हेलो दोस्तों, ये है मेरी पहली सेक्स कहानी का दूसरा पार्ट.
जैसे ही मैने अपना खड़ा लिंग उसकी गांद की लकीर के साथ रगड़ा, वो हल्की सिसकियाँ लेने लगी, और फिर मेरी तरफ मूडी.
चाची बोली: क्या कर रहा है तू? शरम है कुछ?
मैने चुप हो गया और 10 सेक बाद बोला: चाची आप बहुत ज़्यादा खूबसूरत हो. सॉरी मैं खुद को कंट्रोल नही कर पाया.
चाची: लेकिन मैं चाची हू तेरी?
मैने कहा: मेरी कोई गफ़ भी नही है. इसलिए चाची बस एक बार आपसे प्यार करना चाहता हू.
चाची: पागल हो गया है क्या?
मैने कहा: चाची बस एक बार, ये राज़ हम दोनो के ही बीच में रहेगा.
चाची शांत हो गयी. असल में चाची भी गरम थी, लेकिन एक रिश्ते का लिहाज़ भी था, और वहाँ से उनकी अधूरी प्यास भी थी. मुझे इशारा समझ आया, मैने उनका हाथ अपने गरम लंड पे रखा, और अपने हाथ से आहिस्ता से फेरना शुरू करवाया.
1 मिनिट बाद वो मेरा लिंग अब खुद हिलने लगी और कुछ नही बोल रही थी. मैं समझ गया अब लोहा पूरा गरम था. वो अभी भी चुप ही थी.
मैं चाची से गले मिला, और उसके गुलाबी होंठो को चूमने लगा. उन्होने मुझे रोका नही, और कुछ समय में वो भी चूमने लगी वापस. स्मूच की वजह से चाची और मेरी गरम साँसें एक दूसरे से लिपट रही थी.
किस का बाद, चाची ने मेरा लंड छ्चोढा, और मैने चाची की निघट्य उतरी. हम दोनो बहुत उतावला थे. मेरा तो पहला सेक्स था, और चाची भी बहुत सालों की प्यास बुझा रही थी. मैने चाची की ब्रा और पनटी उतरी.
दीं लाइट थी, पर मैं फिर भी चाची का पूरा बदन देख पा रहा था. मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था. चाची का बड़ा-बड़ा बूब्स मेरे सामने था. उनके बूब्स गोल-गोल और थोड़े नरम थे. मैं उनके बूब्स को अपने दोनो हाथो से दबाने लगा, और फिर मैने चूमना शुरू किया तो चाची के मूह से आवाज़ निकली.
मैने चूमना जारी रखा, और साथ ही साथ अब मैं चाची के निपल्स चूसने लगा. चाची की आवाज़ बढ़ने लगी, और निपल्स हार्ड होने लगे.
चाची: हा हा हा.
मैने चूसना जारी रखा, और अपना पूरा मूह उनके बूब्स के अंदर-बाहर करने लगा. चाची की आवाज़े बढ़ने लगी. उनकी साँसें तेज़ होने लगी. बहुत साल बाद वो फिर से एक मर्द के साथ थी, और उनके अंदर का लावा बाहर आने को तैयार था. मेरे तेज़ चूसने से गीली-गीली आवाज़े आने लगी, और चाची ने मेरे बाल पकड़ कर अपना बूब्स के साथ मेरा चेहरा को दबाने लगी.
मैने अपना एक हाथ से चाची की छूट फेरना शुरू किया. चाची की छूट काफ़ी गीली और गरम थी. जैसी की मैने एक उंगली अंदर डाली, चाची उछली और ज़ोर से साँस लेने लगी. आअहह, मैने उंगली करना की स्पीड बधाई और चाची की सिसकियाँ बढ़ने लगी, कुछ ही सेम बाद चाची की टाँगें थरथराई और चाची का पानी निकला.
चाची: ऊऊऊः, ऊवू, चाची चिल्लाई और काफ़ी मदहोश हो चुकी थी.
फिर चाची को होश आया, तो उठी और मुझे लिटाया बेड पे. मैं आसमान की तरह लेता मेरा लिंग काफ़ी हार्ड था, मेरा लंड मोटा है और टोपा तो काफ़ी बड़ा और मोटा है. चाची ने थूक लगाई मेरे लंड पे और आहिस्ता-आहिस्ता मेरे लंड की मालिश करना लगी.
