चचेरी बहन के साथ रंगरेलियाँ

दोस्तो, मेरा नाम विनय है और मैं नोएडा (एनसीआर) का रहने वाला हूँ। बात तकरीबन 6 महीने पहले की है, उस वक्त मेरी नोएडा में नई-नई नौकरी लगी थी। मेरा गाँव नोएडा से 50 किलोमीटर दूर था और मुझे वहाँ जाने के लिए दो बसें बदलनी पड़ती थीं और रात को घर लौटने में भी देरी हो जाती थी।
मेरा एक चचेरा जीजा नोएडा में ही रहता था.. तो घर वालों ने मुझे वहीं उनके साथ रहने को भेज दिया।
उनके घर में मेरे अलावा जीजा, बहन अमिता और उनकी एक दस साल की बेटी थी।
बहन की उम्र करीबन 33 साल की है और वो एक बहुत ही खूबसूरत और कमनीय शरीर की मालकिन है, उनके मम्मे 36 सी साइज के हैं और चूतड़ों का तो पूछो ही मत.. कमाल के गोलाकार और भरे हुए हैं.. जिसे देखते ही जी करता है कि जोर से काट लें।
कोई अगर एक बार उनको साटिन की नाईटवियर में देख ले.. तो मेरा दावा है कि मुठ्ठ मारे बिना नहीं रह सकता।
मैं हमेशा से अपने जीजा को किस्मत वाला मानता हूँ कि उनको भगवान ने इतनी खूबसूरत बीवी दी है।
वैसे तो मैं एक शर्मीले किस्म का लड़का हूँ.. तो डर के मारे आज तक किसी भी लड़की को पटा नहीं पाया। उसी तरह मैंने कभी यह सोचा नहीं था कि मैं उनको कभी चोद पाऊँगा.. इसलिए मैं हमेशा की तरह उनके बारे में सोच कर मुठ्ठ मार कर ही काम चला लिया करता था।
पर एक दिन की बात है.. घर में मैं और मेरी बहन के अलावा कोई नहीं था, मैं वैसे ही पड़ा हुआ एक किताब पढ़ रहा था।
तभी मेरी बहन मूतने के लिए टॉयलेट में गई और उसी वक्त मुझे भी प्यास लगी तो मैं पानी पीने के लिए खड़ा हुआ।
मेरा फोन टॉयलेट के आगे ही गिर गया।
जैसे ही मैं फ़ोन उठाने के लिए नीचे झुका.. तो मुझे जैसे खजाना दिख गया और वो थी.. मेरी बहन की चूत।
झुकते ही मेरी नजर टॉयलेट दरवाजे के नीचे की दरार में पड़ी.. जहाँ से मुझे टॉयलेट के अन्दर का नज़ारा दिखाई दिया। मैंने देखा कि बहन टॉयलेट में मूत रही थीं। मैं धीरे से टॉयलेट के और नजदीक गया और देखने लगा। वहाँ से उनकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी और उनके मूत की धार दिखाई दी जिसे देख कर मैं दंग रह गया।
दोस्तो.. उनकी चूत के बारे में क्या बताऊँ.. पाव रोटी की तरह मस्त फूली हुई और उस पर छोटे-छोटे बाल.. क्या कमाल के लग रहे थे। उनकी चूत के अन्दर के होंठ थोड़े बड़े और थोड़े से बाहर की तरफ को थे.. जो कि मुझे बहुत पसंद हैं। मैं हमेशा ब्लू-फ़िल्मों में ऐसे ही अदाकारा को पसंद करता हूँ.. जिसके अन्दर के होंठ थोड़े बड़े हों।
मेरी बहन तो एकदम गोरी थीं.. मगर उनकी चूत काली नज़र आ रही थी.. और सच बताऊँ तो मुझे हमेशा से ही काली इंडियन लौंडियों के जैसी हब्सी किस्म की चूतें ही बहुत पसंद हैं।

उनकी चूत देख कर मेरा दिल किया कि अभी जाकर उनकी चूत को मूत के साथ ही चाटने लगूं.. पर इससे पहले कि मैं और कुछ सोचता.. वो मूत कर उठ गईं. और मैं झट से अपनी जगह पर वापस आ कर पढ़ने लगा।
अब मुझे बहन की चूत के दीदार करने का रास्ता मिल गया था.. तो मैं हमेशा इसी फ़िराक में रहता था कि कब बहन टॉयलेट जाएं.. और मैं उनकी चूत के दीदार कर सकूँ।
यूं ही 2 से 3 महीने बीत गए।
लेकिन पिछले एक महीने से मैंने नोटिस किया था कि जब वो मूतने टॉयलेट जाती थीं तो मूतने के बाद अपनी चूत को सहलाती थीं और कभी-कभी उंगली भी करती थीं।
चूत को सहलाते हुए.. वो अपनी चूत को इस तरह चौड़ी करती थीं कि मुझे उनकी चूत के अन्दर की गली साफ दिखाई देती थी।
अब तो वो अपनी चूत की सफाई पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी थीं, वो अपनी चूत को हमेशा चिकनी रखती थीं।
उनकी फूली हुई चूत को देख कर ऐसा लगता था कि जैसे वो रोज ही शेविंग करती हों।
मैंने मौका मिलने पर कई बार उनको नहाते वक्त बाथरूम में देखने की कोशिश की.. मगर ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। उनकी चूत को देख कर मेरा जी करता था कि अभी दरवाजा तोड़ दूँ और उनकी चूत को खा जाऊँ और इतना चोदूँ कि मेरा लण्ड कभी चूत से बाहर ही ना निकालूँ।
लेकिन डर के मारे कभी हिम्मत नहीं कर पाया।
अब तो कभी-कभी वो टॉयलेट से बाहर आकार यूँ हीं मेरे सामने हँस दिया करती थीं। उनका ये व्यव्हार मेरी कुछ समझ में नहीं आता था और मैंने उस पर ज्यादा सोचा भी नहीं.. मैं तो उनकी चूत देख कर ही खुश था।
एक दिन की बात है.. बहन बाथरूम में मूत रही थीं और मैं दरवाजे के नीचे से उनकी चूत देख रहा था।
तभी अचानक से उन्होंने वैसे ही बैठे हुए ही टॉयलेट का दरवाजा खोल दिया, दरवाजा मेरे सर से टकराकर रुक गया और मैं अचानक हुए इस हमले से सकपका कर रह गया.. मेरी तो समझ में कुछ भी नहीं आया.. पर एक बात पक्की थी कि मेरी चोरी पकड़ी गई थी, मैं डर के मारे वहीं खड़ा रहा।
थोड़ी ही देर में बहन टॉयलेट से बाहर निकलीं और मेरे सामने आकर खड़ी हो गईं। उन्होंने बड़ी ही अजीब सी निगाहों से मेरी तरफ देखा, उन्होंने मुझसे गुस्से में पूछा- तुम वहाँ क्या कर रहे थे?
