रीति, पिंाज़ और फ्रेया से इंट्रो करवाया. उसके बाद तो जैसे हमारा ग्रूप सा बन गया. वो मुझे स्टडी में हेल्प भी करती. और मैं उसके लिए चॉक्लेट्स भी ले जाता. तब उसकी फ्रेंड्स उसका और मेरा मज़ाक भी उड़ाते और हम दोनो शर्मा जाते.
एक दिन क्लास ख़तम होने के बाद पिंाज़ ने मेरा हाथ पकड़ लिया, और मुझे रोक दिया. पिंाज़ मेरे मोहल्ले से थी, और उसका घर का नामे पीनू था. वो वैसे आवरेज थी, पर बॉडी शेप अछा था.
पिंाज़: ये क्या चल रहा है?
मे: क्या… क्या…चल रहा है?
पिंाज़: देख, मुझे पता है की तमन्ना को तू लीके करता है, उसपे ट्राइ भी मार रहा है.
मे: तो… उसका क्या?
पिंाज़: देख, तमन्ना के सपने बड़े है, वो तेरे हाथ नही आएगी. मैं जानती हू उसे आचे से. वो टाइम पास कर रही है.
मे: तो फिर तुम मेरी हेल्प करो ना, उसे हाथ लगाने में. (पिंाज़ मुझे तमन्ना के बारे में वॉर्न कर रही थी. मतलब की वो मेरे को लीके करती थी. या तमन्ना से जेलस थी. दोनो ही सूरत में मेरा काम वो कर देगी). देखो पीनू, अगर तुम मेरी हेल्प करोगी, तो शायद मैं तमन्ना को पता लू. प्लीज़ यार. ( और मैने उसके दोनो हाथो को अपने हाथो में लेकर उसे रिक्वेस्ट करने लगा) प्लीज़ यार, इतनी हेल्प कर दे ना तू मेरी.
और उसके चेहरे पे एक अची सी स्माइल आ गयी. मेरे हाथ पकड़ने से वो खुश भी थी, और शर्मा भी रही थी. वो अग्री हो गयी, और जाते-जाते मैने उससे पूच लिया-
मे: अगर तमन्ना हाथ नही आती, तो क्या तुम आओगी हाथ में? तुम भी उसी की फ्रेंड हो, सो?”
पिंाज़ (जाते हुए): तुमने कभी ट्राइ ही नही किया, क्या पता, शायद आ भी जौ (और वो शरमाते हुए वहाँ से निकल गयी).
उसके बाद उसने मुझे तमन्ना के लाइक्स/डिसलाइक्स, हॉबी, फेवोवरिट फुड/चॉक्लेट्स सब कुछ बताया, जिससे मैं तमन्ना को इंप्रेस करने लगा. अगर उनका कहीं घूमने का प्लान होता, तो वो मुझे बता देती. और मैं वहाँ पहुँच कर ऐसे बिहेव करता, जैसे आक्सिडेंटली मिल गये, फिर हम घूमते. तमन्ना को अब मैं टच करने लगा था. उसका हाथ भी पकड़ने लगा था. वो स्माइल कर देती.
पिंाज़, तमन्ना को मेरे बारे में अची चीज़ें बता कर उसे मेरे लिए सेट भी कर रही थी. एक दिन वो बहुत हॅपी थी, उसके दाद ने उसको कुछ गिफ्ट दिया था, ऐसा कुछ. जो पिंाज़ ने मुझे बताया. तो मैने उसे आफ्टरनून में उसे रूम में अकेला रखने को कहा.
फिर आफ्टरनून में पिंाज़ ने इशारा किया, तब मैं उसके रूम में गया, जहाँ वो अकेली थी. मैने सीधे जेया कर उसका हाथ पकड़ कर उसे ‘ई लोवे योउ तमन्ना’ बोल दिया. वो शरमाने लगी, और अपना फेस नीचे कर दिया. मैने उसकी चीन पकड़ कर उसका फेस उपर किया, और उसके लिप्स पे अपने लिप्स को रख दिया और उसे किस करने लगा.
ये हम दोनो का फर्स्ट किस था, और दोनो उसे एंजाय कर रहे थे. पर ज़्यादा टाइम ना होने की वजह से हमने अपना किस ब्रेक किया, और तमन्ना शरमाते हुए रूम से चली गयी. पिंाज़ हमे देख रही थी, उसका फेस से वो हॅपी नही लग रही थी.
उसके बाद हमे जब भी मौका मिलता हम दोनो किस करते. एक-दो बार मैने उसके बूब्स पे हाथ रखा, तो वो हटा देती. काई बार तो मैने उसके लिए अपनी नाराज़गी भी उसे दिखाई. तब वो बोलती की, वो अभी उसके लिए रेडी नही थी. तो मैने उसको फोर्स नही किया.
ऐसे ही दिन जाते रहे, और हम दोनो का मिलना होता रहा. हम साथ में गार्डेन में घूमते, हेस्ट, बातें करते. जब मौका मिले तब एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर चलते, और किस्सिंग तो बनता ही है, जब हम अकेले हो.
