भाभी संग रोमॅन्स की हॉट कहानी

देसी भाभी सेक्स स्टोरी अब आयेज से-

मेरी बड़ी भाभी अब मेरे काबू में आ चुकी थी, और अब वो मुझे कुछ भी करने से माना नही करती थी. जब मैं कहता, वो रेडी रहती थी, और मेरा ही वेट करती थी की मैं बस उनके साथ खेलने लग जौ. मुझे भी अब मज़ा आ रहा था, क्यूंकी हमारे बीच अब सब कुछ होने वाला था. मैं उनकी छूट को अपना बनाने वाला था, और उनको भी मेरा लंड पसंद आने लगा था. वो हर वक्त अब मुझसे बात करने की कोशिश करती रहती थी. अब आयेज-

पिछले पार्ट में अपने पढ़ा, की मैं अब छ्होटी भाभी के लिए भी मचलने लगा था. और मुझे अब उनकी छूट लेने का बहुत मॅन था. लेकिन जब तक मेरे पास मेरी बड़ी भाभी थी, मुझे कोई चिंता नही थी. क्यूंकी अब मेरी बड़ी भाभी अब मेरी बीवी बन चुकी थी. पूरी तरह से नही, पर रोज़ रात को मुझे अपनी छूट देने वाली बीवी. और ऐसी बीवी किसे नही चाहिए, जो हर रात आपका लंड अपनी छूट में लेकर सो जाए और अपनी छूट आप से छुड़वाने के लिए हमेशा बैठी रहे.

शाम होने वाली थी. हम शॉप बंद करके निकले ही थे की भाई ने आइस-क्रीम की शॉप से बच्चो के लिए आइस-क्रीम पॅक करा ली. नाम तो सिर्फ़ बच्चो का था, असली मकसद तो कुछ और ही था. हम अब घर आ चुके थे. थोड़ी देर हम हॉल में बैठे, और छ्होटी भाभी हमे पानी देने आई. वो जब झुक कर पानी देने लगी, तो उनकी क्लीवेज देख कर इतना शुकून मिला था की क्या बतौ.

मेरी जान किचन में रात के खाने की तैयारी कर रही थी. किचन से कुछ बर्तन गिरने की आवाज़ आई और छ्होटी भाभी किचन की तरफ जाने लगी. लेकिन भाई ने छ्होटी भाभी को कहा की ये आइस-क्रीम रूम में रख कर आओ पहले, और वो रूम में चली गयी भाई के साथ.

मैं पानी पी कर किचन में गया ग्लास रखने के बहाने, और मैने देखा मेरी भाभी आत्ता गूँथ रही थी. उनकी सारी उनकी कमर पर बँधी थी उन्होने पीले कलर की फुल वाली सारी पहनी हुई थी, जिसमे बहुत ही कातिल लग रही थी. मैं बिना आवाज़ किए उनके करीब पहुँचा और उनकी कमर में हाथ डाल कर उनकी पीठ पर किस की और कहा.

मैं: कैसी हो मेरी जान? तुम्हे बहुत मिस किया.

भाभी को झटका लगा और एक-दूं धक्का देकर कहा: मुझे लगा छ्होटी आ गयी है. क्या कर रहे हो ये तुम? कोई देख लेगा हमे यहाँ. तुम मरवाओगे मुझे.

मैने कहा: जान तू मर्रेगी तो मेरा क्या होगा? अभी तुम्हे मेरे साथ जीना है.

और मैं अपनी बातों में भाभी को उलझने लगा. मैने उनकी कमर को पकड़े रखा, और उन्हे लगातार किस करे जेया रहा था, कभी पीठ पर, कभी उनके कंधे पर, कभी उनकी गार्डेन के पास. फिर नीचे बैठ कर उनकी कमर को पीछे से किस करता रहा, और उनकी कमर को चाट-चाट कर गीला कर दिया.

भाभी ने आतते से अपने हाथ निकले और घूम गयी. फिर खुद भी मेरे साथ बैठ गयी, और आतते वाले हाथ मेरे गले में डाल कर मुझे देखने लगी.

वो कहने लगी: क्या बात है, आज तुम कुछ ज़्यादा ही जोश में लग रहे हो? कुछ करने का इरादा तो नही है?

भाभी अब इतना खुल चुकी थी की वो भूल चुकी थी की मैं उनका देवर था और वो मेरी भाभी. लेकिन हमे क्या था, अब हम दोनो करीब बहुत आ चुके एक नाइट में.

उन्होने मेरी नाक से नाक लगा कर इधर-उधर मूह किया, और नाक को मेरी नाक से घिसने लगी. तभी एक-दूं से किसी की आहत सुनयी दी तो तुरंत हम दोनो उठे, और मैं सींक में ग्लास डाल कर भाभी की गांद को दबा कर बाहर निकल आया. भाभी वापस आत्ता गूँथने लग गयी थी.

