भाई बेहन में सेक्स शुरू हुआ

हेलो फ्रेंड्स, पिछले भाग में अपने पढ़ा कैसे सीमी से इनस्पाइर होके मैने अपने भाई आशु के साथ सेक्षुयल रीलेशन बनाने की कोशिश की. अब आयेज-

अगले दिन टवल माँगने से पहले मैने ब्रा खोल दी और टॉपलेस हो गयी. मैने अपने लेफ्ट हाथ से दोनो बूब्स को घेर के च्छूपा लिया और नीचे सिर्फ़ पनटी पहन के खड़ी रही. फिर मैने आशु को बुलाया. वो जैसे ही आया मुझे देख के ठंडा पद गया. मेरे बूब्स भले ही हाथो से ढके थे, पर फिर भी मैं टॉपलेस थी. आशु वहीं जाम के खड़ा देखता रहा. मैने भी कुछ नही बोला और देखने दिया ताकि उसे लगे की मैं माइंड नही कर रही.

अब यही खेल हो गया रोज़ का. बिना ब्रा के बूब्स को हाथो से धक के भाई के सामने आना. कुछ दिन के मैने ये रूम में भी शुरू कर दिया. मैं भाई के सामने कपड़े बदलने लगी. पहनने के टाइम मैं वैसे ही ब्रा खोल के हाथो से बूब्स धक देती और भाई को कहती नया ब्रा लेक देने अलमारी से. वो शरमाता हुआ मुझे ब्रा लेक दिया.

मैं सोचा पहले भी उसने ऐसे मुझे देखा है पर आज इतना शाइ क्यूँ. अचानक से मेरी नज़र आईने पर पड़ी तो पाया की मैने बूब्स को सही तरह से नही ढाका. मेरा रिघ्त बूब उपर आ गया था और ब्राउन निपल दिख रहे थे. मैं शर्मा के पीछे घूम गयी और तुरंत ब्रा पहन ली. फिर घबरा के रूम से बाहर चली गयी. वहाँ सोचने लगी आज कुछ ज़्यादा हो गया. फिर सोच-सोच के हासणे लगी. फिर मैने सीमी को फोन किया-

मैं: हेलो सीमी, कैसी है?

सीमी: हमएसा की तरह गरम हू. बोल भाई से चूड़ी के नही?

मैं: नही, अभी कहाँ इतनी जल्दी?

सीमी: अभी तक नही हुआ? कर यार जल्दी, मैं कब से वेट कर रही हू न्यूज़ का. मुझे लगा तूने इसलिए फोन किया. खैर क्या बात है?

मैने उसे सारी बातें बताई और वो हासणे लगी.

सीमी: यार तूने खेल तो बढ़िया खेला, बुत इसके लिए रोक क्यूँ दिया? सब कुछ तो दिखा ही रही थी तो अब क्या हुआ?

मैं: अर्रे निपल्स का प्लान नही था. वो मैं करती धीरे-धीरे.

सीमी: अर्रे पागल, कभी तो करना ही था ना. अब हो गया तो अछा ही तो हुआ. इतना दिन वेट नही करना पड़ेगा. जल्दी पटेगा तो मुझे भी जल्दी छोड़ेगा.

मैं: तू बस अपनी ही बोले जेया रही है. बता ना. घबराहट हो रही है.

सीमी: अर्रे सुन, रिलॅक्स. घबराने की कोई ज़रूरत नही. निपल्स दिख गये तो अछा हुआ. अब एक दो दिन में जब तू तैयार हो कुछ करके बूब्स दिखा दे पुर. बस आयेज तो लगता नही तुझे कुछ करना होगा. आशु ही तेरी पनटी उतार देगा. चल तू टेन्षन मत ले और कर डाल.

सीमी से बात करके तोड़ा रिलॅक्स हुई. उसने ठीक ही कहा, एक ना एक दिन तो नंगा होना ही था. फिर आज एक निपल दिख जाने से प्राब्लम क्यूँ? वो तो रोज़ त-शर्ट के उपर से दिखता है.

