सामूहिक चुदाई वाला दिल्ली टूर

जैसा कि मैंने आपको अपनी पिछली कहानी में बताया था कि घर में हम पाँचों लोग नंगे ही रहते हैं, कपड़े तब ही पहने जाते थे जब हम या तो घर से बाहर निकलते थे या कोई रिश्तेदार घर आता था, अन्यथा हम पाँचों ही बिल्कुल नंगे रहते हैं।
चारों लड़कियों को सिर्फ एम सी के समय चड्डी पहनने की इज़ाज़त थी। जिससे जिस किसी का भी जब मन करता वो मेरे लंड के साथ खेल लेती थी। हाँ शिखा को मेरा बीज पीना बहुत अच्छा लगता था इस वजह से वो मेरा लंड अक्सर चूसती थी और उसे अपने मुँह में झाड़ लेती थी।

एक बार दिसंबर में सुबह के समय वो मेरा लंड चूसकर जगा रही थी उसी वक़्त मेरी एक क्लाइंट का फ़ोन आया जो शिखा ने ही रिसीव किया और कहा- जीजू अभी सो रहे हैं थोड़ी देर बाद काल करना।

जब उसने मेरा बीज पी लिया तो मेरी आँख खुली तो उसने बताया कि आपकी एक क्लाइंट का फ़ोन आया था।
मैंने उसे समझाया कि तुम रोज़ मेरा बीज पियोगी तो मैं कैसे तुम लोगों को चोद पाऊँगा क्योंकि बार बार बीज निकलने से लंड की ताक़त कम होती है।
तो वो बोली- जीजू क्या करूँ, आपका बीज इतना स्वादिष्ट है कि मैं अपने आपको रोक नहीं पाती हूँ।
मैंने उससे पूछा- वो क्लाइंट क्या कह रही थी?
तो उसने बताया- मैंने कुछ देर बाद फ़ोन करने के लिए कह दिया है।

उसके बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चला गया। फ्रेश होने और ब्रश करने के बाद चारों में से कोई एक लंड की जैतून के तेल से मालिश करती है जिससे लंड की नशें कमजोर नहीं पड़ें और उसमें लंबे समय तक चोदने की स्टैमिना रहे।
उसके बाद वो ही लड़की नहाते समय मेरे लंड को साबुन से अच्छी तरह साफ़ करती है। यह मेरी रोजाना की दिनचर्या थी।

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मैं जैसे ही नहा धोकर फ्री हुआ वैसे ही दरवाजे की घंटी बजी। मैंने अपने नंगे बदन पर लुंगी लपेटकर और शर्ट पहनकर दरवाजा खोला तो दरवाजे पर गरिमा खड़ी हुई थी।
गरिमा मेरी बहुत अच्छी क्लाइंट थी, वो महीने में कम से कम 20 दिन मेरी सर्विस लेती थी।

मैंने गरिमा से अंदर आने को कहा और पूछा- कैसे आना हुआ?
तो गरिमा ने बताया- दिल्ली में मेरी एक सहेली रहती है, उसकी अभी एक महीने पहले ही शादी हुई है, उसका पति दुबई में नौकरी करता है जो शादी के 10 दिन बाद ही नई नवेली दुल्हन को छोड़ कर दुबई चला गया है। अब वह अपने पति के बिना ऐसे तड़पती है जैसे बिना पानी के मछली। यह बात मेरी सहेली ने मुझे फ़ोन पर बताई तो मैंने अपनी सहेली से कहा कि कोई जिगोलो को बुलाकर अपनी चूत शांत करवा ले।
तो उसने कहा कि मैं तो यहाँ किसी को नहीं जानती तो मैंने उससे कहा कि हमारे आगरा में एक है जिसका लंड भी करीब 9″ का है जो तेरी चूत का भुर्ता बना देगा और साथ साथ तेरी प्यास भी बुझा देगा पर उसका खर्चा थोड़ा ज्यादा होगा।
मेरी सहेली ने कहा कि तू खर्चे की फिक्र मत कर तू उसे जल्दी से भेज दे।
मैं इसीलिए सुबह सुबह तुम्हारे पास आई हूँ, तुम्हें आज ही दिल्ली निकलना है।
उसने मुझे फुल एड्रेस और ट्रेन का रिजर्वेशन टिकट दिया।
मैंने गरिमा से पूछा- दिल्ली का यह टूर कितने दिन का है?
तो उसने जवाब दिया- कम से कम तीन दिन का। क्योंकि उसने मुझसे कहा था कि यदि उसने मुझे संतुष्ट कर दिया तो मैं उससे 3-4 दिन लगातार चुदूँगी। तो मुझे पता है कि तुम्हें कम से कम तीन दिन लगेंगे।

मैंने गरिमा से कहा- तुम मेरी पुरानी क्लाइंट हो इसलिए मैं तुम्हारी कोई बात नहीं टालूंगा।
गरिमा ने कहा- आप चिंता न करो, आपके पैसे मैं दूंगी।
और कहकर उसने लंड का अपने होंठों से चुम्मा लिया और चली गई।
मैंने भी उसके जाने के बाद शिखा से पैकिंग करने के लिए कहा और करीब 30 मिनट के बाद मैं स्टेशन की ओर चल पड़ा।

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शाम के करीब 5 बजे मुझे ट्रेन ने नई दिल्ली छोड़ा। स्टेशन के ऊपर ही रोड वाले पुल पर पहुंचकर मैं उत्तम नगर जाने वाली बस का इंतज़ार करने लगा।
बस स्टॉप पर बहुत भीड़ थी। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि सुबह शाम दिल्ली की बसों में कितनी भीड़ चलती है।
खैर कुछ देर बाद बस आ गई और मैं उसमें चढ़ गया। मेरे साथ दो तीन लड़कियाँ और कुछ अन्य सवारियाँ भी चढ़ी। बस में पैर रखने की भी जगह नहीं थी।
किसी तरह से धक्का मुक्की करके मैं बस में चढ़ गया। पहाड़गंज थाने वाले स्टॉप तक वो लड़कियाँ भी धक्के की वजह से मेरे पास आ गई।

जैसा मैंने आप लोगों को बता चुका हूँ कि मैं नीचे अंडरवियर नहीं पहनता हूँ, उन लड़कियों से टच होते ही मेरा लंड पैंट में ही तन गया और उनकी गाँड में चुभने लगा।
लड़की को जब मेरा लंड चुभा तो वह बोली- भाई, ठीक से खड़ा हो!
तो मैं थोड़ा संभल गया लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण और बस के झटके के कारण कभी उन लड़कियों से मैं टच होता और कभी वो तो उनमें एक लड़की ने मेरा लंड पकड़ लिया। लंड पकड़ते ही उसने मेरी पैंट की ज़िप भीड़ में ही खोल दी और लंड को हाथ से आगे पीछे करने लगी जिससे मुझे मजा आने लगा।
लेकिन मैं मुंह से कुछ भी बोल नहीं सकता था क्योंकि आस पास काफी भीड़ थी।

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