अब मैं उनको क्या बताता कि मैं उनकी चूत देख रहा था।
मैं तो वैसे ही बुत बन के खड़ा रहा.. उन्होंने मुझसे फिर पूछा- जबाव दो.. तुम क्या देख रहे थे.. बताओ वर्ना तुम्हारे जीजा को सब बोल दूँगी।
तो मैंने उनसे बोला- बहन प्लीज़ जीजा को कुछ मत बोलना… मुझसे गलती हो गई.. मैं थोड़ा बहक गया था। लेकिन मैंने ज्यादा कुछ नहीं देखा।
इस पर वो बोलीं- इससे ज्यादा तुम्हें और क्या देखना है.. इतना देखा वो कम है क्या?
मैं तो नजरें झुकाए वहाँ खड़ा रहा..
तो वो बोलीं- मैं पूछती हूँ.. उसका जवाब दो.. वर्ना तुम्हारी खैर नहीं।
मैंने कहा- बहन अँधेरा होने की वजह से मैं ज्यादा कुछ नहीं देख पाया।
इस पर वो बोलीं- पिछले 2-3 महीनों से देख रहे हो और बोलते हो कि कुछ नहीं देखा..!
यह सुन कर मैं सन्न रह गया कि वो सब जानती हैं..
पर तभी मेरे दिमाग की बत्ती जली कि वो जानबूझ कर ही मुझको सब दिखा रही थीं।
अब मेरी समझ में आ गया कि वो अपनी चूत क्यों इतनी साफ क्यों रखती थीं और क्यों टॉयलेट में उंगली करके चूत को रगड़ती थीं।
न जाने मुझ में कहाँ से हिम्मत आ गई और उनको बोल दिया- इसका मतलब कि आप जानबूझ कर मुझे सब दिखा रही थीं।
यह सुनकर वो दंग रह गईं क्योंकि उनको मुझसे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी तो वो मुझे देखती रह गईं।
इससे पहले कि वो मुझसे कुछ कहतीं.. मैंने उनसे फिर कहा- लेकिन बहन सच कहता हूँ कि मैंने ज्यादा कुछ नहीं देखा।
इस पर वो बोलीं- और ज्यादा क्या देखना है तुम्हें.. अब भी कुछ देखना बाकी है क्या?
मेरी समझ में नहीं आया कि वो किस टोन में ये मुझसे पूछ रही हैं.. तो मैं ऐसे ही खड़ा रहा।
सो उन्होंने दोबारा वही पूछा।
इस पर मैंने हिम्मत करके बोल दिया- और तो बहुत कुछ दिखाने के लिए है आपके पास.. अगर आप चाहें तो..
इस पर वो जोर से हँस पड़ीं।
उनकी इस हँसी से मुझे बहुत राहत हुई और मेरी हिम्मत और बढ़ गई।
मैंने उनसे हाथ जोड़ के कहा- बहन, क्या मुझे ठीक से दीदार का लाभ मिलेगा।
वो बोलीं- अवश्य मिलेगा.. लेकिन सिर्फ दीदार ही होंगे.. कोई भोग-प्रसाद नहीं लगेगा.. और वो भी दूर से ही।
मेरी तो जैसे किस्मत ही खुल गई.. मैंने उनसे कहा- मुझे मंजूर है।
उन्होंने मुझसे पूछा- पहले ऊपर के दीदार करना चाहोगे कि नीचे के?
मैंने कहा- दोनों के..
इस पर वो हँस कर बोलीं- आज सिर्फ एक ही चीज के दीदार होंगे, पूरे दीदार तो पूर्णिमा के दिन होंगे।
तो मैंने खुल कर कहा- ठीक है.. आज सिर्फ नीचे के दीदार करवा दीजिए.. क्योंकि मेरी रूचि हमेशा से मम्मों की बजाए चूत में ज्यादा रही है।
उन्होंने कटीली अदा से आँख मारी और कहा- ठीक है।
इतना कहने के बाद वो अपनी सलवार नाड़ा खोलने लगीं।
मैंने कहा- लाइए मैं आपकी मदद कर देता हूँ।
वो बड़ी आँखें करके बोलीं- वहीं खड़े रहो.. आगे मत बढ़ना.. वर्ना कुछ नहीं देखने को मिलेगा।
मैं वहीं रुक गया।
उन्होंने सलवार का नाड़ा खोलते ही उसे छोड़ दिया.. सो सलवार फट से नीचे गिर गई।
दोस्तो, क्या कमाल का नजारा था.. एकदम गोरी-गोरी मक्खन जैसी चिकनी.. केले के तने जैसी मस्त गदराई हुई जांघें और उनके बीच में मस्त चूत के उभार से उभरी हुई पैन्टी..
मैं तो सच में पागल हो गया।
यह नजारा देख कर तो मुझे महसूस हुआ कि यह तो मेरी उम्मीद से कई ज्यादा खूबसूरत था।
उनकी पैन्टी ऊपर से थोड़ी भीगी हुई थी.. शायद उनका मूत लगा हुआ था।
वो अपनी पैन्टी उतार ही रही थीं कि मैंने बोला- बहन थोड़ी देर रुक जाइए.. मुझे ऐसे ही देखना है।
इस पर वो रुक गई और हँसने लगीं।
जैसे ही मैंने बहन की पैन्टी को छूने की कोशिश की.. वो पीछे हट गईं और बोलीं- हमारी शर्त क्या थी.. भूल गया गया?
इस पर मैंने कहा- तो फिर आप खुद इसे निकाल दीजिए।
और उन्होंने बड़े ही सलीके से उसे उतार फेंका।
मैंने झट से उनकी पैन्टी उठाई और उसे चूम लिया और उसे जहाँ उनकी चूत का छेद लगा होता है.. सूंघने लगा.. हाय.. क्या कमाल की खुश्बू थी।
मेरी इस हरकत पर वो मुस्कुराईं और देखने लगीं।

मैंने कहा- मैं आपकी चूत को तो छू नहीं सकता.. तो इसे ही महसूस कर लेता हूँ।
बहन ने बड़े प्यार से कहा- सब कुछ मिलेगा प्यारे भैया जी.. थोड़ा सब्र कीजिए, सब्र का फल मीठा होता है।
वो खड़ी थीं और मैं उनकी बिना बाल की चूत को देख कर खुश हो गया। वाकयी में कमाल की चूत थी.. बिल्कुल पाव रोटी की तरह उभरी हुई और एकदम साफ..