एक दिन उसके पापा को बिज़्नेस में कुछ अछा प्रॉफिट हुआ, तो उसने पापा को उसे नयी मॉडेल की सिल्वर स्कूटी उसे ला कर दी. उस दिन वो ज़्यादा ही खुश थी. और उस दिन जब मुझे मौका मिला तो मैं उसे किस करने लगा. वो भी आज थोड़ी ज़्यादा मज़े से रेस्पॉन्स दे रही थी.
मैने सोचा की क्यूँ ना एक बार फिर से ट्राइ किया जाए, और मैने अपना हाथ उसके बूब पे हल्के से रखा. उसने कुछ रेस्पॉन्स नही दिया, तो मैने उस हाथ को तोड़ा दबाया उसके बूब पे, उसने कुछ नही बोला. मुझे लगा, की आज ग्रीन सिग्नल था.
तो मैने भी देर ना करते हुए, उसके टॉप में हाथ डाल कर, उसके बूब्स को दबाने लगा. ब्रा उसकी टाइट थी, तो उसने अपने हाथ पीछे ले जेया कर खुद से ही अपनी ब्रा के हुक्स को खोल दिया. अब मैं उसके दोनो बूब्स को आचे से फील कर सकता था.
एक-दूं मस्त, छ्होटे से, सॉफ्ट मुलायम बूब्स थे तमन्ना के. उस दिन मैने दिल भर के उसके बूब्स दबाए. फिर पीनू ने बाहर से सिग्नल दिया, और हम अलग हुए. उसकी आँखें झुकी हुई थी, और चेहरे पे मस्त मुस्कान थी. फिर उसने अपने कपड़े सही किए, और वहाँ से चली गयी.
उस दिन के बाद तो जैसे की मुझे लाइसेन्स ही मिल गया तमन्ना के बूब्स को दबाने का. जब भी किस्सिंग होती हमारे बीच, तब मैं बेझीजक उसके बूब्स दबा लिया करता. काई बार तो उनको मूह में लेकर चूस भी लिया करता. तमन्ना के वो छ्होटे साइज़ के बूब, और उसपे पिंक निपल का छ्होटा सा दाना, वाउ क्या मस्त माल थी मेरी तमन्ना.
उसका एक बूब मेरे एक हाथ में समा जाता था. एक बार किस्सिंग और बूब्स प्रेस्सिंग करते टाइम मैने उसके चुतताड को सहलाते हुए, कपड़े के उपर से उसकी छूट को सहलाने लगा. तब उसने मेरा हाथ हटा दिया.
तमन्ना: सुहैल, मत करो ये. मैं तुम्हे माना तो कर रही हू, तुम्हारा हाथ हटा के.
मे: ओक डार्लिंग, तुम नाराज़ मत हो. मैं तो सोच रहा था की अब आयेज बढ़ा जाए.
तमन्ना: ओये हेलो. क्या आयेज बढ़ा जाए? वो सब चीज़ें, जिसे तुम सोच रहे हो ना, वो सब शादी के बाद. समझे?
मे: एस माँ. समझ गया.
तभी पीनू अंदर आई, और मुझे देख कर हासणे लगी. शायद उसने लास्ट वाली चीज़ें सुन ली थी. जाते वक़्त तमन्ना ने मुझे स्माइल देते हुए वहाँ से चली गयी. उसका वो चेहरा और मुस्कान देख कर मैं सोचने लगा, “ठीक ही तो कह रही है तमन्ना. और वैसे भी तमन्ना होटेल में ले जाने की चीज़ नही, घर ले जाने की चीज़ है. अगर उससे मेरी शादी हो गयी तो सच में अपनी लाइफ सेट हो जाएगी.”
क्यूंकी तमन्ना केरिंग वाली लड़की थी. उसकी ज़ुबान भी मीठी थी. उसकी आँखें तो जैसे गहरी नीली झील थी. और वो क्वालिटी की जो हर लड़का अपनी बीवी में ढूंढता है की उसकी बीवी ब्यूटिफुल और सेक्सी होनी चाहिए, जिसे देख कर सब की आँखें फटी रह जाए. तो वैसी ही बाला की खूबसूरत थी मेरी तमन्ना.
और उसके मस्त बूब्स. अभी इस आगे में इतने आचे साइज़ के थे, तो जब शादी के बाद जब वो 30-35 की होगी, तब तो उसके बूब्स और भी बड़े साइज़ के हो जाएँगे. अब और क्या चाहिए एक हब्बी को इसके साइवा? और उसकी किस्सिंग का तरीका भी ज़बरदस्त था. सिर्फ़ उसकी छूट के दर्शन बाकी थे, जो मैं शायद अपनी सुहग्रात पे करने वाला था.
सो फ्रेंड्स, आपके कॉमेंट्स मुझे गमाल/गूगले छत करिएगा ओं लज़्यलीहास@गमाल.कॉम पे.
जल्द मिलते है, अगले पार्ट मैं.