भाई के दोस्त ने किया गरम

ही दोस्तों, मैं आपकी चुड़क्कड़ संगीता फिरसे हाज़िर हू मेरी नयी कहानी लेकर. जो रीडर “मूडछंगेरबोय” को फॉलो करते है, वो मुझे अची तरह से जानते है. मैं पहले बहुत सीधी-सॅडी घरेलू औरत थी, पर मेरे जीवन में ऐसा मोड़ आया की मैं फिर बहुत चुड़क्कड़ बन गयी.

आप मेरी पिछली स्टोरीस पढ़ लेना, जिससे आपको पता चल जाएगा कैसे मैने मेरे हज़्बेंड को चीट करके दूसरे गैर मर्दों से छुड़वाना शुरू कर दिया.

जो नये है उनको मैं फिरसे मेरा इंट्रोडक्षन देती हू. मेरा नाम संगीता है, और मैं इस कहानी में 36 एअर की हाउसवाइफ हू. मेरा रहना गाओं में है. रंग मेरा गेहुआ है, जो मेरे पर सूट करता है. मेरे 3 बच्चे है, और फिर मेरा फिगर 34-28-38 है.

अब आप लोग समझ गये होंगे की मैं कैसी बाला हू. मैं अपने ससुराल में सिर्फ़ सारी ही पहनती हू. मुझे देख कर मेरे कितने रिश्तेदार मेरी चुदाई के सपने देखते है, और उसमे से कितने तो सफल भी रहे है. अब आपको ज़्यादा बोर ना करते हुए सीधे कहानी पर आती हू.

ये कहानी तब की जब मैं बच्चो को लेकर मेरे माइके वाकेशन करने गयी थी. उस टाइम वाहा पर रेनवेशन का काम चल रहा था. उसकी वजह से भाई ने पास में ही रेंट पर फ्लॅट लिया था. हमारा आधा समान फ्लॅट पर शिफ्ट कर दिया था. रात को सोने के लिए मैं, मेरी मम्मी, और बच्चे फ्लॅट पर चले जाते थे.

भाई और भाभी वही घर पर सोते थे, क्यूंकी रात को चोरी होने का दर्र रहता था. हमारे खाने का भी घर पर ही होता था. मेरे छ्होटे भाई जॉब के साथ पार्ट टाइम एलेक्ट्रॉनिक आइटम की सर्विस भी करते थे. उसमे उसका दोस्त हेल्प करता था.

ये काम दोनो पार्ट्नरशिप में करते थे. तो वो सब समान भी फ्लॅट पर पड़ा रहता था. रोज़ सुबह बच्चो को तैयार करके मम्मी के साथ उनको घर भेज देती थी. फिर बाद में फ्लॅट की सॉफ सफाई करके चली जाती थी.

एक दिन मैं बातरूम में कपड़े धो रही थी. मैने उस टाइम मॅक्सी पहनी हुई थी. सामने से मेरी ब्रा पूरी दिख रही थी. विपुल बातरूम का डोर खोल कर एक-दूं से सामने आ गया. उसे सामने देख कर मैं चौंक गयी. मैने कहा-

मैं: विपुल तुम यहा क्या कर रहे हो?

विपुल: अर्रे सॉरी दीदी, मुझे लगा बातरूम में कोई पानी खुला छ्चोढ़ कर चला गया है, तो मैं वो बंद करने चला आया.

संगीता: मैं डोर लॉक है, तो कैसे आए?

विपुल: दीदी मेरे पास इस फ्लॅट की एक एक्सट्रा चाबी है. मैं यहा ज़रूरी समान लेने आया था. विपुल मेरे साथ बातें करते हुए अपनी नज़र इधर-उधर घुमा रहा था. मैने सोचा ये तोड़ा दर्र गया है.

संगीता: ठीक है तुम बैठो, हम साथ में छाई पीते है.

