चुदक्कड़ भाभी सेक्स स्टोरी

दोस्तो, मेरा नाम धवल है. मैं गुजरात से हूँ. यह कहानी मेरी और मेरी पड़ोस वाली भाभी की है. इस कहानी में मैंने लिखा है कि कैसे उसको चोदा था.

मैं 23 साल का हूँ और अभी ग्रेजुएशन पूरा किया है. जिम में जाने के शौक के कारण मैंने बॉडी भी अच्छी बना रखी है. पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी मैंने अपना बिज़नेस शुरू किया है.

ये बात 6 महीने पहले की है. हमने अपना नया फ्लैट लिया था. यह सोसाइटी नई थी.. इसलिए यहाँ सभी लोग नए थे. हम किसी को नहीं जानते थे. हमारे सामने वाला फ्लैट खाली था.

अचानक एक दिन जब मैं सुबह जिम से वापिस आ रहा था तो देखा कि सोसाइटी में एक ट्रक खड़ा था. उस ट्रक में घर का सामान लदा हुआ था. बाद में पता चला कि वो लोग हमारे सामने वाले फ्लैट में रहने आये थे.

जब मैं घर में जा रहा था तो देखा कि एक मरियल सा आदमी मेरे पापा से बात कर रहा था. जैसे ही मैं वहां गया, पापा ने मेरा उन से इंट्रो कराया.
पापा परिचय देते हुए बोले- यह मेरा बेटा है.
मैंने ‘हैलो..’ बोला.
पापा मुझसे बोले- बेटा ये शर्मा अंकल हैं. लखनऊ से इनका ट्रांसफर यहाँ हो गया है.

थोड़ी देर में उनकी पत्नी और बेटी भी ऊपर आ गईं. मैं तो उनकी पत्नी को देखता ही रह गया. क्या फिगर था उनका. एकदम चिकनी कमर. एकदम कांटा माल लग रही थीं. उनके तने हुए मम्मे मेरे लंड को आंदोलित करने लगे थे.

तभी शर्मा जी ने उनसे इंट्रो कराया- यह मेरी वाइफ और बेटी हैं.
हम सबने एक दूसरे को हैलो कहा.

मेरे पापा ने कहा- आपको कोई भी काम हो, तो आप बेझिझक हमारे घर पर आइएगा और मैं ना होऊं तो मेरे बेटे को बुला लीजिएगा.

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यह सुनकर मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे. फिर तो अंकल और आंटी से हमारे परिवार की काफी अच्छी दोस्ती हो गई.. और मुझे आंटी से मिलने में मजा आने लगा. मुझे उनको आंटी कहना पड़ता था लेकिन वो मुझे भाभी जैसी ही लगती थीं. तो मैं कह रहा था कि वे भाभी भी मेरी मॉम के साथ हमारे घर पर आती रहती थीं.

कुछ महीने यूं ही गुजर गए. अचानक मैंने दोपहर को सोसाइटी के बाहर खड़ी एक मोटर साइकिल देखी. मैंने नोट किया कि वह मोटर साइकिल सोसाइटी में से तो किसी की नहीं है. मैंने ध्यान देना शुरू किया तो समझ आया कि वो बाइक हफ्ते में दो बार सोसाइटी के बाहर खड़ी रहती थी.

उस दिन जब मैं घर पहुंचा तो मैंने देखा के तीन बजे थे और भाभी के घर से एक आदमी बाहर निकला और चुपचाप चला गया. मैंने उस आदमी को गौर से देखा. उसी समय भाभी घर के बाहर आईं तो उनको पता चल गया कि मैंने उस आदमी को उनके घर से निकलते देख लिया. वो थोड़ा सा घबरा सी गईं.

दस दिन के बाद फिर से मैंने देखा बाइक बाहर खड़ी है, तो मैंने ठान लिया कि आज तो पता करके ही रहूँगा कि क्या चल रहा है. मैंने प्लान बनाया. मैं यह जानता था कि अंकल के घर की एक चाबी हमारे घर पे रहती है. बस फिर क्या था, मैं उनके घर की चाभी लेकर उनके दरवाजे के पास गया. पहले मैंने छेद में से देखा, हॉल में कोई नहीं था. मैंने धीरे से चाबी से दरवाज़ा खोला और जैसे ही मैं अन्दर घुसा, तो पता चला कि एक रूम में से आवाजें आ रही हैं.

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जैसे ही मैंने उस रूम के दरवाजे से चाभी वाले छेद में से झाँक कर देखा, तो मैं तो देखता ही रह गया. वो आदमी भाभी की चुदाई कर रहा था और भाभी भी बड़े मज़े से चुदवा रही थीं. उनकी गोरी टांगें एकदम खुली हुई थीं और वो आदमी भाभी के ऊपर चढ़ कर उनकी चूत में अपना लंड डाले हुए धकापेल चुदाई कर रहा था. भाभी की टांगें उस आदमी की टांगों को जकड़े हुए थीं.

भाभी की मादक आवाजें निकल रही थीं- आह.. चोद जोर से चोद.. आह मजा आ रहा है..
वो आदमी कह रहा था- आह.. ले साली छिनाल भोसड़ी वाली कितनी आग है तेरी चूत में.. बुझती ही नहीं है.
भाभी- आह.. अब तेरे लंड में भी जान नहीं बची है.. साले मुझे कोई दूसरा लंड ढूँढना पड़ेगा.

वो आदमी- उस दिन क्या हुआ था तुम फोन पर कुछ कह रही थीं?
भाभी- हां यार वो सामने वाले लौंडे धवल ने हम दोनों को उस वक्त देख लिया था जब तू मुझे चोद कर जा रहा था.
वो आदमी- तो? इससे क्या होता है?
भाभी- होता तो कुछ नहीं है.. लेकिन सोसायटी का मामला है.. जरा समझना पड़ता है.
वो आदमी- कुछ नहीं होता.. अगर ज्यादा कुछ हो तब देखेंगे. किसी और जगह पर चुदाई का खेल कर लेंगे.
भाभी- दूसरी जगह किधर तलाशेंगे? कुछ और सोचना पड़ेगा.
वो आदमी- सोच लेना.. मुझे तो बस तेरी चूत चाहिए.
भाभी- चूत चाहिए तो जरा दम से चोद साले..

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