भाभी को सोते हुए चोदने की मस्त कहानी

नमस्ते मैं राज. आशा करता हू सब की ज़िंदगी खुशाल चल रही है.

रूपा दीदी के बारे में पिछले पार्ट में पढ़ लेना. रूपा दीदी की प्रेग्नेन्सी के बाद, मैं पूरा साल स्टडी में कॉन्सेंट्रेट करने लगा. जैसे ही एग्ज़ॅम ख़तम हुए सीधा गोन चला गया.

शाम का वक़्त था, तो मैं खाना खा के आराम करने चला गया. अगले दिन सुबा उठा, और बाहर गया, और देखा सुरेंदर भैया एक लूँगी और बनियान पहने दाँत सॉफ कर रहे थे. तभी आवाज़ लगाई मैने उनको-

मैं: सुरेंदर भैया, कैसे हो?

सुरेंदर: राज कैसा है तू बता? और शादी पे क्यूँ नही आया?

मैं: किसकी शादी?

सुरेंदर: मेरी शादी, तुझे पता नही. अर्रे चल, तेरी भाभी से मिलेगा? (आँख मारते हुए)

मैं: कब की शादी? (शॉक होके)

सुरेंदर: कितने महीने हो गये. तू घर के अंदर चल तो सही.

घर के अंदर गये और सुरेंदर भैया ने मुझसे कहा-

सुरेंदर: इनको तो जानता ही है?

मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी. वो हमारे गाओं की सिंधी थी, जिसको मैं दीदी कहता था. अब वो मेरी भाभी बन गयी थी. मैं भैया के लिए खुश था, और साथ-साथ दुखी भी. सोचते हुए मैं फ्लश बॅक पे चला गया.

रूपा दीदी की चुदाई के बाद खिड़की से निकलते हुए सिंधी ने मुझे देख लिया था. शादी के 5 दिन बाद वो मुझे ब्लॅकमेल करने लगी. उस समय रूपा दीदी उनके पति के साथ अपनी मा के घर आई हुई थी. मैं रूपा दीदी के साथ फ्लर्ट कर रहा था, तो सिंधी मुझे कोने में ले गयी.

सिंधी: तू दीदी के साथ जो किया वो ग़लत है. मैं सब को बतौँगी.

मैं: मैने क्या किया?

सिंधी: मैने शादी की रात देखा है उनके कमरे में तूने उनके सात क्या किया.

मैं: क्या प्रूफ है?

सिंधी: उनके पेट मैं जो बच्चा आएगा, वो है प्रूफ.

मैं घबरा गया. कुछ समय बाद मुझे धमकी देते हुए वो मुझसे अपना सारा काम करवाने लगी. मैने सोच लिया इस लड़की से बचना था, और मौका देखते ही मैं रूपा दीदी को सब से तोड़ा डोर ले गया, और सब बातें बोल दी.

रूपा: वो बस तुझे दर्रा रही है, कुछ नही करेगी.

मैं: नही वो मुझे ब्लॅकमेल कर रही है.

रूपा: उसको फ़ससा ले, सब ठीक हो जाएगा.

मैं: यार दीदी समझो.

रूपा: टेन्षन मत ले, और आज ज़रा वही मज़ा डेडॉ.

ये कहते हुए वो मुझे चुपके से उसके और उसके पति के कमरे के अंदर ले गयी, और जल्दी से चुदाई करवाई. सब करने के बाद मैने कहा-

मैं: किसी को पता चला तो?

रूपा: अब तू जेया.

ये कहते हुए उसने मुझे बाहर निकाल दिया. मैने अगले दिन से सिंधी को फसाने की कोशिश करनी शुरू ही की थी, की हम सब शहर घर आ गये. दिन बीता, और मैं भी पढ़ाई में बिज़ी हो गया. मुझे किसी का कंधे पे हाथ महसूस हुआ तो होश आया.

सिंधी से अब भी तोड़ा दर्रा हुआ था की किसी को कुछ बता तो नही दिया.

4 दिन बीट गये, और अब सिंधी ने खुद इष्कबाज़ी करनी शुरू कर दी, और मैं भी इष्कबाज़ी करने लगा. ऐसे ही दिन गुज़रने लगे.

2 वीक्स बाद एक दिन जब सब बाहर थे, दादा और दादी आराम कर रहे थे. मैं आड़ा नंगा बस लूँगी पहने कंधे पे टवल पकड़ के सिंधी के घर पे गया. घर के बाहर से दरवाज़ा धीरे से धक्का दिया तो खुल गया.

