भाई-बहन बनके सेक्स फॅंटेसी पूरी करने की कहानी

वो रात बहुत डिफिकल्ट थी, मगर हमने रात में सब के सोने की वेट की. फिर जैसे मैने मेसेज किया व्हातसपप पे तुरंत उसका रिप्लाइ आया, जैसे मानो वो वेट कर रही थी, की मैं बात शुरू करू

मे: सोई नही क्या तुम?

शी: नही, नींद नही आ रही है.

मे: क्या सोच रही हो?

शी: वही जो तुम सोच रहे हो.

मे: वो एक आक्सिडेंट्ली हुआ इन्सिडेंट था. किसी की ग़लती नही है.

शी: पता है, मगर…

मे: मगर क्या?

शी: कुछ नही, जाने दो.

मे: बोलो ना, बोलॉगी नही, तो समझ कैसे आएगा?

शी: बहुत अनकंफर्टबल सिचुयेशन थी आज.

मे: पता है मगर जान कर थोड़ी हुआ है. सो डॉन’त फील गिल्टी.

शी: यार रहने दो, तुमको नही समझा सकती.

यहा वो कुछ और बोलना चाहती थी, मगर बोल नही पा रही थी. मगर मैने उसको कॉन्फिडेन्स दिया, की ये सिर्फ़ हमारे बीच रहेंगी बात.

वो फिर बोली: एक बार पहले भी ऐसी सिचुयेशन हुई थी, और वो भी मेरे भाई के साथ. मेरा भाई मस्ती में था, मगर मेरे अंदर जैसे सेक्स की इक्चा हुई थी.

मैने पूछा: तो ये तो नॉर्मल है. इसमे इतना सोचना क्या?

तभी वो बोली: सेम आज भी वैसी फीलिंग ही हुई है.

मैने पूछा: अभी भी हो रही है वो फीलिंग?

उसने जवाब हा में दिया. मैं तो मानो एक-दूं शॉक हो गया, और रिप्लाइ तक नही दिया. फिर उसने एक स्माइल और किस वाली एमोजी भेजी. मैने भी स्माइल दी, और फिर पूछा-

मे: आयेज बढ़ना है?

तो वो बोली: पता नही. मैने आज तुमको इमॅजिन करा था. मगर एक प्राब्लम है.

मैने पूछा: क्या प्राब्लम है?

वो बोली: मुझे सेक्स रियल, मगर फॅंटेसी टाइप चाहिए.

मैं समझा नही एग्ज़ॅक्ट्ली वो क्या बोल रही थी. उसने फिर मुझे बताया, की वो देसी कहानी पे स्टोरीस पढ़ती थी. उसको सिर्फ़ इन्सेस्ट स्टोरीस अची लगती थी, मतलब वो मुझे भाई इसलिए बुलाती थी ताकि मैं उसको भाई बनके छोड़ू.

दोस्तों यकीन मानो मैने हा किया, की मैं भाई बनने को तैयार था. मैने तो ये सोच के हा बोला क्यूंकी मुझे छोड़ने का था उसको. लेकिन यकीन मानो सच में सेक्स डबल हो जाता है अगर फॅंटेसी करो की बेहन है.

ई मीन वो मुझे उसके रियल भाई की जगह रख के छुड़वाना चाहती थी. फिर मैने उससे पूछा-

मैं: अपने भाई से छुड़वाना भी ट्राइ करो.

वो बोली: ट्राइ करा था मगर वो बहुत डरता है.

उसने 2 बार अपने भाई को ऑलमोस्ट रेडी कर लिया था, मगर वो दर्र से हॅट गया.

वो बोली: छूतिए का 2 बार लंड चूसा. उसने भी खूब रगड़ा मुझे, मगर पूरा नही किया. मुझे अजीब लगा, लेकिन ठीक है.

फिर मैं बोला: मुझे भाई मानोगी तुम?

वो बोली: मैं तो भाई इसीलिए मानती हू, और भाई बोल के बुलाती हू.

फिर रात बहुत हो गयी, हम सो गये. मैने छत डेलीट कर दी.

सुबा मेरा सला मतलब उसका हज़्बेंड और मेरी वाइफ ऑफीस चले गये. फिर मैं गया उसके फ्लॅट में. आज कुछ अलग ही माहौल था. उसके बच्चे स्कूल गये हुए थे.

दरवाज़ा खोला उसने, लेकिन अंदर आने ही नही दिया, और वही किस करना शुरू कर दिया. मैं बता डू, हम लोग 7त फ्लोर पे रहते है, जो की टॉप फ्लोर भी है. उस फ्लोर पे 3 फ्लॅट है. एक फ्लॅट मेरा, एक मेरे सेयेल का, और 3र्ड किसी और का.