दोस्तो, चूत को चाहे ऊपर से देखो.. चौड़ी करके देखो या पीछे से हर जगह देखो.. वो हर ओर से खूबसूरत लगती है।
बहन खड़े हुए अपना कमीज ऊपर उठाए पकड़ कर खड़ी थीं.. तो मैंने थोड़ी चालाकी करते हुए उनसे कहा- इसे पकड़ कर आप थक जाएंगीं.. इसे भी निकल दीजिए ना..
इस पर वो मेरा कान पकड़ कर बोलीं- आप बड़े ही होशियार हो.. सब कुछ आज ही देखना चाहते हो क्या?
मैंने कहा- अगर आप की मर्जी हो तो..
इस पर उन्होंने बोला- आज सिर्फ नीचे का ही देखने का लाभ मिलेगा.. बाकी फिर कभी..
अब मैं समझ गया था कि अब वो पक्का ही चुदेगी। लेकिन मुझे बड़े ही सब्र से काम लेना था, कहीं हाथ आई हुई बाजी बिगड़ न जाए।
दोस्तो.. ऊपर वाले ने चूत भी कमाल की चीज बनाई है.. ऊपर से देखो तो कुछ भी नहीं.. और चौड़ा करो तो क्या कुछ न उसमें समां जाए।
मैंने बहन से कहा- ऐसे तो कुछ ठीक से दिखाई ही नहीं देता है.. आप प्लीज़ सोफे पर बैठ जाईए ना..
इस पर वो थोड़ा मुस्कुराईं और जाकर सोफे पर बैठ गईं। मगर उन्होंने अब भी टाँगें नीचे रखी हुई थीं.. तो मैंने कहा- बहन टाँगें तो ऊपर कीजिए।
इस पर उन्होंने टाँगें ऊपर करके चौड़ी कर दीं..
अब मेरे सामने जन्नत का नजारा था.. पर मैं तो अभी और अन्दर जाना चाहता था।
थोड़ी देर में उसे यूं ही ललचाई निगाहों से देखता रहा, फिर मैंने कहा- बहन इतना तो में पहले भी देख चुका हूँ.. कुछ और दिखाएं ना..
वो बोलीं- और क्या दिखाऊँ?
मैंने कहा- अपनी चूत थोड़ी चौड़ी कीजिए ताकि मैं जन्नत का रास्ता देख सकूँ।
इस पर वो हँस पड़ीं और बोलीं- आप जितने दिखते हो.. उससे कई ज्यादा शैतान हो भैया जी।
मैंने कहा- मैं तो संत ही था.. आपकी इस चूत ने शैतान बना दिया।
उस पर उन्होंने कहा- भैया जी ये वो कुँआ है जिसमें उतरने बाद कोई वापस नहीं आता।
मैंने बहन से कहा- जो भी हो बहन मुझे इसमें उतरना है।
इस पर उन्होंने कहा- जैसी आपकी मर्जी..
अब बहन पूरी तरह लाइन पर आ चुकी थीं।
इतना कहते हैं कि उन्होंने चूत की दोनों फांके पकड़ कर अपनी चूत चौड़ी कर दी।
मैं तो उनकी गुलाबी गली देखता ही रह गया.. एकदम गुलाबी और छोटा सा छेद। मैं यह सोच रहा था कि एक शादीशुदा और दस साल की बेटी की माँ की चूत का छेद इतना छोटा कैसे हो सकता है।
मैं थोड़ा उनके नजदीक जाकर बिल्कुल उनकी चूत के पास बैठ गया।
जैसे ही मैंने उसे छूने के लिए हाथ बढाया.. उन्होंने मुझे अपनी शर्त याद दिलाई।
इस पर मैंने कहा- मैं उसे छूना नहीं चाहता.. मैं तो सिर्फ उसकी खुश्बू महसूस करना चाहता हूँ।
इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।
अब मैं जैसे ही अपनी नाक उनकी चूत के नजदीक ले गया और एक जोर की सांस ली.. आह.. एक अजीब सी खुश्बू मेरी नाक में भर गई।
उस खुश्बू में थोड़ी सी उनकी मूत की भी खुश्बू महसूस हुई क्यूँकि वो अभी-अभी ही मूत कर आई थीं.. पर क्या बताऊँ दोस्तो.. कितनी मादक और कमाल की महक थी।
मैं थोड़ी देर उसे सूँघता ही रहा.. फिर मैंने चालाकी करके अपनी नाक से उनकी चूत का दाना छू लिया और वहाँ रगड़ने लगा।
वो सिसिया कर बोलीं- भैया जी.. क्या कर रहे हो.. कभी चूत नहीं देखी क्या?
मैंने कहा- इतनी करीब से तो कभी नहीं और इसकी खुशबू इतनी मस्त है कि मुझसे रहा नहीं जाता।
इस पर उन्होंने अपने पैर थोड़े और फैला दिए.. ताकि उनकी चूत थोड़ी और चौड़ी हो जाए।
अब मैंने नाक से उनका दाना रगड़ना शुरू कर दिया और इस बीच कभी-कभी उनके छेद में भी नाक घुसा दिया करता था।
अब उन पर चुदाई का खुमार चढ़ने लगा था। जब भी मैं नाक से उनके दाने को रगड़ता.. उनकी एक हल्की सी ‘आह’ निकल जाती।
दोस्तो, अभी भी उन्होंने अपने हाथ से अपनी चूत चौड़ी की हुई थी। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उन्होंने चूत से अपने हाथ हटा लिए और मेरे सर पर रख दिए।
उनके हाथ हटते ही मैं उनका मूड समझ गया और मैंने हाथों से उनकी दोनों टाँगें ऊपर उठा दीं और अपना मुँह उनकी चूत में घुसा दिया और मैं अपनी जीभ से उनकी चूत चाटने लगा।
वो अब मदहोश हो रही थीं और कुछ-कुछ बोल रही थीं.. और जोर से मादक ‘आहें’ भर रही थीं, बीच-बीच में वो बोलती थीं- भैया जी क्या कर रहे हो।
मैंने कुछ जवाब नहीं दिया और अपना काम चालू रखा।
दोस्तो, क्या बताऊँ.. चूत चाटने के बारे में.. क्या अद्भुत स्वाद.. क्या अद्भुत महक.. और क्या अद्भुत अहसास.. कोमल जाँघों के बीच में अपना सर घुसाने का.. आह.. अकथनीय अहसास है।
इस क्रिया की हर एक चीज अवर्णनीय होती है।
अब वो मेरा सर जोर से अपनी चूत पर दबा रही थीं। इस बीच मैं कभी उनकी चूत के अंदरूनी होंठ काट लेता.. तो कभी उनका दाना.. मींज देता.. आह्ह.. क्या मस्त चूत थी मेरी बहन की..!
