ही दोस्तों, मेरा नाम आंवी है, और मेरी उमर 21 साल है. मेरा साइज़ 32-30-34 है. ये सेक्स कहानी तब की है, जब मैं 19 साल की थी, और मुझे चुदाई वग़ैरा का इतना पता भी नही था, और इतना इंटेरेस्ट भी नही था.
अब तो मुझे गैर मर्दों से भी छुड़वाने की आदत हो गयी है. क्यूंकी मेरे घर वाले ही जब मुझे रंडी बना चुके है, तो फिर बाहर मेरी क्या इज़्ज़त होगी?
अगर किसी मर्द को मुझसे गंदी छत करनी हो, या मेरी छूट, चुचियाँ और गांद के दर्शन करने हो. या ऑनलाइन मेरी रंडी बातों से मूठ मारनी हो. या गालियाँ देनी हो, तो मेरी ग-छत ईद अेनआनामीर25@गमाल.कॉम पर मुझसे राबता करे.
खैर चले अब कहानी शुरू करते है, की कैसे मेरे भाई ने मुझे पहली दफ़ा छोड़ा, और मेरी सील तोड़ी.
मेरे पापा का अपना बिज़्नेस है, और वो ज़्यादातर काम के सिलसिले में बाहर ही रहते है. मेरे घर पे ज़्यादातर अम्मी और भाई ही होते है. मेरा भाई (रोहित) मुझसे 3 साल बड़ा है, और वो यूनिवर्सिटी जाता है.
जब मैं 18 की होई थी, तो उनकी उनी से छुट्टियाँ चल रही थी, जिसके कारण वो ज़्यादातर घर पर ही रहते थे, और मैं उनकी नज़रों के सामने ही रहती थी. तब से उनकी नज़र मेरे लिए खराब हो गयी. अब वो अक्सर मुझे देख के अपना लंड सहलाते, या मेरे कपड़े बदलते हुए अंदर आ जाते, और ग़लती से आने का बहाना करते.
मैं ये बात नोटीस करती थी, मगर कुछ कहती नही थी. क्यूंकी अंदर ही अंदर मुझे अछा भी लगता था. फिर जब मैं 19 की हुई, तो वो मुझे छ्छूने भी लगे. कभी मेरी चुचिया दबा देते, तो कभी मेरी गांद सहला देते.
फिर एक रात आई, जब मेरी नानी की तबीयत खराब हुई, और मेरी मम्मी कुछ दीनो के लिए उनके घर चली गयी. मेरे पापा अपने बिज़्नेस की वजह से मुल्क से बाहर थे. घर पे सिर्फ़ मैं और मेरे भैया थे.
मम्मी को दरवाज़े तक छ्चोढ़ के मैं वापस आ रही थी, तो मैने देखा के भैया ने पी रखी थी. वो वो सोफे पर बैठ के अपने फोन पर कुछ देख रहे थे. मैने करीब जेया कर देखा तो मेरे पैरों तले से ज़मीन निकल गयी. क्यूंकी उनके फोन पर एक लड़की अपनी छूट में काला मोटा लंड लेके उछाल रही थी, और वो लड़का उसके मूह पर थप्पड़ मार-मार कर उसे बेरेहमी से छोड़ रहा था.
मैने गौर से देखा तो मेरे भैया का लंड उनकी सलवार से बाहर था, और वो मेरे नाम की मूठ मार रहे थे. मैं जल्दी-जल्दी मैं अपने रूम में जाने लगी थी, तो मेरे पास पड़ी एक प्लेट ज़मीन पर गिर कर टूट गयी. भैया ने पीछे मूड के देखा तो मैं खड़ी हुई नज़र आई.
उन्हे समझ आ गयी थी की मैं उन्हे देख रही थी. तो वो अपना फोन रख कर खड़े हुए, और मेरी तरफ मुड़े. अब उनका लंड खड़ा हो कर सीधा मेरी तरफ देख रहा था, और मैने आज तक पॉर्न में भी इतना मोटा और लंबा लंड नही देखा था.
उनका लंड तकरीबन 8.6 इंचस का था, और बहुत खौफनाक लग रहा था. जैसे मेरी छूट में जेया कर तबाही मचा देगा. भैया मेरी तरफ हवस भारी नज़रों से देखते हुए अपना लंड सहलाने लगे.
रोहित (भैया): मेरी जान, इधर आ, और अपने भाई की गर्मी शांत कर.
मैं: भैया ये आप कैसी बातें कर रहे हो? अंदर करो अपने इसको (मुझे नही पता था इसे लंड कहते है).
