कॉलेज गर्ल की टीचर्स के साथ चुदाई की कहानी

हेलो, नमस्कार और सलाम दोस्तों. तो आप सभी को मैं अपने बारे में बता डू. मेरा नाम फरहान है और मैं एक आवरेज बॉय हू. दिखने में सिंपल हू और मेरी हाइट 5’11” है. मेरे लंड का साइज़ 7.5 इंच है. अब आते है हम लोग स्टोरी पर.

तो ये स्टोरी मेरे कॉलेज की है. मुझे एक लड़की पर क्रश था. लेकिन मुझे पता नही था की वो इतनी बड़ी रंडी निकलेगी. तो मुस्कान एक बहुत ही सुंदर लड़की थी. एक-दूं दूध जैसी गोरी लड़की. उसके बूब्स 30″, कमर 26″, और गांद 34″ की थी. भाई क्या ग़ज़ब का फिगर था. कोई भी अगर उसे देखता तो उसे ज़रूर छोड़ने का मॅन करता.

तो हमारे कॉलेज में दो टीचर थे धीरज और अचितानंद. दोनो बहुत मोटे थे. एक दिन बरसात का दिन था. कॉलेज में बहुत कम बच्चे आए थे. उस दिन ज़्यादा से ज़्यादा 50 बच्चे ही आए होंगे. मैने देखा की दोनो सिर मुस्कान को कहीं लेकर जेया रहे थे.

मैने देखा की दोनो टीचर आपस में कुछ बात कर रहे थे, और मुस्कान पीछे उनकी बातें सुन कर ब्लश कर रही थी. उसके गाल लाल हो गये थे. तब मुझे तोड़ा डाउट हुआ तो मैं उनके पीछे गया.

फिर मैने देखा की वो लोग उसको एक रूम में लेके जेया रहे थे जहाँ पर अंदर की आवाज़ बाहर और बाहर की आवाज़ अंदर नही जेया सकती थी. तो मैं भी उस रूम में जेया कर च्छूप गया.

तब मैने देखा की मुस्कान ने गाते बंद किया और दोनो सिर के बीच में जेया कर बैठ गयी. फिर दोनो सिर ने उसे छ्छूना शुरू किया. तभी धीरज सिर ने मुस्कान को पास बुलाया और उसे किस करना शुरू किया. पीछे से अचितानंद सिर उसके कपड़े उतारने लगे और उसे नगा करने लगे.

तब मैने देखा की मुस्कान के माममे कितने गोरे थे. मॅन तो कर रहा था की अभी जेया कर मैं उन्ही में शामिल हो जौ. लेकिन मैने खुद पर काबू किया और आयेज देखा.

तब मैने देखा की मुस्कान की छूट भी गुलाबी और होंठ भी गुलाबी थे. और उसकी गांद तो हड्द से ज़्यादा गोरी थी. दोस्तों क्या बतौ मुझे कैसा फील हो रहा था. मुझे जिस लड़की पर क्रश था, मैं जिसे एक-दूं संस्कारी समझता था, वो 2 टीचर से चूड़ने वाली थी.

फिर अचितानंद ने उस्की छूट पर अपनी जीभ रख दी, और उसे चूसने लगे. उसने धीरज सिर से कहा-

अचितानंद: यार धीरज, इस कुटिया की तो छूट बहुत रसीली है. इसे चूसने में तो बहुत मज़ा आ रहा है. तो फिर छोड़ने में कितना मज़ा आएगा.

तब धीरज सिर ने कहा: भाई तू तो पहली बार छोड़ रहा है. मेरा तो जब मॅन करता है तब छोड़ता हू. मुझे तो बहुत मज़ा आता है.

और इधर मैं एक बेंच के पीछे च्छूप कर ये सब बातें सुन रहा था. मेरा लंड खड़ा हो गया था मुस्कान को देख कर. फिर मैने देखा की सिर मुस्कान को गाली दे रहे थे-

धीरज: चल रे रांड़, साली कुटिया, चल मेरे दोस्त का लंड चूस और उसे मज़े दे, नही तो तेरी छूट का भोंसड़ा बना दूँगा.

