चाचा ने की दर्द भारी पहली चुदाई

मेरा नाम माँया है. मैं 19 साल की हू. मैं अपने मम्मी-पापा के साथ रहती हू. मेरा कोई भाई-बेहन नही है. मैं अकेली बेटी हू मेरे मम्मी पापा की.

मेरा रंग काफ़ी सफेद है. मैं बहुत पतली हू, और मेरे होंठ पुर गुलाबी है. मैं अभी कॉलेज जेया रही हू. मेरे मम्मी-पापा हमेशा जहाँ भी जाते थे, मुझे लेकर जाते थे. कभी भी अकेले नही छोढ़ के गये. पर इस बार वो लोग पापा के एक फ्रेंड के शादी में जेया रहे थे. लेकिन मेरे एग्ज़ॅम्स थे, इसलिए मैं नही जेया सकती थी.

तो उन्होने सोचा की चाचा जी को यहाँ पे मेरे साथ रख के शादी में चले जाए. मेरे चाचा जी का नाम भुवन है. उनकी आगे करीबन 42 साल होगी. उनकी शादी हो चुकी है, लेकिन उनका कोई बच्चा नही है.

चाचा जी दूसरे शहर में रहते है मेरे दादा-दादी के साथ, और यहाँ मैं, मम्मी और पापा अलग रहते है. मम्मी-पापा के शादी में जाने के बाद मैं अपने कमरे में पढ़ रही थी, की तभी चाचा जी मेरे कमरे में आए, और मुझसे बात करने लगे.

मैं अपनी चेर पे बैठी थी, तो वो आके मेरे टेबल के पास खड़े थे. वो मुझसे पढ़ाई का पूच रहे थे. फिर वो खड़े थे और मैं पढ़ने लग गयी फिर से.

चाचा जी ऐसे ही कुछ देर खड़े रहे. फिर अचानक उन्होने उनका हाथ मेरे कंधे पे रख दिया. मैं अचानक दर्र गयी. तो उन्होने कहा-

चाचा जी: काफ़ी टेन्षन में लग रही हो. मैं तुम्हारा कंधा दबा डू?

मैने भी उनसे कहा: हा, एग्ज़ॅम की टेन्षन है.

फिर वो मेरा कंधा दबाने लगे, और फिर मुझे महसूस हुआ की उनका हाथ मेरे कंधे से नीचे जेया रहा था. मैं एक कुर्ता और पंत पहनी थी तब. उनका हाथ नीचे आके मेरे चेस्ट एरिया पे रुक गया.

मुझे कुछ समझ नही आ रहा था, की मैं क्या करती, और फिर वो मेरी चुचियो को दबाने लग गये. मैं शॉक्ड थी. मैने उनका हाथ जल्दी से हटा दिया, और बोली-

मैं: ये आप क्या कर रहे है चाचा जी?

तो उन्होने कहा: मैं क्या कर रहा हू?

मैने कहा उनसे: आप जाइए यहाँ से!

लेकिन वो नही गये, बल्कि उन्होने फिर से पूछा की वो क्या कर रहे थे? मुझे अब गुस्सा आने लगा. मैने अपनी चेर से उठ के उन्हे कहा-

मैं: आप जाइए यहाँ से, वरना मैं मम्मी को बता दूँगी.

तो उन्होने एक झटके में मेरी कमर पकड़ के मुझे पास खीच लिया. उनके और मेरे बीच अभी बहुत कम जगह थी. मैं उनका हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी.

फिर उन्होने मेरे कान के पास आके बोला: क्या कहेगी अपनी मा को हा?

और उन्होने मेरे कान और चीक्स को किस कर दिया. इससे मेरे जिस्म में अजीब सा करेंट दौड़ गया. फिर वो फिर से मेरी चुचिया दबाने लगे. इस बार मैं मदहोश होने लगी, और कुछ नही कर पा रही थी. वो मेरे गले को चूम रहे थे, और मैं मोन कर रही थी.

फिर उन्होने मुझे छोढ़ दिया, और बोला की वो मेरा लिविंग रूम में वेट कर रहे थे, और मैं कुछ अछा पहन के जौ उनके पास. तब तक मेरे अंदर भी आग लग चुकी थी. मैं अपना वॉर्डरोब खोल के एक सिल्क का स्लीपिंग रोब निकली. वो रेड कलर की थी, और मॅक्सी थी. उसके आर्म्स लेस की थी. मैने आपना कुर्ता उतरा, और जल्दी से उसे पहन लिया. फिर अपने बाल भी खोल दिए. और फिर मैं तोड़ा पर्फ्यूम लगा के लिविंग रूम की तरफ जाने लगी.

