चाची को उनके बेटे के साथ चोदने की कहानी

तो दोस्तों इसके पहले की कहानी अगर आपने नही पढ़ी है, तो पहले पढ़ लीजिए. अब आयेज

इतने में मैने चाची को आँख दिखा कर इशारा किया की इसी बहाने कुणाल की पॅंट्स उतरवाए, ताकि हम उसकी लुल्ली दिख सके. पहले चाची ने तोड़ा सोचा. लेकिन फिर मॅन तो उन्हे भी था.

चाची: अछा कुणाल बेटा, देख सस्यू ही निकला है ना? या क्या है? ठीक से चेक कर.

कुणाल (उपर से ही टच करते हुए): ये तो कुछ स्टिकी-स्टिकी है मुम्मा.

चाची: हा तो ऐसे नही पता चलेगा ना बेटा. उतार के देख.

वैसे कुणाल यहा आक्टिंग कर रहा था, और वाहा चाची बहाना ढूँढ रही थी. इन सब के बीच मज़े मैं ले रहा था. खैर कुणाल भैया ने भी ज़्यादा इनोसेंट ना बनते हुए बेड से उतरे, और अपनी ट्रॅक्स को नीचे करके पूरी उतार दी. वैसे वो थोड़े मोटे ज़रूर थे, और गोरे ज़्यादा थे मुझसे.

ट्रॅक्स उतारने पर तो उनकी लुल्ली नॉर्मल ही थी. क्यूंकी शायद मुझे और उनकी मम्मी को सेक्स करते हुए देख कर उनका निकल चुका था. वैसे फिर चाची ने कुणाल भैया की छ्होटी सी लुल्ली को अपनी दो उंगलियों से पकड़ा, और तोड़ा चेक करने के बहाने फील लेते हुए उनकी लुल्ली उपर की, और उनकी गोतियाँ वग़ैरा देखने के बहाने से टच किया कुछ सेकेंड्स.

चाची: बेटा सब ठीक है. कोई टेन्षन वाली बात नही है.

राहुल: वैसे चाची इसी बहाने मेरी भी लुल्ली चेक करोगे?

चाची समझ चुकी थी मैं दूसरे रौंद की तरफ इशारा कर रहा था. लेकिन ये सब से मैं तो बड़े मज़े के मूड में था, जिससे मेरा लंड पूरा तो नही, लेकिन आधा ज़रूर खड़ा था. फिर मैं चाची के सामने आया, और मैने भी शॉर्ट्स में से अपनी ब्लॅक लुल्ली निकाल कर चाची को दिखाई. चाची पता नही क्यूँ हस्स पड़ी मॅन ही मॅन में कुछ सोच कर.

चाची: वैसे कुणाल बेटा, पता है इस लुल्ली का काम सस्यू करने के अलावा भी कुछ होता है.

कुणाल: और वो क्या है?

चाची: वो राहुल बताएगा तुम्हे. और फिर अगर (तोड़ा कुणाल को उपर से नीचे देखते हुए) तुम सब सीख गये, तो तुम्हे करने का मौका भी मिल सकता है.

राहुल: एस भैया. ट्रस्ट मे, इसमे बड़ा मज़ा आता है.

मैने फिर बिना वक़्त गवाए अपनी शॉर्ट्स और त-शर्ट पूरी उतार दी.

फिर मैं चाची के कपड़े उतारने लगा, और इस बार तो वो पूरा साथ देने लगी थी. लेकिन चाची के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कुराहट थी और मॅन में काफ़ी ज़्यादा खुशी. वो बस कुणाल का रिक्षन देख रही थी और मैं चाची का. खैर फिर मैने चाची की स्लीव्ले टॉप उतरी और उन्होने अंदर क्रीम ब्राउन कलर की ब्रा पहनी हुई थी, जो मैने उतरी नही.

फिर चाची खुद उठ कर जीन्स उतारने लगी. वो कुणाल की आँखों में देखते हुए, जैसे कोई किसी के लिए कर रहा हो, उसको खुश करने के लिए. फिर उन्होने अपनी पनटी भी उतरी, और सीधे बेड पर लेट गयी.

मैं ठीक उनके नीचे बैठा, और उनकी टाँगो के बीच में अपना मूह डाल कर छूट चाटनी शुरू की. चाची मेरे बालों में उंगलियाँ घुमा रही थी, और कुणाल को देख रही थी. लेकिन यहा तक भी कुणाल का लंड खड़ा नही हुआ था. चाची को इस बात से घबराहट हुई की खड़ा क्यू नही हुआ था अब तक.