बहन अब जोर-जोर से ‘आहें..’ भर रही थीं और गाण्ड उचका कर मेरा सर उनकी चूत पर दबाकर अपनी चूत चटवा रही थीं।
इस दौरान अब बहन का भोसड़ा थोड़ा पानी छोड़ने लगा था.. मैं समझ गया कि आज मेरा नसीब खुलने वाला है और साथ में उनकी चूत का छेद भी।
अब मैंने अपने दोनों हाथ से उनकी जांघें पकड़ कर सोफे में आगे को खींच लिया ताकि मैं अच्छे से उनकी चूत चाट सकूँ।
क्या बताऊँ दोस्तो,.. उनकी चूत इतनी टेस्टी थी कि जी करता था कि कच्चा ही खा जाऊँ.. सो चाटने के बीच में मैंने अपने दांतों से धीरे से उनके दाने को काट लिया।
इस पर उनकी ‘आह’ निकल गई और मुझसे बोलीं- ओह.. धीरे भैया जी.. सच में खा जाओगे क्या?
थोड़ी देर में ऐसे ही चूत चाटता रहा.. अब उनकी चूत की खुश्बू और भी मादक हो गई थी.. क्योंकि अब उनकी चूत पानी छोड़ रही थी और वो अब आँखें बन्द करके इसका मजा ले रही थीं।
इस बीच मैंने अपना लण्ड पैन्ट से बाहर निकाल दिया था.. जो कि अब पूरी तरह टाईट हो गया था, शायद उतना जितना पहले कभी नहीं हुआ था।
अब मैंने अपने हाथों से उनकी चूत की दोनों फलक चौड़े किए और अन्दर तक जीभ घुसेड़ कर उनकी चूत चाटने लगा।
इस बीच मैंने चूत में उंगली करनी शुरू कर दी।
पहले तो वो थोड़ा कसमसाईं.. फिर अपनी टाँगें ऐसे चौड़ी कर लीं.. ताकि मुझे उसमें उंगली डालने में आसानी हो।
मैं एक तरफ उनकी चूत चाट रहा था और एक तरफ उंगली डाल कर उनका जी-स्पॉट भी टटोल रहा था, अब वो पूरी तरह मेरे काबू में आ चुकी थीं और लगातार अपना पानी छोड़ रही थीं।
जब वो चरमसीमा तक पहुँच जाती थीं.. तो गाण्ड ऊँची करके मेरा सर इतना दबा देतीं कि मुझे घुटन होने लगती थी। लेकिन दोस्तो, चूत के अन्दर घुटन का भी अपना एक अलग ही मजा है।
मेरा पाठकों से एक ही निवेदन है कि अब तक आपने चूत नहीं चाटी.. तो आपने कुछ नहीं किया.. आपका जीवन व्यर्थ है और मेरी प्यारी बहन, आंटी और लड़कियों.. अगर अब तक आपने अपनी चूत नहीं चटवाई.. तो जरूर चटवाना।
यहाँ पर मैं एक बात कहना चाहूँगा दोस्तो.. कि मैं हमेशा से ही लड़कियों को सेक्स के बारे में किस्मत वाला समझता हूँ क्योंकि वो जितनी देर चाहें सेक्स कर सकती हैं, लड़कियाँ जितनी बार चाहें चर्म सीमा पर पहुँच कर परम आनन्द लेकर अपना पानी छोड़ सकती हैं।
हमें तो चोदते वक्त भी यह ख्याल रखना पड़ता है कि कहीं झड़ न जाएं.. वर्ना दोबारा लण्ड महाराज को तैयार होने में वक्त लग जाएगा और शायद चूत फिर चोदने दे या नहीं।
दोस्तो, बीवियाँ तो अक्सर रात को दोबारा चोदने ही नहीं देतीं.. लेकिन मेरी प्यारी बहन की बात ही कुछ और है।
मैंने सोचा शायद मैं सीधा बोलूँगा तो वो मुझे चोदने नहीं देगीं.. इसलिए कोई आईडिया लगाना पड़ेगा तो मैंने थोड़ा और आगे बढ़ने का सोचा।
अब मैं अपने दोनों हाथों से उनके मम्मों को मसलने लगा।
क्या कमाल के मम्मे थे.. दोस्तों एकदम मुलायम और नर्म.. बर्फ के गोले.. जो एकदम सफ़ेद और उत्तेजित अवस्था में सख्त हो जाने वाले मस्त चूचे थे।
दोस्तो, चूत की तरह मम्मों का भी एक अलग ही मजा होता है।
कुल मिलाकर ऊपर वाले ने औरत चीज ही अद्भुत बनाई है। उनकी चूत.. उनके मम्मे.. उनकी मटकती गाण्ड.. उनके मांसल मदमाते चूतड़.. उनकी मखमली त्वचा.. हर एक चीज अवर्णनीय होती है।
थोड़ी देर बाद उन्होंने चुदास के चलते खुद ही अपनी कमीज़ ऊपर कर दी.. ताकि मैं अच्छे से उनके मम्मों को मसल सकूँ।
अब मैं भी थोड़ी हिम्मत करके उनकी ब्रा ऊपर करके उनकी निप्पल की ट्यूनिंग करने लगा.. जैसे हम रेडियो में स्टेशन मिलाने के लिए किया करते थे। मुझे यहाँ अपनी बहन का स्टेशन सैट जो करना था।
इस बीच मैंने थोड़ा आगे बढ़ते हुए उनकी नाभि को चूमना शुरू कर दिया। मैं कभी उनकी नाभि में जीभ घुसाता.. तो कभी चूत में घुसेड़ देता।
दोस्तो, वो सच में अब अपने आपे से बाहर थीं और मेरे काबू में आ गई थीं, वो अपनी आँखें बन्द किए हुए मजा ले रही थीं।
मैंने चालाकी करते हुए अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा के हुक खोलने की कोशिश की.. लेकिन मैं नाकामयाब रहा।
दोस्तो, मैं आज भी ब्रा के हुक नहीं खोल पाता हूँ.. पता नहीं ब्रा वाले भी क्यों ये हुक लगाते हैं।
कुछ देर मैंने ट्राई किया.. लेकिन सफलता नहीं मिली.. तो बहन ने मेरे हाथ पकड़ लिए।
करीब आधे घंटे बाद हम दोनों की नजरें एक हुईं.. उनकी आँखों में एक अजब सी चमक थी और चेहरे पर कातिल मुस्कान छाई हुई थी।
मैंने कहा- बहन प्लीज़..
