मेरी चुदाई की शुरुआत नानी के साथ

Parivar Me Chudai kahani हेलो फ्रेंड्स मेरा नाम कबीर है और मई लुक्कणोव का रहने वाला हूँ. मेरी उमर 24 साल है और मेरी 5 फ्ट 7 इंच की हाइट है.


ये कहानी मेरे और मेरी नानी के बीच की बिल्कुल साची कहानी है. कहानी हो सकता है थोड़ी स्लो हो बुत प्लीज़ पूरी पढ़िएगा मज़ा ज़रूर आएगा.

मेरी नानी का नाम रजनी (नामे चेंज्ड) है. वो मेरी मम्मी की मा है और उनकी उमर लगभग 65 के आस पास की है. इतनी उमर होने के बावजूद भी उनके लुक्स में कोई कमी नही थी. आज भी वो अकचे अकचो का लंड खड़ा कर देती है.

उनका फिगर 36-38-40 है और बिकुल गोरा दूध जैसा रंग है उनका.

मेरे नाना जी की 12 साल पहले हे डेत हो गयी थी. नानी का एक बेटा था जिसकी शादी हो गयी थी और वो शहर के बाहर रहता था और एक बेटी थी जिसकी भी शादी हो गयी थी. मतलब ये था के मेरी नानी काफ़ी समय से सेक्स की भूकि थी और अकेली भी थी.

अब कहानी शुरू करते है.

डिसेंबर का महीना था और मेरे छोटे भाई की बर्तडे थी तो काफ़ी सारे गेस्ट्स आए हुए थे. उसमे मेरी नानी भी आई हुई थी. मई हमेशा से हे औरतों का दीवाना था.

क्यूकी उनके पास जो एक्सपीरियेन्स है वो किसी के पास नही. मेरी नानी एक येल्लो कलर की सारी और एक बहुत हे टाइट ब्लाउस पहन कर आई थी. मई हमेशा से हे उनके बहुत करीब था और बड़े होने के बाद और करीब होना चाहता था. नानी के आते हे मैने उनके पेर छुए.

नानी- कैसा है बेटा कबीर?

मई- अक्चा हू नानी, आप सुनाए कैसी है आप और कितने दिन बाद आई है घर.

(मई बात तो नानी से कर रहा था पर मेरी नज़र बार बार नानी के बूब्स पर जेया रही थी.)

नानी- क्या बटाओ बेटा अकेली रहती हूँ, कौन इश्स बुधिया को इधर उधर ले कर जाएगा. कोई सहारा भी तो नही है. एक हे बेटा है और वो भी शहर से बाहर रहता है.

मई- अर्रे नानी मई किस काम अवँगा. आप मुझे बुला लिया करो.

नानी- चलो ठीक है. अगली बार मई तुझे हे फोन कर दूँगी.

फिर हम इधर उधर की बातें करने लगे लेकिन मेरी नज़र नानी के बूब्स से हट हे नही रही थी. उनके बूब्स मानो बाहर निकालने की भीक माँग रहे हो. फिर मम्मी ने मुझे किसी काम से बुला लिया और मुझे जाना पड़ा.

थोड़ी देर बाद केक काटा गया और फिर सबने खाना खाया. खाना खाने के बाद नानी बोली मम्मी से-

नानी- अक्चा बेटा मई चलती हूँ.

मम्मी- अर्रे मोसी थोड़ी देर और रुकिये ना.

नानी- नही बेटा देर बहुत हो गयी है और घर भी समेटना है मुझे अभी.

मम्मी के बहुत मानने के बाद भी नानी नही मानी.

मम्मी- तो आप अकेले कैसे जाएँगी? रुकिये कबीर चोर आएगा आपको.

नानी पहले तो माना करने लगी लेकिन फिर मान गयी. खुश था के अब नानी को बिके पर बिताने का मौका मिलेगा.

फिर मैने नीचे जेया कर अपनी बिके स्टार्ट की और नानी को बैठाया. नानी का घर हमारे घर से लगभग 17 केयेम दूर था और मई बिके भी धीमे धीमे चला रहा था ताकि नानी के साथ ज़डा टाइम स्पेंड कर साकु.

फिर रास्ते में हमारी बात शुरी हुई.

नानी- और बेटा कबीर तेरी जॉब कैसी चल रही है?

मई- ठीक हे चल रही है नानी कुछ ख़ास नही. बस काम करते रहो और क्या.

(फिर जो नानी ने पूछा वो मई एक्सपेक्ट नही कर रहा था.)

नानी- अक्चा तो कितनी गर्लफ्रेंड्स है तेरी?

मई- कहाँ नानी मेरी कोई गफ़ नही है.

नानी- चल झूते. इतने हॅंडसम हो कर भी कोई गफ़ ना हो मई नही मान सकती.

मई- कोई आप जैसी नही मिली ना इसीलिए वेट कर रहा हूँ.

नानी- (शरमाते हुए) धात्ट पगले. मई कहाँ सुंदर हूँ. 60 साल की बुधिया हो गयी हूँ.

