भाई ने बहन के साथ बातरूम में वासना शांत की

हेलो दोस्तों, अब तक अपने पढ़ा की मेरे बर्तडे की रात को मनु दी ने मेरे लंड का पानी निकाला. अब इस कहानी में पढ़े आयेज क्या होता है.

मम्मी मेरी अंडरवेर उठा के बेड पे रख के किचन में चली जाती है. आज के दिन के लिए मैं बहुत एग्ज़ाइटेड था. रात को जो हुआ उसके बाद मुझे यकीन था की जल्दी ही अब मेरा और दीदी का रिश्ता बदलने वाला था. सुबह-सुबह ही मेरा लंड दीदी को याद करके खड़ा हो चुका था.

मम्मी किचन में काम कर रही थी. तभी हमारा दूध वाला आ जाता है. दूध वाले की आवाज़ सुन के मैं उठ जाता हू. मम्मी दूध लेने बाहर चली जाती है, और दीदी नहा रही होती है. घर में कोई नही होता, तो मैं चुप-छाप बातरूम में घुस जाता हू.

दीदी बिना कपड़ों के नहा रही होती है. गाते की आवाज़ सुन के दीदी एक-दूं दर्र जाती है, और अपने शरीर को अपने हाथो से धक लेती है. जैसे ही वो पीछे मुड़ती है, तो मुझे देख के तोड़ा स्माइल करती है, और अपने हाथ हटा लेती है.

दीदी के पुर शरीर पे पानी की बूंदे होती है. बूब्स एक-दूं कड़क, गोरे, पानी में भीगे हुए होते है. निपल्स से पानी की बूंदे गिरती हुई क्या मस्त लग रही थी. दीदी की छूट बिल्कुल चिकनी थी, बिल्कुल क्लीन. शायद दीदी ने नहाने से पहले शेव की थी. मुझे गाते पे खड़ा देख दीदी मुझे बातरूम में खींच लेती है.

मनु: तू यहा क्या कर रहा है? मम्मी ने देख किया ना तो दोनो की गांद मार लेंगी. और अगर मम्मी ने पापा को बता दिया, तो फिर पापा तो हमे जान से मार देंगे.

मैं: कोई नही देखेगा. मम्मी बाहर गयी है दूध लेने, दूध वाला आया है. और मुझे आपको नहाते देखना था तो आ गया आपको देखने.

दीदी (मुस्कुराते हुए): अछा रात को कितना देखा, मॅन नही भरा तेरा? देख लिया हो तो जेया अब मम्मी आ जाएँगी.

मैं: अछा जेया रहा हू, पर एक बार मेरे लंड को प्यार करदो, फिर चला जौंगा.

दीदी: बीसी ये फिर खड़ा हो गया. रात को ही तो मूठ मारी थी. तू ना अभी बाहर जेया, मैं आके कर दूँगी पक्का.

मैं बाहर जाने लगता हू. तभी मम्मी दूध लेके वापस आ जाती है, और मैं बातरूम में ही फ़ासस जाता हू.

दीदी: अर्रे यार, बोला था ना मम्मी आ जाएँगी. अब तो गये हम. अब बाहर कैसे जाएँगे?

मैं: मैं तो जेया ही रहा था ना बाहर. अब मम्मी अचानक आ गयी. आप टेन्षन मत लो, थोड़ी देर में कचरे वाला आएगा. जब मम्मी कचरा डालने जाएँगी, तब आप चली जाना.

दीदी: हा यही कर सकते है अब. तू बैठा रह अब यही.

दीदी नहाने लगती है, और मैं दीदी के एक-एक इंच को अपनी आँखों से निहारता हू. रात को दीदी ने तो मेरा लंड हिलाया था, मगर मैने अभी तक दीदी को टच नही किया था. दीदी दीवार की तरफ मूह करके शवर ले रही थी. मैं आयेज बढ़ के दीदी की कमर पे हाथ फेरने लगता हू.

दीदी इस्पे कोई रिक्षन नही देती, और नहाती रहती है. मैं कमर को मसालने लगता हू. धीरे-धीरे पूरी बॅक और शोल्डर रब करने लगता हू. दीदी को पकड़ के अपनी तरफ घुमा देता हू. दीदी मेरी आँखों में देखती है. मैं दीदी की आँखों में देखता हू. दीदी की आँखें मुझे पूरी आज़ादी दे रही थी.

मैं दीदी के पेट पे हाथ रखता हू, और अपना हाथ उपर करता हू.

दीदी मेरा हाथ पकड़ लेती है और सीधे अपने बूब्स पे रख देती है. उसके निपल पूरी तरह से खड़े हो चुके थे. मैं भी जोश में दीदी के बूब्स को दबाने लगता हू. कुछ मिनिट बूब्स दबाने के बाद मैं उनको अपने मूह में भर लेता हू. दीदी को बहुत अछा फील हो रहा था. उनकी धड़कन तेज़ हो चुकी थी.

वो मेरे सर को पकड़ के बूब को मूह के अंदर डाल रही थी. मैने जितना बूब मूह में आ सकता था सारा ले लिया और चूसने लगा. अपने एक हाथ से दूसरा बूब दबा रहा था, और दूसरे हाथ से दीदी की गांद सहला रहा था. फिर मैं दीदी के बूब्स छ्चोढ़ के अपने कपड़े निकल देता हू.

