भाई-बहन में चुदाई की हॉट कहानी

फॅमिली सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट-

दीदी: मुझे माफ़ कर दे. मैने तुझे इग्नोर किया. इन दीनो में तुझसे डोर रही तो मुझे तेरी कमी खाली.

मैं: अर्रे दीदी, आप ये क्या बोल रही हो?

दीदी: उस रात जो हुआ, मैं दर्र गयी थी. मैं नशे में थी और मुझे माफ़ कर दे (इतना बोलते हुए वो रोने लगी).

मैं: अब रो क्यूँ रहे हो आप? माफी मत माँगो, मेरी भी ग़लती है. वैसे जब आपने बोला ई लोवे योउ, मुझसे रहा नही गया.

दीदी (आँखें पोंछते हुए): क्यूँ नही रहा गया?

मैं: दीदी मैं आपसे बहुत प्यार करता हू. लेकिन भाई-बेहन के बीच में ऐसा रिश्ता पासिबल होगा मुझे लगा नही था. पर अब ये रिश्ता अछा लगने लगा.

दीदी: तो तू क्या चाहता है की ये नया रिश्ता जो शुरू हुआ है, वो ख़तम ना हो?

मैं इस बात का रिप्लाइ नही दे पाया. मैं कुछ सोच ही रहा था तभी दीदी ने मुझे लीप किस कर दिया और मेरी गोद में आ गयी. किस में मैं उनका साथ दे रहा था. मेरा एक हाथ उनकी पीठ पर और दूसरा हाथ उनके बूब्स के उपर था. उनका हाथ मेरे शॉट्स के उपर से मेरे लंड को सहला रहा था.

कुछ समय पहले तक मैं इस टाइप की स्टोरीस पढ़ता था. कभी लगा नही था की मैं भी ये सब कर पौँगा. ऐसे ही किस करते-करते मैने उनका टॉप और उन्होने मेरे शॉर्ट्स उतार दिए. लगे हाथ मैने उनकी ब्रा भी उतार दी थी.

अब वो उपर से और मैं नीचे से पूरा नंगा था. अब मैं किस्सिंग के साथ साथ अपने हाथो से उनके बूब्स दबाता और वो मेरा लंड रगड़ती. दोनो गरम हो रहे थे. मेरा लंड भी पूरा तंन गया था. फिर दोनो ने बचे हुए कपड़े भी उतार दिए. दोनो किस्सिंग में इतने बिज़ी थे की दुनिया की कोई सुध-बुध ही नही थी.

फिर मैने उनको लिटाया और उनकी गर्दन पे किस करने लगा. उसके बाद बूब्स दबा के चूज़. बूब्स चूसने के बाद नाभि में किस किया और उनकी छूट के पास आके छूट चाटने लगा. दीदी भी मज़े से सॉफ्ट मोन्स कर रही थी. छूट चटाई से उनकी छूट गीली ही रही थी.

इसी बीच मैं अपने दोनो हाथ से उनके बूब्स भी दबा रहा था. छूट चटाई के दौरान मैं उनकी छूट चाट-ता, फिर अपनी जीभ उनकी छूट के अंदर-बाहर करता और फिर उनकी छूट को चूस्टा. दीदी इन सब के मज़े ले रही थी.

दीदी: अया उम्म सुनील, मज़ा आ रहा है.

अब इतनी चटाई से दीदी ज़्यादा ही एग्ज़ाइटेड हो गयी थी, की वो झड़ने वाली थी.

दीदी: अया भाई, रुक जेया मा…

इतना बोलते ही उनकी बॉडी पूरी शेक हुई, और वो मेरे मूह के पास झाड़ गयी. ये नज़ारा देखने लायक था. मैं उनका सारा पानी पे गया. उनकी साँस तेज़ थी. फिर वो उठी, मुझे एक नॉटी स्माइल दी, और अब मुझे लिटा दिया.