मई- नही नानी. मेरी नज़र से देखो तो टा चले के कितनी सेक्सी हो आप. आपको देख कर तो कोई भी देवाना हो जाए.

नानी- (मुझे चेरते हुए) कौनसी नज़र से देखता है तू ये तो बता दे.

मई- बस पूछो मत नानी. अगर आप मान जाओ तो मई आपको अभी अपनी गफ़ बना लूँगा.

और फिर हम दोनो हासणे लगे. गाड़ी चलते वक़्त मई कभी कभी झटके से ब्रेक मार रहा था जिससे नानी के बूब्स मेरे पीठ से टकरा रहे थे.

ठंड की वजह से उनके निपल्स एक दूं कड़े हो गये थे. तो जैसे हे वो मुझसे टकराई उनके निपल्स सीधे मेरी पीठ में गढ़ रहे थे. तब मुझे पता चला के नानी ने ब्रा नही पहनी है. और पीठ पर लगते हे मेरा लंड मेरी पंत में उतावला होने लगा.

मुझसे कंट्रोल नही हो रहा था और बार बार पंत अड्जस्ट करनी पद रही थी. आयेज ट्रॅफिक रेड लाइट थी और हम सिग्नल ग्रीन होना का वेट कर रहे थे.

नानी का घर अब बस 4 केयेम हे बचा था के अचानक से बारिश शुरू हो गयी और सिग्नल अभी भी रेड हे था. हम दोनो बारिश में भीग रहे थे. जैसे हे ग्रीन लाइट हुई हम जल्दी से कोई शेड ढूँदने लगे लेकिन आस पास कोई भी शेड नही था. फिर नानी बोली-

नानी- बेटा भीग तो गये हे है तो क्यू ना सीधे घर चल. रुक कर कोई फायेदा नही होगा.

मैने सोचा नानी कह तो सही रही है और बिके बघाते हुए सीधा उनके घर पर जेया कर रोकी.

मई- नानी मई निकलता हूँ. अब भीग तो गया हे हूँ तो घर जेया कर हे चेंज कर लूँगा.

मई जानता था के नानी मुझसे रुकने के लिए कहेंगी. इसीलिए मैने घर जाने का नाटक किया क्यूकी मई भी रुकना चाहता था. आज जो मौका मिलेगा वो शायद दोबारा ना मिले.

नानी- पागल हो गया है क्या जो इतनी बारिश में जाएगा. चुप छाप अंदर आ मई तेरी मा को फोन कर के बता देती हूँ के तू यहीं रुका है. बारिश बंद ही गयी तो आ जाएगा वरना सुबह भेज दूँगी.

नानी इतना कहते हे अंदर चली गयी और मुझे भी अंदर बुला लिया. अंदर जाते हे नानी ने पहले मम्मी को कॉल कर के सब ब्टाया और मम्मी मान भी गयी.

मेरी नज़र नानी से तो हट हे नही रही थी. बारिश में भीगने की वजह से उनकी पूरी सारी उनके शरीर से चिपक गयी थी और उनका पूरा फिगर मानो मुझे बुला रहा हो के आकर कस्स के जाकड़ लो उन्हे.

फिर नानी ने अलमारी से दो टवल निकले और एक नाना जी की लूँगी निकली. टवल और लूँगी मुझे दिया और एक टवल खुद ले कर अंदर वेल कमरे में चली गयी. नानी का घर किराए का था और उसमे सिर्फ़ दो कमरे हे थे जिसमे से एक किचन था और एक में नानी रहती थी.

नानी अंदर किचन मई चेंज कर रही थी और दरवाज़ा बंद करना उन्होने ज़रूरी नही समझा. मैने अपने आप को पॉच कर लूँगी बाँध ली थी और तभी मेरी नज़र नानी पर पड़ी. वो दरवाज़े की तरफ़ हे मूह कर के अपना ब्लाउस खोल रही थी और ब्लाउस खुलते हे उनकी चूचियाँ ऐसे बाहर आई जैसे दो पंछी आज़ाद हो गये हो.

मई दर्र रहा था के कहीं नानी मुझे देख ना ले उन्हे चेंज करता देखते हुए. लेकिन अब मेरा ज़ोर नही चल रहा था. मई कितनी भी कोशिश कर लू उनसे नज़र नही हटा पा रहा था.

मई उन्हे देखता हे रहा और देखते देखते उन्होने अपना पेटी कोट भी उतार दिया. पेटीकोआट उतरते हे मेरा तो जैसे लंड रुकने को तय्यार हे नही था.

उन्होने पनटी भी नही पहनी थी. उनकी छूट के पास थोड़े बाल थे जो उनके गोरे बदन पर काले टीके का काम कर रहे थे. पेटीकोआट उतरने के बाद जैसे हे उन्होने टवल उठाया उनकी नज़र मुझ पर पड़ी और मेरी तो जैसे गांद हे फटत गयी थी. मैने दर्र के मारे मूह घूमा लिया.

