चचेरी बहन के साथ रंगरेलियाँ

दोस्तो, मेरा नाम विनय है और मैं नोएडा (एनसीआर) का रहने वाला हूँ। बात तकरीबन 6 महीने पहले की है, उस वक्त मेरी नोएडा में नई-नई नौकरी लगी थी। मेरा गाँव नोएडा से 50 किलोमीटर दूर था और मुझे वहाँ जाने के लिए दो बसें बदलनी पड़ती थीं और रात को घर लौटने में भी देरी हो जाती थी।
मेरा एक चचेरा जीजा नोएडा में ही रहता था.. तो घर वालों ने मुझे वहीं उनके साथ रहने को भेज दिया।
उनके घर में मेरे अलावा जीजा, बहन अमिता और उनकी एक दस साल की बेटी थी।
बहन की उम्र करीबन 33 साल की है और वो एक बहुत ही खूबसूरत और कमनीय शरीर की मालकिन है, उनके मम्मे 36 सी साइज के हैं और चूतड़ों का तो पूछो ही मत.. कमाल के गोलाकार और भरे हुए हैं.. जिसे देखते ही जी करता है कि जोर से काट लें।
कोई अगर एक बार उनको साटिन की नाईटवियर में देख ले.. तो मेरा दावा है कि मुठ्ठ मारे बिना नहीं रह सकता।
मैं हमेशा से अपने जीजा को किस्मत वाला मानता हूँ कि उनको भगवान ने इतनी खूबसूरत बीवी दी है।
वैसे तो मैं एक शर्मीले किस्म का लड़का हूँ.. तो डर के मारे आज तक किसी भी लड़की को पटा नहीं पाया। उसी तरह मैंने कभी यह सोचा नहीं था कि मैं उनको कभी चोद पाऊँगा.. इसलिए मैं हमेशा की तरह उनके बारे में सोच कर मुठ्ठ मार कर ही काम चला लिया करता था।
पर एक दिन की बात है.. घर में मैं और मेरी बहन के अलावा कोई नहीं था, मैं वैसे ही पड़ा हुआ एक किताब पढ़ रहा था।
तभी मेरी बहन मूतने के लिए टॉयलेट में गई और उसी वक्त मुझे भी प्यास लगी तो मैं पानी पीने के लिए खड़ा हुआ।
मेरा फोन टॉयलेट के आगे ही गिर गया।
जैसे ही मैं फ़ोन उठाने के लिए नीचे झुका.. तो मुझे जैसे खजाना दिख गया और वो थी.. मेरी बहन की चूत।
झुकते ही मेरी नजर टॉयलेट दरवाजे के नीचे की दरार में पड़ी.. जहाँ से मुझे टॉयलेट के अन्दर का नज़ारा दिखाई दिया। मैंने देखा कि बहन टॉयलेट में मूत रही थीं। मैं धीरे से टॉयलेट के और नजदीक गया और देखने लगा। वहाँ से उनकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी और उनके मूत की धार दिखाई दी जिसे देख कर मैं दंग रह गया।
दोस्तो.. उनकी चूत के बारे में क्या बताऊँ.. पाव रोटी की तरह मस्त फूली हुई और उस पर छोटे-छोटे बाल.. क्या कमाल के लग रहे थे। उनकी चूत के अन्दर के होंठ थोड़े बड़े और थोड़े से बाहर की तरफ को थे.. जो कि मुझे बहुत पसंद हैं। मैं हमेशा ब्लू-फ़िल्मों में ऐसे ही अदाकारा को पसंद करता हूँ.. जिसके अन्दर के होंठ थोड़े बड़े हों।
मेरी बहन तो एकदम गोरी थीं.. मगर उनकी चूत काली नज़र आ रही थी.. और सच बताऊँ तो मुझे हमेशा से ही काली इंडियन लौंडियों के जैसी हब्सी किस्म की चूतें ही बहुत पसंद हैं।

उनकी चूत देख कर मेरा दिल किया कि अभी जाकर उनकी चूत को मूत के साथ ही चाटने लगूं.. पर इससे पहले कि मैं और कुछ सोचता.. वो मूत कर उठ गईं. और मैं झट से अपनी जगह पर वापस आ कर पढ़ने लगा।