और वो मान गईं.. उन्होंने खुद अपना कुर्ता उतार फेंका और अपनी ब्रा खोल दी।
क्या बताऊँ दोस्तो.. क्या मदमस्त नजारा था। एकदम दूध जैसे सफ़ेद और मखमली भरे हुए मम्मे.. और उन पर काले मस्त अंगूर घमण्ड से तने हुए थे.. और उन पर अंगूरों को एक चौड़ा सा उसी की रंगत का घेरा साधे हुए था।
मैं अब एक पल भी नहीं रुक सका और सीधे उनके दूधों को अपने मुँह में ले लिया। उनका एक निप्पल मेरे मुँह में था और एक हाथ में था।

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दूध का भी अपना एक अलग ही मजा होता है। हालांकि चूत चाटने जितना मजा नहीं आता.. लेकिन फिर भी कोई कम मजा नहीं होता।
इस बीच वो मेरे सर को अपने मम्मों पर दबा रही थीं और इतने प्यार से मेरा सर सहला रही थीं कि मैं उनके इस प्यार से पागल हो रहा था।
काफी देर तक उनके मम्मों को मसलने और चूसने के बाद मैंने उनके मम्मों से अपना सर हटाया और उनकी तरफ कामुक निगाहों से देखा।
उन्होंने फिर से कातिल मुस्कराहट से मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रखके चूसने लगीं। कभी उनकी जीभ मेरे मुँह में तो कभी मेरी उनके मुँह में होती थी।
सच में मैं जन्नत में था।
मैंने अब उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए। वो भी बड़ी ही लज्जत से मेरे होंठ चूस और काट रही थीं।
किस करते हुए ही मैंने चालाकी से अपना पैन्ट उतार दिया और लण्ड महाराज को आजाद कर दिया.. जो कि तकरीबन आधे-पौने घंटे से टाइट होके पैन्ट में फंसा हुआ था। मेरा लण्ड अब अपने पूरे उफान पर था और चूत में जाने के लिए बेकरार था।
मैंने अब बहन को पीछे से पकड़ के सोफे पर लिटा दिया और उन पर चढ़ कर उन्हें बेतहाशा चूमने लगा.. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं।
मैं इस दौरान अपना लण्ड उनकी चूत पर रगड़ रहा था और क्या बताऊँ दोस्तो.. तभी वो वक्त आ गया.. जिसका मुझे शिद्दत से इंतजार था।
उन्होंने खुद मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के दरवाजे पर रख दिया, मैंने भी देर न करते हुए धीरे से अपना सुपारा अन्दर घुसा दिया।
इस दौरान उन्होंने अपने आपको थोड़ा एडजस्ट किया.. जिससे उनकी चूत थोड़ा और खुल गई।
मैंने भी थोड़ा और जोर लगा कर आधा लण्ड अन्दर डाल दिया।
इस दौरान उनको थोड़ा दर्द हुआ.. तो उन्होंने चूमना छोड़ के मुझसे कहा- बस इतना ही भैया जी..
मैंने कहा- बहन अभी तो आधा ही गया है।
तो वो बोली- क्या बोल रहे हो.. ये कैसे हो सकता है?
मैंने कहा- खुद ही देख लो।
जैसे मैंने उनको दिखाने के लिए लण्ड निकालने की कोशिश की.. उन्होंने मेरी गाण्ड पकड़ कर अपनी पर खींचा और बोलीं- निकालो मत.. आज पहली बार इतना मजा आया है चुदाई में.. जब तक में न कहूँ.. निकालना मत.. वर्ना दोबारा कभी इसके दीदार नहीं होंगे।
इस पर मैंने भी अपना लण्ड चूत की गहराइयों में पूरी तरह ठूँस दिया और उनकी एक हल्की सी चीख भी निकल गई।
उन्होंने अपने आपको थोड़ा एडजस्ट किया और मेरी गाण्ड पकड़ कर अपनी और खींचा.. जैसे उन्हें और अन्दर लण्ड चाहिए हो। मैं तो हैरान था कि इन औरतों का भी अजीब है.. एक तरफ चीखती हैं और एक ओर और ज्यादा लण्ड चाहती हैं।
मैंने भी देर न करते हुए अपनी स्पीड बढ़ा दी। हर बार में पूरा लण्ड बाहर निकालता और फिर पूरा अन्दर डाल देता।
अब बहन पूरी तरह चुदाई में मस्त हो चुकी थीं.. वो मुझ पर अपने नाख़ून गड़ा कर इस तरह अपनी तरफ खींचती थीं.. जैसे वो मुझे भी अन्दर समा लेना चाहती हों।
मैंने भी जोर से उन्हें भींच लिया और धक्के लगाने लगा। उन्होंने भी अपनी टाँगें ऊँची करके अपनी खुबसूरत टाँगें जकड़ दीं।
क्या बताऊँ दोस्तो.. क्या गजब का अहसास था वो.. उनकी नर्म और सफेद दूध जैसी मस्त जाँघें मेरे चूतड़ों को दबा रही थीं और उनके चूचे मेरी छाती से इस तरह दबे थे कि अब उनके बीच हवा भी नहीं जा सकती थी। उनके बदन की और बगल के पसीने की खुश्बू तो कमाल की थी।
दोस्तो.. क्या कमाल का अहसास होता है.. जब किसी के प्यारे मम्मे आपके सीने से सटे हुए होते हैं।
मेरे लिए यह पहला अनुभव था.. तो मैं इतना उत्तेजित हो गया था कि मेरे लिए अपने आपको रोक पाना नामुमकिन था।
मैंने एक जोर का झटका लगाया और पूरा लण्ड उनकी चूत की गहराइयों में उतार दिया और जोर से झड़ने लगा। मैं करीबन 5 मिनट तक रुक-रुक कर झड़ता रहा।
मुझे खुद अपने आप पर आश्चर्य हो रहा था कि मैं इतना अधिक कैसे झड़ सकता हूँ.. पर दोस्तों कसम से झड़ने इतना मजा आया कि पूछो मत।
