क्लासमेट के साथ दोस्ती से लेके सेक्स तक की कहानी

हेलो दोस्तों, मेरी उमर इस समय सिर्फ़ 23 वर्ष है, और मेरी हाइट 5’6″ है. ये कहानी आज से 3 साल पहले की है. मैं उस समय गुजरात में रहती थी. मैने कॉलेज में नया-नया अड्मिशन लिया था और मैं वर्जिन थी.

कॉलेज के पहले दिन मैने एक क्रॉप शर्ट पहनी थी, और उसके अंदर एक टाइट ब्रा. नीचे मैने एक कार्गो पहनी थी आंड क्यूंकी मेरे पीरियड्स चल रहे थे, तो मैने पद भी पहना हुआ था.

फर्स्ट दे जब मैं क्लासरूम में पहुँची, तो सिर्फ़ 5 ही बच्चे मौजूद थे, और सभी लड़के थे. एक बार के लिए मैने सोचा की जौ या ना जौ. फिर मैं सेकेंड में क्लास में चली गयी. तब कोई टीचर वाहा पर नही था.

4 लड़के एक साथ बैठे हुए थे, और एक लड़का जो की दिखने में काफ़ी अछा था, वो उनसे 3 बेंच आयेज बैठा हुआ था. तो 2 मिनिट्स के बाद मैं उसके पास गयी और मैने बोला-

मे: उहह, हेलो! क्या आज कोई टीचर क्लास में नही आएँगी?

हे: आक्च्युयली, आज हमारा भी पहला ही दिन है? तो क्या मैं स्टाफ रूम से पूच कर अओ आपके लिए?

मे: हा प्लीज़, क्यूंकी अगर आज कोई क्लास नही है तो क्लास में बैठना का कोई रीज़न नही है.

(इस बीच मैने देखा उसके फोन में तो वो डेसिखहनि नाम की वेबसाइट पर कुछ पढ़ रहा था, और इत्तेफ़ाक़ तो देखिए आज मेरी पहली कहानी भी “डेसिखहनि” पर ही आ रही है.)

मेरे ये बात बोलते ही वो क्लास से बाहर स्टाफ रूम की तरफ निकल गया, और मैं भी उसके पीछे-पीछे चलने लगी. मैं स्टाफ रूम के बाहर खड़ी हो गयी, और वो अंदर चला गया. लगभग 5 मिनिट के बाद वो एक पेपर लेकर बाहर आया, और मुझे वो पेपर देते हुए कहा की, “ये लो टाइम-टेबल”. मैने कहा “आपको भी तो चाहिए होगा ना?”

हे: हा बुत तुम रखो, मैं बाद में ले लूँगा किसी से Wहत्साप्प पर.

मे (बीच में बोलते हुए): किसी और से क्यूँ? मैं कार्दु क्या आपको Wहत्साप्प?

हे: हा शुवर! आपको कोई दिक्कत नही है तो.

मे (अपना फोन अपने बाग से निकालते हुए): ओक, आपका नंबर क्या है?

हे: 9 2 5….. राहुल नामे से सवे कर लो.

मे: ओह वाउ, मेरा भी नामे “र” से है, रोशनी.

राहुल: ओह अछा, तट’स गुड यार. अछा लगा आपसे मिल के.

ह्म दोनो का उस कॉलेज में कोई और दोस्त नही था. उस दिन के बाद हम दोनो में काफ़ी बात-चीत बढ़ गयी और हम इसी तरह आपस में मिलते रहे. कभी क्लासरूम्स में घंटो बातें करते, तो कभी कॅफेटीरिया में बैठ के कॉफी के मज़े लेते. वो दिन मुझे आज भी आचे से याद है. हलकी उस टाइम मैने कभी संभोग नही किया था, बुत मैं एक बहुत अची दोस्त बनने के काबिल थी.

बुत किसी के इतना करीब और वो भी इतनी जल्दी मैं कभी नही आई थी. राहुल करीब 5’10” का था, और दिखने में काफ़ी फिट था. वो ज़्यादातर फ़ॉर्माल्स ही पहन कर आता था. और मैं भी राहुल से मिलने के बाद काफ़ी अछा फील कर रही थी. वो मेरा काफ़ी ख़याल रखता था, और क्यूंकी मेरे पीरियड्स ख़तम हो गये थे तो मैं अछा फील कर रही थी.

