कज़िन सिस्टर का नंगा जिस्म और भाई की वासना

ही फ्रेंड्स, आज मैं एक न्यू सेक्स स्टोरी के साथ आया हू. ये स्टोरी मेरे एक रीडर ने सेंड की है. आशा करता हू की आपको ये स्टोरी पसंद आए.

मेरा नाम अमित है. मैं एक कंपनी में जॉब करता हू. साल में ऐसा टाइम आता है जब हम भाई-बेहन मिल के नाना-नानी के घर जाते थे. वहाँ जाके रेस्ट करते, घूमते फिरते और लाइफ को एंजाय करते. पर इस बार नाना-नानी का खुद का कहीं जाने का प्लान था.

इस प्लान के बारे में मुझे बाद में पता चला, तब तक मैने 10 डेज़ लीव अप्रूव करवा ली थी. मैने अपने भाई बहनो से पूछा तो उन्होने बोला ठीक है, इस बार नानी के घर नही जेया सकते तो क्या हुआ, पर दूसरे मामा के घर चले जाएँगे. लेकिन उन लोगों की छुट्टी सिर्फ़ 2 दिन की ही अप्रूव हो पाई थी.

हमने ये प्लान मामा को बताया की हम लोग इस बार उनके घर आ रहे थे. वो खुश हो गये. मामा मामी दोनो एक मंक में काम करते थे. उनके एक बेटी थी, उसका नाम आयुषी था. उसकी आगे 20 साल और उसकी भी कॉलेज में छुट्टी थी. जहाँ नानी के घर जाते थे, तब वो भी हमारे साथ आती थी. मामा ने बताया की इस बार नानी-नाना घर नही थे तो आयुषी भी तोड़ा दुखी थी, अब तुम लोग आओगे तो खुश हो जाएगी.

फिर हम लोग मामा के घर को निकल गये. वहाँ पहुँचे तो मामा-मामी ने हमारा बहुत धूम-धाम से स्वागत किया. दो दिन कैसे बीते पता ही नही चला. हम घूमने गये, शॉपिंग की, मोविए देखी और धीर सारी बातें करी. फिर वो टाइम भी नज़दीक आ गया जब सब भाई-बेहन को जाना पड़ा.

आयुषी का मूड ऑफ था की वो लोग इतनी जल्दी जेया रहे थे. अब वो लोग भी चले गये थे. घर में सिर्फ़ मैं, मामा, मामी और आयुषी थे. आयुषी और मैं लिविंग रूम में थे.

आयुषी: भैया यार सब इतनी जल्दी चले गये. थोड़े दिन और रुक जाते तो कितने मज़े और करते.

मैं: अर्रे उनको जॉब में छुट्टी नही मिली. अगली बार जब छुट्टी मिलेगी तब कर लेंगे. कैसे भी मैं तो यही हू ना.

आयुषी: ये भैया आप नही समझोगे.

इतना बोलते ही वो अपने रूम में चली गयी. वो और भाई बहनो से नाराज़ थी. मैने भी उसको टाइम देना ठीक समझा. अगली सुबह मामा-मामी जब जॉब के लिए निकल गये तब मेरे रूम के बाहर एक नॉक हुई. फिर आयुषी रूम के अंदर आई और बोली-

आयुषी: भैया, मैं कल आपसे तोड़ा रूड हो गयी थी, सॉरी.

मैं: अर्रे कोई बात नही.

आयुषी: भैया, आप अब इतने दिन यहीं हो तो अब हम खूब एंजाय करेंगे. उनको बताएँगे की उन्होने क्या मिस किया.

मैं उसकी ये बात सुन के हासणे लगा और बोला: चल ठीक है, मैं नहा-धो के ब्रेकफास्ट करता हू, फिर सोचते है की क्या करना है अब.

फिर मैने वहीं किया, नाहया-धोया. ब्रेकफास्ट में परानते थे, वो खाए. अब घर में सिर्फ़ हम दो लोग थे. मामा-मामी जॉब पे चले गये थे. मैड भी अपना काम करके जेया चुकी थी. तभी मैने देखा आयुषी के रूम का डोर ओपन था, और मुझे सुबह की बात याद आई की हुमको अभी प्लान बनाना था की ये 8 डेज़ क्या करेंगे.