आज से पहले कितनी ही दफा मुठ्ठ मार के झड़ा था.. पर जो मुझे इस चूत में झड़ने में आया.. वो इससे पहले कभी नहीं आया। उस 5 मिनट के लिए मानो मैं जन्नत में था। उस दौरान बहन मुझसे अपनी जान भी मांगती.. तो मैं शायद दे देता।
बहन समझ गई थीं कि मैं झड़ रहा हूँ.. तो वो मुझे उस दौरान प्यार से मेरी पीठ सहला रही थी। झड़ने के बाद मैं निढाल हो गया और वैसे ही अपना लण्ड चूत में डाले हुए उन पर पड़ा रहा और वो मुझे कुछ देर तक सहलाती रहीं।
थोड़ी देर बाद मेरी प्यारी बहन बोलीं- बस हो गया भैया जी.. आप तो बहुत जल्दी शहीद हो गए।
मैंने प्यार से बहन से कहा- बहन आप हो ही इतनी सेक्सी कि कोई ज्यादा देर अपने आपको रोक ही नहीं सकता और मेरा तो ये पहली बार था।
इस पर बहन ने कहा- वैसे विनय जी आप भी कमाल की चुदाई करते हो। मैंने आज तक ऐसी चुदाई का मज़ा नहीं लिया था। मुझे सही मायनों में आज पता चला कि चुदाई क्या होती है। आपके जीजा भी कुछ ठीक ही चुदाई कर लेते हैं लेकिन आज तक उन्होंने ना ही कभी चूत चाटी है ना ही इस तरह मुझे प्यार किया है। मुझे तो मालूम ही नहीं था कि कोई कभी चूत भी चाट सकता है।
मैंने कहा- आपने कभी मुखमैथुन के बारे में नहीं सुना?
वो बोलीं- सुना तो है… लेकिन यकीन नहीं था कि कोई ऐसा भी कर सकता है।
मैंने कहा- वैसे बहन.. मैंने भी कभी नहीं सोचा था कि मैं भी कभी इस तरह से चूत चाटूंगा.. यह तो आपकी चूत का ही कमाल है कि मैं पागल हो गया।
उन्होंने मुझे प्यार से भींचते हुए कहा- ऐसे पागल ही रहना मेरे नटखट भैया..
मैंने कहा- सच में बहन.. आपकी चूत कमाल की है.. क्या बताऊँ उसकी महक.. उसका स्वाद.. मस्त पाव रोटी जैसा उभार..
उन्होंने बीच में ही मुझे ‘बस.. बस..’ कहते हुए रोक दिया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रखते हुए चूम लिया और अपनी बाँहों में कस लिया।
आपको याद दिला दूँ कि अभी भी मेरा लण्ड उनकी चूत के अन्दर ही था।
वो अचानक से बोलीं- भैया जी आपका लण्ड तो काफी बड़ा लगता है.. जरा इसे दिखाओ तो सही।
ऐसा कहते हुए उन्होंने अपनी चूत सिकोड़ दी और मेरे लण्ड में एक झुनझुनाहट सी हो गई।
दोस्तो.. जब मैं पहले मुठ्ठ मारता था.. तो उसके बाद मेरा लण्ड फ़ौरन ही ढीला हो जाता था। लेकिन इस बार तो इतना झड़ने के बाद भी वो अब तक टाईट था जिसका मुझे आश्चर्य हुआ।
मैंने बहन को दिखाने के लिए अपना लण्ड उनक चूत से बाहर निकाला और उनके सामने खड़ा हो गया।
मेरा लण्ड अब भी तना हुआ था.. जैसे उनका शुक्रिया अदा कर रहा हो।
बहन सोफे पर बैठ गईं अब उनका मुँह बिल्कुल मेरे लण्ड के सामने था।
बहन उसे देख कर बोलीं- भैया जी, यह तो जैसे मुझे घूर रहा है।
मेरा लण्ड पूरी तरह उनके रस और मेरे वीर्य से सना हुआ था और चमक रहा था। उधर बहन की चूत से मेरा वीर्य रिस रहा था.. जो सोफे पर गिर रहा था।
मेरे लण्ड को देखकर बहन बोलीं- आप का तो जितना सोचा था.. उससे काफी बड़ा है।
मैंने कहा- बहन आपकी चूत से बड़ा नहीं है.. आपने तो इसे पूरा निगल लिया था।
वो हँसने लगीं और बोलीं- भैया जी चूत से बड़ा तो कुछ भी नहीं होता.. न जाने कितने ही रजवाड़े इनमें घुसते चले गए।
उन्होंने मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया.. जिससे मुझे अजीब सी झनझनाहट महसूस हुई और मेरे मुँह से ‘आह’ निकल गई।
बहन बोलीं- क्या हुआ भैया जी?
मैंने कहा- कुछ नहीं बहन.. आपके हाथ कमाल के हैं।
वो धीरे-धीरे मेरे लण्ड को सहलाने लगीं। मुझे लगा कि वो चूसना चाहती थीं.. पर हिम्मत नहीं जुटा पा रही थीं। थोड़ी देर बहन के हाथों में रगड़ने के बाद मेरे लण्ड की झनझनाहट कम हो गई और मैं फिर से चुदाई के मूड में आ गया।
मैंने बहन से कहा- बहन एक राउंड और हो जाए।
वो बोलीं- आज इतना ही.. बाकी फिर कभी..
तो मेरा सारा मूड खराब हो गया और मैंने मुँह लटका दिया।
इसे देखकर बहन बोलीं- लगता है भैया जी नाराज हो गए। और वे मुझे अपनी और खींचते हुए बोलीं- आ जाओ मेरे अन्दर मेरे चोदू भैया जी।
मैं इस पर खुश होकर बहन को सोफे पर गिरा कर उन पर चढ़ गया और जोर से उनको भींच लिया।
वो बोलीं- आराम से भैया जी.. मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ।
मैंने कहा- बहन.. आप हो ही इतनी प्यारी कि सब्र ही नहीं होता।
इस पर वो बोलीं- जब मैं आपको इशारा करती थी.. तब तो कुछ नहीं किया।
मैंने कहा- कब इशारा किया था आपने बहन?