अब मुझे बहन की चूत के दीदार करने का रास्ता मिल गया था.. तो मैं हमेशा इसी फ़िराक में रहता था कि कब बहन टॉयलेट जाएं.. और मैं उनकी चूत के दीदार कर सकूँ।
यूं ही 2 से 3 महीने बीत गए।
लेकिन पिछले एक महीने से मैंने नोटिस किया था कि जब वो मूतने टॉयलेट जाती थीं तो मूतने के बाद अपनी चूत को सहलाती थीं और कभी-कभी उंगली भी करती थीं।
चूत को सहलाते हुए.. वो अपनी चूत को इस तरह चौड़ी करती थीं कि मुझे उनकी चूत के अन्दर की गली साफ दिखाई देती थी।
अब तो वो अपनी चूत की सफाई पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगी थीं, वो अपनी चूत को हमेशा चिकनी रखती थीं।
उनकी फूली हुई चूत को देख कर ऐसा लगता था कि जैसे वो रोज ही शेविंग करती हों।
मैंने मौका मिलने पर कई बार उनको नहाते वक्त बाथरूम में देखने की कोशिश की.. मगर ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। उनकी चूत को देख कर मेरा जी करता था कि अभी दरवाजा तोड़ दूँ और उनकी चूत को खा जाऊँ और इतना चोदूँ कि मेरा लण्ड कभी चूत से बाहर ही ना निकालूँ।
लेकिन डर के मारे कभी हिम्मत नहीं कर पाया।
अब तो कभी-कभी वो टॉयलेट से बाहर आकार यूँ हीं मेरे सामने हँस दिया करती थीं। उनका ये व्यव्हार मेरी कुछ समझ में नहीं आता था और मैंने उस पर ज्यादा सोचा भी नहीं.. मैं तो उनकी चूत देख कर ही खुश था।
एक दिन की बात है.. बहन बाथरूम में मूत रही थीं और मैं दरवाजे के नीचे से उनकी चूत देख रहा था।
तभी अचानक से उन्होंने वैसे ही बैठे हुए ही टॉयलेट का दरवाजा खोल दिया, दरवाजा मेरे सर से टकराकर रुक गया और मैं अचानक हुए इस हमले से सकपका कर रह गया.. मेरी तो समझ में कुछ भी नहीं आया.. पर एक बात पक्की थी कि मेरी चोरी पकड़ी गई थी, मैं डर के मारे वहीं खड़ा रहा।
थोड़ी ही देर में बहन टॉयलेट से बाहर निकलीं और मेरे सामने आकर खड़ी हो गईं। उन्होंने बड़ी ही अजीब सी निगाहों से मेरी तरफ देखा, उन्होंने मुझसे गुस्से में पूछा- तुम वहाँ क्या कर रहे थे?
अब मैं उनको क्या बताता कि मैं उनकी चूत देख रहा था।
मैं तो वैसे ही बुत बन के खड़ा रहा.. उन्होंने मुझसे फिर पूछा- जबाव दो.. तुम क्या देख रहे थे.. बताओ वर्ना तुम्हारे जीजा को सब बोल दूँगी।
तो मैंने उनसे बोला- बहन प्लीज़ जीजा को कुछ मत बोलना… मुझसे गलती हो गई.. मैं थोड़ा बहक गया था। लेकिन मैंने ज्यादा कुछ नहीं देखा।
इस पर वो बोलीं- इससे ज्यादा तुम्हें और क्या देखना है.. इतना देखा वो कम है क्या?
मैं तो नजरें झुकाए वहाँ खड़ा रहा..
तो वो बोलीं- मैं पूछती हूँ.. उसका जवाब दो.. वर्ना तुम्हारी खैर नहीं।
मैंने कहा- बहन अँधेरा होने की वजह से मैं ज्यादा कुछ नहीं देख पाया।
इस पर वो बोलीं- पिछले 2-3 महीनों से देख रहे हो और बोलते हो कि कुछ नहीं देखा..!
यह सुन कर मैं सन्न रह गया कि वो सब जानती हैं..