अगले दिन से ऐसा ही किया. हमेशा की तारा मैने बूब्स ढके रखा और आशु से ब्रा माँगी पर उसे कलर नही बताई. अलमारी में जाके उसने पूछा-

आशु: कों सा वाला दीदी?

मैं: अर्रे वो पिंक वाला.

पिंक ब्रा की और इशारा करने के बहाने मैने हाथ बूब्स से हटा दिए और मेरे बूब्स मेरे भाई के सामने खुल गये. भाई ब्रा लेके जैसे ही मुड़ा, मुझे टॉपलेस देख के उसका मूह खुला रह गया. मुझे हस्सी आ रही थी पर कंट्रोल किया.

मैं: ओये, कहाँ खो गया? ब्रा फेंक.

वो एक-दूं से घबरा गया और ब्रा मेरी और फेंक दी और मूह घुमा लिया. मैं भी पीछे मूड के धीरे से हासणे लगी. मुझे खेल में मज़ा आने लगा था, क्यूंकी रोज़ भाई का लंड और भी ज़्यादा तंन रहा था. बस मुझे उस दिन का इंतेज़ार था जब मैं उसका लंड अपने मूह में लेके चूसू.

कुछ दिन मुझे टॉपलेस देख के यहाँ-वहाँ देखता रहा. पर धीरे-धीरे कॉन्फिडेंट हो गया. मैं भी बहुत फ्री हो गयी थी. पहले की तरह भाई के सामने टॉपलेस रहने में शरम नही आती थी. हम बातें भी करते थे, तो वो अक्सर मेरे बूब्स की और देखता था और मैं देखने देती.

कुछ दिन ऐसे ही जाने के बाद एक शाम हम रूम में बातें कर रहे थे. मैं किसी और ही चीज़ के बारे में बोल रही थी की भाई ने अचानक से कहा-

आशु: दीदी आपके बूब्स बहुत गोरे है.

मैं एक-दूं से चुप हो गयी: क्या कहा?

आशु: सॉरी दीदी, ग़लती से निकल गया.

मैं: अर्रे नही, बोल मैने सुना नही.

आशु तोड़ा डरते हुए: वो आपके बूब्स, बहुत गोरे है.

मैं: अर्रे तो ज़ोर से बोल ना. डरता क्यूँ है? मैं तेरे सामने टॉपलेस हू, मैं घबराती हू? तो तू क्यूँ डरता है?

आशु: वैसे मैं बहुत पहले से बोलना चाह रहा था, बुत हिम्मत नही हो रही थी.

मुझे बहुत अछा मौका दिखा.

मैं: अछा तुझे हिम्मत डेडू?

आशु: वो कैसे?

मैने उसके दोनो हाथ पकड़े और अपने बूब्स पे रख दिए. बूब्स पे हाथ रखते ही वो जाम गया और पहली बार मेरे भाई का हाथ मेरे बूब्स पर पड़ने से मेरे रोंगटे खड़े हो गये. लगा जैसे बोल डू की मेरा सब कुछ लेले.

मैं: कैसा लगा रहा है?

उसके हाथ ठंडे थे और काँप रहे थे.

मैं: अभी भी दर्र रहा है? मैने अलो किया ना. अब क्यूँ घबरा रहा है? ठीक से रख.

आशु: वाउ दीदी, बहुत सॉफ्ट है.

मैने उसका हाथ हटा दिया: तो अबसे नही डरना, छ्छूने का मॅन हो तो छ्छू लेना. ठीक है?

फिर आशु ने ऐसा ऐसी बात बोली, जो मैं कब से सुनना चाहती थी.

आशु: खेलने डोगी?

मैं: अछा. खेलना चाहता है इससे? कैसे खेलेगा?

आशु: वो दीदी, कैसे बतौ? बस ऐसे ही.

मैं: ऐसे क्या? खेल के बता.

आशु: सच?

मैं: हा दिखा कैसे खेलेगा. पसंद आया तो दूँगी.

फिर वो मेरे बूब्स पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ा. एक-दूं से दोनो बूब्स पकड़ के मसालने लगा.

मैं: अया भाई धीरे, उफफफफ्फ़ ओउूउ, भाई एयाया.