इस पर वो बोलीं- टॉयलेट में क्या मैं यूँ ही अपनी चूत रगड़ती थी और चौड़ी करके आपको दिखाती थी?
मैंने कहा- बहन मैं बुद्धू था.. तो मुझे कुछ समझ में नहीं आया।
वो बोलीं- खबरदार.. जो मेरे प्यारे भैया को बुद्धू कहा.. और मुझे जोर से भींच लिया।
मुझे उनका ये प्यार बहुत ही अच्छा लगा।
मैंने इस दौरान अपना लण्ड उनकी चूत पर रखा और अन्दर घुसेड़ दिया।
मेरे इस अचानक हमले से उनकी हल्की चीख निकल गई.. पर वो मस्त हो कर बोलीं- भैया जी आप तो बड़ी ही जल्दी अँधेरे में तीर चलाना सीख गए।
मैं अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया और धक्के पर धक्के लगाने लगा, जिसे वो बड़े ही मजे से अपने अन्दर ले रही थीं।
दोस्तो.. इस बार मैंने बड़े ही खुलकर उनको चोदा.. क्योंकि अब झड़ने का डर नहीं था।
इस बीच हम दोनों ने अपनी रसीली बातें चालू रखीं.. वो कभी-कभी मेरे चूतड़ों को थपकी मार दिया करती थीं.. तो मैं कभी उनके मम्मों को काट लेता और कभी उनके होंठों को काट लेता था।
वो बोलीं- भैया जी.. ये तो बताओ.. आप को मुझमें सबसे अच्छा क्या लगा.. ये तो बताओ?
मैंने कहा- आप पूरी की पूरी कमाल की हो।
वो बोलीं- ऐसे नहीं.. कुछ डिटेल में बताओ।
साथियो, अब बहन को अपनी खूबसूरती का बखान सुनना था.. और मैं भी उनको चोदने से पहले भरपूर मजा देना चाहता था..
मैंने उनकी सुन्दरता के बारे में कहना शुरू किया।
मैंने कहा- आपका पूरा जिस्म.. आपके इस खुबसूरत चहेरे के आगे तो ऐश्वर्या भी कुछ नहीं।
वो बोलीं- सच में?
मैंने कहा- आपकी इस चूत की कसम..
और मैंने एक जोर का धक्का मारा जिससे उनकी हल्की ‘आह’ निकल गई।
बहन बोलीं- और..
मैंने कहा- आपके ये मम्मे भी बड़े ही मस्त हैं.. ये दूध जैसे सफेद और रुई जैसे नर्म.. और उस पर ये काले निप्पल.. सच में किसी को भी पागल कर सकते हैं।
वो बोलीं- आप मर्दों की नजर ही वहाँ पर टिकी होती है.. कभी-कभी तो लगता है कि वो इन्हें खा ही जाएंगे।
मैंने कहा- ये चीज ही ऐसी है।
वो मुस्कुरा दीं।
मैंने कहा- सच बताऊँ तो आपकी खुश्बू कमाल की है।
वो बोलीं- कहाँ की खुश्बू.. ये तो बताओ?
मैंने एक और जोर का झटका उनकी चूत में लगाया और कहा- यहाँ की।
उन्होंने एक ‘आह’ भरी और बोलीं- थोड़ा विस्तार से बताओ मेरे राजा।
मैं थोड़ा रुक गया और मैंने उनको देखा और चूमने लगा। मैं बड़े ही चाव से उनकी जीभ चूस रहा था और होंठ काट रहा था।
थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी गाण्ड पर एक थपकी लगाई और बोलीं- इसका काम चालू रखो.. ये रुकना नहीं चाहिए।
इस दौरान हमारी बाते चालू थीं.. मैंने बहन से कहा- आपकी चूत कमाल की है..
उन्होंने कहा- इसमें क्या कमाल है जैसी सबकी होती है वैसी मेरी है।
मैंने कहा- औरों की तो पता नहीं.. लेकिन आपकी चूत की खुश्बू मुझे पागल कर देती है… मैंने ऐसी खुश्बू आज तक नहीं सूँघी।
वो बोलीं- कैसी है इसकी खुश्बू?
मैंने कहा- चूत की खुश्बू किसी भी चीज के साथ तुलना नहीं कर सकते.. उसकी अपनी एक अलग ही खुश्बू होती है। अगर कोई उसकी खुश्बू जैसी खुश्बू बना ले.. तो वो मालामाल हो जाएगा।
इस पर वो जोर से हँस पड़ीं और प्यार से मुझे चूमा और कहा- मेरा आशिक सच में पागल है.. पर ये तो बताओ कि इसका स्वाद कैसा लगा?
मैंने कहा- थोड़ा नमकीन.. थोड़ा खट्टा.. इसका भी खुश्बू जैसा ही है.. पूरी तरह किसी चीज से मैच नहीं करता।
वो मुस्कुराने लगीं।
मैंने बहन से कहा- चूत एक यूनिक चीज है.. दुनिया में ऐसी कोई भी चीज नहीं..
वो बोलीं- तभी तो पूरी दुनिया इसकी दीवानी है.. लेकिन अब तो ये चूत कहाँ रही.. आपने तो इसका भोसड़ा ही बना दिया।
अब मैंने अपना मुँह उनके मम्मों पर लगाया और उनके दूध चूसने लगा। बीच-बीच में उनके निप्पल काट लेता था.. जिस पर वो मेरा सर अपने दूध पर दबा देती थीं।
बहन ने कहा- आप कमाल का चूसते हो.. आपके जीजा को न चूत चाटनी आती है न ही इन मस्त मम्मों को चूसना आता है… उन्होंने तो मेरे इतने साल यूं ही जाया कर दिए।
मैंने कहा- बहन.. अब आप फिकर न कीजिए.. मैं आपको इतना चोदूँगा कि आप पूरी तरह तृप्त हो जाएंगी।
बहन ने कहा- तृप्त तो मैं हो ही गई आपसे भैया जी..
मैंने कहा- अभी कहाँ आपको तृप्त किया है..
बहन ने कहा- और क्या बाकी रहा है अब?
मैंने कहा- अभी तो बहुत कुछ बाकी है।
वो बोलीं- और क्या.. बताओ तो?
