चाचा के बेटे ने ऑफर किया लंड

ही फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता अपनी न्यू सेक्स स्टोरी लेके आपके सामने हाज़िर हू. मेरी पहले की स्टोरीस को प्यार देने के लिए थॅंक योउ. जिन रीडर्स ने मेरी पिछली कहानियाँ नही पढ़ी है, वो उनको भी ज़रूर पढ़ ले. चलिए बढ़ते है आज की कहानी की तरफ.

पहले मैं अपने बारे में बता डू. मैं 24 साल की हो गयी हू, और मेरा फिगर 34-29-36 है. मैं पुंजब के लुधियाना शहर में रहती हू, और नौकरी करती हू. मुझे देख कर लड़के और मर्द मेरे दीवाने हो जाते है, और मेरी चुदाई करना चाहते है. लेकिन मैं इतनी आसानी से हाथ नही आती. आज की ये कहानी मेरी चाचा के नशेड़ी लड़के से चुदाई की है. तो चलिए शुरू करते है.

मेरा एक कॉंपिटेटिव एग्ज़ॅम था, तो उसके लिए मुझे देल्ही जाना था. पापा ने मुझे कहा की मैं वहाँ किसी होटेल में ना रुक कर उनके डोर के भाई के घर रुक जौ. फिर उन्होने अपने भाई (मेरे चाचा) को फोन लगाया और सब बात बता दी.

चाचा जी बहुत खुश हुए, क्यूंकी सालों बाद मैं उनके घर जेया रही थी. फिर मैं निकल पड़ी ट्रेन में, और ट्रेन चलते ही उनको फोन कर दिया. जब मैं देल्ही पहुँचने वाली थी, तब मैने उनको कॉल किया. चाचा जी बोले-

चाचा जी: बेटा पिंटू वहीं तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा है. मैं उसका नंबर देता हू, तुम उसको कॉल कर लो.

फिर चाचा जी ने मुझे पिंटू का नंबर दिया. अब मैं आपको पिंटू के बारे में बता देती हू.

पिंटू चाचा जी का इक-लौटा बेटा है. उसकी उमर 26 साल है. दिखने में हॅंडसम है, लेकिन पक्का नशेड़ी है. शुरू से ही घर पर सिर्फ़ लाद-प्यार मिला उसको, और कॉलेज जाके वो ग़लत संगत में फ़ासस गया. इसलिए उसको ड्रग्स लेने की आदत हो गयी. अब उसमे बहुत सुधार था. बुत नशा लगने के बाद कोई कहाँ छ्चोढ़ पाता है. वो ड्रग्स तो नही करता है, लेकिन शराब सिगरेट बहुत पीटा है.

फिर मेरी ट्रेन स्टेशन पर पहुँच गयी. मैने उसको कॉल किया तो उसने मुझे अपनी लोकेशन भेज दी. मैने उस वक़्त जीन्स और शर्ट में थी. मेरे कपड़े टाइट थे, जिसमे से मेरी बॉडी शेप पूरी नज़र आ रही थी. मतलब मैं सेक्सी लग रही थी.

फिर मैं उसके सामने पहुँच गयी. मुझे देख कर वो देखता ही रह गया. वो भी हॅंडसम लग रहा था. मैं आयेज बढ़ी और हाथ मिलाया. फिर उसने मेरा समान उठाया और गाड़ी तक ले गया.

हम गाड़ी में बैठ कर स्टेशन से निकल पड़े. रास्ते में हमारी काफ़ी बातें हुई. वो समझदार तो था, बुत एक आदत की वजह से बदनाम था. देल्ही की ट्रॅफिक की वजह से गाड़ी बड़ी स्लो चल रही थी. उसकी नज़र बार-बार मेरी सेक्सी लेग्स पर जेया रही थी. मुझे अछा लग रहा था, क्यूंकी मर्दों का अटेन्षन मुझे पसंद है.

फिर जैसे-तैसे ट्रॅफिक से निकल कर हम चाचा जी के घर पहुँचे. चाची ने बड़ी गरम-जोशी से मुझे गले लगा कर मेरा स्वागत किया. चाचा भी बहुत खुश हुए और मुझे आशीर्वाद दिया.