मुझे दर्द हो रहा था, पर मज़ा भी आ रहा था. दुनिया भर की सिसकियाँ ले रही थी. थोड़ी देर मसालने के बाद मेरे निपल्स तनने लगा. मेरे पुर बदन में बिजली दौड़ गयी. मैं एक-दूं से उछाल पड़ी. इसका दर्द बर्दाश्त कर ही रही थी की भाई ने लेफ्ट बूब को चूसना शुरू कर दिया. साथ ही दूसरा दबाने लगा. फिर रिघ्त वाला चूसा और लेफ्ट दबाना.

मैं: अयाया भाई, आआआवउ, धीरे-धीरे, अयाया उफफफ्फ़ भ्ााईयइ.

मेरी हालत खराब हो गयी. मैं और बर्दाश्त नही कर पाई और मेरी ज़ोर से आआअहह निकली और मैं झाड़ गयी. 6-7 झटके में मेरा सारा पानी निकल गया. मैं पसीने से चूर बेड पर तक के लेट गयी. मेरी साँसें भी चढ़ि हुई थी.

आशु घबरा के पूछा: क्या हुआ दीदी? बहुत ज़ोर लगा क्या? सॉरी दीदी.

मैने उसे पास खींचा और कहा: बहुत मज़ा आया भाई. रोज़ खेलेगा ऐसा?

आशु: सच में दीदी? डोगी?

मैं: ह्म. दिया.

आशु: कभी भी?

मैं: हा रे पगले. तेरा जब करे मेरे बूब्स के साथ खेलना. मैं नही रोकूंगी.

आशु: और रूम से बाहर?

मैं: मैं सिर्फ़ त-शर्ट या टॉप में रहूंगी. अंदर ब्रा नही होगा. मम्मी सामने हो और तेरा मॅन करे तो उपर से ही दबा लेना, या चुपके से हाथ डाल लेना. और तोड़ा अछा मौका हो तो टॉप उपर करके खेल लेना. मम्मी आने वाली हो तो टॉप नीचे कर देना.

आशु: ठीक है दीदी, ऐसा ही करूँगा.

मैं: पर मुझे क्या मिलेगा?

आशु: आपको क्या चाहिए बोलिए मैं ला दूँगा अभी.

मैं: मुझे बाहर से कुछ नही चाहिए.

आशु: फिर?

मैने उसके खड़े लंड की और इशारा किया: मुझे वो चाहिए.

आशु: ये दीदी? ची, नही? इससे क्या करोगी?

मैं: बताती हू. बस तू रोकना मत. लेट जेया.

वो लेट गया और मैं फुल गरम थी, इसलिए ये मौका जाने देना नही चःति थी. मैने तुरंत भाई का पंत उतारना शुरू किया. उसने घबरा कर पंत पकड़ लिया.

आशु: दीदी ये क्या कर रही हो?

मैं: ना रोक मत. बस रिलॅक्स कर.

मैने फिरसे उस का पंत खींचा और इस बार उसने मुझे नही रोका. मैने भाई का पूरा पंत उतार दिया और उसका छ्होटा पर कड़क लंड बाहर आ गया. मेरा सपना पूरा होने वाला था. एक सेकेंड की भी देर ना करते हुए मैने उसका लंड मूह में ले लिया और चूसने लगी.

वो मछली की तरह मचलने लगा: अया दीदी, आआ, दर्द हो रहा है. धीरे दीदी आआआहह उूुउउ.

लंड उसका तोड़ा छ्होटा था पर हार्ड और गरम था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं 5 मिनिट तक उसका लंड चूस्टी रही. कुछ पल में उसकी जांघें काँपने लगी. मैं समझ गयी वो झड़ने वाला था.

वो चिल्लाने लगा: एयेए दीदी, कुछ हो रहा है.

मैं नही रुकी और और स्पीड में चूसने लगी. फाइनली उसने पानी छ्चोढ़ दिया और उसका सारा माल मेरे मूह में गिरने लगा. मैं भी आखरी बूँद तक चूस्टी रही. शायद पहली बार था, इसलिए काफ़ी कम पानी आया. पर टेस्ट ग़ज़ब का था. मैं आँखें बंद करके सारा माल निगल गयी. वो तक के बहाल पड़ा रहा. मैं पास में लेट गयी.