तब मुस्कान बोलती है-

मुस्कान: सिर मैं तो आपकी ही रांड़ थी. आज से में अचितानंद सिर की भी रांड़ हू. आप दोनो जैसा बोलॉगे मैं वैसा करूँगी मेरे मलिक.

फिर दोनो सिर हासणे लगे और अचितानंद सिर बोले की-

अचितानंद: आजा मेरी नयी रॅंड, तुझे मैं अपना लंड देता हू. अब तुझ जैसी गोरी लड़की मिले, तो मैं दिन-रात बस छोड़ता राहु.

फिर मुस्कान ने कहा-

मुस्कान: सिर अगर आप दोनो जैसे छोड़ने वाले हो तो मैं खुद दिन भर चुड़ू. सिर अब आप अपना लंड मुझे दीजिए, मुझसे सबर नही हो रहा है.

ये कह कर उसने अचितानंद सिर का लंड उनकी पंत से निकाला और उस पर एक किस दिया अपने गुलाबी होंठो से. फिर एक-दूं से अपने मूह में ले लिया, और चूसने लगी. वो इतना अछा चूस रही थी की अचितानंद सिर बोले-

अचितानंद: कितना मस्त चूस रही है मेरी रानी, श आह श, ह्म ले गले तक ले.

फिर सिर ने मुस्कान के खुले बाल पकड़ कर अपने मुट्ठी में लिए और उसका मूह छोड़ने लगे. वो अपना लंड गले तक उतार रहे थे. इधर मुस्कान साँस नही ले पा रही थी तो उसने सिर को हाथ मार के इशारा दिया. लेकिन सिर नही माने. उन्होने उसके गले तक अपना लंड डाल दिया.

फिर सिर का होने वाला था तो सिर ने मुस्कान से कहा: कहाँ लेगी रांड़ जल्दी बता, मेरा होने वाला है.

मुस्कान: सिर दे दीजिए मूह में आपका माल.

तब सिर ने अपना माल मुस्कान के चेहरे पर गिरा दिया. उसके गोरे चेहरे पर एक-दूं वाइट माल और अछा लग रहा था. तब उसने वो सारा माल अपनी उंगलियों से चाट-चाट कर पी लिया.

उसके बाद तीनो हासणे लगे. फिर धीरज सिर आए और उसके मूह में अपना लंड डाल दिया. पीछे से अचितानंद सिर ने अपना लंड अचानक से उसकी छूट में डाल दिया. इसके चलते मुस्कान ज़ोर से चिल्लाई, लेकिन उसके मूह में धीरज सिर का लंड होने की वजह से वो कुछ बोल नही पाई.

फिर धीरज सिर मुस्कान के मूह को छोड़ते रहे. बुत जब उनका होने वाला था, तब सिर ने उसका मूह पकड़ा और अपना लंड उसके गले में उतार दिया. फिर आखरी स्ट्रोक से माल उसके गले तक डाल दिया.

मुस्कान बिना एक भी बूँद गिराए सिर का सारा माल पी गयी. फिर अचितानंद उसकी छूट में ही अपना माल गिरा दिया. जब अचितानंद सिर हटते, तब धीरज सिर आए और उन्होने अपना लंड उसकी छूट में दल दिया. मुस्कान ने ये एक्सपेक्ट ही नही किया था, इसलिए मुस्कान चिल्लती है.

उसकी आँखों में से पानी आ रहा था. बुत उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था. फिर उसने सिर का साथ दिया और धीरज सिर से कुटिया के जैसे चुड्ती रही. फिर जब सिर का होने वाला था, तब उन्होने अपना लंड बाहर निकाला और मुस्कान के मूह में अपना लंड डाल दिया. मुस्कान ने बिना कुछ कहे सारा माल दोबारा पी गयी.

फिर दोनो हाँफने लगे और साइड में बैठे अचितानंद सिर बोले: चलो सब अपने-अपने कपड़े पहन लो, नही तो किसी को शक हो जाएगा.

उन्हे ये नही पता था की मैं एक कोने में बैठ कर सब देख रहा था. फिर सब ने अपने-अपने कपड़े पहने और बाहर चले गये. मैं भी उनके जाने के बाद चला गया. अगर किसी भी लड़की को या फिर भाभी को मेरे से बात करनी है, तो वो मुझे मेसेज कर सकती है. mail id hai [email protected] pe

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