बस में मिली लड़की के साथ सेक्स का मजा

दोस्तो नमस्कार, मैं विप्लव आज एक बार फिर से आपके लिए अपने जीवन की एक और सच्ची चुदाई की कहानी लेकर आया हूँ.

आपने मेरी पहली कहानी
प्यासी ननद और भाभी की जयपुर के रास्ते में चूत चुदाई
पढ़ी. इस कहानी के लिए आप लोगों के बहुत सारे मेल भी मिले, उसके लिए सभी चूत और लंड वालों का धन्यवाद.

हुआ यूं कि मुझे एक शादी के लिए देहरादून से आगे कलसी नगर जाना था, तो मुझे रात को ठीक दस बजे दिल्ली आइएसबीटी से कलसी की बस पकड़नी थी. मैं ठीक 9.30 पर बस अड्डे पहुंच गया. शनिवार होने के कारण बस में भीड़ कुछ ज्यादा ही थी. चूंकि मैंने अपनी सीट ऑन लाइन बुक कर दी थी इसलिए मैं बस में अपनी रिजर्व सीट देखने लगा. मैंने देखा कि मेरी सीट पर एक जवान लेडी बैठी थी. उससे पूछने पर पता चला कि वो बिना बुकिंग के बैठी है और वो अकेली ही थी. ठीक दस बजे बस चल दी.

सर्दी का मौसम था. दोस्तो आप समझ सकते हो कि जब आप अकेले कोई सफर करते हो और साथ में आपको कोई लेडीज मिल जाए तो सफर का मजा दोगुना हो जाता है. वैसे हर किसी की यही तमन्ना होती है कि सफर में कोई मस्त सा हमसफर मिल जाए.

तभी कंडक्टर आया और उसने मेरा टिकट चैक किया. फिर उसने उन मैडम से उनका टिकट पूछा तो उसने कहा कि मेरा टिकट विकास नगर का है.
उस महिला के मुँह से सुनकर मुझे अन्दर से बड़ी खुशी मिली कि 7 घंटे ये माल मेरे साथ ही रहेगी.

कंडक्टर के जाने के कुछ देर तक हम दोनों चुप बैठे रहे. फिर उसने ही मुझसे पूछा- आप कहां से आए हैं?
मैंने कहा- गुड़गांव से.
वो बोली- मैं भी गुड़गांव में ही रहती हूँ.

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उससे बात होने लगी तब मालूम चला कि वो भी किसी आईटी कम्पनी में नौकरी करती थी. मेरी उससे कुछ ज्यादा ही बातें होने लगीं. बातों से वो काफी खुले विचारों की लगी. बातों ही बातों में मैंने उसका नाम पूछा, उसने अपना नाम कोमल बताया. यूं ही बातचीत करते रहने से पता भी नहीं चला कि हम कब उत्तरप्रदेश के नगर खतौली पहुंच गए. बस रुक गई और हमने वहां खाना खाया, जिसका बिल मैंने दे दिया.

अब बस चल दी. सर्दी बढ़ गई थी तो मैंने अपना शॉल बैग से निकाल लिया. कोमल तो पहले से ही लिए हुए थी.

कुछ देर बाद कोमल को नींद आने लगी तो उसका सिर मेरे कंधे पर आने लगा. मैंने भी कोमल को अपना पूरा कंधा दे दिया. मैं भी सोने का नाटक करने लगा. मैंने भी अपना मुँह कोमल की ओर कर लिया. उसकी सांसें मुझे महसूस हो रही थीं.
मैंने अपना बांया हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया, हालांकि उस समय मेरी भी गांड फट रही थी कि कहीं ये कुछ बोल ना दे. लेकिन उसने कुछ नहीं बोला क्योंकि वो नींद में थी.

थोड़ी देर में उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख लिया. दोस्तो इससे मुझे हरी झंडी मिल गई. अब मैंने अपना शॉल भी उसके ऊपर कर लिया और उसकी जांघों को सहलाने लगा. कोमल मेरे बिल्कुल करीब आ गयी. उससे सटते हुए मैं अपना एक हाथ उसके चुचे पर रख कर सहलाने लगा. मेरा लंड खड़ा हो गया था. अब मैं बिल्कुल पक्का हो गया था कि कोमल सोई नहीं है, वो भी मम्मों का मजा ले रही है.

मैं थोड़ा सा उसकी तरफ को घूम गया और अपना दाहिना हाथ कोमल की जैकेट में डाल दिया. लेकिन जिप टाइट होने के कारण मेरा हाथ अन्दर तक नहीं जा रहा था. कोमल समझ गयी, उसने अपनी जिप खोल दी. जिप खुलते ही मैंने अपना हाथ अन्दर डाल दिया और उसकी टी-शर्ट को भी ऊपर कर दिया. मैंने हाथ के स्पर्श से महसूस किया कि कोमल का निप्पल एकदम टाइट हो चुका था.

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मुझे उसके साथ हरकत करते वक्त ऐसा लग रहा था, जैसे आज समय बहुत ही जल्दी गुजर रहा हो. हम रुड़की पहुंच चुके थे. बस 5 मिनट के लिए उधर रुकी और चल दी. मैंने कोमल को अपने दोनों घुटनों पर लेटा लिया. मेरा हाथ उसके मम्मों को सहला रहा था. उसका मुँह बिल्कुल मेरे लंड पर था.

मैंने अपना एक हाथ पीछे से उसके लोवर में डाल दिया, उसने पेंटी पहनी थी, उंगली चूत तक गई तो मालूम हुआ कि कोमल की चूत से पानी निकल रहा था. मैंने अगले ही पल अपनी दो उंगलियां कोमल की चूत में डाल दीं और उंगली से ही चूत चुदाई करने लगा.
इधर कोमल ने भी मेरे लोवर में डालकर मेरा लंड पकड़ लिया. मेरे लंड से भी पानी निकल रहा था. मैंने अपने लंड को शॉल से साफ किया और अपने लंड को पकड़कर कोमल के मुँह में लगा दिया. कोमल धीरे धीरे मेरा लंड चूसने लगी. इस सफ़र में कोई दिक्कत भी नहीं हो रही थी.

बस धीमी रफ्तार से पहाड़ी रास्ते में पहुंच चुकी थी. आप लोग जानते ही हो कि जब बस पहाड़ी रास्ते में चलती है, तो बस हिलती डुलती है. वही हो रहा था.

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