मैंने अपनी एक उंगली उनकी गाण्ड के छेद में थोड़ा घुसेड़ कर कहा- अभी तो ये बाकी है।
उन्होंने कहा- खबरदार.. इसके बारे में सोचा भी तो..
मैंने हँस कर कहा- ओके..
थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा- अब तक मैं 5 बार झड़ चुकी हूँ। इतना तो मैं सुहागरात के दिन भी नहीं झड़ी थी। तुमने तो मेरी चूत का कचूमर ही बना दिया है।
मैंने कहा- कचूमर नहीं.. भोसड़ा..
वो बोलीं- हाँ.. वही यार..
मैंने मजाक में कहा- तो निकालूँ क्या?
उस पर उन्होंने मेरी गाण्ड पर जोर से चपत लगाई और बोलीं- खबरदार जो इसे निकाला तो.. ये तो अब मेरा है।
मैंने एक जोर का झटका लगाया और कहा- और ये चूत अब मेरी है।
वो बोलीं- बिल्कुल भैया जी.. आप जब चाहे.. इसकी बजा सकते हो।
मैं इस बीच उनके दूध चूस रहा था और चूत चोद रहा था।

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वो बोलीं- जरा इसके बारे में तो कुछ बताओ।
मैंने कहा- बहन आज पहली बार ही आपके मम्मे देखे और मुझे मिल भी गए.. इनका अहसास ही कुछ और है। ये थोड़े नर्म.. थोड़े सख्त हैं और सफ़ेद दूध पर ये काला निप्पल तो कमाल ही लगता है.. जैसे ऊपर वाले ने इसे बुरी नजर से बचाने के लिए ही लगा दिया हो।
बहन मेरी ये बातें सुनकर बोलीं- भैया जी.. आपको तो कवि होना चाहिए था।
मैंने कहा- आप हो ही इतनी खूबसूरत कि कोई भी कवि बन जाए।
वो अपनी तारीफ सुन कर इतनी खुश हो गईं कि मुझे जोर से जकड़ लिया और बोलीं- ओह.. मेरे प्यारे चोदू.. भैया जी.. आप मुझे पहले क्यों नहीं मिले।
अब वो अपनी चूत में मेरे हर एक धक्के का मजा ले रही थीं। थोड़ी देर मैं यूं ही बिना कुछ बोले धक्के लगाता रहा।
सच बताऊँ तो मुझे भी अब थोड़ी थकान महसूस हो रही थी.. पर चुदाई का खुमार और बहन की चूत थी.. जो मुझे थकने ही नहीं देती थी।
थोड़ी देर बाद बहन बोलीं- बस भैया जी अब इसको ख़त्म कीजिए।
मैंने कहा- हार गईं क्या मेरी प्यारी बहन..
वो बोलीं- सच में भैया जी.. आप जीत गए।
दोस्तो… मैंने भी अब काम ख़त्म करने के हिसाब से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
थोड़ी ही देर बाद मैं उनकी चूत में जोर से झड़ने लगा और मैं उन पर ही निढाल हो गया।
वो काफी देर तक मुझे प्यार से सहलाती रहीं और चूमती रहीं।
पता नहीं कितनी देर तक मैं उनकी चूत में थोड़ा-थोड़ा झड़ता रहा।
सच में दोस्तो, मैं अपनी बहन का प्यार पाकर धन्य हो गया।
इस बार झड़ने के बाद मेरा लण्ड ढीला पड़ गया, अब उसमें थोड़ा दर्द भी महसूस हो रहा था।
आखिरकार लण्ड पिछले एक घंटे से खड़ा जो था.. इतनी मेहनत के बाद उसकी थकान तो लाजमी ही थी।
मैं और बहन बिना लण्ड निकाले ही कितनी ही देर तक एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और एक-दूसरे को प्यार करते रहे।
बाद में बहन उठीं और मुझे चूमते हुए बोलीं- भैया जी.. ये चुदाई मैं जिंदगी भर नहीं भूलूँगी।
मैंने भी उनके चूचे चूसते हुए कहा- मैं भी..
वो जैसे ही उठीं.. मेरा वीर्य उनकी जांघों से रिस कर बाहर आने लगा जिसकी धार देख कर बहन बोलीं- भैया जी आप कितना झड़ते हो.. तुम्हारे जीजा की तो कुछ बूँदें ही बाहर आती हैं.. वो भी कभी-कभार ही!
मैंने कहा- इसे चख कर देखो बहन..
वो बोलीं- हट गंदे कहीं के..
मैंने कहा- एक बार देखो तो सही..
इस पर वो मुस्कुराईं और थोड़ा अपनी उंगली पर लेकर चख लिया।
मेरी बहन का ऐसा रिस्पोंस देख कर सच में मैं बहुत खुश हो गया।
वो सीधे ही ऐसे नंगी बाथरूम में चली गईं। मैं भी उनके पीछे बाथरूम में चला गया।
वहाँ बहन ने अपने हाथों से मेरे लण्ड को पानी डालकर साफ कर दिया। बाद में उन्होंने अपनी चूत साफ की.. जिसे मैं खड़े होकर देख रहा था।
उन्होंने अपनी उंगली चूत में डालकर अन्दर घुमाई और अपनी चूत से सारा वीर्य निकाल दिया और अपने आपको साफ कर दिया।
उन्होंने कहा- अब तो बाहर जाओ भैया जी.. मुझे मूतना है।
मैंने कहा- मेरे सामने ही कर लीजिए ना..
जिस पर उन्होंने मुझे धक्का दिया और प्यार से कहा- अब जाओ भी..
मैं अपनी जगह पर आ गया और अपनी पैन्ट पहन ली, मैं किताब पढ़ने बैठ गया।
थोड़ी देर बाद बहन बाथरूम से बाहर आईं और सोफे पर पड़ी अपनी पैन्टी और सलवार लेकर पहनने लगीं।
थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आईं और बोलीं- भैया जी ये ड्राइंग रूम का दरवाजा तो खुला ही था। मैं भी उसे देख कर भौंचक्का रह गया। फिर मैंने बहन से कहा- चलो बहन इससे एक बात तो साफ है कि ऊपर वाले को हमारा ये रिश्ता मंजूर है.. वर्ना कोई आ जाता और हम पकड़े जाते।
मेरा ऐसा कहने पर बहन ने राहत की साँस ली और बोलीं- शायद आप ठीक कह रहे हो भैया जी।
तो दोस्तो, यह थी मेरी अपनी चचेरी बहन के साथ चुदाई की सच्ची कहानी..

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