अपनी बूढ़ी नौकरानी के साथ लेज़्बीयन सेक्स

हाई मेरा नाम शेफाली हे. ये मेरी पहली कहानी हे और मुझे पूरा यकीन हे की आप को ये कहानी पसंद आएगी. ये सची कहानी नहीं हे बस अपने विचारों को शब्दों का स्वरूप दिया हुआ हे. ये स्टोरी में आप पढेंगे की कैसे मैंने अपनी 45 साल की कामवाली के साथ लेस्बियन सेक्स किया.

मेरे घर में मैं और मेरी मोम ही रहते हे. डेड ने 6 साल पहले मेरी माँ को डिवोर्स दे दिया था. ललिता आंटी हमारे यहाँ पिछले 4 साल से काम करती हे. वो रोज सुबह 9 बजे आती हे और लगभग 12 बजे चली जाती हे. और शाम को भी 4 बजे से 6 बजे तक वो वापस काम के लिए आती हे.

गर्मियों की छुट्टियां चल रही थी और मैं घर पर ही रहती थी. ललिता आंटी भी विडो तो ज्यादातर साडी एक रंग की साडी ही पहनती थी. गर्मियों के दिनों में उनका ब्लाउज पसीने से भीग जाता था और उनके निपल्स दिखने लगते थे. जब वो कुछ काम के लिए हाथ ऊपर उठाती थी तो उनके बगल के बाल भी साफ़ नजर आते थे. उनके बगल के बाल और निपल्स देखकर मेरी पेंटी गीली हो जाती थी. मन करता था की बस जाऊं और उनके निपल्स चूस लूँ और उनकी बगल का पसीना भी चाट लूँ. मैं रोज रात को उनको सोचकर अपनी चूत में ऊँगली करती थी.

एक बार मोम को 4 5 दिन के लिए बहार जाना था तो उन्होंने ललिता आंटी को बोला की आप रात को यही सो जाना और इसका ध्यान रखना. मैं भी खुश हो गई की शायद अब मुझे उनके साथ सोने का मौका मिल जाएगा. फिर जब मोम के जाने का वक्त आया तो आंटी अपने एक बेग बनाकर ले आई और मैंने उसे कहा की आप मेरे कमरे में ही सोना क्यूंकि मुझे डर लगता हे रात को.

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फिर वो अपने काम में लग गई. मैंने अपने कमरे में लेपटोप के ऊपर एक लेस्बियन पोर्न पिक्चर लगाईं. और मैं बाथरूम में जाकर छिप गई. वो मेरे कमरे में सफाई करने आई तो एक बार तो पोर्न देखकर चौंक गई.

फिर उन्होंने इधर उधर नजर घुमाई और जब उन्हें लगा की कोई नहीं हे तो वो और करीब आकर देखने लगी. उनकी बॉडी गर्म होने लगी और वो अपने बूब को दबाने लगी. मुझे ये सब देखकर मजा आ रहा था क्यूंकि इस से ये पता चल गया था की वो लेस्बियन में इंटरेस्टेड हैं. फिर मैंने हलकी सी बाथरूम में आवाज करी जिस से वो फटाफट कमरे से बहार चली गई.

मैं नहाकर निकली तो मैंने सफ़ेद टॉप पहन लिया बिना ब्रा के और गिले बाल खुले छोड़ दिए टॉप के ऊपर और बहार आ गई. टॉप ढीला भी था और कटस्लीव थी. गिले बालों के कारण टॉप भी गिला हो रहा था और बूब्स से चिपक रहा था जिस से निपल दिखने लगे थे. आंटी बार बार मेरी तरफ देखती और नजरें फिरा लेती. उनका काम में मन नहीं लग रहा था.

थोड़ी देर बाद वो खाना खाने बैठ गई. मैं उठी और पानी के बहाने रसोई में गई. फिर जान बूझकर ग्लास उनके सामने गिरा दिया और जैसे ही झुकी उनको मेरे बूब्स को दर्शन हो गए. उनकी आँखे फटी की फटी रह गई. वो लगातार मेरे बूब्स देख रही थी. मैं भी और धीरे धीरे उठी जिस से उन्हें पूरा मजा मिले. वो टुकटुक मेरे बूब्स ही देखती रही.

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जब उन्होंने मेरी तरफ देखा तो पाया की मैं भी उन्हें ही देख रही हूँ. वो डर गई और इधर उधर देखने लगी. थोड़ी देर बाद वो बोली मुझे नींद आ रही हे और वो कमरे में सोने चली गई. मैं बहार टीवी देख रही थी तभी मुझे धीमी सिसकियों की आवाज आने लगी. मैंने कमरे में धीरे से झाँका तो देखा आंटी ने साड़ी ऊपर उठा रखी हे और वो अपनी चूत को ऊँगली से रगड़ रही थी. उनकी चूत पर घना जंगल था. उसे देख मेरे मुहं में भी पानी आ गया.

मैंने चुपके से उनकी फोटो खिंच ली और कमरे से बहार निकल आई. फिर शाम का वक्त हो गया. मैंने कहा मैं अपनी फ्रेंड के घर जा रही हूँ और एक घंटे में आउंगी आप खाना तैयार रखना. वो बोली ठीक हे. फिर मैं एक घंटे बाद आई और अपनी फ्रेंड से डिलडो, हेंडकफ, व्हिप्स वगेरह सामान ले आई.

रात को खाना काने के बाद हम कमरे में चले गए. आंटी बोली मैं निचे सो जाती हूँ. मैंने बोला नहीं आप यही सो जाओ. थोड़ी देर बाद उनकी खर्राटें की आवाज आने लगी जिस से मेरी नींद खुल गई. मैंने देखा उनकी साडी घुटनों तक आ चुकी थी. उनकी चिकनी टाँगे देखकर मेरी चूत गीली होने लगी. मैंने धीरे से एक हाथ उनके बूब पर रख दिया और सहलाने लगी. धीरे धीरे उनके पास गई और निपल दबाने लगी. उनका कोई रिएक्शन नहीं आया तो मैंने एक हाथ उनकी साडी निचे से डाला और साडी ऊपर कर दी जब तक उनकी झांटे नहीं दिखने लगी.

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