बहन को लंड चुसवाने और चोदने की मस्त स्टोरी

दी ने मुझे घूरते हुए देखा, जब मैने उसको अपना लंड मूह में लेने को कहा.

दी ने मुझे माना किया, तो मैने उसको सॉफ बता दिया की बिना उसके मूह में गये मेरा लंड उसकी छूट में नही जाएगा. तो उसके पास अब कोई ऑप्षन नही था. इस बात से दी को थोड़ी दिक्कत सी हुई, फिर हस्स कर उसने कहा-

दी: अर्रे नाराज़ क्यूँ हो रहा है? मैं तो बस इसलिए कह रही थी, की तुम्हारा फर्स्ट टाइम है. तो कही मेरे मूह में ही ना निकल जाए.

और उसने मेरी तरफ टॉनटिंग वाली स्माइल की.

इसको सुन कर तो मेरी झांते फिरे हो गयी. दिल में आया की अब तो पहले अपने लंड का पानी उसके मूह में निकाल कर उसको पिलाता हू. और फिर उसको छोड़ूँगा. तब इस साली को पता चलेगा.

पर वक़्त की नज़ाक़त (कायरा का मोविए टाइम और वीडियो कॅमरा की बॅटरी टाइम) को देख कर मैं अपनी ज़ुबान की बात को पी गया. फिर थोड़ी मुस्कान के साथ कहा, “नही निकलेगा दी, इतना तो भरोसा है मुझे अपने इस्पे.” (और फिर अपना लंड उसके होंठो के सामने हिलने लगा)

मे: अब जल्दी भी करो, कही मेरे रूम्मटेस ना आ जाए. उनके हिसाब से तो आज यहा प्रियंका चूड़ने वाली थी. पर यहा पे तो… इसलिए अब जल्दी भी करो.

दी: ओक. ( बोल कर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया, और उस पर अपनी ज़ुबान घूमने लगी. आ… आ… क्या मस्त एहसास था. फिर मैने तोड़ा प्रेस करके अपने लंड को उसके मूह में डाला, जिसको अब वो अंदर-बाहर कर रही थी.

उसको ऐसे चूस्टा हुए देख मैं जोश में आ गया, और थोड़ी पोज़िशन को ठीक करके उसके मूह को ही छोड़ने लगा. पूरा गीला लंड बाहर निकाल के वापस उसके मूह में डाल कर उसके गले तक उतारता. काई बार तो साँस ना आने की वजह से वो झटपटती और खाँसती भी.

उसके आँखों से आँसू भी निकल आए. मैने देखा की मजबूरी इंसान से क्या-क्या करवाती है. आज मेरी शादी-शुदा फॉरिन रिटर्न दी को ये मजबूरी मेरा लंड चुस्वा रही थी.

कुछ देर बाद फिर मुझे होश आया, और अपना लंड बाहर निकाल के दी को खड़ा किया. फिर मैं उसके बूब्स को देखने लगा.

दी: क्या देख रहे हो, कभी बूब्स देखे नही क्या?

मे: देखे तो है, पर तुम्हारे अब तक नही देखे. बहुत ही कम भाइयों को ये मौका मिलता है, अपनी सिस्टर के शरीर से उसकी ब्रा को हटाने का. (और मैने ब्रा को निकाल फेंका)

वाह! क्या मस्त गोरे मुलायम बूब्स थे. बिना ब्रा के सपोर्ट के भी अभी तक टाइट थे. शायद दी उनको रोज़ मेनटेन करती होंगी. मैं सीधे अपने मूह में एक बूब को दबा के उसको चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी मों को लिपट जाता है, वैसे ही.

दी भी मेरे बालों को सहला रही थी. आ, चूसो इसको, आ, पुर पी जाओ. ( मैने फील किया की दी यहा आई तो मजबूरी में थी, पर एंजाय तो वो भी कर रही थी).

मैने उसको चूस्टे हुए अब उसके लिप्स को चूसने लगा. एक दूं वाइल्ड वाली स्मूछिंग करते हुए मैने उसको बेड पे पटक दिया. मैं हर पोज़िशन कॅमरा के आंगल को ध्यान में रख कर दी को उसमे रखता.

सिचुयेशन ये थी, की मैं नीचे से और दी उपर से नंगी थी. तो मैने खड़े हो कर अपने बाकी के कपड़े निकाल दिए, और दी की सलवार को भी उतार दिया.

दी ने अपनी आँखें बंद कर ली थी. अब वो बस पनटी में थी, जो गीली हो चुकी थी. ये देख कर मेरे चेहरे पे स्माइल आ गयी, और मॅन से ये बोझ हॅट गया की दी मुझसे आज जबरन या मजबूरी में चूड़ेगी.