विपुल मेरे छ्होटे भाई का दोस्त है. वो बहुत ही शरीफ किसाम का लड़का था. हमेशा मुझसे बड़े आदर से बात करता था. उसकी आगे मेरे भाई जितनी कुछ 34-35 साल की थी. लेकिन देखने में तोड़ा बड़ा लगता था. उसके कम उमर में बाल सफेद होने लगे थे. उसका रंग सावला है और वो तोड़ा मोटा है. उसकी शादी हो गयी थी, और उसका एक 8 साल का बेटा है. उसकी वाइफ मेघा रंग से सावली थी पर एक नंबर की माल थी.

मुझे बाद में पता चला की मेरा भाई विपुल के काम पर चले जाने के बाद उसकी वाइफ मेघा की चुदाई करता था. विपुल बहुत ग़रीबी से गुज़रा हुआ लड़का था. मैं भी विपुल को मेरा भाई ही मानती थी. मैने कभी उसके बारे में ऐसा कुछ नही सोचा था.

अब मैं कपड़े सूखा कर हमारे लिए छाई बना रही थी. मैने नोटीस किया की विपुल मुझे चोरी-चोरी देख रहा था. मैं उसकी और देखती तो वो अपनी नज़र घुमा देता था. मुझे काम की टेन्षन में कुछ समझ ही नही थी की मैं अभी किस हाल में थी. मैने विपुल को छाई दी, और उसके साथ बातें करने लगी.

मैने कहा: विपुल घर में सब कैसे है? भाभी और बच्चे कैसे है?

विपुल: घर में सब आचे है. मेघा उसकी मा के घर वाकेशन करने गयी है.

संगीता: हा जैसे मैं यहा आई हू ( हम दोनो हासणे लगे). मैने देखा की विपुल ने अपने बाल बहुत छ्होटे करवा दिए थे, तो मैने पूछा-

संगीता: विपुल बाल इतने छ्होटे क्यू करवा दिए? गर्मी की वजह से कर दिए?

विपुल: नही दीदी, पिछले महीने मम्मी की डेत हो गयी ना ( ये बताते हुए उसकी आँखों में नामी आ गयी).

मुझे पता था की विपुल बहुत छ्होटा था, तब उसके पिता जी की डेत हो गयी थी. उसके बाद उसकी मम्मी ने उसको छ्होटे-मोटे काम करके पाला था. उसकी लाइफ में उसकी मा की एहमियत बहुत थी. मैने उसका हाथ पकड़ कर उसको दिलासा दिया.

मैं उसकी पीठ को सहला कर उसको शांत कर रही थी. उसने मेरी पीठ पर हाथ घूमना चाहा, पर मैं उससे अलग हुई. मुझे उसका बर्ताव कुछ अलग लग रहा था. मैने देखा उसका लंड उसकी पंत में खड़ा हो रहा था. पर मैने इस सब पर ध्यान नही दिया. मैने उसको नाश्ता करने को दिया, और कहा-

संगीता: मैं नहाने जेया रही हू. तुम मेरा वेट करो.

मैं जैसे मिरर के सामने गयी, तो मैने देखा की लाइट येल्लो कलर की मेरी मॅक्सी गीली होने से पूरी ट्रॅन्स्परेंट हो गयी थी, और मेरी पूरी ब्रा और पनटी विज़िबल हो गयी थी. ऐसी हालत में देख कर किसी का भी चुदाई का मॅन करने लगे. अब मुझे समझ आया की विपुल चोरी-चोरी क्या देख रहा था. पर मुझे अब ये सब की आदत हो गयी थी. मैं विपुल की और मुस्कुरा कर देख कर नहाने चली गयी.