मैने कमरा समेटना शुरू कर दिया. अपने भीगे कपड़े निचोड़ कर सूखने लगा और बाकी काम करने लगा. इतने में नानी ने मुझे आवाज़ दी. मई तो दर्र के मारे कप कपाने लगा था.

नानी- कबीर सुन्न ज़रा.

मई- जी नानी?

नानी- मेरी एक मदद करेगा?

मई- जी कहिए.

मई तो पहले दर्र गया था फिर जब नानी ने ये कहा तो मई समझ नही पाया के नानी क्या चाहती है.

नानी- मेरा हाथ पीठ तक नही पहुच रहा है, क्या मेरी पीठ पॉच देगा?

मई- बिल्कुल नानी. क्यू नही.

नानी- अभी तू मुझे कपड़े बदलते हुए देख रहा था ना.

मई फिर डरने लगा और हककलते हुए बोला.

मई- नही नानी. ऐसा तो कुछ नही है.

नानी- देख झूट मत बोल. मैने तुझे अपनी चूचियों को घूरते हुए देखा था.

अब मेरे पास कोई रास्ता नही था.

मई- सॉरी नानी, प्लीज़ मम्मी को कुछ मत बताईएएगा वरना वो मुझे बहुत मरेगी और घर से बाहर निकल देंगी.

नानी- अरे परेशन क्यू हो रहा है, मई किसी को कुछ नही बतौँगी तू चिंता मत कर.

मई- थॅंक उ नानी, आज के बाद ऐसा कभी नही होगा.

इतने पूरा टाइम मई नानी की पीठ पॉच रहा था और वो सिर्फ़ एक कपड़े से आयेज अपने आप को धाक्क कर खड़ी थी.

नानी- चल ऐसा कर मेरी थोड़ी मालिश कर दे. बहुत दीनो से पीठ मेी दर्द है.

मैने ठीक है कहा और तेल ले कर आ गया. नानी बेड पर पीठ के बाल सिर्फ़ एक पेटीकोआट पहन कर लएट गयी. मुझे समझ नही आ रहा था के क्या चाहती है ये.

मैने तेल लगाना शुरू किया और मेरा हाथ लगते हे उनकी सिसकियाँ शुरू हो गयी. सिसकियाँ सुनते हे मई समझ गया के आग दोनो तरफ बराबर लगी हुई है. फिर मई अपने पुर फॉर्म में आ कर मालिश करना शुरू कर दिया. मेरे हर एक स्ट्रोक पर उनकी आआहह उम्म्म्मममह ह्म्‍मन्न सिसकारियाँ निकल रही थी.

मेरा लंड उनकी सिसकारियाँ सुन्न कर पागला रहा था लेकिन मैने भी तान ली थी के इनके साबरा का इंतेहाँ लेना है. मई मालिश करता रहा और वो उम्म्म्ममह आआअहह ऊऊओह आआअहह उम्म्मह करती रही.

15 मीं की लगातार मालिश के बाद उनके साबरा का बाँध टूटा और उन्होने सीधा पलट के मेरा मूह अपनी छूट में डाल दिया.

यहाँ से शुरू होती है असली छोड़ूम पट्टी. मई एक अकचे कुत्ते की तरह उनकी छूट चाट रहा था और वो चिल्ला रही थी.

नानी- चाट चाट मेरे लाल और अकचे से चाट. आज तक किसी ने तेरी नानी की छूट नही छाती. तेरे नाना को तो कुछ आता हे नही था और 12 साल से ये छूट वीरान पड़ी है.. आआआहह और कस्स के चाट ऊऊओह और कस्स के.

वो चिल्लती जेया रही थी और मई उनकी छूट चाट्ता जेया रहा था.

करीब 15 मिन्स चाटने के बाद एक दूं से उन्होने मेरा सिर अपनी छूट में दबा दिया और कापने लगी. मई सनझ गया वो झड़ने वाली है. और उनके झाड़ते ही मैने उनका सारा रस्स पी लिया.

मेरे रस्स पीते हे उन्होने मुझे उठाया और अपनी चूची मेरे मूह में डाल दी. मई उनकी रिघ्त चूची चूसने लगा और एक हाथ से उनकी छूट में उंगली करने लगा.

मेरे उंगली करते हे वो एक दूं से हिलने लग गयी और हिल हिल के मेरी उंगली से अपनी छूट छोड़ने लग गयी.

इसके आयेज की कहानी दूसरे पार्ट मे बतौँगा. होप आप सबको ये स्टोरी पसंद आई होगी. स्टोरी स्लो और लंबी करने के लिए माफी चाहता हू.

आयेज के पार्ट में मे बतौँगा की कैसे मैने नानी को दो दिन तक चोदा और नानी की मदद से कैसे उनकी बेटी, यानी अपनी मौसी को चोदा.

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आगे की कहानी अगले पार्ट मे जल्दी ही आएगी. ओर भी जवान भाभी लड़किया ओर आंटी को हॉट बाते करना ही तो आप मैल करे mailto:[email protected] आप की सारी डीटेल्स एक दम सीक्रेट रहेंगी उससे आप लोग बेफ़िक्र रहे.

 


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