भाभी सेक्स स्टोरी को आयेज बढ़ते है-
वो खाना बना कर फ्री हो गयी, और बर्तन सॉफ करने लगी. सभी घर वाले खाना खा कर कोई कहाँ, कोई मार्केट, और कोई टीवी देखने में लग गया.
भाभी किचन में बर्तन सॉफ करने में लग गयी, और मैं धीरे से उनके पीछे आ कर, उनकी कमर में हाथ डाल के उनसे चिपक गया. भाभी थम सी गयी वहीं. वो कुछ कहने वाली थी, पर मूह से कुछ नही निकला उनके.
मैने पीछे से पकड़ रखा था उनको. मेरा लंड उनकी गांद की दरार में जाने को रेडी था. शायद उनको चुभ भी रहा था. उन्होने मुझे बिना धक्का मारे कहा-
भाभी: क्या बोला था तूने, कुछ और खाएगा? क्या खाएगा बोल? बड़ा आया कुछ और खाने वाला. जो सब के लिए बना है, वहीं तू भी खाएगा. नही तो बाहर जेया कर खा ले ना.
मैने पीछे से तोड़ा और टाइट हाथ बाँधते हुए भाभी से कहा: तुम कहोगी तो ये भी खा लूँगा भाभी. लेकिन मुझे इसके बाद कुछ और भी खाना है. बोलो खिलाओगी ना?
भाभी: पहले मुझे छ्चोढ़. इतनी ज़ोर से क्यूँ पकड़ रखा है? कोई आ जाएगा, छ्चोढ़ मुझे.
मैने भाभी से अपने हाथ थोड़े ढीले करे, और उनके कान के करीब आ कर कहा: मुझे आपकी छूट खानी है. बोलो खिलाओगी ना आज?
भाभी ने झट से मुझे धक्का दे दिया, और कहा: ज़्यादा आयेज बढ़ने की ज़रूरत नही है. चुप-छाप जो मिल रहा है उसी में खुश रहो. वरना जो मिल रहा है, वो भी नसीब नही होगा. और मुझे ऐसे मत पकड़ा कर. मुझे पता नही क्या-क्या होता है, और तेरा वो भी चुभता है मुझे पीछे. तोड़ा कंट्रोल कर उसे, जहाँ देखो वहाँ शुरू हो जाता है. क्या मुझे मरवाएगा.
मैं डोर हटा और कहा: ठीक है भाभी, अब तुम कहोगी तब ही तुम्हारे करीब अवँगा. जब तक तुम नही कहोगी, मैं तुमसे बोलूँगा भी नही (और में वहाँ से चला गया).
शाम के 11:15 हो रहे थे. मेरा गाते खुला था, और अचानक मुझे मेरे कमरे का गाते खुलने की आवाज़ आई. मैने देखा के भाभी आई थी, और जल्दी से आके उन्होने गाते लगा दिया. फिर मेरे पास आ कर बैठ गयी और कहा-
भाभी: जल्दी से जो करना है कर, मुझे जाना है.
मैने कहाँ: मुझे नही करना कुछ भी, जाना है तो जाओ.
भाभी: क्यूँ नही करना कुछ भी? फिर मत कहना कुछ भी.
मैं: जब भी कुछ करने को बोलता हू, तुम्हे हर कुछ याद आ जाता है. मुझे ऐसे नही करना कुछ भी. मुझे पूरी आज़ादी से करना है. जो मैं करू, उसमे आप भी मज़ा लो, और मुझे भी मज़ा आए. नही तो आप चाहे चली जाओ, मैं कुछ नही कहूँगा.
भाभी: देख मैं चली जौंगी. करना है या नही?
मैने सॉफ माना कर दिया की: मुझे नही करना, जाओ आप आपको जाना हो तो.
भाभी जाने लगी और जाते हुए कहने लगी: जौ, पक्का?
मैने कहा: जाओ ना, अब आने की ज़रूरत नही है.
5-6 दिन गुज़र गये. मैं हमेशा उनके पास से बिना कुछ कहे गुज़र जाता था चुप-छाप. वो सोचती की मैं कुछ बात कहूँगा उनसे. पर मैं खामोश रहता, और अपने काम में लग जाता.
एक रोज़ मैं किचन में अपने लिए खाना लेने गया. मैं अपना खाना ले ही रहा था की भाभी का आना हुआ और उन्होने कहा-
भाभी: रूको, मैं दे देती हू. कहीं तुम फैला नही दो.
मैने माना कर दिया की: मैं खुद ले लुऊगा. हाथ है मेरे.
भाभी ने गुस्से में मेरी प्लेट वहीं रख दी, और जाने लगी.
वो कहने लगी: कुछ फैला मत देना, जेया रही हू मैं.
मैने भी कह दिया: जाओ ना, किसने रोका है तुम्हे? जब रोकता हू तब तो रुकती नही हो. अब बड़ी आ रही हो मेरी प्लेट लगाने.
भाभी तुरत आई, और मेरे मूह पर हाथ रख कर बोलने लगी: इतनी ज़ोर से क्यूँ बोल रहा है? धीरे बोल ले. कोई सुन लेगा तो क्या बोलेगा? घर में सभी लोग है.
मैने मौका देख कर के उन्हे ज़ोरो से कमर से पकड़ लिया, और उनके होंठ को चूम लिया. मैने 1 मिनिट तक ज़ोरो से उनके होंठो को चूसा, और उनकी गांद दबा दी. इससे मेरा लंड उन्हे आयेज टच होने लगा.
