भाई बहन की जम के हुई चुदाई की स्टोरी

आपने पिछले पार्ट में पढ़ा कैसे मेरा भाई मेरी और मेरी देवरानी का दीवाना बन रहा था. हम भाई बेहन छत करते-करते बहुत क्लोज़ हो गये.

मैं जब मेरे भाई विजय को बेडरूम के बाहर भेज रही थी, तब विजय ने मुझे पकड़ लिया, और उसके लिप्स मेरे लिप्स पर रख दिए. मैं तो शॉक्ड हो गयी. विजय के दोनो हाथ मेरी गांद पर चले गये. मैने दोनो हाथ उसके गले में डाल दिए, और उसको किस में रेस्पॉन्स देने लगी.

मैं भूल गयी विजय मेरा सागा भाई है. छूट में लगी आग कोई रिश्ता नई देखती. जब दो जिस्म एक-दूसरे की आग बुझते है, तो कोई रिश्ता मायने नही रखता. मैं भी अपने सगे भाई के जिस्म से खेल रही थी. उसकी टाइट बॉडी मुझे बहुत मस्त फील दे रही थी. हम दोनो भाई-बेहन के जिस्म में जो आग लगी थी, वो हमारा भाई-बेहन का रिश्ता जला रही थी.

मेरा भाई मेरी गांद को दबा रहा था, और मैं जोश में उसको लिप्स किस करे जेया रही थी. मुझे मेरे भाई की बाहों में अलग ही सुकून मिल रहा था. मेरा भाई बहुत स्ट्रॉंग था. उसने मुझे एक झटके में गोदी में उठा लिया, और बेड पर जाके बैठ गया. मैने अब तक उसके लिप्स को नही छ्चोढा था. उसको लगातार पागल की तरह किस कर रही थी.

अब मैने विजय को धक्का दिया, और उसको बेड पर लिटा दिया, और खड़ी हो कर मैने बाबयडॉल्ल निकाल दिया. मैं अब सिर्फ़ पिंक कलर के ब्रा पनटी में थी. मेरे ब्राउन बॉडी पर वो अलग ही दिख रहा था. मेरे टाइट बूब्स पर्फेक्ट रौंद शेप में दिख रहे थे.

शीला: विजय मैं कैसी लग रही हू? तुम्हे मेरा ये लुक कैसा लगा?

विजय: दीदी आप तो कसम से सेक्सी बॉम्ब लग रही हो. मैने तो कभी सोचा नही था की मेरी बेहन इतनी सेक्सी है, और उसके साथ ये सब एंजाय करने को मिलेगा.

शीला: सच काहु यार मैने भी कभी ये सब नही सोचा था. तुझे एरपोर्ट पर देख तब से तुम पर क्रश आ गया. मैने तेरे जीजा जी के अलावा किसी से सेक्स नही किया. तुम पहले हो जो मुझे ऐसे देख रहे हो.

अब मैने हाथ आयेज किया तो मेरे भाई ने मुझे अपनी और खींच लिया, और मेरी पूरी बॉडी पे किस करना स्टार्ट कर दिया. उसका हर एक किस मेरे अंदर की आग को बढ़ावा दे रहा था. उसने मेरे दोनो बूब्स को पकड़ लिया, और ब्रा के उपर से किस करने लगा. मैं भी उसकी चेस्ट पर किस कर रही थी, और उसके निपल को चूस रही थी. अब किस करते-करते उसके लंड तक पहुँच गयी.

तोंग के उपर से मैने उसके लंड को किस किया, और एक सेक्सी स्माइल पास की. मुझे मेरे भाई की आँखों में मेरे लिए बहुत लस्ट दिख रही थी. मैं तोंग को चाटने लगी, और एक हाथ अंदर डाल कर लंड बाहर निकाला. भाई का लंड देख कर मेरी आँखों में चमक आ गयी.

शीला: वाउ भाई, क्या लंड है तुम्हारा. कहा च्छूपा रखा था? अब जब तक तुम यहा हो मुझे ये चाहिए.

अब मैने लंड मूह में ले लिया, और उसको आचे से चूसने लगी. मुझे लंड चूसना पसंद नही है, पर भाई का लंड चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरे भाई की सिसकारी निकल रही थी. वो भी आचे से एंजाय कर रहा था. थोड़ी देर लंड चूसने के बाद भाई उठ गया, और मेरी ब्रा और पनटी निकाल दी.