टॉप फ्लोर पे किसी के आने का सवाल ही नही उठता. किस्सिंग बहुत हार्ड थी हमारी. जैसे ही मैं अंदर गया मानो जैसे मुझे भी बेहन छोड़ने का भूत सवार हो गया. पुर घर में मस्त पर्फ्यूम था, और माहौल एक-दूं सेक्सी था.

जस्ट नहा के हम दोनो मिले थे, तो बदन में ठंडक और गर्मी दोनो एक साथ बह रही थी. उस दिन एक बात और समझ आई, की हम दोनो का सेक्स करने का तरीका सेम था. मतलब नो रूल्स.

हम दोनो को बेड पे सेक्स अछा नही लगता. किचन, बाल्कनी, टेरेस, कार पार्क, जंगल, ओरल सेक्स मतलब 69 पोज़िशन, मतलब कोई रिस्ट्रिक्षन नही. जैसा चाहो वैसे करो, बस भाई-बेहन बोल के करो.

तो आते है आक्षन पे. उसने बस एक निघट्य पहनी हुई थी. मैने बॉक्सर, उसके अंदर अंडरवेर, उपर त-शर्ट पहनी थी. फिर जैसे हम अंदर गये, हॉल में ही मैने अपनी त-शर्ट निकाल फेंकी. उसके बाद मैं उसकी और बढ़ा, और उसकी निघट्य एक झटके में निकाल दी. क्या नज़ारा था कमाल का. एक-दूं पर्फेक्ट जिस्म की मालकिन थी वो.

फिर मैने उसको गोद में उठाया, और सीधा बाल्कनी में लेके गया. बाल्कनी बहुत छ्होटी थी. उसमे चेर रखी हुई थी. मैने उसको चेर पे बिताया. फिर जैसे ही उसकी टांगे खोली, एक-दूं क्लीन शेव्ड छूट मेरे सामने आ गयी.

मज़े की बात ये है, की उसका प्री-कम निकला हुआ था एक्षसितमेंट में भाई से चूड़ने के लिए.

अब मुझसे रहा नही गया. मैं अपनी ज़ुबान से प्री-कम को चाटने लगा, और वो मानो दूसरी दुनिया में पहुँच गयी. वो मेरे बालों पे कभी सहलाती, कभी अंदर धकेल्टी, कभी नोचती, बस मूह से एक ही बात बोलती-

शी: भाई चूस ले मेरी छूट को पूरा.

फिर मैने हल्का सा छूट का मूह खोला, और ज़ुबान अंदर डाल दी. क्या आवाज़ें थी उसकी. उसने ज़ोर से सर को दबाया, और पूरा पानी मेरी ज़ुबान पे छ्चोढ़ दिया. बेहन की छूट को चूसने का मज़ा आ गया.

फिर मैने उसको उठाया, और चेर को अंदर रूम में डाल दिया. उसके बाद मैने उसको घोड़ी बनाया. उसने हाथ से बाल्कनी की ग्रिल पकड़ी. मैने अपने खड़े लंड को पीछे उसकी छूट पे रगड़ा, और एक ज़ोर का झटका लगाया. लंड सीधा उसकी छूट की गहराई में चला गया, और वो ज़ोर से चीखी-

शी: भाई आहिस्ता डालो.

लेकिन आज तो बेहन छोड़ना सर पे सवार था. हर झटके में उसकी आवाज़ मानो सुकून दे रही हो. जिसने भी कज़िन या रियल सिस्टर के साथ किया है, वो समझेगा क्या मज़ा है ऐसे सेक्स में.

शी: स्पीड बाधाओ भाई.

मे: ओक बहना, जैसा तुम चाहो.

शी: हमेशा अपनी बेहन को छोड़ोगे ना?

मी: अर्रे अब तो रोज़ चुदाई का मज़ा लेंगे. हर बार कुछ नया करेंगे टेन्षन मत लो.

ऐसा बोलते-बोलते मैने स्पीड को तेज़ कर दिया. मानो जैसे लंड का टोपा अंदर उसकी गहराई को चू रहा था.

शी: इतना मज़ा आज तक किसी ने नही दिया, जो आज तुम दे रहे हो भाई. और ज़ोर से छोड़ो मुझे.

20 मिनिट की चुदाई में वो 3 बार झाड़ चुकी थी, और एक-दूं सुस्त हो चुकी थी. हमने चुदाई को पूरी तरह एंजाय किया.

मिलते है अगली बार.

यह कहानी भी पड़े  भाभी की खूबसूरत सेक्सी गांड मारी

error: Content is protected !!