डाल दो रस मेरी प्यासी चूत में–1

हेलो दोस्तो, मेरी ये कहानी एक कहानी नहीं, एक वास्तविक घटना है, एक आत्म कथा है, एक उपन्यास के रूप में पेश कर रही हूँ. इस कहानी में एक पात्र ने मुझे ये सचाई बताई है जिसको मैने लिखने की कोशिश की है. उम्मीद है आप पसंद करेंगे. मुझे अपने विचार ज़रूर लिखना.

मुझे अपनी ज़िंदगी की पहली याद है जब मैं पढ़ता भी था और काम भी करता था. मेरा नाम गणेश है और मैं जनम से ही अनाथ हूँ. मेरी उमर तब 15 साल की थी जब से मैं सरकारी स्कूल में पढ़ता था और रात को एक रेस्टोरेंट में सफाई करता था. मेरी वाकफियत शहर के बदमाश लोगों से थी और मैं एक नंबर का हरामी था. रेस्टोरेंट का मालिक रोशन नाम का एक बदमाश था और मुझे अक्सर उसके घर काम करने जाना पड़ता था.

मेरा कद 6 फीट का हो चुका था और शरीर भी ताकतवर था. एक दिन मैं मालिक के घर खाना देने गया तो ऐसा लगा कि घर में कोई नहीं है. मैं अभी पलटने ही लगा था कि मालकिन के कमरे से आवाज़ सुनाई पढ़ी तो मैं चौंक पढ़ा,” उफफफफफ्फ़ साले हरामी आराम से चोद….मैं कोई रंडी हूँ क्या? रोशन के सामने तो मुझे भाबीजी कहता है और अब देखो कैसे चोद रहे हो अपनी भाबी को? मादरचोद कितना बड़ा है तेरा लंड? तेरी बीवी खूब मज़े लेती होगी…मुझे तो थका दिया तुमने राज, काश मेरे पति का भी लंड तेरे जैसा विशाल होता. बहनचोड़ फाड़ कर रख डाली है अपनी भाबी की चूत…..अब जल्दी से चोद डाल मुझे, गणेश खाना ले कर आता ही होगा….मैं क्या करूँ मूह से अधिक भूखी तो मेरी चूत है….चोद मुझे राज….ज़ोर से पेल….मैं झड़ी” मेरी ना चाहते हुए भी नज़र दरवाज़े के छेद से अंदर चली गयी. मालकिन का गोरा जिस्म पसीने से नाहया हुआ था. उसका दूधिया बदन मालिक के दोस्त के सामने कुतिया की तरह झुका हुआ था. कितनी प्यारी लग रही थी मालकिन! पीछे से मालिक का दोस्त उस्स्को छोड़ रहा था और बगलों से हाथ डाल कर मालिकन की गोरी चुचि को बे-रहमी से मसल रहा था.

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मैं चुप चाप बाहर हॉल में बैठ कर वेट करने लगा और थोड़ी देर में मैने बेल बजा दी. मालकिन एक गाउन पहन कर आई और मैने उस्स्को खाना पकड़ा दिया. मेरी नज़रें झुक गयी लेकिन मालकिन का जिस्म गाउन से बाहर निकलने को आतुर हो रहा था. खाना लेते हुए मालकिन का हाथ मुझ से स्पर्श कर गया और मुझे एक करेंट सा लगा. मालकिन की आँखें मेरे बदल को टटोल रही थी. वो मुझे वासनात्मक नज़रों से देख रही थी जैसे बिल्ली दूध के कटोरे को देखती है. मेरे सीने पर हाथ रख कर वो बोली,” गणेश, तुम तो जवान हो गये हो और सुंदर भी. कभी क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझ से माग लेना. मैं जानती हूँ की जवानी में मर्द को बहुत मुश्किल आती है.” मैं जानता था कि वो मुझ से चुदवाने के लिए तड़प रही है, लेकिन मैं अपनी नौकरी को रिस्क में नहीं डाल सकता था.

वापिस आते हुए मेरे बदन में एक अजीब हुलचूल हो रही थी और मेरा लंड ना चाह कर भी अकड़ रहा था. मालकिन का नंगा जिस्म बार बार मेरी नज़र के सामने आ जाता. उस रात मैने मालकिन की याद में मूठ मारी.

स्कूल में एक लड़का और एक लड़की नये दाखिल हुए. सुनील और नामिता दोनो भाई बेहन थे. वो हमारी एमएलए प्रभा देवी के बच्चे थे. प्रभा देवी को सब जानते थे. वो प्रेम और ममता की तस्वीर मानी जाती थी. प्रभा देवी कोई 45 साल की थी. हमेशा सफेद सारी में रहती किओं की उसस्का पति मर चुका था. सभी उस्स्को मा कह कर बुलाते थे. सुनील, मेरी क्लास में था. वो बिल्कुल लड़कीो जैसा दिखता था, गोरा चिटा, और कोमल. सभी लड़के उस्स्को प्यारा लोंदा कहते और प्यार से या ज़ोर से उसस्की गांद को चिकोटी काटने की कोशिस करते. सुनील की छाती भी औरतों जैसी सॉफ्ट थी. वो लड़का कम और लड़की अधिक लगता था. उसस्की बहन नामिता मुझ से दो क्लास आगे थी. लंबी, सुंदर और सेक्सी. उसस्की छाती का उठान देखते ही बनता. पॅंट में उसस्के चूतड़ बहुत उभरे हुए दिखते. काले कटे हुए बाल और तेज़ आँखें देख कर मैं पहली नज़र में नामिता से प्यार कर बैठा. उस रात से मैं नामिता को नंगी कल्पना करके मूठ मारने लगा. कल्पना में मैं अपने आप को राज और नामिता को मालकिन के रूप में देखने लगा.

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कुच्छ दिन बाद रघु(स्कूल का एक बदमाश लड़का) ने सुनील को ग्राउंड में दबोच लिया और उसस्की पॅंट उतारने लगा. बेचारा सुनील रोने लगा.” चल साले लोंडे, मैं तुझे चोद कर अपना पर्सनल लोंदा बना कर रखूँगा. बहनचोड़, वेर्ना सारा स्कूल तुझे चोदने को तैयार बैठा है. अगर मेरे साथ दे गा तो तेरी बेहन को भी प्रोटेक्षन दूँगा. साली माल तो बहुत बढ़िया है तेरी बेहन. अगर मेरे बिस्तर में आ जाए तो तेरी चाँदी लगवा दूँगा, मेरे साले” मैं सब कुच्छ देख कर वहाँ चला गया. सुनील की पॅंट उत्तर चुकी थी और उसस्के गोरे चूतड़ एक काले अंडरवेर में झाँक रही थी. साली उसस्की गांद भी बहुत सेक्सी दिख रही थी. लेकिन उसस्का रोना देख कर मैं अपने आप को रोक ना सका और रघु से बोला,” रघु, सुनील को छ्चोड़ दे, वेर्ना अच्छा ना होगा.” रघु भी भड़क उठा और बोला” बहनचोड़, ये लोंदा मेरा माल है और उसस्की बेहन भी मेरा माल है. चल फुट यहाँ से वेर्ना तेरी भी गांद मार लूँगा.”

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