मैने उसके रूम का डोर ओपन किया. वो उस समय कपड़े चेंज कर रही थी. वो पूरी नंगी थी, अपने उतरे हुए कपड़े समेटने के लिए नीचे झुकी हुई थी. उसकी छूट और गांद का च्छेद सॉफ-सॉफ दिखाई दे रहा था. फिर उसने भी दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनी और वो पलटी. 1 सेकेंड के लिए मुझे उसके बूब्स और शेव्ड पुसी दिखाई दी.

मैं: सॉरी, मुझे पता नही था तू चेंज कर रही थी.

आयुषी ने एक हाथ से बूब्स और एक से छूट च्छुपाने की कोशिश करी. फिर भी मुझे उसके निपल्स सॉफ दिख रहे थे. जैसे ही वो कुछ बोली, मैं रूम से बाहर चला गया.

मुझे पहले से चुदाई का शौंक रहा है. मैने बहुतों को छोड़ा है. अगर अभी कोई और होता तो मैं इसको कब का छोड़ चुका होता. वो मेरे मामा की लड़की थी, और मुझे उसको छोड़ने का मॅन करने लगा. क्या छूट थी उसकी. यही सोच के मैं बातरूम गया और एक मूठ मारी.

मैं पहले बहुत बार सेक्स कर चुका था, पर उसके अंदर जाने के ख़याल मात्रा से ही मैं बहुत एग्ज़ाइटेड फील करने लगा. मैं अपने रूम में बैठा ही था की वो मेरे रूम में आ गयी. फिर मैं बोला-

मैं: सॉरी यार, मुझे पता होता तो मैं रूम का डोर ओपन ही नही करता.

आयुषी: रिलॅक्स, ग़लती मेरी भी थी की मैं रूम का डोर बंद करना भूल गयी थी. इस बात को भूल जाओ. चलो आज क्या करना है वो बताओ?

वो मुझसे ऐसे बात कर रही थी की सारी ग़लती उसकी थी, और इस टॉपिक को दफ़नाना चाहती हो. मैने भी प्लान बनाया की स्लोली-स्लोली इसके नज़दीक जाना है और यहाँ से जाने से पहले इसकी छूट लेके जौंगा.

फिर मैने उसके साथ मिल के प्लान बनाए घूमने फिरने के, जिससे ये मेरे साथ ओपन हो जाए. कभी-कभी तो मैं उसको टच करता. ऐसे टच करता जिससे इसको भी शक ना हो, और मुझे भी मज़े आ जाए.

पहले दिन कुछ ख़ास हुआ नही. सिर्फ़ इधर-उधर की बातें. कभी-कभी मैं बूब्स टच करने के बहाने उसको सामने से हग कर लेता, कभी सर्प्राइज़ देने के बहाने पीछे से हग कर लेता. उसकी मखमली गांद मेरी थाइस में टच करती, तो मुझे और भी मज़े आते. उसको इससे ज़्यादा ऐतराज़ नही था. मेरा लॉडा हर बार टाइट हो जाता. पर मुझे अभी संभाल के चलना था, तो मैं कुछ कर नही पाता.

ऐसे ही एक दिन निकल गया. रात को जब सब सो गये थे, और मुझे नींद नही आ रही थी की आयेज कैसे क्या करना था. फिर मैने सोचा तोड़ा लिविंग रूम में टहल लेता हू. मैं लिविंग रूम में गया तो वहाँ देखा की आयुषी के रूम की लाइट ओं थी और एक विंडो थोड़ी खुली थी.

मैने उसको आराम से तोड़ा खोला और उसको ऐसे अटका दिया जिससे वो बंद ना हो जाए. फिर मैने जो अंदर देखा मेरे पैरों तले की ज़मीन ही खिसक गयी.

तो बे कंटिन्यूड….

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