मैने इतनी ज़ोरो से उन्हे चूसा की उनकी साँस तक निकालने नही दी. चूसने के बाद वो साँस लेने लगी, और नीचे मूह करके चली गयी. उधर मेरा लंड खड़ा हो गया था की अब क्या करू. मैने उसे शांत किया और अपना खाना खा कर मैं सीधा उनके कमरे में चला गया. मुझे देख वो घबरा गयी की मैं क्या करने गया था वहाँ अब.
कमरे में वो अकेली थी. मैने धीरे से उनका गाते लगा दिया, और उनके करीब आ कर कहा-
मैं: अब इसे बड़ा किया है ना, तो ऐसे अब छ्होटा करो, नही तो.
भाभी: जाओ यहाँ से. तुमने अछा नही किया अभी जो किया.
मैने कहा: तुम सीधे मूह बात नही मान रही थी ना, इसलिए मुझे करना पड़ा. अब नखरे छोढ़ो, और मेरा जो खड़ा किया है उसे वापस छ्होटा करो. नही तो मुझे तेरे साथ करना होगा.
भाभी: ठीक से बात करो, जाओ नही करना मुझे. निकलो मेरे कमरे से.
मैने कहा: भाभी फिर से कह रहा हू कर दो.
उन्होने नही सुनी मेरी. फिर मैने उनके उपर चढ़ कर, उनका मूह दबा कर, उनके उपर आ कर, उनके बूब्स पकड़े, और ज़ोरो से उन्हे दबाने लगा. भाभी कॉसिश करती रही मुझसे छूटने की, लेकिन खुद तो मुझसे च्चूधा नही पाई. मैं उनके बूब्स दबाए जेया रहा था. उनके मूह से आह ह ऑश निकल रहा था.
मैं: मुझे पता है तुझे भी मज़ा आ रहा है.
कुछ देर दबाने के बाद उनका मुझसे छ्छूटने की कॉसिश करना बंद हो गया, और अब उसने हाथ छ्चोढ़ के पटक दिए बेड पर. मैने भी उन्हे छ्चोढ़ कर उनके बूब्स मसालने चालू रखे.
फिर मैने कहा: क्यूँ, अब अछा लग रहा है ना?
उन्होने आँखें बंद करके “हा” कहा, और मैं उनके उपर से उतार गया. मेरे उतरते ही उन्होने कहा-
भाभी: क्यूँ उतार गये? अब करो ना.
मैने कहा: मैं बस यही चाहता था की तुम मेरे साथ अपनी मर्ज़ी से करो जो भी करो. जिसमे मुझे भी अछा लगे, और तुम्हे भी मज़ा आए. मैं जानता हू भाई यहाँ नही है, तो आपको कैसा लगता है. लेकिन क्या तुम मेरे साथ नही कर सकती? मैं किसी को बोलूँगा भी नही और तुम भी खुश रहोगी.
कुछ देर सोचने के बाद उन्होने ठीक है कहा, और कहा: जैसा तुम कहोगे अब से में वैसा ही करूँगी.
फिर मैं उनके करीब आया, और उनके होंठो पर अपने होंठ रखे, और उन्हे चूमने लगा. वो भी मेरे होंठ चूसने लगी, और मैं उनके मूह में अपनी जीभ घुसा कर उनकी जीभ से खेलने लगा. मेरा थूक उनके मूह में जेया रहा था, और उनका थूक मुझे चूसने में मज़ा आ रहा था. हम दोनो का मूह थूक से गीला हो गया था.
फिर मैं उनके पास से उठा, और उनको उठाया, और उनकी आँखों में देख कर कहा: देखा, ऐसे होता है प्यार. तुम अगर पहले मान जाती, तो आज हम आपस में एक-दूसरे के साथ सो रहे होते, और दोनो खुश भी रहते.
भाभी ने मेरी बातों को समझा और नीचे मूह करके शरमाने लगी. साथ ही मैं धीरे से उनके बूब्स पर हाथ रख कर धीरे-धीरे उन्हे दबा रहा था.
मैने उनसे कहा: भाभी आपके दूध बहुत ही सॉफ्ट है. कितना मज़ा आ रहा है देखो.
भाभी: ठीक है दबा लो.
मैं उनके बूब्स दबाए जेया रहा था. बीच-बीच में उनका निपल दबा देता था. उपर से वो आ करती, और नीचे मूह करके मुस्कुरा देती. मैने काई बार उनके बूब्स दबाए और ज़ोरो से उनकी आह ह आह निकलती.
अब मैं और भाभी अछा फील कर रहे थे एक-दूसरे के लिए. मैने उनसे कहा: अब माना तो नही करोगी ना?
भाभी ने कहा: नही करूँगी. जो तुम कहोगे वहीं करूँगी.
मैने कहा: तो तुम शाम को आना मेरे कमरे में, और मुझे अपना दूध खोल कर पिलाओगी ना? और मेरा लंड चूसोगी ना?
भाभी ने मुझे देखा और कुछ नही कहा.
मैने कहा: अब शरमाना मत, बोलो चूसोगी ना मेरा लंड? लॉगी ना अपने मूह में?
उन्होने हा कहा और ठीक है ले लूँगी बोला. और मैं एक दफ़ा ज़ोरो से उनके होंठ चूस के, और उनके बूब्स दबा के, उनके कमरे से जाने लगा.
मैने कहा: तो शाम को मिलते है मेरी जान.
आयेज की कहानी अगले पार्ट में.