पर तभी मेरे दिमाग की बत्ती जली कि वो जानबूझ कर ही मुझको सब दिखा रही थीं।
अब मेरी समझ में आ गया कि वो अपनी चूत क्यों इतनी साफ क्यों रखती थीं और क्यों टॉयलेट में उंगली करके चूत को रगड़ती थीं।
न जाने मुझ में कहाँ से हिम्मत आ गई और उनको बोल दिया- इसका मतलब कि आप जानबूझ कर मुझे सब दिखा रही थीं।
यह सुनकर वो दंग रह गईं क्योंकि उनको मुझसे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी तो वो मुझे देखती रह गईं।
इससे पहले कि वो मुझसे कुछ कहतीं.. मैंने उनसे फिर कहा- लेकिन बहन सच कहता हूँ कि मैंने ज्यादा कुछ नहीं देखा।
इस पर वो बोलीं- और ज्यादा क्या देखना है तुम्हें.. अब भी कुछ देखना बाकी है क्या?
मेरी समझ में नहीं आया कि वो किस टोन में ये मुझसे पूछ रही हैं.. तो मैं ऐसे ही खड़ा रहा।
सो उन्होंने दोबारा वही पूछा।
इस पर मैंने हिम्मत करके बोल दिया- और तो बहुत कुछ दिखाने के लिए है आपके पास.. अगर आप चाहें तो..
इस पर वो जोर से हँस पड़ीं।
उनकी इस हँसी से मुझे बहुत राहत हुई और मेरी हिम्मत और बढ़ गई।
मैंने उनसे हाथ जोड़ के कहा- बहन, क्या मुझे ठीक से दीदार का लाभ मिलेगा।
वो बोलीं- अवश्य मिलेगा.. लेकिन सिर्फ दीदार ही होंगे.. कोई भोग-प्रसाद नहीं लगेगा.. और वो भी दूर से ही।
मेरी तो जैसे किस्मत ही खुल गई.. मैंने उनसे कहा- मुझे मंजूर है।
उन्होंने मुझसे पूछा- पहले ऊपर के दीदार करना चाहोगे कि नीचे के?
मैंने कहा- दोनों के..
इस पर वो हँस कर बोलीं- आज सिर्फ एक ही चीज के दीदार होंगे, पूरे दीदार तो पूर्णिमा के दिन होंगे।
तो मैंने खुल कर कहा- ठीक है.. आज सिर्फ नीचे के दीदार करवा दीजिए.. क्योंकि मेरी रूचि हमेशा से मम्मों की बजाए चूत में ज्यादा रही है।
उन्होंने कटीली अदा से आँख मारी और कहा- ठीक है।
इतना कहने के बाद वो अपनी सलवार नाड़ा खोलने लगीं।
मैंने कहा- लाइए मैं आपकी मदद कर देता हूँ।
वो बड़ी आँखें करके बोलीं- वहीं खड़े रहो.. आगे मत बढ़ना.. वर्ना कुछ नहीं देखने को मिलेगा।
मैं वहीं रुक गया।
उन्होंने सलवार का नाड़ा खोलते ही उसे छोड़ दिया.. सो सलवार फट से नीचे गिर गई।
दोस्तो, क्या कमाल का नजारा था.. एकदम गोरी-गोरी मक्खन जैसी चिकनी.. केले के तने जैसी मस्त गदराई हुई जांघें और उनके बीच में मस्त चूत के उभार से उभरी हुई पैन्टी..
मैं तो सच में पागल हो गया।
यह नजारा देख कर तो मुझे महसूस हुआ कि यह तो मेरी उम्मीद से कई ज्यादा खूबसूरत था।
उनकी पैन्टी ऊपर से थोड़ी भीगी हुई थी.. शायद उनका मूत लगा हुआ था।
वो अपनी पैन्टी उतार ही रही थीं कि मैंने बोला- बहन थोड़ी देर रुक जाइए.. मुझे ऐसे ही देखना है।
इस पर वो रुक गई और हँसने लगीं।
जैसे ही मैंने बहन की पैन्टी को छूने की कोशिश की.. वो पीछे हट गईं और बोलीं- हमारी शर्त क्या थी.. भूल गया गया?
इस पर मैंने कहा- तो फिर आप खुद इसे निकाल दीजिए।
और उन्होंने बड़े ही सलीके से उसे उतार फेंका।
मैंने झट से उनकी पैन्टी उठाई और उसे चूम लिया और उसे जहाँ उनकी चूत का छेद लगा होता है.. सूंघने लगा.. हाय.. क्या कमाल की खुश्बू थी।
मेरी इस हरकत पर वो मुस्कुराईं और देखने लगीं।

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