8:30 तक भाभी फ्री हो चुकी थी, और खाना लगाने लग गयी थी सभी. छ्होटी भाभी अपना खाना उनके कमरे में लेकर चली गयी थी. फिर भाभी, मेरा भतीजा, मम्मी और पापा, और चाची खाना खाने लगे.

मम्मी-पापा और चाची ने जल्दी खाना खा लिया और वो पड़ोस में टहलने निकल गये. उनके जाने के बाद भाभी मेरे पैरों से खेलने लग गयी. हम डाइनिंग टेबल पर बैठे थे. मेरा भतीजा खाना खा रहा था. वो ज़िद कर-कर के खाना खा रहा था.

तो भाभी ने कहा: बेटा चुप-छाप खा लो वरना पापा से शिकायत करूँगी तुम्हारी की तुम खाना नही खा रहे हो. और तुम ज़िद करने लगे हो, इसलिए तुम्हारे लिए कुछ लाए ना.

भाभी उसको दर्रा के खाना भी खिला रही थी, और मुझे अपने पैरों से गुदगुदी भी का रही थी. मैं भी हैरान था की भाभी इतनी कैसे बदल गयी थी. मैने सोचा रात को भाभी से पूछना पड़ेगा. 9:00 बजे तक हमारा खाना हो गया, और हम सब अपने अपने कमरे में चले गये. 10:00 बजे तक मम्मी-पापा चाची पड़ोस से घूम कर वापस आ गये.

वो अपने कमरे जेया कर सो गये. चाची भी भाभी के पास चली गयी. रात के 11 बाज रहे होंगे, और मेरा कमरे का गाते धीरे से नॉक हुआ. मैं तुरंत समझ गया की भाभी ही आई थी. मैने गाते खोल दिया, और भाभी एक-दूं से अंदर घुस गयी.

अंदर घुसते ही उसने मुझे पकड़ा, और मेरे गले लग गयी. वो मेरी पीठ पर ज़ोरों से हाथ घूमने और लंबी-लंबी साँसें लेने लगी. मैने उन्हे तोड़ा पीछे खींचा और उन्हे बेड पर बैठा दिया, और उनसे बातें करने लगा.

भाभी एक-दूं मूड में लग रही थी. मैने पूछा क्या हुआ भाभी तो उन्होने बुरा मूह बना के कहा-

भाभी: भाभी नही बीवी कहो अपनी, तब बतौँगी.

मैने भी कह दिया: हा मेरी जान, क्या हुआ?

उसने कहा: आज तुम्हारी दिन में बहुत याद आई. पहले कैसे तुम मुझे दिन भर चूमते रहते थे, और अब मुझे . ही नही हो.

मैने कहा: अर्रे मेरी जान, किसी को. शक ना हो इसलिए . पर गया था. और अगर दिन भर घर रहता तो तेरा मुझसे इतनी बेसब्री मिलने का मॅन करता क्या बोल?

हम दोनो . .. मैने . से पूछा: एक बात ., बुरा ना मानो तो?

उन्होने कहा: हा .. तुम एक रात में इतनी बदल कैसे गयी हो? . तो तुम ऐसी नही थी. . मुझे धक्का देती रहती थी. लेकिन एक रात . बीच वो क्या हुआ, तुम तो पूरी बदल गयी.

तब . ने कहा: तेरे . नही है यहाँ, इसलिए मुझे हर रात उनकी याद आती थी. मैं . रहती थी कब आएँगे, और वो कब मुझे .. लेकिन उससे कोई . नही . था. वैसे भी उनका लंड तेरे लंड से आधा है, और तेरा लंड तेरे . से बहुत बड़ा है. तूने उस रात मेरे . तक जो तेरे लंड का पानी पिलाया था, उसने मुझे बदल दिया है. आज तक मैने तेरे . का पानी नही पिया, और ना ही कभी उन्होने मेरी ऐसी छूट और गांद छाती थी. लेकिन उस रात तूने मुझे पूरा बदल दिया था. तू मुझसे ऐसा क्यूँ पूच रहा है? तुझे पसंद नही हू क्या अब मैं?

मैने कहा: नही मेरी जान, ऐसी बात नही है. बस तेरा . एक-दूं से बदल गया ना, तो ऐसे ही पूछा.

भाभी: तुम ही ने . और अब तुम ही कह . हो.

मैने कहा: नही मेरी बेबी.

मैं उनके करीब बैठा और उनका हाथ अपने हाथ में लेकर उनके हाथ पर हाथ . रहा. फिर एक-दूं से उन्होने मुझसे पूछा-

भाभी: क्या तुम सच-मच मेरे साथ बच्चे करना चाहते हो मेरे पति ..

मैने कहा: तुम्हे एक-दूं से ये कैसे .?

भाभी: तुमने उस रात कहा था ना तुम मुझे अपने बच्चे की मा . चाहते हो. क्या सच में तुम यही चाहते हो मेरे साथ?

मैं: अगर तुम्हे . है तो.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा.

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