कज़िन सिस्टर को पता के वर्जिन चूत मारी

नमस्कार, सुक्रिया पिछली स्टोरी पसंद करने के लिए और अब आयेज की घटना.

छोटा भाई: शामे शामे भैया.

मई पलट के पंत पहें लिया और पूछा यहा क्या कर रहा है?

छोटे: मा बुला रही है.

सुरनीटा: अभी चलो वरना मा अप्पर आ जाएगी.

मई: अक्चा ठीक है, छोटे तुम जाओ हम 5 मीं आते है.

छोटे के जाते ही सुरनीटा हड़बाद से उतने लगी और टांक के पास गयी और खून सॉफ किया. उसी टांक के नीचे तोड़ा सा जघा है जहा एक इंसान लेट सकता है. टांक के साइड से नीचे घर धिकता है पर टांक के नीचे बेटने वाला नही दिक्ता.

मुई तुरंत मेरी बहें को उठाया उसके लातेया, छूट मई लंड घुसाद धक्के देने लगा.

उसका आ आ के हल्के आहे भरते हुए एंजाय करने लगी और बोलने लगी भैया जल्दी करो कोई आ जायगा.

मेरी बहें आह मा सिसकिया बार्न लगी तो नीचे मेरी आंटी धिकी और बोली क्या कर रहे हो जल्दी आओ. मई हल्के धक्के देते हुए. हा आ रहे है आंटी.उसके करीब 10 मीं बाद वो झार गयी और मैने अपना लंड बाहर निकाला.

उसने अपने हटो से जल्दी जल्दी मेरा उसकी रस से भीगा गीली लंड हिलने लगी, आकरी छूट के पास झार गया.

मई उसे चूमा, सॉफ किया और दोनो रेडी हो गये. मेरी चुड़ाकड़ बहें बहुत खुश दिख रही थी और नीचे गये तो सब देकने लगे हमे.

यूयेसेस दिन शायद जो हुआ अंकल और आंटी को बाद मई पता चल गया होगा तो उसके बाद हम दोनो के सात कोई ना कोई रहता और फिर छोड़ नही पाया. पर उसके मुस्कुराने से पता चलता यूयेसेस को छुड़ाने का बड़ा मज़ा आया है.

मई उसे फिर नही छोड़ पाए तो पॉर्न और स्टोरीस पे अडिक्ट हो गया करीब 1 साल बाद मेरे दूसरे अंकल की 2 बेतिया थी दोनो बहएने मस्त थी.

मेरी बड़ी बहें 1 साल बड़ी थी पर प्रूफ नही था क्यू के उनका बर्त सर्टिफिकेट नही था और गौण मई जानम हुई थी. उनका कोई प्रूफ नही था तो हम दोस्त के तारा थे और नाम से बुलाया करते थे.

उनकी छोटी बहें करीब उनके ही हाइट की थी.दोनो दूध जैसे गोरी थी और आरती से थोड़ी उबरी स्तन और गांद थे रेका के.

दोनो गाओं से सहेर मेरी चाची उनकी मा के सात आई थी उत्तम शरीर का आकृति है और 5.6 से 5.7″ का हाइट.

मई दोनो से बहुत ज़ायद प्यार करता हू और आज बे आरती मेरी बहें ना होती तो बीवी बना के छोड़ने का सपने डेका करता और मुत्ता मरता. पर क्या करे उनसे पहले सुरनीटा चुड गयी मुझसे.

आरती हमेशा टाइट गुटनो तक छुरीदार तोड़ा डीप कट पर पल्लू हमेशा रहेगा उसके उप्पर और टाइट लेग्गिंस पहनती.

हमारे परिवार मई एक वो और मई सब के नज़र मई बहुत सीडे सादे थे.

वो सब हर दूसरे सीन घर आते और वही सो जया करते क्यू के चाचा बाहर रहते कम से पापा बे उनके सात काबी चले जाते.