मैं: कैसा लगा?

आशु: वाउ दीदी. ये आपने क्या किया?

मैं: इसको ब्लोवजोब बोलते है. जब खड़ा हो जाए, इसे हाथ से हिला के या ऐसे मूह से चूस के पानी निकाल के शांत करते है.

आशु: अछा. वैसे वो पानी वो गंदा नही लगा?

मैं: मैने भी फर्स्ट टाइम पिया. पता नही था कैसा होगा. बुत अछा लगा टेस्ट. गरम, हल्का मीठा क्रीम जैसा. तो क्या सोचा? मेरे बूब्स के बदले ये करने देगा मुझे?

आशु: ठीक है दीदी लेलो.

मैं: पक्का, माना तो नही करेगा?

आशु: नही दीदी प्रॉमिस. आपका जब मॅन करे आप चूस लेना मेरा भी. और बाहर करना हो तो बोलना, हम रूम में चलेंगे.

मैं: ना, तू मेरे बूब वहीं पे चूस सकता है. मुझे तेरा लंड चूसना हो तो रूम में क्यूँ जौ? मुझे भी वहीं चाहिए. फासेगा नही ये मेरी गॅरेंटी है. मुझपे छ्चोढ़ दे.

आशु: चलिए ठीक है दीदी. आप ही मॅनेज करो, बाकी मुझे प्राब्लम नही.

मैं: डन.

डील होती ही मैं किचन में मम्मी की हेल्प करने के लिए जाने के लिए रेडी होने जेया रही थी, की भाई ने मुझे बुलाया.

आशु: दीदी एक और बात थी. आप बुरा तो नही मानोगी?

मैं: क्या बोल?

फिर उसने ऐसी बात बोल दी की मैने सोचा भी नही था.

आशु: आपको एक बार पूरा नंगा देख सकता हू?

उसका ये बोल्डनेस देख के मैं इंप्रेस हो गयी. मैने उसकी और देख मुस्कुराया.

मैं: ये ले… ये कहते हुए मैने अपनी पनटी भी उतार दी. ज़िंदगी में पहली बार मैं अपने भाई के सामने पूरी नंगी खड़ी थी.

आशु: वाउ दीदी. नंगी क्या कमाल लगती हो आप. कभी सोचा नही आप इतनी सेक्सी हो अंदर से.

मुझे शरम आ रही थी, इसलिए सर झुका के खड़ी थी सुन रही थी. उसने नोटीस किया.

आशु: अछा दीदी वापस पहन लो.

मैं सच में शायद इसके लिए रेडी नही थी, तो वापस पनटी पहन ली.

आशु: पर दीदी एक रिक्वेस्ट है. अगर हो सके तो करना, कोई ज़बरदस्ती नही.

मैं: क्या?

आशु: आपका फिगर सच में कमाल है दीदी. मैं तो दीवाना हो गया. अगर हो तो क्या आप रूम में ऐसे नंगी रह सकती हो मेरे सामने?

मैं: पता नही भाई. तोड़ा टाइम देगा?

आशु: इट’स ओक दीदी. कोई प्राब्लम नही. आप आराम से सोचो. आक्च्युयली मैने सोचा सब कुछ जब देख ही लिया है तो रह सकती हो. बुत कोई जल्दी नही. आपको जब सही लगे. अगर ना भी तो बता देना मैं और कभी नही बोलूँगा.

मुझे भाई की ये बातें बहुत अची लगी की उसने ज़बरदस्ती नही की. मुझे लगा की उसकी बात मान लेनी चाहिए.

मैं: ठीक है भाई, मैं कोशिश करूँगी.

आशु: ओक दीदी. वैसे उपर का पक्का है ना?

मैं हासणे लगी: हा भाई उपर जो मर्ज़ी कर. चाहे तो तू खुद ही मेरा टॉप उतार के बूब्स चूस लेना. मैं हमेशा रेडी हू तेरे लिए.

यहा से हमारा इन्सेस्ट रिलेशन्षिप की शुरुआत हुई.

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