बस में मिली आंटी ने घर बुला कर दिया मस्त मजा

नमस्कार दोस्तो, मैं 24 साल का हूँ और बेंगलूर का रहने वाला हूँ।
मैं एक सुन्दर लड़का हूँ मेरी हाइट 5.8 है।

यह मेरी पहली स्टोरी है तो आप सभी पढ़ने वालो का प्यार मैं आप से अच्छा रेस्पॉन्स चाहूँगा।

बस में मिली आन्टी के बदन का स्पर्श सुख

बात उन दिनों की है जब मैं अपने बी.टेक के तीसरे साल में था भुवनेश्वर में हमारा कॉलेज सिटी से काफ़ी दूर था तो भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन आने के बाद में 2 घंटे बस में सफर करना पड़ता था।

मैं गर्मी की छुट्टियों के बाद कॉलेज आ रहा था, दोपहर के 2 बजे होंगे जब मैंने स्टेशन से बस ली कॉलेज जाने के लिये!

मेरे पास बहुत सारा सामान था तो मैं जल्दी जल्दी में बस में चढ़ा और जहाँ सीट मिली, मैं बैठ गया।

अगले स्टॉप में बहुत सारे लोग बस में चढ़े तो काफ़ी भीड़ हो गई।
मेरी सीट के पास में एक आंटी खड़ी थी, मैंने उनको सीट ऑफर की लेकिन उन्होंने मुझे मना कर दिया क्योंकि मेरे पास सामान बहुत था और मुझे थैंक्स बोल के मुस्कुरा दी।

बस ऐसे ही 30 मिनट बीत गये, आंटी दूसरी तरफ मुँह करके खड़ी थी, उनकी उम्र 35 की रही होगी, देखने में वो काफ़ी खूबसूरत थी और फिगर भी मस्त था।
उनके बूब्स काफ़ी बड़े थे, उनका फिगर 36-30-38 रहा होगा, हल्की मोटी थी पर बहुत सेक्सी लुक था उनका!

कुछ देर के बाद जब बस में भीड़ और बढ़ गई तो आंटी ने अपने बदन को थोड़ा एड्जस्ट किया और मेरी तरफ थोड़ा और पास आ गई लेकिन अभी भी उनका चेहरा मेरी तरफ नहीं था, इस बार उनका पिछवाड़ा थोड़ा सा मेरे हाथ से टच हो रहा था।

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मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई लेकिन थोड़ी देर बाद मेरा मन डोलने लगा और मेरे मन में बुरे ख्याल आने लगे, मैंने अपना हाथ थोड़ा सीधा किया और उनकी कमर को छुआ।
उन्होंने कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया।

फिर 5 मिनट के बाद मेरा मन और बढ़ गया और मैं अपनी उंगलियों से उनके चूतड़ों को छूने लगा।
इस बार वो थोड़ा पीछे मुड़ी जैसे उन्हे पता चल गया हो… पर कुछ बोली नहीं।

मैं तो बिल्कुल डर गया और हाथ हटा लिया।
दस मिनट के बाद मैंने फिर से कोशिश करने की सोची और अपनी उंगलियाँ फिर उनके कूल्हों के पास ले गया और धीरे धीरे उनके कूल्हों को सहलाने लगा साड़ी के ऊपर से!

इस बार उन्होंने अपना बदन थोड़ा हिलाया लेकिन मुड़ कर नहीं देखा। मैंने इसको पॉज़िटिव रेस्पॉन्स की तरह लिया और उनके कूल्हों को पूरी तरह सहलाने लगा।
मैं तो काफ़ी उत्तेजित हो गया था, एक हाथ से अपने लंड को सहला रहा था पैंट के ऊपर से तो दूसरे हाथ से उनके चूतड़ों को!

मैं काफ़ी देर तक ऐसे ही करता रहा, आंटी भी काफ़ी मज़े ले रही थी लेकिन बुरी किस्मत कि मेरा स्टॉप आ गया और मैं आंटी की तरफ स्माइल करते हुये उतर गया।

जब मैं बस से उतरा तो देखा आंटी भी उतर गई हैं और मेरे पीछे खड़ी थी।

आंटी को फ़ोन नम्बर दिया

मैं रिक्शे वाले को बुला रहा था क्योंकि मेरे हॉस्टल का फासला 500 मीटर था।
स्टॉप से फिर आंटी मेरे करीब आई, अब मैं भी समझ गया था कि आंटी क्या चाहती हैं।
तो मैंने एक पेपर पर अपना फोन नंबर लिखा और हल्के से उनकी हथेली पर रख कर आगे बढ़ गया।

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