अब मैं और दीदी दोनो ही नंगे हो चुके थे. दीदी ने अपना हाथ आयेज बढ़ते हुए मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया. मैं भी बिना देर करते हू सीधे दोनो हाथो से गांद मसालने लगा और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा. दीदी भी मेरे लंड पे हाथ चलाने लगी, और मेरी स्किन को आयेज-पीछे करने लगी.

दीदी को मैने अपने पास खींचा और अपना हाथ उनकी गीली छूट पे रख दिया. उसने एक ज़ोर की साँस ली, और मुझसे चिपक गयी. मैने धीरे-धीरे छूट पे हाथ फेरना शुरू कर दिया. दीदी ने मेरे लंड को टाइट पकड़ लिया. थोड़ी देर छूट रब करने के बाद मैने अपनी एक उंगली दीदी की छूट में डाल दी, और दीदी ने वापस मेरा लंड हिलना शुरू कर दिया.

दीदी की छूट में एक उंगली आराम से जेया रही थी, तो मैने दूसरी उंगली भी छूट में डाल दी. दूसरी उंगली डालते ही दीदी ने मुझे कस्स के किस कर लिया. मैं तो एक-दूं थम सा गया. मेरी लाइफ की बेस्ट किस थी. मेरे और दीदी के लिप्स एक-दूसरे में कुछ मिनिट के लिए लीप लॉक हो गये. मेरा तो दीदी के लिप्स छ्चोढने का मॅन ही नही कर रहा था.

फिर दीदी ने किस तोड़ी और शर्मा के मूह नीचे कर लिया. मैने दीदी का मूह उपर किया तो दीदी ने आँखें बंद कर ली. मैने दीदी के लिप्स पे एक हल्की सी छ्होटी किस की, और छूट में उंगली अंदर-बाहर करने लगा. दीदी की छूट पूरी गीली हो चुकी थी, और पानी छ्चोढने लगी थी.

मैं अपने घुटनो पे बैठ जाता हू, और दीदी भी मेरे मूह के पास खड़ी हो जाती है. उपर से शवर का पानी दीदी के सर से उनके बूब्स पर, और फिर दीदी के पेट से फिसलता हुआ उनकी छूट से मेरे फेस पे गिर रहा होता है. मैं अपना मूह दीदी की छूट पे रख देता हू, और मूह खोल के अपनी टंग से चाटने लगता हू.

छूट चाट-ते–चाट-ते दीदी की क्लिट (दाने ) को मूह में पकड़ लेता हू, और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगता हू. दीदी की छूट का पानी मेरे मूह में गिरने लगता है. वो अब झड़ने वाली थी, बस मैं तेज़ी से अपनी टंग छूट के छेड़ में अंदर-बाहर करने लगता हू. दीदी मेरा सर छूट में दबा देती है, और तेज़ी से चिल्लाते हुए मेरे मूह में झाड़ जाती है. दीदी की आवाज़ सुन के मम्मी भाग के बातरूम का गाते नॉक करती है.

मम्मी: मनु क्या हुआ? तू ठीक है ना? चिल्ला क्यूँ रही है?

दीदी: हा मम्मी ठीक हू, मेरा पैर मूड गया था बस.

मम्मी: अछा गाते खोल मुझे देखने दे. मोच तो नही आई है ना?

मैं और दीदी एक-दूसरे की तरफ देखते है. हम दोनो की गांद फटत रही होती है.

दीदी: मम्मी कुछ ज़्यादा नही है. बाहर अवँगी तभी देख लेना.

तभी कचरे वाला आ जाता है, और मम्मी कचरा डालने चली जाती है. फिर दीदी बाहर जाती है, तो मैं उनको रोक लेता हू.

मैं: दीदी मेरी मूठ तो मार के जाओ.

दीदी: राहुल मम्मी फिरसे वापस आ जाएँगी, और इस बार मुश्किल हो जाएगी.

मैं: तो जल्दी से मूठ मार के जाओ ना प्लीज़. निकालने वाला है मेरा वैसे भी.

दीदी घुटनो के उपर बैठ के मेरा लंड तेज़-तेज़ हिलने लगती है. पर मेरा पानी नही निकलता. तो दीदी जल्दी से मेरा लंड मूह में ले लेती है. मुझे अलग ही मज़ा आना लगा है. दीदी भी ज़ोर-ज़ोर से लंड चूसने लगी, और मैं दीदी के मूह के सामने टिक नही पाया, और सारा माल मूह में ही निकाल दिया. दीदी मेरा माल थूक के बेडरूम में चली जाती है. फिर मैं न्हाने लगता हू.

आपको क्या लगता है क्या आज रात दीदी मुझे अपनी छूट देंगी या नही? कॉमेंट करके ज़रूर बताए. एक और बात दोस्तों, अगर ये स्टोरी आपको पसंद आ रही है तो इस कहानी को अपने दोस्तों और अपने पार्ट्नर को ज़रूर भेजे, ताकि वो भी अपना पानी निकाल सके.

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