मई सोणेका नाटक करके हर बार आरती के बगल मई सो जाता और चाची सपोर्ट करती मुझे और उसके बाजू मई छोतीबेहें रेका या चाची फिर मा सोजते हमे कोई अलग नही करता ये आदत बन गयी.

अंडरे मई कुछ नही दिक्ता बस छोटी से खिड़की तीस जिस रोशनी ना के बराबर था क्यू के सामने बिल्डिंग थी.

नींद मई आरती की चूचिया दबाता और छूट और गांद पे हाथ सहलाता. हर बार वो बस तोड़ा सा हिलती और चुप हो जाती.

वो हमेशा मुझे छोटा शेरा बुलाया करती क्यू के मई एलास्टिक वेल शॉर्ट्स पहेंटा बिना अंडरवेर के.

उसका ये कोड वर्ड था मेरको छिड़ने का अकेले मई हो या सब के सामने.

एक दिन सॅटर्डे को सब बाहर पार्क गुंने का प्लान बनाए और हमे बुलाया.

मई: नही! सोना है नींद आ रही है.

आरती: अपनी बहें को डेक के बोली ये सोई हुए है तो मई भी यही रुकूंगी तो सब खुशी से निकल गये.

मई: तुम क्यू नही आई?

आरती: तुम्हारा छोटा शेर आज कल बहुत गरज रहा है इससलिए डरती हू और हासणे लगी.

मई: अक्चा कुस्टी करे.(हम जब बे अकेले होते व्फ ही करते यूयेसेस समय का फॅवुरेट, ओपन थी मुझ से बहुत).

आरती: ओके बोला और दो बेड नीचे उतार लिए.

मई: बहुत जल्दी है टुजे.

आरती: दीदी बोल बोसिडिके बड़ी हू. अपने आप को बड़ी समजती. (ये वाला इसका रूप सिर्फ़ मई डेका हू पूरे परिवार मई वरना सबके सामने बहुत सीडी सदी बनी रहती है).

मई: चल हाथ ढक्कन खहिक्ी.

तभी जैसे वो जुकी और बेड लगाने लगी तो उसका पल्लू गिरा और मुझे गोरे उबरे उसके कपड़े पे दबी स्तन धिके, पता नही कैसे अपने आप को काबू कर लिया था.

आरती: तुम छोटे हो तो दीदी बोलना पड़ेगा.

मई: अक्चा चलो अगर तुम जीती तो मई दीदी बोलूँगा और मई जीटा तो जो मई चाहू.

आरती: चल सुरू कर, उसे लगा मई क्या पूछ सकता हू.

मई: पास मे पड़ा ग्लास उताया और दीवार पे टीन बार मारा के मॅच शुरू.

आरती ने अपने पल्लू को साइड फेका और मुझपे टूट पड़ी. उफ़फ्फ़ उसकी गोरी चूचियों पे कट डेक के मेरा लंड हरकत करने लगा.

आरती मुझे गिरने के लिए खींच रही थी के तबी उसका पौ पिसला और एक बेड पे तो दूसरा ज़मीन पे लेग स्प्लिट हुआ तो टार आवाज़ आया उसकी लेगीनीस फॅट गयी थी हाहाहा.

मई ज़ोरो से हँसे लगा और अब बोलो, दीदी बुलवाना है या हर मनोगी. यूयेसेस दिन पता नही उसे क्या हुआ था फिर उत्ती और अपने पूरे ताक़त से गुस्से मई गिरने के कोशिश करने लगी.

उसकी आदत था उसको गुस्सा कम आता जब आता रोक नही पता कोई.

मई उसे मोका डेक गांद से पकड़ गोदी मई यूटा लिया तो उसके नरम चूचियाँ मेरे मूह पे थे. वो मुझे मरने लगी तो उसने मेरा लंड महसूस किया.

वो घबरा गयी और हटने की कोशिश कर रही थी की तभी उसे वही गिरा दिया.

मई उसका हाथ पकड़ के: हार मान ले.

आरती: बिल्कुल नही.