मैने चाची को देखा तो वो मुस्काराई और मेरे लंड को अपने हाथो से उपर नीचे करने लगी. मेरे मूठ मारने में और चाची के मूठ मारने में ज़मीन-आसमान का फराक था. चाची कभी हाथ टाइट करती, तो कभी लूस. मैं पागल हो रहा था.
फिर चाची रुकी और मेरे उपर बैठ गयी, और उसने अपनी छूट को मेरे लंड पे सेट किया. चाची ने मेरा हाथ पकड़ा, और कॉवगिरल पोज़िशन में आहिस्ता से मेरा लंड अंदर ले लिया. ये एक अलग ही फीलिंग थी दोस्तों. मेरे लंड को छूट की गर्मी और गीला-पन्न महसूस हो रहे थे. मैने अपनी आँखें बंद की.
चाची: आआआः एम्म्म.
मैने आँखें खोली तो देखा मेरा और चाची का पेट टच कर रहा था. मतलब मेरा पूरा लंड अंदर था. अंदर काफ़ी गीला था. फिर कुछ सेकेंड्स के बाद चाची ने उपर-नीचे करना शुरू किया. कुछ ही झटकों के बाद चाची ने स्पीड बधाई. मेरा दिल रोज़ धड़क रहा था.
चाची आ आ की सिसकियाँ लगा रही थी. मैं अब काफ़ी एग्ज़ाइटेड हो गया था, और मैने चाची को मोटी गांद दोनो हाथो से पकड़ी और झटके और तेज़ किए. क्यूंकी मेरा पहला सेक्स था, मैं ज़्यादा एग्ज़ाइटेड था, कुछ ही मिनिट बाद मैं झाड़ गया, और पूरा माल मैने चाची के अंदर डाला.
मेरे मूह से आवाज़ निकली. हम दोनो काफ़ी हाँफ रहे थे. फिर चाची मेरे लंड से उठी, और साइड में लेट गयी. कुछ मिनिट तक हम लेते रहे, और मेरा लंड फिर से हार्ड हो गया. इस बार मैं चाची को पूरा सॅटिस्फाइ करना चाहता था.
मैं चाची को बेड पे घोड़ी बनाया, और अपने लंड पे थूक लगा के आहिस्ता से चाची के अंदर डालने लगा. मैने हल्के-हल्के झटके मारे पहले. फिर थोड़ी देर में झटकों की स्पीड बढ़ गयी. चाची के मूह से आवाज़े आनी शुरू हो गयी. उनकी छूट और ज़्यादा गीली होने की वजह से आब पूछ पूछ की आवाज़ भी आने लगी.
चाची अब ज़ोर-ज़ोर से अग अग की आवाज़े निकल रही थी. मैने अपनी रफ़्तार काम की, लेकिन चाची अपने चरमसुख पे थी. वो अपनी गांद को आयेज-पीछे करने लगी. मैने अब हिलना पूरा बंद किया. अब चाची ही तेज़-तेज़ आयेज-पीछे खुद को छुड़वा रही थी.
कुछ मिनिट ऐसा ही चला. चाची की छूट टाइट हो गयी, और मेरे लिंग को खींचने लगी. कुछ ही सेकेंड्स बाद चाची झाड़ गयी, और उनकी छूट से काफ़ी पानी निकला. चाची का पूरा बदन काँपने लगा और वो बिस्तर पे लेट गयी.
अब मैं चाची के उपर चढ़ गया. मेरा लोड्ा अभी भी हार्ड था. चाची ने अपनी टाँगें खोली और मैने अपने लंड को छूट पे सेट किया. मैने पहले ही झटके में पूरा लंड अंदर किया, और पहला से इस बार झटका काफ़ी बारी और तीज़ी से शुरू किया. हमारी चुदाई की ताप ताप आवाज़ पुर कमरे में गूँज रही थी.
अहम्म अहम्म अहम्म अहम्म की आवाज़ चाची से आ रही थी. मेरे झटका इतने वज़नदार थे की चाची ने मेरी स्पीड कम करने की कोशिश की. लेकिन मैं अलग ही दुनिया में था. मैने अपनी पूरी स्पीड जारी रखी, और हमारे बेड के हिलने की आवाज़ आ रही थी.
हम दोनो पसीने में लिपटे थे, और चुदाई बिल्कुल भी रुक नही रही थी. कुछ समय में हम दोनो एक साथ रिलीस हो गये और बेड पे ही सो गये.
कैसी लगी कहानी? आयेज की कहानी अगले पार्ट में.