फिर उसने मुझे गोदी में बिता दिया, और मेरे बूब्स चूसने लगा. वो मेरे निपल को हल्का काट रहा था, जिससे मेरी आहें निकल रही थी. अब उसने मुझे लिटा दिया, और मेरी पूरी बॉडी पे किस करने लगा. मैं तो किसी और दुनिया में खो चुकी थी.

मैं मेरे भाई के साथ फिज़िकल रीलेशन बना रही थी ये सोच कर मेरी छूट पानी छ्चोढ़ रही थी. अब मेरा भाई मेरी छूट के पास आ कर मेरी चिकनी छूट पर हाथ घूमता है. मेरे से अब रहा नही जेया रहा था.

मैने बोल दिया: प्लीज़ भाई कुछ करो. मुझे छोड़ डालो, और अपनी बेहन की प्यास बुझा दो.

उसने मेरी टांगे खोल दी, और मेरी छूट के पास आ कर बैठ गया. फिर उसने मेरी छूट पर किस किया, और मेरी छूट चाटने लगा. ये सब मेरे लिए हॅंडल करना बहुत मुश्किल था. मैं ज़ोर-ज़ोर से मोन कर रही थी.

शायद मेरी आवाज़ कमरे के बाहर जेया रही थी. मेरी छूट में से बहुत सारा पानी निकला, और वो मेरा भाई चाट गया. मैं तो बुरी तरह तक गयी थी. आज जो मज़ा मेरे भाई ने दिया था, वो मैं कभी नही भूल पाई.

अब उसने फिरसे मुझे लंड चुस्वाया और छूट पर लंड सेट कर दिया. मेरी छूट बहुत गीली थी, तो लंड धीरे से अंदर चला गया. पर मुझे दर्द हो रहा था. मेरे भाई का लंड मेरे हज़्बेंड से मोटा और लंबा था. विजय ने अब आधे लंड से चुदाई चालू की, और धीरे-धीरे पूरा लंड छूट में उतार दिया. मेरा दर्द मीठा हो गया.

विजय का हर एक धक्का अब हम भाई-बेहन का रिश्ता ख़तम कर रहा था. अब हम भाई-बेहन तो थे, पर एक-दूसरे की हवस मिटाने का ज़रिया भी बन गये थे. भाई-बेहन का रिश्ता अब चुदाई में बदल गया था.

शीला: वाउ विजय, तुम बहुत आचे से अपनी बेहन की चुदाई कर रहे हो. तेरे जीजा से भी अछा तू छोड़ रहा है. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. अब जब तक तू यहा है, मेरी चुदाई करना.

विजय: हा दीदी, आप भी बहुत सेक्सी हो. आपकी छूट बहुत टाइट हे. लगता हे जीजा जी रेग्युलर तेरी चुदाई नही करते.

शीला: हा भाई, वो यहा होते ही कम है. मंत में 3-4 बार चुदाई मुश्किल से होती है. तूने मेरे अंदर आग जला दी है. अब मुझे रोज़ लंड चाहिए. तूने अपनी बेहन के जिस्म की आग को हवा दी है. अब तुझे इसको बुझाना होगा.

विजय: हा दीदी, मैं हू तब तक आपको लंड की कमी नही होने दूँगा.

अब विजय ने मुझे घोड़ी बना दिया, और ताबड़तोड़ मेरी चुदाई शुरू कर दी. मेरी आवाज़ बहुत तेज़ हो गयी. मैं “आ आ ओइइ ह्म मज़ा आ गया और ज़ोर से विजय” ऐसा चिल्ला रही थी. हम भूल गये थे की घर में मेरी बेटी और मेरी देवरानी रूपाली भी थे.

अब विजय का निकालने वाला था. मैने उसको छूट में ही निकालने को बोला, क्यूंकी मुझे उसका स्पर्म मेरी छूट में फील करना था. विजय के गरम स्पर्म ने मेरी छूट की गर्मी को ठंडा कर दिया.

विजय अब मुझसे चिपक कर सो गया, और मुझे लिप्स किस कर रहा था. मैं भी उसकी बॉडी को किस कर रही थी. मिडनाइट मेरी आँख खुली तो मैने मेरे भाई को गेस्ट रूम में भेज दिया.

