भैया से अपनी चूत फड़वा ली

bhaiya se apni chudai karai यह कहानी उस समय की है जब मैं बारहवीं की परीक्षा देने के बाद इंजीनियरिंग के टैस्ट देने के लिए इलाहबाद अपनी मौसी के घर गई थी। वैसे मेरी मौसी के घर सिर्फ दो लोग रहते हैं, मेरी मौसी और उनका लड़का सौरभ… मेरे मौसा की मौत दो साल पहले कैंसर की वजह से हो गई थी इसलिए मेरी मौसी को जॉब करनी पड़ती है… वो बैंक में कैशियर हैं, उनका पूरा दिन बैंक के काम में बीत जाता है… और सौरभ जो मुझसे एक साल छोटा है वो अभी गयारहवीं पास करके बारहवीं में आया है।

मेरी मौसी का घर बहुत छोटा है, दो कमरे, एक रसोई और कमरे से ही जुड़ा बाथरूम है।

मैं पिछले साल वहाँ आई आई टी की परीक्षा देने गई थी मैं तीन दिन पहले ही वहाँ पहुँच गई थी।

तब मौसी ऑफिस के काम से आउट ऑफ़ स्टेशन थी और अगले दिन रात तक आने वाली थी। घर में सिर्फ सौरभ था। मैं सुबह सुबह वह पहुँच गई थी।

मौसी के कमरे में ही मैंने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी… दोपहर में खाना खाने के बाद मैं और सौरभ थोड़ा घूमने चले गई और फिर रात का खाना बाहर ही खाकर आए। हमें वापस आने में रात के दस बज गए थे। मैं मौसी के कमरे में पढ़ाई करने चली गई और पढ़ाई करते करते सुबह के चार बज गए…

मुझे जोरों की प्यास लगी थी, मैं पानी पीने के लिए रसोई में गई, वापस आते समय देखा कि सौरभ के कमरे की लाइट जल रही थी और दरवाजा भी थोड़ा खुला था। मैं दरवाजे की तरफ बढ़ी और मैंने अंदर की तरफ देखा तो मुझे यकीन नहीं हो रहा था जो मैंने देखा। मानो कि आसमान नीचे और ज़मीन ऊपर चली गई हो !

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मैंने देखा कि सौरभ अंदर बैठ कर ब्लू फिल्म देख रहा था.. इतना छोटा लड़का और ऐसी हरकतें.. और मैं भी बाहर से खड़े होकर उसकी हरकतें देखने लगी।लगभग आधा घंटा ब्लू फिल्म देखने के बाद वो उठकर बाथरूम में चला गया और उसने बाथरूम का दरवाज़ा नहीं बंद किया था, शायद वो ब्लू फिल्म देखने के बाद जोश में आ गया था और अपने अंदर की वासना को शांत करने गया था…

मैंने बाथरूम के अंदर देखना चाहा पर मैं अचानक दरवाजे पर बहक सी गई… और दरवाज़ा पूरा खुल गया, मैं वहाँ से जोर से भागी पर दरवाज़ा खुलने के शोर से सौरभ बाहर आ गया और शायद उसने मुझे वहाँ से जाते हुए देख लिया…

मैं अपने कमरे में चली गई और वहाँ से देख रही थी। सौरभ परेशान दिख रहा था, शायद उसे डर था कि मैंने जो देखा है वो मैं किसी को बता न दूँ। वह बेचारा डर के मारे एकदम पसीने-पसीने हुआ जा रहा था, मानो कि उसने शर्ट पानी में भिगो कर पहनी हो… उसकी इस हालत को देख कर मेरे भी अंदर आग लग रही थी और उसके ऊपर दया आ रही थी…

मैंने सौरभ को बुलाया, वह मेरे कमरे में आया, मैंने पूछा- क्या हुआ?

उसने कहा- कुछ नहीं…

“तो फिर इतने परेशान क्यों हो? क्या बात है?”

उसने फिर बोला- कुछ नहीं दीदी…

मैंने कहा- शर्माओ मत, बोलो…

उसने सर झुकाते हुए कहा- सॉरी दीदी..

“पर किस लिए?”

“प्लीज, जो भी आपने देखा, किसी को मत बताइएगा…”

“अरे पगले, यह भी कोई कहने की बात है क्या?”

उसने मुस्कुराते हुए कहा- मैं डर गया था…

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मैंने उसके गाल पर हाथ फेरते हुए कहा- अब ठीक है न?

उसकी मुस्कराहट और बढ़ गई !

“कब से कर रहे हो ये सब?”

“दीदी आप भी ना !”

“अरे तू इतना शर्माता क्यों है? बता ना !”

“अरे छोड़िए इस बात को !

“ठीक है, पर ज्यादा मत कर ये सब ! तेरी सेहत पर असर पड़ेगा…”

वो मुस्कुराते हुए वहाँ से उठ कर नहाने चला गया।

मैंने पीछे से आवाज़ लगाई- अपना अधूरा काम पूरा कर लेना…

सब सोच सोच कर मेरे तन बदन में आग लग रही थी।

मैं उठी और उसके कमरे से उसकी वो पसीने से भीगी शर्ट ले आई जिसकी महक मेरी कामुकता को बढ़ाए जा रही थी… मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसकी शर्ट पहन ली।

उस भीगी शर्ट में मैं बहुत सेक्सी दिख रही थी, मेरी पूरे तन बदन में आग लग चुकी थी, मैंने अपनी एक उंगली अपनी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। ऐसा ही करते करते मैं बिस्तर में ही झड़ गई… और न जाने कब वहीं सो गई। जब आँख खुली तो सुबह के दस बज चुके थे।

मैं उठी और बाथरूम में नहाने चली गई। जब नहा कर निकली और अपने कपड़े निकालने के लिए बैग खोला तो देखा कि मैं जल्दी जल्दी में अपनी ब्रा लाना भूल गई थी…

मैंने बिना ब्रा और पैंटी के बिना कपड़े पहन लिए। मैं सौरभ के पास गई और उसे बताया कि मैं अपनी ब्रा लाना भूल गई हूँ।

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