मैं धीरे से अंदर गया, और कमरे के अंदर देखते ही मेरी आँखें बड़ी हो गयी. सिंधी जो दीदी से भाभी बनी थी, वो अंदर खाट पे लेती हुई थी, और ब्लाउस आयेज से 2 बटन खुला हुआ था.

सिंधी भाभी के स्टान्नो का उभार सॉफ दिख रहा था, जो हल्के पसीने से भीगे हुए थे, और घुटनो को उँचा उठा करके, सारी अपनी कमर तक खींच के, बगल में फन चालू करके, बिना पनटी पहने सोई हुई थी.

मैं घबरा गया और वाहा से भागने लगा, और दरवाज़े के बाहर रुक गया. आँखें आस-पास घुमाई, तो डोर तक कोई नही दिखा. दिमाग़ बोलने लगा रुक जेया, ये मौका फिर नही मिलेगा, और जाके सीधा अंदर डाल दे.

कुछ देर सोचने के बाद धीरे से हिम्मत करके फिर अंदर गया, और उनकी खटिया के पास खड़ा हो गया. फिर धीरे से अपने हाथ भाभी के स्टान्नो की तरफ काँपते हुए बढ़ाए. पसीने से भीगा हुआ दो उंगली से ब्लाउस का आखरी बटन खोल दिया, जिससे उनके गोरे स्टअंन बाहर आज़ाद हो गये.

स्टान्नो को मैं बहुत बारीकी से देखने लगा. शरीर की बनावट, उसका चेहरा, पतली कमर मुझे मदहोश करने लगी थी. उसकी सुंदरता भाँपते हुए उसके चेहरे के सामने, और उसकी गोरी टाँगो के पास खड़ा हुआ था मैं. सिंधी भाभी अपनी टाँगो को खोल के लेती थी.

टाँगो के बीच सिंधी भाभी के गुलाबी चूतड़ दिकने लगे, और मैं अपने आप को काबू नही कर पा रहा था. बहुत महीने हो गये थे किसी की चुदाई करके.

मैने अपनी लूँगी थोड़ी बीच में से हटाई, और अपना अंडरवेर उतार लिया. फिर मैने अपने लंड पर आचे से थूक लगाई, और फिर छूट पे थोड़ी थूक लगाई तो पता चला उसकी छूट पहले से ही गीली थी, और मुझे ज़्यादा मेहनत नही करनी था.

मैं सिंधी भाभी की लकड़ी की खाट पे आराम से चढ़ने लगा, जो थोड़ी कमज़ोर भी थी. वो बहुत गहरी नींद सो रही थी. मैं सिंधी भाभी की टाँगो के बीच आराम से अपना लंड सेट करने की कोशिश करने लगा. पर बहुत मुश्किल लगने लगा, क्यूंकी टाँगो को तोड़ा और फैलाना था.

गर्मी और दर्र के कारण पसीने से भीग रहा था. फिर हिम्मत जुटाई मैने, और दोनो हाथो से खाट के कोने को पकड़ लिया, और आराम से अपनी गांद नीचे की. अब मुझे उनकी नंगी जांघों के स्पर्श का एहसास हुआ, और मेरा लंड उनकी छूट के पास छूने लगा.

नींद में ही थोड़ी अंगड़ाई लेते हुए, टाँगो को तोड़ा और फैलाते हुए सिंधी ने अपने दोनो हाथ सर के पास रखे, और जाने-अंजाने में वो खुद मेरे लंड के पास अड्जस्ट हो गयी. एक नज़र उपर से नीचे की मैने. कसम से बवाल लग रही थी वो.

मेरे लंड का टोपा अब भाभी के च्छेद को चू रहा था.

पहले अपने हाथ से थूक ली, और लंड पे गीला किया, और छूट के च्छेद पे हिलने लगा, और फिर आराम से धक्का देने लगा.

अब लंड छूट की दीवारों को चीरते हुए जैसे ही अंदर गया, भाभी की गीली छूट मेरे लंड को अपने अंदर खींचने लगी, और भाभी की नींद में एक्सप्रेशन्स बदलने लगे. वो उम्म उम्म की हल्की आहें भरने लगी. फिर भाभी हिलते हुए कहने लगी-

भाभी: जी जल्दी करो, कोई देख लेगा. सब है यहा.

जिससे मैं दर्र गया, और इधर-उधर देखने लगा. फिर एहसास हुआ भाभी अभी नींद में बोल रही थी. इस दौरान उन्होने अपनी एक टाँग मेरे पैरों के उपर डाल ली. ये सब वो नींद में ही कर रही थी. मैं धीरे से सिंधी भाभी के मस्त नंगे स्टान्नो के उपर लेट गया.