बातरूम में जेया कर मैं नहाने लगी, और जब मैं अपने बूब्स पर साबुन को घिस रही थी, तब अचानक मुझे चुदाई करवाने का मॅन करने लगा. मैने फिर पनटी में हाथ डाल कर छूट में उंगली करी. 2-4 मिनिट हुए और मैं झाड़ गयी. ये सब चक्कर में मैं टवल और कपड़े लाना भूल गयी. मैने सिर्फ़ पनटी पहनी थी. फिर मैने विपुल को टवल के लिए आवाज़ लगाई.

विपुल: हा दीदी बोलिए?

मैं: अर्रे मैं अपने कपड़े और टवल भूल गयी हू. प्लीज़ मुझे ला कर दो ना.

विपुल ने जान-बूझ कर बातरूम का पूरा गाते खोला. मैं डोर के पीछे थी, पर बातरूम में एक छ्होटा मिरर टंगा हुआ था, जिसमे उसको मेरे नंगे बूब्स दिख गये. मैने जल्दी से हाथ आयेज करके टवल पकड़ लिया, और बातरूम का गाते बंद कर दिया. अब फ्लॅट में हॉल और बेडरूम के बीच बातरूम था, तो मैं टवल लपेट कर बाहर आई. क्यूंकी विपुल ने मुझे जान-बूझ कर सिर्फ़ टवल ला कर दिया था.

टवल मेरे आधे बूब्स और गांद को कवर कर रहा था. मेरे हेर गीले थे. मेरे बालों से गिरता हुआ पानी बूब्स की दरार में चला जाता था. मैने देखा तो विपुल चेर पर बैठ कर अपना लंड च्छूपा रहा था. वो मुझे हवस भारी निगाहों से देखने लगा.

मेरे दिमाग़ में डूस सवाल होने लगे. और बहुत दिन से किसी गैर मर्द से चूड़ी नही थी, तो इक्चा भी हो रही थी. सोच रही थी की मेरी बेहन के दामाद परेश जी को बुला कर यहा छुड़वा लूँगी. वैसे भी उनका ऑफीस वाहा से कुछ 25 केयेम दूरी पर था. पूरा दिन फ्लॅट खाली ही रहता था.

पर एक तो मेरी चुड़क्कड़ छूट में लंड लेने की तलाप लगी थी. मैं उल्टी घूम कर बाग में से अपने कपड़े निकाल रही थी. फिर मैं अचानक पीछे मूडी तो वो पंत के उपर से लंड सहला रहा था. मैं उसकी आँखों में देख कर नॉटी स्माइल करते हुए बेडरूम में चली गयी.

विपुल की हरकतों से मुझे छुड़वाने का अब बहुत मॅन करने लगा था. मैने रेड ब्रा और पनटी पहनी. ये सेट मेरे जेठ जी के दोस्त सुरेश जी ने दिया था. ब्रा फॅन्सी थी, और उसमे से मेरे आधे बूब्स बाहर रहते थे. उसमे मेरा 36-28-38 का फिगर, आ यार, कोई देख कर बिना चुदाई मुझे जाने नही देगा. मैने फिर सोच लिया की आज तो हमारे दामाद परेश जी को बुला कर पक्का चुदाई कार्ओौनगी.

मैने अपने गीले बालों को हेर ड्रायेर से सूखने के लिए उसको प्लग में डाला. फिर जैसे ही स्विच ओं किया, मुझे करेंट का झटका लगा. मैं ज़ोर से चिल्ला पड़ी. मेरी आवाज़ सुन कर विपुल बेडरूम के डोर को फाटाक से खोल कर अंदर आ गया. मैने डोर लॉक नही किया था.

मैं दररी हुई थी, और मैं बेड पर दोनो हाथ पीछे करके बैठ गयी थी. मेरी साँस तेज़ हो गयी थी. मेरे बूब्स रेड ब्रा में उपर-नीचे हो रहे थे. मुझे देख कर मुझसे ज़्यादा शॉक तो उसको लगा. उसका मूह खुल्ला रह गया. उसकी आँखें नशीली हो गयी.