आफ्टर फ्यू डेज़:-

आज राहुल से मैने जाते ही पूछा-

मे: राहुल, तुम उस दिन डेसिखहनि करके कुछ पढ़ रहे थे ना?

राहुल: श श! यार ये सब मत बोलो, कोई सुन्न लेगा तो?

मे: क्यूँ, ऐसा क्या है इसमे?

राहुल (मुझे तोड़ा आयेज ले-जाते हुए बोलता है): यार उसमे काफ़ी सारी हिन्दी/हिंगलिश स्टोरीस होती है. जिसे पढ़ने में बड़ा मज़ा आता है.

मे: यार प्लीज़, मुझे भी पधाओ ना.

राहुल: पागल हो क्या? असाइनमेंट्स की वजह से ना तो मेरे पास समय है. ना ही मैं ये फालतू चीज़े करना चाहता हू.

मे: तो एक काम करते है, आज तोड़ा जल्दी कॉलेज से निकलते है, और मेरे घर पर चलते है. क्या कहते हो?

राहुल: तुम्हारे पेरेंट्स को कोई दिक्कत तो नही है ना?

मे: नही-नही, थे अरे अंडरस्टॅंडिंग.

कुछ देर बाद हम कॉलेज से एक साथ मेरे घर की तरफ निकल पड़े. राहुल ने रास्ते से अपने लिए और मेरे लिए कुछ असाइनमेंट शीट्स खरीदी. घर पहुँचते ही मैने राहुल को कहा-

मे: तुम मूह हाथ धो लो, और उस अलमारी में दाद के त-शर्ट और लोवर पड़े होंगे पहन लेना. मैं भी फ्रेश हो कर आती हू (ये कहते ही मैं, वॉशरूम की तरफ चली गयी).

शवर लेने के बाद मैने एक ओवरसाइज़ त-शर्ट पहन ली, जिसकी नेक से मेरे बूब्स सॉफ दिखाई दे रहे थे. और नीचे मैने शॉर्ट्स पहन लिए. जैसे ही मैं अपने रूम में पहुँची तो मैने देखा की राहुल ने कमरा सेट्ल कर दिया था. शायद मुझे इंप्रेस करने के लिए किया था.

मुझे देखते ही वो कहता है “वोआह! वैसे तुम्हारे पेरेंट्स घर पे नही है क्या?” मैने जवाब दिया “नही”. ये सुन कर उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी. फिर वो स्टडी चेर पर बैठ गया, और मैं घोड़ी पोज़िशन में बेड पर बैठ गयी और असाइनमेंट लिखने लगी. मैं जस्ट उसके ऑपोसिट बैठी थी. कुछ देर बाद जैसे ही उसने अपना सर उपर किया उसने मेरे बूब्स के पूरी तरह से दर्शन कर लिए. मुझे ऐसे देखते ही उसके हाथ से पेन नीचे गिर गया.

मैने ध्यान नही दिया. अब वो 5 मिनिट तक मुझे यू ही देखता रहा. थोड़ी देर बाद मैने उसकी तरफ देखते हुए बोला, “ओये राहुल, तुमने कितना कर लिया? देखो मेरा पहले असाइनमेंट होने वाला है”. ये सुनकर राहुल ने कहा “अर्रे यार तू तो बहुत तेज़ है”. कुछ देर बाद भी राहुल बीच-बीच में मुझे निहारता जेया रहा था.

मैने ये चीज़ नोटीस कर ली, और अंदर ही अंदर खुश हो गयी. मैने राहुल को कहा “राहुल, मुझे लगता है तुम भी बेड पर लिखोगे तो शायद जल्दी लिख पाओगे”. ये बोलते ही राहुल चेर से उठ कर तोड़ा काँपते हुए बेड पर आ गया. मैने उसे बोला, “देखा तुम कंफर्टबल ही नही हो मेरे घर पर. इसीलिए मैं कह रही थी की वो कहानिया पढ़ते है”.