चाचा जी वहाँ बैठे थे. मेरा इंतेज़ार कर रहे थे. जब उन्होने मुझे देखा, वो शॉक्ड थे. फिर वो मुस्कुराए, और अपनी जगह से उठ गये, और मेरे पास आ गये. मैं वहाँ खड़ी थी. उन्होने आके मेरी कमर पकड़ ली और अपने पास खींच लिया मुझे. फिर उन्होने अपने एक हाथ से मेरे चेहरे को पकड़ा, और अपने होंठ मेरे होंठो के उपर रख दिए. वो मुझे चूमते गये.

काफ़ी देर चूमने के बाद वो अपना हाथ नीचे की तरफ ले जेया रहे थे. फिर उन्होने अपना हाथ मेरी पनटी के अंडार डाल दिया, और छूट मसालते रहे. वो अपनी स्पीड बढ़ते रहे, और मेरे लिए खड़ा होना भी मुस्किल होता जेया रहा था.

मैं सिर्फ़ “एम्म्म एम्म्म” कर रही थी. फिर उन्होने अपना हाथ निकाला, और मेरा रोब खोल दिया. लेकिन उन्होने पूरा उतरा नही. उसके बाद उन्होने मेरा ब्रा ज़ोर से खीच के फाड़ दिया. फिर उन्होने मुझे टेबल पे लिटाया, और मेरी चुचियो को एक हाथ से ज़ोर-ज़ोर से दबा रहे थे, और एक को चूम रहे थे.

ऐसे बहुत समय करते रहे. मैं मोन कर रही थी. मुझसे सहा नही जेया रहा था. फिर जब उनका मॅन भर गया, उन्होने मेरे चुचियों को छ्चोढ़ दिया. उसके बाद उन्होने मेरी पनटी भी उतार दी, और कही फेंक दी. फिर उन्होने मुझे खड़ा कर दिया.

अब मैं खड़ी थी. वो मेरे सामने घुटने टेक के पहले फिंगरिंग किए. फिर वो मेरी छूट को चाटने लगे. उन्होने मेरा एक पैर उपर कर दिया. मैं खड़ी नही हो पा रही थी. मैं सिर्फ़ “एम्म्म और आहह” कर रही थी. लेकिन वो चाट-ते गये. मैं अब पूरी गिरने वाली थी, की मैने उनसे कहा-

मैं: चाची जी प्लीज़, मुझसे खड़ा नही हुआ जेया रहा.

उन्होने कहा: चुप कर, और चुप-छाप खड़ी रह.

मैने उनसे फिर कहा की मैं गिर जौंगी. फिर उन्होने मुझे गोद में उठाया, और सोफा में लिटा दिया. और वो मेरे उपर थे अब. वो फिर से मेरी छूट को चाटने लगे. फिर जब उनका मॅन हो गया तब खड़े हो कर उन्होने अपने कपड़े उतार दिए.

वो उनका लंड मेरे मूह में डालना चाहते थे. मैने माना कर दिया, तो वो मेरा चेहरा ज़ोर से पकड़ के डालने की ट्राइ किए. लेकिन मैं नही मानी. फिर उन्होने मुझे खड़ा किया, और मेरे बूम पे मारने लगे.

मैं आ आ करके चिल्लाने लगी. फिर उन्होने मेरे बालों को खींच के कहा: मेरी बात नही मानेगी तो इससे भी बुरा होगा. अब डाल मूह में.

फिर मैने चुप-छाप उनका लंड अपने मूह में डाल लिया, और चूस्टी रही. काफ़ी देर चूसने के बाद उन्होने लंड निकाल लिया. फिर उन्होने मुझे खड़ा करके लिटा दिया सोफे पे फिर से. अब वो मेरी छूट को दबा रहे थे. वो अपना लंड मेरे अंदर डालने ही वाले थे की मैने कहा-

मैं: नही चाचा जी, मुझे बहुत दर्र लगता है. इतना रहने देते है.

तो वो मेरी तरफ गुस्से में देखने लगे. फिर उन्होने मेरी एक टाँग उपर कर दी. तो मैने अपना हाथ अपनी छूट पे रख दिया. वो मेरे हाथ को हटाने की कोशिश कर रहे थे. फिर उन्होने मेरा हाथ हटा दिया, और एक ही झटके में अपना लंड डाल दिया मेरे अंदर.

मैं चीख उठी: आहह.

बहुत दर्द हो रहा था तब, बहुत ज़्यादा. मैने कभी ऐसा कुछ नही किया था पहले.

मैं चाचा जी से कहती हू: प्लीज़ आहह चाचा जी, निकाल दो आहह. प्लीज़, बहुत दर्द हो आहह रहा है.

लेकिन मेरी एक ना सुनी उन्होने, और उपर से स्पीड बढ़ते रहे वो. वो मुझे छोड़ते गये, और छोड़ते गये. धीरे-धीरे मुझे बहुत मज़ा आने लगा, और मैं उनको ज़ोर-ज़ोर से करने को बोलने लगी. और ऐसे ही हमारी चुदाई पूरी रात चलती गयी.

error: Content is protected !!