मुझे जब समझ आया की मैं आधे कपड़ों में उसके सामने थी, मैं अपने हाथ से बूब्स च्छुपाने लगी. वो मुझे और हवस भारी नज़रों से देख रहा था. मैं दर्र गयी. वो एक-दूं से मुझे पकड़ कर बेड पर धक्का दिया और मेरे उपर चढ़ गया. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था क्या करू.

वो मेरी गर्दन पर किस करने लगा, और एक हाथ से मेरे बूब्स दबाने लगा. मैं उसको अपने आप से डोर कर रही थी, तो उसने मेरे हाथो की उंगलियों में उसकी उंगलियाँ फ़ससा दी, और मेरे पैरों को उसके पैर से जाकड़ लिया. अब वो मेरे फेस और लिप्स पर किस करने की कोशिश करने लगा.

मैं मेरा मूह इधर-उधर घुमा रही थी. वो पंत के उपर से उसका लंड मेरी पनटी पर घुमा रहा था. मैं उससे रिक्वेस्ट कर रही थी.

मैं: अर्रे क्या कर रहे हो? छ्चोढो मुझे. ग़लत कर रहे हो. तुम ये नही कर सकते मेरे साथ. कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा? मैं शादी-शुदा हू और 3 बच्चे है मेरे.

विपुल: अभी यहा पर कोई नई है. किसी को कुछ नही पता चलेगा.

संगीता: हमारे घर वालो को पता चला तो हमारी इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी. प्लीज़ मुझे जाने दो. तुम्हे अपनी दोस्ती की कसम. अपने दोस्त की बेहन के साथ ऐसा मत करो. मैं तुम्हे अपना भाई मानती हू.

विपुल: दोस्त की बेहन ही इतनी तगड़ी माल हो तो कैसे कंट्रोल होगा? अब भैया को सैयाँ बना कर मज़ा कर.

विपुल की हरकत से मैं भी गरम होने लगी. धीरे-धीरे मेरा झूठ-मूठ का नाटक ख़तम होने लगा. मुझे पता ही नही चला और मैं भी उसका साथ देने लगी. विपुल को लगा अब मैं उसका साथ देने लगी थी, तो उसने लिप्स पर किस करना शुरू किया. मैं भी उसको किस करने लगी. मेरी छूट में इतनी आग लगी थी, की उस टाइम मैं किसी से भी छुड़वा सकती थी.

जब कोई औरत 2-4 लोगों से चूड़ी हुई होती है, फिर उसको फराक नही पड़ता की उसको कों छोड़ रहा है. बस उसे अपनी छूट को ठंडा करना होता है. मेरे साथ भी यही होने लगा था. विपुल ने अब मेरे शोल्डर से ब्रा के स्ट्रॅप को उतार दिया, और ब्रा नीचे कर दी. वो मेरे बूब्स देख कर पागल हो गया.

वो मेरे निपल को चूसने लगा और बूब्स ज़ोर से दबाने लगा. मेरी भी आ निकल रही थी, और सिसकारियों से आवाज़ निकल रही थी. मुझे तड़प्ता हुआ देख वो मेरी और देख कर मुस्कुरा रहा था. उसने मेरी पनटी में हाथ डाला, और छूट को उंगली से छोड़ने लगा. मेरी छूट पहले से गीली हो गयी थी. हम दोनो हवस भारी निगाहों से एक-दूसरे को देख रहे थे.

मैं चुदाई में इतनी मदहोश हो गयी की मैने उसके सर को पकड़ कर उसके लिप्स को चूसने और काटने लगी. वो भी छूट में फटाफट उंगली चलाने लगा और मैं झाड़ गयी.

मैने विपुल की और देख कर स्माइल किया. मेरे पर अब चुदाई का भूत सवार हो गया था. अब इसके आयेज क्या हुआ वो मैं आपको आने वाले पार्ट में बतौँगी. आपको स्टोरी कैसी लगी उसका फीडबॅक मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे.

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