चुदाई का खेल

दोस्तों मेरा नाम रोहन कुमार है मैं अभी रांची में रह रहा हूं मैं देसीकहानी का नियमित पाठक हूं और इसीलिए मैं आज आप लोगों से अपने जीवन की आपबीती सुनाने जा रहा हूं यह कहानी काफी लंबी होगी यह कहानी कुछ 10- 15 साल के अंतराल को दिखलाएगी मेरे बचपन नवमी दसवीं की पढ़ाई से लेकर अभी तक जब मैं रेलवे में कार्यरत हो चुका हूं ।

ये कहानी काफी लंबी होगी इसलिए बहुत पार्ट में आएगीइस कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक छोटे शहर का लड़का जो दिखने में ज्यादा स्मार्ट नहीं लेकिन जीवन उसे कहां से कहां तक ले जाती है।

इसमें आप देखेंगे कि कैसे एक छोटा सहर का लड़का अपने घर की चचेरी और ममेरी बेहेन को चोदता है, अपने स्कूल की लड़कियों को चोदता हैइस कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक छोटे शहर का लड़का जो दिखने में ज्यादा स्मार्ट नहीं लेकिन जीवन उसे कहां से कहां तक ले जाती है। कैसे कोटा में अपने मकान मालिक और उसकी बेटी की चोदता हुए पकड़ा जाता है और जेल जाता है और फिर अपने girlfriend और उसकी बहन की चोदता है।

इस कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक छोटे शहर का लड़का जो दिखने में ज्यादा स्मार्ट नहीं लेकिन जीवन उसे कहां से कहां तक ले जाती है।

यह कहानी आपको लग सकता है कि झूठी है लेकिन यकीन मनिए ये सच है पता नहीं जीवन कब कौन सा रंग दिखा दे।

पहले आप लोग मेरे परिवार के बारे में जान लीजिए मेरे पापा नरेंद्र सिंह उम्र 52 साल मम्मी सरिता देवी उम्र 48 साल बड़ी बहन रिंकी उम्र 27 साल और मेरे बड़े भैया उनकी इस कहानी में कोई भूमिका नहीं है।

वर्ष 2008 अभी मैं और मेरा पूरा परिवार झारखंड के कोडरमा में रहता हू मेरे पिताजी वन विभाग में कार्यरत हैं और झारखंड बिहार के बंटवारे के बाद हम लोग झारखंड में ही रह गए मैं एक आईसीएसई स्कूल में पढ़ता हूं और पढ़ने में काफी तेज हूं गोल मटोल और दिखने में सुंदर स आठवीं कक्षा में मुझे सेक्स के बारे में काफी ज्ञान हो चुका था।

स्कूल के लड़के के साथ मैं काफी बार पॉर्न मैगजीन और नंगी लड़कियों की चुदाई करते हुए वीडियो देख चुका हूं।

इसी बीच मेरी एक मौसेरी बहन जो मुझ से 1 साल छोटी है हमारे यहां रहने और पढ़ने के लिए आती है उसका नाम सोनी है वह देखने में अत्यंत खूबसूरत है 15 साल की उम्र में मैं ही उसकी चूचियां 34 की है और उसका गांड बहुत बड़ा है मैं सोनी को देखते ही फिदा हो गया था।

मैंने उसे एक बार बचपन में देखा था क्योंकि पापा वन विभाग में थे और वहां बहुत सारे फ्लैट खाली थे इसलिए मैं और मेरे भैया ऊपर वाले फ्लैट में रहते थे। मेरी मां पापा दीदी और सोनी नीचे वाले फ्लैट में रहती थी मेरे भैया और दीदी दसवीं कक्षा में पढ़ते थे लेकिन हिंदी मीडियम स्कूल में जाते थे।

गर्मियों का मौसम था और मेरे भैया और दीदी अपने कंप्यूटर क्लास गए हुए थे मैं खेल के लौटा ही था कि मैंने देखा कि सोनी नीचे वाले फ्लैट में सोई हुई है उसका स्कर्ट उसकी गांड से ऊपर होकर कमर तक आ चुका था।

