भाभी सेक्स स्टोरी कंटिन्यूस…
तो मैने रोहन को मेसेज किया-
मैं: भाई, एक हेल्प कर दे मेरी.
रोहन: कैसी हेल्प?
मैं: यार, भाभी को छोड़ना है, कुछ टिप्स दे दे.
रोहन: कौन है, बता तो सही?
मैं: अर्रे, वो कोमल भाभी है.
रोहन: कल तो तू गुस्सा कर रहा था. अब मॅन कैसे बदला?
मैं: वो सब छ्चोढ़. हेल्प करेगा या नही वो बता?
रोहन: हा, मैं तेरी हेल्प करूँगा. पहले बता तो सही, हुआ क्या?
फिर मैने उसको मेरी बात जो मम्मी और बेहन से हुई थी, वो बताई.
रोहन: अछा, ऐसी बात है. एक बात तो बता, भाभी तेरी दिखने में कैसी है?
मैं: यार, देखने में भाभी गोरी-चित्ति है. उनका फिगर लगभग 36-32-34 है. वैसे उनकी शादी को 2 साल हो चुके है. मेरे दाद की आखरी इक्चा थी की मरने से पहले बड़े बेटे की शादी देख जाए. कोमल उनकी फ्रेंड की बेटी थी.
रोहन ये सब ध्यान से पद रहा था. मैने उसको ये भी बताया की मैं कल घर जेया रहा था. कल सनडे था, परसो से मेरी जॉब भी स्टार्ट होने वाली थी. ये बात मैने दीदी को बताई थी और बाकियों को मैं सर्प्राइज़ देने वाला था.
रोहन: ठीक है, ऐसा कर, तू कुछ दीनो तक भाभी से बात-चीत कर. ट्रस्ट बढ़ा, और इतना होना चाहिए की जो बात तेरी बेहन ने बताई, वो भाभी तुझे खुद बताए.
मैं: ठीक है, समझ गया.
रोहन: देख, भाभी के लिए मान गया. बाकी दो का क्या ख़याल है?
मैं: यार, अभी भाभी पे कॉन्सेंट्रेट करते है. बाकियों का बाद में देखते है.
मैने रोहन को माना नही किया और इस बार गुस्सा भी नही आया. पर ये सोचता रहा की क्या ये सब पासिबल होगा या नही? ये सब सोचते-सोचते मैने तायारी की और रात 12:00 बजे की ट्रेन पकड़ के सुबह 8 बजे अपने होमे टाउन पहुँच गया. फिर कॅब करके अपने घर पहुँच गया.
घर पहुँचते ही मुझे परानते की खुश्बू आने लगी. मुझे उस खुश्बू से भूक लगने लगी. मैने डोर नॉक किया, पर कोई नही आया. तो मैं डाइरेक्ट अंदर चला गया. लिविंग रूम में कोई नही था. किचन में मम्मी ब्रेकफास्ट बना रही थी. दीदी अपने रूम में सो रही थी. भाई-भाभी का रूम एंप्टी था और मैं बातरूम से शवर की आवाज़ आ रही थी.
मैने देखा बातरूम का डोर ओपन था. फिर मुझे ध्यान आया की सिर्फ़ दीदी को पता था की मैं आने वाला था, और सब के लिए सर्प्राइज़ था. शायद भाई अभी घर में नही थे, और बेहन और मम्मी से क्या शरमाना. ये सोच के की भाभी ने डोर लॉक नही किया था, मेरी दिल तेज़ी से धड़क रहा था.
मैने डोर को साइलेंट्ली ओपन किया और देखा अंदर भाभी का कातिलाना बदन पूरा नंगा गीला हुआ था. उनके बड़े-बड़े बूब्स और क्लियर शेव्ड छूट जो की शवर के पानी से गीली थी. उनकी गीली गांद. मॅन कर रहा था वहीं पकड़ के छोड़ डू.
उन्होने अपने शरीर को सॉफ किया और एक टॉय निकाल लिया, और उस टॉय से अपनी छूट रगड़ने लगी. मुझे लगा सही मौका था, इसको रेकॉर्ड कर लेता हू. बाद में हिलाने के काम आएगा. मम्मी किचन में थी. उनको वहाँ टाइम लगता और बेहन अभी तक नही उठी थी.