मे: आँखें क्यूँ बंद कर दी तुमने?

दी: मुझे शरम सी आ रही है.

मे: तो क्या तुम पूरी चुदाई में आँखें बाँध रखोगी?

दी: नही, जब तुम उसको मेरे अंदर डालोगे, तब तुम्हारे हर धक्के के साथ मेरी शरम भी जाती रहेगी.

मे: ह्म, पर इसके पहले एक और काम बाकी है ( और मैं दी की पनटी को खींचने लगा). वो सुख, जो फॉरिन में तो कामन है. पर इंडिया में बहुत कम औरतों को ये नसीब होता है. तुम्हे जीजू से मिला ये पता नही, पर आज तुम इसकी हक़दार हो.

दी (आँखें खोल कर): क्या?

मे: तुम्हारी छूट की चुसाई.

और मैं झुक कर दी की छूट के लिप्स को चूसने लगा. मैं उसकी छूट के दाने (क्लाइटॉरिस) को भी मूह में लेकर चूसने लगा. दी तो जैसे स्वर्ग में चली गयी थी. वो मेरे बालों को सहलाने लगी.

दी: आ आ भाई चूस आचे से. तेरे जीजू ने तो कभी इसका स्वाद नही चखा. आ कब से मेरी ख्वाहिश थी, की कोई चूज़ इसको. आज वो पूरी हो गयी. आ आ

ये सुन कर मैं और भी जोश में आ गया, और दी की छूट में अपनी ज़ुबान डाल कर उसको छोड़ने लगा. और कुछ देर में दी की छूट भी आचे से गीली हो गयी, और दी ने कहा-

दी: अब मैं काम पे आजा भाई. अब रहा नही जाता. डाल दे अंदर.

मे: ओक दी.

और मैं खड़ा हो कर पास के ड्रॉयर से कॉंडम निकाल के ले आया. ( मुझे पता था की दी मुजको कॉंडम पहनने से रोकेगी. क्यूंकी मैने उसको मेसेज में अपने भाई से बिना कॉंडम के सेक्स की शर्त रखी थी.)

दी: पूरी तैयारी पहले से की है तूने लगता है.

मे: हा दी, वो रखना पड़ता है. एक तो प्रेग्नेन्सी का ख़तरा नही रहता, और अपनी भी सेफ्टी. आज कल की लड़कियो का क्या भरोसा?

दी: तो तुझे मैं तेरी गफ़ जैसी चालू दिखती हू, जो तुझे मुझे फक करने के लिए कॉंडम चाहिए, ह्म?

मे: अर्रे ऐसी बात नही. मुझे लगा तुम इसके लिए इन्सिस्ट करोगी, इसलिए मैने पहले निकाल दिया. क्यूंकी कही आपको प्रेग्नेन्सी ना रह जाए.

दी: बुद्धू माल, प्रेग्नेन्सी को रोकने के लिए टॅब्लेट्स भी आती है. और बिना कॉंडम के छुड़वाने में ही असली मज़ा आता है दोनो को. और मुझे तेरे लंड से ज़्यादा उसके पानी में इंटेरेस्ट है.

मे: मतलब?

दी: तू पहले डाल, फिर बताती हू.

और दी ने खुद मेरा लंड पकड़ के अपनी छूट के गाते पे रखा. तो मैने भी देर ना करते हुए उसको अंदर धक्का लगाया. छूट गीली होने की वजह से लंड अंदर जेया रहा था, पर छूट के दबाव से लगा की दी इस साइज़ को फर्स्ट टाइम ले रही थी.

दी तकिये को दबाते हुए अपने होंठ भींच रही थी. उसके चेहरे पे सॉफ दिख रहा था, की ये साइज़ उसके लिए नया था. और वो अनकंफर्टबल लग रही थी.

मे: दी, तुम्हे तकलीफ़ हो रही हो तो निकाल डू क्या? अभी आधा ही गया है.

दी: तू रुक मत, और इसको जल्दी ख़तम कर.

तो फिर मैने भी और ज़्यादा ना सोचते हुए बाकी का लंड भी अंदर प्रविष्ट कर दिया. पूरा अंदर लेते ही, दी हाँफने लगी. कुछ देर तक मैं ऐसे ही रहा. जब दी थोड़ी कंफर्टबल हुई, और मुझे हल्की स्माइल देकर उसने मुझे सिग्नल दिया. तो मैने धक्के लगाने शुरू किए.

शुरू में स्लोली, मैं अपने लंड को आधा ही बाहर और अंदर करने लगा. और हर धक्के के साथ दी की आ निकल जाती.

बाकी की स्टोरी अगले पार्ट में.

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