यह देख कर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया मैंने इधर उधर देखा तो पाया मेरे पापा ऑफिस गए हुए थे और मां सो रही थी। मैं सोनी के बगल में लेट गया मुझे लगा कि सोनी सो रही है। मैं सोनि के चुचियों पर हाथ रख कर सो गया।

जब मुझे लगा कि वह सोई हुई है तो मैंने अपना एक हाथ नीचे उसकी स्कर्ट पर रखा और उसकी स्कर्ट को ऊपर करने लगा। धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को मैंने पूरी तरह से ऊपर कर दिया था और उसकी काली पेंटी मुझे पागल बना रही थी।

मैंने उसकी पैंटी को अपनी उंगली से साइड किया और धीरे से अपनी उंगली उसकी गांड के छेद पर रख दिया सोनी उसी तरह पड़ी हुई थी मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने उसकी वुर में एक उंगली डाला।

उसने अपनी आंखें खोल दी मुझे यह बात पता नहीं थी कि वह जाग चुकी है।

मैं धीरे से उठा और उसकी पेंटी को उसकी गांड से नीचे करते हुए पैरों तक ले आए और उसकी बुर को चाटने वाला था कि सोनी उठकर खड़ी हो गई। यह देखकर मैं डर गया और बहाना बना कर वहां से खेलने भाग गया।

खेलने में मेरा मन नहीं लग रहा था कि ना जाने घर में क्या हुआ होगा। जब मैं खेल के वापस आया तो मेरे मां और पापा मुझे बहुत गुस्से से देख रहे थे। तो पता चला कि सोनी ने सारी बात सबको बता दी। मुझे सबसे डांट भी मिली और पापा ने मारा भी लेकिन पता नहीं सोने की तरफ मुझे जरा भी गुस्सा नहीं आया।

15 – 20 दिन बीत गए गर्मी की छुट्टियां भी खत्म हो गई स ब यह बात धीरे-धीरे भूल चुके थे लेकिन मेरे मन में वह बात हमेशा याद थी।

तो एक दिन यूं हुआ कि रांची में हम लोगों का मकान बन रहा था और पापा को छुट्टियां नहीं मिल रही थी तो मम्मी को रांची जाना पड़ा। मेरे भैया और दीदी अपनी कोचिंग गए हुए थे। घर में मैं और सोनी अकेले थे।

सोनी नहाने गई हुई थी मैं बाथरूम के पास जाकर उसे नहाता हुआ देखने की कोशिश कर रहा था। और अपने पेंट से लंड को निकाल कर हिला ही रहा था। इतने में सोनी ने फिर से दरवाजा खोल दिया और मेरी चोरी फिर से पकड़ी गई।

सोनी मेरा खड़ा लंड देख रही थी और मै बिना डरे जोर जोर से हिला रहा था। सोनी गुस्से में वह से निकल गई लेकिन मैने देखा वो दूर जाकर फिर से मूड कर लंड को देखे जा रही थी।

ये देख कर मेरी हिम्मत बढ़ी और में वैसे ही अपने लंड को हाथ में लेकर उसके पास चला गया। वो घबरा गई और रोने लगी। उसने मुझसे पूछा भैया ये सब क्यों करते हो में आपकी बहन हूं।

लेकिन में कहा रुकने वाला था, मैंने जोर से उसकी चूचियां दबाई और वो बिलख बिलक कर रोने लगी और बोली आने दो मौसा और दीदी को सब बता दूंगी, मेरी तो गांड फिर से फट गई।

अब अगले पाठ में जानिए कि क्या हुआ। आप मुझे अपना सुझाव जरूर लिखकर दें मुझे आपके सुझाव का इंतजार रहेगा ताकि मैं और बेहतर लिख सकूं। याद रखें यह कहानी मेरे 15 साल के अंतराल को बताएगी इसीलिए थोड़ा सब्र बनाए रखिएगा।

कोई भी लड़की अगर झारखंड की हो और मुझसे बात करना चाहती हैं तो इस ईमेल आईडी पर अपना फीडबैक दें और चैट करें आपकी गोनियता रखी जाएगी धन्यवाद दूसरी पाठ जल्दी अपलोड होगी।

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