ये बोलते ही मैने अपने फोन में देसी कहानी सर्च किया, और पहले पेज पर क्लिक करते ही मेरे सामने काफ़ी कहानियाँ आ गयी थी. उस वेबसाइट को देखते ही मैं मचलने लगी थी. कुछ ही सेकेंड्स में मुझे राहुल ने भी जाय्न कर लिया, और अब मैं कहानी तोड़ा तेज़ पढ़ रही थी. राहुल के लिए भी ये बहुत नया एक्सपीरियेन्स था.

कहानी का 1/4 हिस्सा ही ख़तम हुआ था की मेरा एक हाथ हल्के से बूब्स पर था. फिर जब मैने राहुल की तरफ देखा, तो उसका लंड पूरा तन्ना हुआ था. मानो अभी पंत फाड़ कर बाहर आ जाएगा. धीरे-धीरे से उसका हाथ उसके लंड पर जेया रहा था. मैं धीरे से उसकी तरफ खिसक गयी और अब मेरे रिघ्त बूब का कुछ हिस्सा उसकी लेफ्ट चेस्ट पर लग रहा था. धीरे-धीरे उसने अपना बया हाथ मेरी पीठ के पीछे से ले-जेया कर मेरी कमर पर रख लिया. उसके हाथ बुरी तरह से काँप रहे थे.

राहुल को कंफर्टबल फील करवाने के लिए मैने उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया और कहा, “दररो मत राहुल”. ये सुन कर वो काफ़ी रिलॅक्स फील करने लगा. अब उसका वो हाथ मेरे लेफ्ट बूब्स पर था. धीरे-धीरे उसने मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया. मैं भी आहें भरने लगी, मानो जैसे की मैं जन्नत में थी.

अब मेरे बूब्स पूरी तरह से टाइट हो गये थे. हालाँकि बूब्स इतने बड़े नही थे, पर बहुत मज़ेदार थे. राहुल ने एक साइड के बूब को मेरी त-शर्ट से बाहर कर दिया. और मैं भी कुछ नही बोली.

(कहानी पढ़ते हुए) मैने अपने लेफ्ट हाथ से साइड में पड़ा पानी का ग्लास उठाया, और और पानी पीने के लिए ग्लास लिप्स पर लगाया. पानी पीने की जगह मैं अपने मूह से काफ़ी पानी गिराए जेया रही थी, जिससे देखते ही देखते मेरी त-शर्ट काफ़ी गीली हो गयी. ये चीज़ जैसे ही राहुल ने नोटीस की, उसने और मज़े से मेरे बूब्स को दबाना चालू कर दिया. मैने कहानी पढ़ना कंटिन्यू रखा.

अब हम दोनो मदहोश हो चुके थे. त-शर्ट गीली होने की वजह से वो मेरे शरीर पर चिपक गयी थी. पर अभी भी वो आधी ही गीली थी. इतने में राहुल ने अपनी साइड का पानी का ग्लास अपने हाथ में लिया, और दो सीप मार कर मुझे देते हुए कहा, “ये लो पानी, तुम काफ़ी देर से ये कहानी पढ़ रही हो”.

ये सुन कर मैं पढ़ना रोकते हुए पानी पीने लगी. पर इस बार मैने काफ़ी पानी अपने त-शर्ट के सूखे हुए हिस्से पर गिरा लिया. पर पता नही उस पानी में ऐसा क्या था, की उसे पीने के कुछ सेकेंड बाद मैं अपना कंट्रोल खोने लगी थी. मैने कहानी पढ़ना शुरू किया, पर इतना उत्तेजित होने के बाद मैं खुद को एक पोज़िशन में नही रख पा रही थी. मानो जैसे की मैं जन्मो की भूखी थी.

मेरे दोनो गीले बूब्स बाहर आ गये थे. मैने अपना एक हाथ उसके लोवर पर रख दिया, और मानो उसका लंड अपने आप मेरे हाथ में फिट हो गया हो मैं लोवर के उपर से उसके लंड को उपर-नीचे करने लगी. इतने में उसका लंड लोवर से बाहर आ गया. इतने में मैने पढ़ना बंद कर दिया, क्यूंकी उस कहानी का पार्ट 1 ख़तम हो गया था.