लिटने के बाद उन्होने मेरे लंड को पकड़ा जो की पूरा तन्ना हुआ था और उसमे से तोड़ा प्रेकुं ड्रिप कर रहा था. दीदी ने मेरे लंड से वो ड्रिपिंग प्रेकुं छाता और घाप से पूरा लंड मूह के अंदर ले लिया. वो मेरे लंड को एक लॉलिपोप जैसे चूस रही थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

वो बीच-बीच में मेरे टॅटन को भी मूह में ले लेती. दीदी का ये स्वरूप मैं पहली बार देख रहा था. पहली चुदाई मैं भी वो ऐसी नही थी.

दीदी: सुनील देख तेरी दीदी तेरा लंड चूस रही है. कैसा लग रहा है?

इतना बोलते ही उन्होने मेरे लंड में तोड़ा सा थूक डाला. फिर लॉडा हिलाया और दोबारा मूह मैं डाल दिया. आज मैने पहली बार दीदी के मूह से लंड सुना था. मुझे अछा लगा ये सुन के.

इसके बाद उन्होने मूह से लंड निकाला और उसको अपनी छूट में सेट किया. फिर वो खुद मेरे लंड के उपर बैठ गयी. फर्स्ट ऑर्गॅज़म की वजह से उनकी छूट गीली थी तो लॉड को छूट में जाने से कोई दिक्कत नही हुई. पर फिर भी उनकी छूट टाइट थी. इसके साथ ही वो मेरे से उछाल उछाल के चूड़ना स्टार्ट हो गयी.

दीदी के मॅन में कुछ बात चल रही थी. फिर कुछ समय बाद उन्होने अपने हाथ अपने बालों मैं रखे और अपने फेस को सहलाने लगी और चूड़ते चूड़ते बोली-

दीदी: अया बहनचोड़ भाई, छोड़ मुझे और ज़ोर से. उम्म्म्म भाई, शांत क्यूँ है, कुछ तो बोल. आई.. फक ऐसे ही.

मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या करू या क्या बोलू. तभी मुझे आइडिया आया. फिर दीदी की कमर पकड़ी और अपने हिप्स ज़ोर-ज़ोर से हिला के धक्के मार-मार के छोड़ने लगा. दीदी बावली हो गयी थी चुदाई से.

मैं: अया दीदी मज़ा आ रहा है. अया, ऐसे ही अपनी रंडी बना के छोड़ूँगा.

दीदी: अयाया ऐसे ही. अपनी रंडी बना के छोड़ भाई, मज़ा आ गया. मैं झड़ने वाली हू.

ऐसा बोलते ही दीदी दूसरी बार झाड़ गयी. फिर मैने दीदी को पकड़ा और उल्टा लिटा दिया, और छूट मैं लंड पेल दिया. फिर चुदाई करने लगा. ऐसे तो मैने अपनी फ्रेंड्स वित बेनिफिट्स वाली सीनियर को भी नही पेला था. ऐसी तबाद-तोड़ चुदाई के बारे में तो दीदी ने भी नही सोचा था की वो मेरे साथ कर पाएँगी.

अब इतनी चुदाई के बाद मैं भी झड़ने को हुआ था. तो मैने अपना लंड बाहर निकाला और दीदी को पलटने को बोला. फिर सारा माल उनके चेहरे में डाल दिया. ऐसे ही एक-दो रौंद और चुदाई करने के बाद हम दोनो आपस में लिपट के सो गये.

मुझे नीड आ गयी थी, पर दीदी कुछ सोच रही थी. दीदी ने मेरी तरफ देखा. मैं सो रहा था. उन्होने मेरा माता चूमा.

दीदी (मॅन में सोचते हुए): रोहन के मदद के हाथ से मुझे मेरे भाई का प्यार मिल गया है. अब आयेज क्या-क्या और होता है?

दीदी और रोहन के बीच में क्या-क्या हुआ, ये मुझे बहुत बाद में रोहन से पता चला.
सुबा हुई और दीदी मेरे रूम से अपने रूम चली गयी. पर जब वो अपने रूम में जेया रही थी, तब भाभी ने दीदी को मेरे रूम से बाहर निकलते हुए देख लिया. फिर मैं भी उठा और फोन देखा तो 8 बजे हुए थे, और मुझे किसी का मेसेज आया था की “सुनील क्या आज हम मिल सकते है?”

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तो बे कंटिन्यूड…

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