चाची: कुणाल बेटा, क्या हुआ? ये सब देख कर कुछ फील नही हो रहा? और वाहा क्यूँ खड़ा है? त-शर्ट उतार के यहा पास में आ ना बेटा.

कुणाल भैया ने त-शर्ट उतार दी, और आ कर हमारे पास में लेट गये. फिर चाची ने एक हाथ में थूक लेकर कुणाल की छ्होटी सी लुल्ली को पकड़ा, और वो उसे हिलने लगी. लेकिन चाची के हाथ बड़े थे, और कुणाल की लुल्ली छ्होटी. वो ठीक से हाथ में नही आ रही थी.

मुझे पता था की भैया का खड़ा कब होता है. तो मैने फिर छूट चाटना बंद किया, और मैने अपनी कड़क लुल्ली को चाची की छूट में डाला, और उनके उपर लेट गया. फिर मैं उन्हे छोड़ने लगा, और इस बार तो चाची का ध्यान बस अपने बेटे पर ही था. बस वो फील ले रही थी.

ये सब देख कर कुणाल भैया को वक़्त नही लगा अपना लंड खड़ा करने के लिए, और वो तुरंत एग्ज़ाइटेड हो गये. ये देख कर चाची और कुणाल काफ़ी खुश हुए, और चाची कुणाल के होंठ अपने तरफ खींच कर उसे किस करने लगी.

कुणाल का तो फर्स्ट टाइम था, तो उसे नही आता था किस करना. वो बस अपना मूह खोल बंद कर रहा था. लेकिन चाची उसे पूरी तरह किस कर रही थी.

राहुल: भैया आओ. आप भी करो अब.

मैं फिर साइड हॅट गया, और कुणाल चाची की टाँगो के बीच आ कर अपनी लुल्ली को छूट पे सेट करने लगा. लेकिन वो अंदर डालने जाता तो स्लिप हो जाता. जिस पर चाची हस्स पड़ी और उन्होने उसके लंड को पकड़ कर छूट के अंदर सेट किया. फिर तोड़ा सपोर्ट दे कर उसका साथ दिया.

फिर क्या था, कुणाल अपनी ही मम्मी को मेरे सामने छोड़ रहा था, और चाची ने उसे बड़ी ज़ोर से गले लगा रखा था. एक मा बेटे का प्यार होता ही इतना अनमोल है, की उसे किसी शब्दों की ज़रूरत नही होती.

फिर कुछ देर बाद भैया ने कुछ बोला भी नही, और सीधे चाची के उपर लेट गये.

चाची: कुणाल बेटा तू ठीक है?

(उसके चेहरे पर हाथ रख के प्यार से पूछते हुए)

कुणाल: एस मुम्मा. ई आम ओके.

ई लोवे योउ मुम्मा.

चाची (कुणाल भैया के फोर्हेड पे किस करते हुए): ई लोवे योउ टू बेटा.

राहुल: चाची फिर अब तो हम भैया को भी अपने ग़मे में बुला सकते है ना?

चाची: हा क्यूँ नही. अब तो हमारा परिवार पूरा हो गया. लेकिन ये बड़ी ना इंसाफी है.

कुणाल: क्या मम्मी?

चाची: इस घर में लॅडीस बस 2 है. तुम लंड वाले 4. ऐसा थोड़ी होता है. तुम सब मिल कर हमारी तो बंद बजा दोगे.

राहुल: तो चाची इसमे मज़े तो आपके और मम्मी के है ना.

वैसे आप सब चाहो तो आपकी किसी फ्रेंड को बुला लो ना. इस बहाने आपको और मम्मी को राहत मिलेगी और हमे भी कुछ एक्सट्रा (आँख मरते हुए).

चाची: हा बेटा, ज़रूर. और कुछ (तोड़ा सार्कॅज़म में पूछते हुए)?

कुणाल: थॅंक योउ मुम्मा, फॉर गिविंग मे तीस चान्स.

चाची: बेटा जब से राहुल जाय्न हुआ था, तब से हम सब चाहते थे की तू भी हमे जाय्न करे. लेकिन खैर चलो आफ्टर ऑल फाइनली हॅपी एंडिंग हो गयी.

नाउ वी ऑल कॅन एंजाय टुगेदर.

तो दोस्तो आपको ये कहानी कैसी लगी, मुझे कॉमेंट्स के द्वारा और नीचे दिए गये मैल ई’द पे मैल करके ज़रूर बताए.

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