फिर मुझे मेरा रूम दिखाया गया. वो रूम असल में पिंटू का था, जो मुझे दिया गया था. मैं वहाँ चली गयी, और पिंटू ने मेरा समान लाके रूम में रख दिया. फिर मैं फ्रेश हुई और नीचे आई. शाम हो गयी थी. चाची ने पकोडे और छाई बनाई थी.

हम सब ने बहुत बातें की और छाई-पकोडे का मज़ा लिया. फिर ऐसे ही बैठे रहे, और टीवी देखते रहे. बातें करते हुए रात हो गयी. चाची डिन्नर की तैयारी करने लगी. तभी पिंटू उठा, और घर के बाहर जाने लगा. मैने उसको पूछा-

मैं: पिंटू वीरे, डिन्नर नही करेगा हमारे साथ?

पिंटू: मुझे तोड़ा काम है. आप लोग करो डिन्नर. मैं करके अवँगा बाहर से.

ये बोल कर वो चला गया. उसको जाते देख चाचा जी का मूह बन गया. वो कुछ बड़बड़ा रहे थे. फिर मैने चाचा जी से पूछा-

मैं: क्या हुआ चाचा जी. आप उसके बाहर जाने पर नाराज़ क्यूँ हो रहे हो?

चाचा जी: पुत्तर जी, ये बाहर पीने के लिए जेया रहा है. पता नही इसकी ये आदत कब जाएगी. भगवान कब सुनेगा हमारी.

मैं: कोई बात नही चाचा जी. ड्रग्स छ्चोढ़ दी ना उसने. ये भी छ्चोढ़ देगा.

चाचा: बस उमीद ही कर सकते.

फिर हमने डिन्नर किया, और अपने-अपने रूम में सोने के लिए चले गये. मैने रूम में आके पाजामा और त-शर्ट पहन लिए. फिर मैं बेड पर लेट गयी. नींद नही आ रही थी, तो मोबाइल चलाने लगी.

थोड़ी देर बाद मेरी खिड़की पर बाहर से लाइट पड़ी. कोई गाड़ी रुकी थी घर की पार्किंग में. मैने खिड़की पर जाके देखा तो पिंटू आ गया था. वो गाड़ी से बाहर निकला. उसके पैर लड़खड़ा रहे थे. आँखें लाल थी. सॉफ पता चल रहा था की उसने बहुत दारू पी थी.

फिर वो लड़खड़ते हुए घर के अंदर दाखिल हुआ. मेरे रूम की लाइट बंद थी. वो घर आया, और सीधे मेरे रूम में आ गया (जो असल में उसका रूम था). मैं अभी भी खिड़की पर खड़ी थी, तो उसने मुझे देखा नही था. वो नशे में धुत था, तो सीधे बेड पर लेट गया. वो मूह में कुछ बड़बड़ा रहा था.

रूम में हल्की रोशनी थी, क्यूंकी छ्होटा बल्ब जल रहा था. तभी मैने सोचा मैं रूम से बाहर चली जाती हू. क्यूंकी वो तो सो गया था बेड पर.

ये सोच कर मैं रूम से बाहर जाने लगी. मेरे कदमों की आवाज़ उसको सुन गयी और वो बोला-

पिंटू: रुक जेया ना यार पूजा. ये ले चूस इसको प्लीज़.

ये बोल कर उसने आँखें बंद किए हुए ही अपनी पंत खोली, और फिर अंडरवेर नीचे करके अपना लंड बाहर निकाल लिया. फिर वो बोला-

पिंटू: कहाँ जेया रही हो पूजा? ज़रा चूस दो इसको भी.

मेरी नज़र उसके लंड पर पड़ी तो काफ़ी बड़ा और मोटा लंड था उसका. ऐसा लंड जिसको देख कर कोई भी लड़की खुश हो जाए, जैसे मैं हो गयी थी. अब मैं सोच रही थी की क्या करू. मुझे लगा की पूजा उसकी कोई गर्लफ्रेंड होगी, और नशे में वो मुझे पूजा समझ रहा होगा.

फिर वो लंड हाथ में लेके हिलने लगा और बोला: पूजा, आजा मेरी जान. आजा तेरी प्यास बुझा डू.

दोस्तों मैने क्या किया, और इसके आयेज क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पढ़िएगा.

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