अब मैं धीरे-धीरे धक्का देने लगा. खटिया चू-चू की आवाज़ करने लगी, और सिंधी बीच-बीच में उम्म्म उम्म्म की हल्की आहें भरने लगी. उसने मुझे दोनो हाथो से गले लगा लिया. मुझे लगा वो अब भी सो रही थी.

मैने तोड़ा तेज़ छूट छोड़ना शुरू किया, जिससे उसकी सिसकियाँ तेज़ हुई, और खटिया भी तेज़ी से चू-चू करने लगी. मुझे लगा क्या भाभी अब भी सो रही थी? और कन्फर्म करने उठा तो देखा उसकी आँखें बंद थी, और अचानक खुल गयी.

वो मुझे देख आँखें बड़ी करके चीकने वाली ही थी, की तभी मैने उसका मूह पकड़ लिया, और चुप रहने को कहा. मैने छूट पे धक्का देना चालू रखा, और कुछ देर बाद वो भी मज़ा लेने लगी.

अब दोनो मज़ा लेने लगे. सिंधी ने मुझे गले से लगा लिया और दोनो टाँगो को मेरी कमर के उपर मोड़ लिया.

कमरे के अंदर दोनो पसीने से भीगे हुए थे. जितनी बार छूट में धक्का देता, उतनी बार छाप-छाप की आवाज़ गूंजने लगती. और बस उसी समय “आह ह ह ह और तेज़ राज, और तेज़” कहते हुए सिसकियों के बीच उसका शरीर झटके मारने लगा और वो झाड़ गयी.

फिर कुछ समय बाद मैने उसकी छूट के बाहर अपना सारा रस्स निकाल दिया. फिर मैं उठा और लूँगी पहन ली.

सिंधी: कुत्ते ये क्या किया?

मैं: वही जो तुझे भी चाहिए था.

सिंधी: हरामी नींद खराब कर दी. निकल बाहर, वरना सब को बुला लूँगी.

मैं मुस्कुराते हुए बाहर निकल गया. फिर मैं अपने घर गया और सो गया. शाम को सिंधी भाभी भी आई, और मुझे गुस्से से देखने लगी. मैं घबरा गया क्यूंकी दादी भी गुस्से से मुझे देख रही थी.

दादी: ये जो बोल रही है सच है?

मैं: नही दादी, झूठ है. मैने कुछ नही किया?

सिंधी भाभी: ये झूठ भोल रहा है.

दादी: बेटा तुझे किसी की मंज़ूरी के बिना ये सब नही करना है.

मैं माफी माँगने लगा, और दोनो के पैरों पे गिर गया. सिंधी भाभी ज़ोरो से हासणे लगी और दादी मुस्कुराने लगी. मैं हैरान था.

दादी समझते हुए बोली: बेटा अगर सिंधी के घर में खाना खाना ही था, तो इसको पूच के सही से खा लेता. जब सिंधी बेटी नींद में थी तब तुमने बिना उसकी इजाज़त के घर में घुस के खाना खाया, और गंदा भी किया.

सिंधी मुझे देख आँख मारने लगी, और मुस्कुराते हुए देख रही थी. उसको मज़ा आ रहा था. मैं सारा खेल अब समझ गया था, और भाभी को घूर्ने लगा.

मैं: अब इसके होश में ही खाना ख़ौँगा.

दादी: बदमाश! अब ये तेरी भाभी है. इज़्ज़त से.

मैं वाहा से गया, और अगले दिन फिर उसके घर जाके चुदाई की, और घोड़ी बना के लंड से उसकी गांद के च्छेद खोल के पहली बार गांद की चुदाई कर दी. मैने गांद में ही अपना पूरा रस्स निकाल दिया.

पहली बार भाभी गांद चूड़ने से 2 दिन ठीक से नही चल पा रही थी. अब मैं सिंधी भाभी को देख हासणे लगा था. दादी और अपने पति को बोलती थी की खाट से फिसल के गिर गयी थी, और बस तोड़ा दर्द सा था. ऐसे ही इनकी भी चुदाई का सिलसिला चालू रहा. रूपा दीदी के बाद उनकी बेहन सिंधी भाभी.

अगला एपिसोड कुछ समय बाद. एपिसोड एक-दूसरे से रिलेटेड रहेंगे. अगर स्टोरी पसंद आई हो, तो लीके और कॉमेंट कर देना.

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