मैने एक हाथ से फोन निकाला, और रेकॉर्डिंग स्टार्ट की. दूसरे हाथ से मैने पंत नीचे की और अपना लंड हिलने लगा. अंदर भाभी अब उस टॉय को अपनी छूट के अंदर-बाहर करते हुए…
कोमल: अया… संजू. ऐसे ही करते रहो. आआआः… जब से रिपोर्ट्स आई है, तब से तुम मेरे साथ करते नही हो. मुझे इस टॉय का उसे करना पड़ता है. एयाया ओह यॅ बेबी, फक मे लीके तट बेबी.
ऐसा बोलते हुए उन्होने टॉय की स्पीड बढ़ा दी और मैं भी अपना लंड ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगा. फिर एक ही टाइम में मैं और भाभी दोनो झाड़ गये. अब भाभी देख ना ले करके मैने अपनी पंत ठीक की और वहाँ से चला गया.
जल्द-बाज़ी में मैं डोर पहले जैसा करना भूल गया और अपना माल डोर के पास से सॉफ करना भी भूल गया. मैं सीधे किचन में आया. वहाँ मम्मी गाना गुनगुनाते हुए अपना काम कर रही थी. मैं पीछे से जाके उनको हग कर लेता हू.
मम्मी: आ गया बदमाश, हर बार बिना बताए ही आ जाता है.
मैं: आपको कैसे पता लगा की मैं ही हू? दीदी ने आपको बताया क्या? कुछ बात नही पचती उनके पेट में.
मम्मी: मैं तुम दोनो की सब बात जान जाती हू. कल जब तूने बताया तो वो बोहुत खुश हो गयी. मूह से कितनी भी गाली देती है, पर तेरे आने से बहुत खुश हो जाती है. कल तो और भी ज़्यादा खुश लग रही थी, तो मैने सोचा की मेरा लाल आने वाला है.
मैं: तो है कहाँ महारानी?
मम्मी: तू आ रहा है, करके एग्ज़ाइट्मेंट में रात भर नही सोई होगी, और अभी सो रही होगी.
तभी पीछे से आवाज़ आई.
दीदी: मा, आप किसके साथ बात कर रहे हो?
पीछे देखा तो दीदी नींद में आँख मलते-मलते किचन में आई. उन्होने मुझे देखा और बोली-
दीदी: कुत्ते, तू आ गया! और भुक्कड़ सेयेल, आते ही किचन में आ गया. ना कपड़े चेंज करने का, फ्रेश होने का, सीधे किचन में आ गये महाराज जी.
मैं: मम्मी, मुझे तो नही लगता जो आप बोल रहे थे सही है.
दीदी: मम्मी, क्या बोल रहे थे आप?
मम्मी ने दीदी का कान पकड़ा और बोली, “उसको एक सेकेंड के लिए भी आचे से नही रहने देना. अभी आ ही रहा है और तू उस पर रॅशन लेके चढ़ पड़ी.” ये सुन कर दीदी मम्मी को हग कर लिया. और मैने भी उन दोनो को हग कर लिया.
दीदी: ये देखो, हॉस्टिल में रह के कब से नही खाया. जेया, पहले नहा के आ.
ये सुन कर तीनो हासणे लगे. तभी बाहर से भाभी किचन की तरफ आई और वो बोल रही थी: मम्मी जी, कोई आया है क्या? लिविंग रूम में बॅग्स रखे हुए है.
तभी वो अंदर आती है और मेरे को देखती है. मेरे को देख कर चौक जाती है, क्यूंकी जब वो नहा के आई तो डोर तोड़ा सा ओपन था, और डोर के पास बातरूम में सीमेन गिरा हुआ था, और संजू भैया नही थे घर में.
मैं: हेलो भाभी, कैसी है आप? भैया कहाँ है, दिखाई नही दे रहे?
भाभी सोच में लगी थी की क्या उनका देवर था, जो उनको बातरूम में उनको देख कर मूठ मारा था? तभी भाभी मेरी आवाज़ सुनकर होश में आई थी. वो रियली सर्प्राइज़्ड लग रही थी.
भाभी: अर्रे आप आ गये? आपने तो इस बार सर्प्राइज़ ही दे दिया. और हा, आपके भैया साइट में गये है, वर्क प्रोग्रेस देखने. ऑफीस से अर्जेंट कॉल आया था ना, तब.
भाभी मेरे से 3 साल बड़ी थी, पर फिर भी ‘आप-आप’ करके बात करती थी. फिर मैने भी अपना समान रूम में शिफ्ट किया, फ्रेश होके आया और सब ब्रेकफास्ट टेबल पर आए.
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तो बे कंटिन्यूड…