रोहित: इसे लंड कहते है मेरी मासूम बेहन. इधर आ, करीब से देख इसे (वो मुझे प्यार से अपने पास बुलाने लगे).
आंवी: नही भैया, मैं नही अवँगी. ये सब ग़लत है, आप इसको अंदर करो.
रोहित: साली कुट्टी, नखरे मत कर, और इधर आ.
आंवी: भैया अआप मुझे गालियाँ क्यूँ दे रहे हो? मैने नही आना आपके पास.
मैं नाराज़ हो कर मूड कर अपने कमरे में जाने लगी, की भैया ने मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खींचा. अब भैया मेरे होंठो को अपने दांतो से नोचने लगे.
आंवी: भैया आह. छ्चोढो, मुझे. दर्द हो रहा है मुझे, आह.
रोहित: चुप कर साली मोतेरचोड़.
भैया मेरे मूह पर थूकते हुए गुस्से से बोले-
रोहित: चल रंडी, अब नीचे बैठ, जो तेरी औकात है साली च्चिनाल.
भैया ने मुझे घुटनो पर बिताया, और मेरे हाथ अपने लॉड पर रखवाए.
रोहित: सहला इस डंडे को. कब से तेरी चाहत थी मेरे को साली कुटिया, चल शुरू हो जेया.
मैं भाई के लॉड पर हाथ फेर कर उसे महसूस करने लगी.
रोहित: आह, ऐसे ही करती रह मेरी रंडी बेहन, उंह.
फिर भैया ने मेरे हाथ अपने लॉड से हटाए, और अपना लंड मेरे मूह पर थप्पड़ की तरह मारने लगे. मुझे बहुत घिन आ रही थी.
रोहित: साली कुटिया, मूह खोल अपना, और जीभ बाहर निकाल.
मैं कुछ ना बोली, और गर्दन हिला कर इनकार करने लगी. तो भैया ने मेरे मूह पर थूक दिया. कुछ देर बाद मैने मूह खोल लिया. तब भैया ने अपनी उंगलियाँ मेरे मूह में तूस कर मेरी जीभ ज़बरदस्ती बाहर निकली, और अपना लॉडा मेरे गले तक तूस दिया.
रोहित: साली भोंसड़ी की, अब मेरा लॉडा चूस कर मेरी गर्मी शांत कर.
आंवी: अघ. अग. अग.
भैया का खौफनाक लंड मेरे मूह में होने की वजह से मुझसे कुछ बोला भी नही जेया रहा था. मेरे मूह से राल तपाक रही थी. मैं बिल्कुल एक भूखी सड़क की कुट्टी लग रही थी, जो अपने भाई का लॉडा लेने के लिए उतावली हो रही थी.
सच पूछो तो मुझे कुछ कुछ मज़ा भी आने लगा था.
अचानक से भैया ने मेरे बाल अपने हाथ पर लपेटे, और अपना लॉडा पूरा मेरे मूह में घुसा दिया. इस हद तक, की मेरी नाक उनके पेट को छ्छूने लगी. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपनी ज़िंदगी की आखरी साँसें ले रही थी. मैं उनका लोड्ा बाहर निकालने के लिए फड़फड़ने लगी. मगर वो और अंदर घुसने लगे.
रोहित: साली अंदर रख. तुझे भी पता चले की तुझ जैसी रंडियों के साथ क्या होता है, भोंसड़ी की.
कुछ देर बाद मैं बेहोश होने वाली गयी. तो मेरे भैया ने अपना लंड मेरे मूह से निकाला, और अपना सारा माल मेरे मूह पर निकाल दिया. फिर मुझे वहीं, उसी हाल में छ्चोढ़ कर अपने कमरे में चले गये.
अगले पार्ट में पढ़िए कैसे सुबा उठ कर मैने अपने आपको ज़मीन पर भाई के माल में लत-पाठ पाया. फिर भाई ने मुझसे अपनी सेवा करवाई, और मेरी छूट के मज़े उड़ाए.
और हा, दोबारा कह डू. क्या करू मेरी छूट में बहुत गर्मी है. अगर कोई लड़का मुझे ऑनलाइन छत पे रंडी बना कर मूठ मारना चाहता है. या मुझे अपनी फॅंटेसी बताना चाहता है. तो मुझे ग-छत पर मेसेज करे. मेरी मैल ईद है- अेनआनामीर25@गमाल.कॉम. अगला पार्ट जल्द ही उपलोआड कर दूँगी.