इधर कहानी ख्तम हुई, उधर राहुल ने मेरे बूब्स को दबाना बंद कर दिया. इस समय हमारी हालत काफ़ी हॉर्नी हो चुकी थी. मैं आधी नंगी थी. मेरे बूब्स गीले, मेरी पूरी त-शर्ट गीली, यहा तक की मेरे शॉर्ट्स भी गीले हो चुके थे. उधर राहुल की लोवर भी काफ़ी गीली लग रही थी. इतने में मुझे याद आया और मैं बोली-

मे: ओह नो, राहुल प्लीज़ चेंज करो जल्दी. अगर दाद ने देख लिया तो दिक्कत हो जाएगी. क्यूकी ये शर्ट और लोवर तो उनकी है ना, ओह नो.

ये सुन कर राहुल ने कहा “हा, और तुम भी चेंज कर लो यार. अगर कोई आ गया तो?”. देखते ही देखते कमरे में हड़बड़ी का माहौल हो गया था. पर अभी सिर्फ़ 4:30 बाज रहे थे. मैं जानती थी की कोई नही आने वाला था.

राहुल की बात सुनते ही मैं कमरे के साथ वाले वॉशरूम में चली गयी, और मैने खुद को क्लीन किया. मैं मॅन ही मॅन सोच रही थी की क्या ये ही वो दिन था, जिस डिनन मैं पहली बार राहुल के लंड के मज़े ले पौँगी. हम दोनो ने एक-दूसरे को बहुत टच किया, बुत राहुल मेरे पेरेंट्स की वजह से दर्रा हुआ था.

इतने में मैने अपनी त-शर्ट और शॉर्ट्स उतार कर टवल पहन लिया, और रूम में चली गयी. और मैने क्या देखा की राहुल नंगा था, और अपने कॉलेज के कपड़े पहन रहा था. तभी मैं हरनी में चिल्लाई, “राहुल!” ये सुनते ही राहुल मेरी तरफ मुड़ा. उसके मुड़ने से मैने उसके लंड के पहली बार दर्शन किए. सच में दोस्तों, पहली बार मैने रियल में एक मर्द का लंड देखा था, वो लगभग 7 इंच लंबा था, और काफ़ी मोटा भी था.

राहुल को इस तरह देख कर मैं भूल ही गयी की मैं टवल में थी, और मेरे हाथ से टवल छूट गया. ह्म दोनो मानो फ्रीज़ हो गये थे, पूरी तरह से नंगे. हम एक-दूसरे को 15 सेकेंड टकटकी लगा कर देखते रहे.

मेरे कदम धीरे-धीरे राहुल की तरफ बढ़ रहे थे. अब राहुल मेरे बिल्कुल सामने था. हम एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे. जब तक की मैं कुछ करती, उससे पहले ही राहुल ने मुझे दबोच लिया, और बहुत गहरी किस करने लगा. मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी.

ह्म दोनो पूरी तरह से किसी और ही दुनिया में पहुँच गये थे. किस करते-करते कभी हम दीवार पर लग जाते, तो कभी अलमारी में. अपनी गति धीमी करते हुए राहुल ने कहा, “सुनो रोशनी, तुम्हारे पेरेंट्स तो नही आएँगे ना?”

मैने कहा, “नही जान, आज हमारे बीच कोई नही आएगा. वो लोग 8 बजे से पहले नही आने वाले है”. ये सुन कर तो राहुल की लॉटरी ही निकल गयी थी. उसने मुझे एक और सवाल करते हुए पूछा, “क्या तुम मेरे लंड के रस्स का स्वाद लेना पसंद करोगी?” मैने हेस्ट हुए कहा, “क्यूँ नही? ये मैं पहली बार करूँगी राहुल, प्लीज़ मेरा पूरा साथ देना”. ये सुन कर राहुल ने मेरे बाल पकड़े, और मुझे नीचे बिता दिया, और देखते ही देखते अपना लंड मेरे मूह में डाल दिया.

माफी चाहती हू, पर आज के लिए सिर्फ़ इतना ही. आयेज की कहानी बहुत जल्द आपके सामने आएगी. बने रहे अपनी इस रंडी रोशनी के साथ.

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