नेक्स्ट दे मैं लाते से उठी, क्यूंकी मेरी बहुत दीनो के बाद अची चुदाई हुई थी. जब मैं फ्रेश हो कर बाहर आई, मैने त-शर्ट और लोवर पहना था.

मैने रूपाली को देखा तो उसको देखती ही रही. उसने बहुत टाइट वाइट कलर का त-शर्ट पहना था, और उसके नीचे उसकी पिंक कलर के ब्रा की स्ट्रॅप्स दिख रही थी, और नीचे जीन्स का शॉर्ट्स पहना था. रूपाली की फेर स्किन पर वो बहुत मस्त लग रहा था.

उसके 36″ साइज़ के बूब्स मस्त दिख रहे थे. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. और उसकी बातों से लग रहा था की उसको मेरे और मेरे भाई के बीच में रात में क्या हुआ उसकी भनक लग गयी थी.

रूपाली: आप आ गये भाभी? लगता है रात को अची नींद आई थी. आपका चेहरा खिल गया है. विजय भाई भी अभी तक सो रहे है ( वो मुझे देख कर नॉटी स्माइल पास कर रही थी).

शीला: अर्रे ऐसा कुछ नही है. बस कल माल में गये तो तक गयी थी.

रूपाली: भाभी कल तो मैं भी आपके साथ थी. हुँने तो साथ में वो अंडरवेर लिए थे.

शीला ( मैं दर्र गयी थी की रूपाली मेरे बारे में क्या सोच रही होगी, की मैने अपने सगे भाई के साथ ): रूपाली प्लीज़ तुम ये बात किसी को मत बताना.

रूपाली: भाभी में किसी को नही बतौँगी प्रॉमिस. पर आपके रूम से आपकी बहुत मधुर आवाज़ आ रही थी. मैने सुना है. कल कों आया था मुझे तो बताओ.

शीला: मैं कैसे बतौ यार वो कों था. तुम मुझे ग़लत समझ लॉगी.

रूपाली: भाभी बिलीव मे. ये बात हम दोनो के बीच रहेगी. हम एक-दूसरे को सपोर्ट करेंगे तो दोनो खुल कर एंजाय करेगे. मैं जानती हू एक औरत को पति का सुख नही मिलता तो बाहर एंजाय करना पड़ता है. ( उसने मेरे हाथ पकड़ लिए) भाभी में आपके साथ हू.

शीला: अर्रे वो कल रात को मेरे और विजय के बीच हो गया. पता नही क्या हुआ मुझे मैने उसे रूम में बुला लिया, और फिर दोनो आउट ऑफ कंट्रोल हो गये.

रूपाली: ओह नो भाभी, आपने विजय भाई से. ई कॅन’त बिलीव.

शीला ( मैं रोने जैसी हो गयी): रूपाली मुझसे ग़लती हो गयी. मैने ग़लत कर दिया ना?

रूपाली: भाभी देखो सगे भाई के साथ करना ग़लत तो है. पर अब आप दोनो कंफर्टबल है तो प्राब्लम क्या है? घर की बात घर में रहेगी. सच काहु तो मुझे भी अपने भाई पे क्रश था. तो मुझे तो ये बहुत अड्वेंचरस बात लगती है. (रूपाली की बातों से मैं रिलॅक्स हो गयी. )

शीला: थॅंक्स रूपाली तुमने मुझे समझा. एक बात पूचु?

रूपाली: हा भाभी बिंदास पूछो. अब तो हम दोनो को एक-दूसरे का सपोर्ट जो करना है, तो ही दोनो एंजाय करेगे.

शीला: क्या तुम्हे विजय पसंद है?

रूपाली ( शरमाते हुए): भाभी सच काहु तो हा. वो जब से घर में आए है, सोच रही हू मौका मिले तो उनसे छुड़वा लू. पर आपने कर दिया.

शीला: तो अब क्या तुम हमे जाय्न नही करोगी?

रूपाली: आपको प्राब्लम नही है तो मैं तो रेडी हू.

मैने रूपाली को पूरा प्लान समझा दिया. वो सुन कर बहुत खुश हो गयी. अब मेरी देवरानी और मेरे भाई के बीच क्या ट्विस्ट आता है, आपको नेक्स्ट पार्ट में बतौँगी.

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