मई उसके उप्पर लेता चूचियों को दबाते हुए: 1-2 बोला के तभी उसने हाथ उताया.

आरती पूरा छटपटा रही थी मुझे हटाने.

मुझे उसकी छूट का स्पर्श करने का मान किया तो शॉर्ट्स को नीचे किया और लंड को आज़ाद किया और उसके पनटी पेर रखा.

आरती: ओये उठ ये क्या कर रहा है?!

मई: उसके गालो को चूमा, और बोला हार मान जाओ..

आरती: नही, उठ मेरे उप्पर से बेवकूफ़!

मई उसकी पनटी सरकने के कॉसिश करने लगा पर बहुत हिल रही थी.

मई: हार मान ले.

उसकी तंग पकड़ के मुश्किल से उसे घुमाया और अब फिट के बाल लेती थी और मई उसके उप्पर बैट गया.

आरती: उठ जा भेंचोड़ वरना चिल्ला दूँगी!

मई: अक्चा छिलाओ, पहले हार मान लो तब छोड़ दूँगा.

उसकी गांद के उप्पर से फटी जगा से पनटी सरकया तो डेक्ता रहा गया पागल होगआया, उसकी छूट पे उंगली रहा तो गीली था, रस बाहर मेरे उंगलयों पे था.

आरती: नही!अक्चा मई हर मनती हू.

मई: सुनाई नही दिया और उंगली मई लगा रस का स्वाद लिया.कैसे बोलो बस गजब था.

हॅट पकड़ के उसके छूट तक मेरा लंड ले गया वो टॅंगो को टाइट कर ली, मई लंड दोनो गांद के बीच रगड़ने लगा.

आरती: नही प्लीज़ मई हर मनती हू, एसा मत करो.

मई उसकी चूचियों को दबाने लगा उसके ब्रा के उप्पर.गांद के बीच रग़ाद थे समय उसकी छूट पे रग़ाद लगा और तोड़ा मेरा लंड उसके छूट पे गुस्स गया और निकल गया.

आरती: आहह रूको…

मई धक्के देने लगा जानो के बीच और धेका तोड़ा सा खून धिक रहा था.लंड का टोपा गुस्स के बाहर निकला था.

आरती: प्लीज़ अब बस हुआ जाने दो मुझे. नही खेलना.

मई: चॅलेंज तो चेल्लेंगे है मई जीटा तो रिवॉर्ड मिलना छाईए.

अब मई चरम सीमा के पास ही था के तबी डोर नॉक हुआ. मई उसका मूह पकड़ जल्दी जल्दी हिलने लगा और वही उसके गांद के घड़दे पे अपना रूस गिरा दिया और उत्त् के नज़र पीछे किया तो रेका आँके बड़ी करके सब धेक रही थी पर कुछ नही बोली. शायद तभी उटी होगी.

आरती: जल्दी उटी और धक्का दिया और तमाचा मारा. सब को बतौँगी अब.

मई: दर गया और पॅव पड़ने लगा प्लीज़ ग़लती हो गयी.

आरती: छोटी बहें को धेक मुझे एक और तपद लगा दिया.

रेका: अपने बहें की फटी लेग्गीन के अंदर मेरा रस बहते हुआ धेक रही थी.

फिर से नॉक हुआ तो वो अपने आप को बेडशीट से सॉफ की फटी लेग्गीन छुपाते बोली रूको सबको बता दूँगी.

मई रेका को बोलने लगा बचा ले. पर सब हेस्ट हुए आए और मुझ पे हासणे लगे मई हैरान था कुछ समाज नही आया.

कुछ समय बाद बाते की और जब मोका मिलता वो सात देती उसके होटॉको चूमता, उसकी छूट मई उंगली करता और वो मेरा लंड हिलती और मूह मे भी लेते पर काबी अपनी छूट छोड़ने नही देती. हाफ वर्जिन थी अब.

अब इश्स हाटसे के बाद आरती के सात छोटी बहें रेका कैसे मुझ पे डोरे डालने लगी वो अगली कहानी मई बतौँगा.

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