प्रशंसक भाभी की चुदाई की चाहत

दोस्तो, कैसे हो आप सब … मैं आपका दोस्त शिव राज सिंह, एक बार फिर आपकी सेवा में एक नई और सच्ची कहानी लेकर आया हूँ. आप सबके प्यार के लिए थैंक्स, बस ऐसे ही अपना प्यार मेल करके बताते रहिएगा. आज मैं आप लोगों को एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जो एक ईमेल से शुरू होती है.

मेरी सेक्सी कहानी
दोस्त की शादी मेरी सुहागरात
को पढ़ने के बाद कानपुर की ही एक भाभी का मेल आया था. उन्होंने मेरी सेक्स स्टोरी की बहुत तारीफ की.

उनसे नजदीकी बढ़ी, तो हमारी जी-मेल पर चैट होने लगी. भाभी का नाम अनीता था, वो मैरिड थी. भाभी की उम्र करीब तीस साल के आस पास की रही होगी, क्योंकि उसका एक आठ साल का बेटा भी था, मैंने अंदाजा लगाया. लेकिन वो छब्बीस साल से ज्यादा की नहीं लगती थी. भाभी काफी अच्छी फैमिली से थी. उसके हस्बैंड का बिज़नेस था … और बेटा देहरादून में पढ़ता था.

हमारी काफी चैटिंग होती थी, जिसके चलते हम दोनों ने एक दूसरे के बारे में काफी कुछ जाना था. मुझे भी भाभी की पसंद नापसंद आदि के बारे में मालूम हो गया था कि उसको क्या क्या पसंद है. उसे भी जानकारी हो गई थी कि मुझे क्या क्या पसंद है. हम लोग कभी कभी वीडियो चैट भी करने लगे थे, लेकिन अब तक सेक्स को लेकर कभी ऐसी वैसी बातें नहीं हुई थीं.

एक रात को मैं घर पर अकेला था और उस रात मेरी बीवी भी मायके गयी हुई थी. उधर भाभी के हस्बैंड भी काम से दिल्ली गए हुए थे. मैं घर पे अकेला था सो खाना पैक करवा के ले आया था. साथ में तीन बियर की कैन भी ले आया था.

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मैंने सोचा था कि आज जवानी के दिनों की कोई आपबीती को सेक्स स्टोरी में लिखूंगा.

रात के करीब दस बजे भाभी का मैसेज आया- क्या हो रहा है … खाना खा लिया कि नहीं?
मैंने रिप्लाई किया- नहीं यार … अभी तो बियर पी रहा हूँ, खाना रखा हुआ है अभी खाऊंगा.

भाभी बोली- अकेले अकेले बियर पी रहे हो … हमें कब पिलाओगे?
मैंने कहा- आ जाओ … अभी दो और रखी हुई हैं.
भाभी बोली- आज तो अकेले हो … बीवी नहीं है, तो रात कैसे कटेगी?
मैंने कहा- हां यार … क्या कर सकते हैं … आज तो अपने हाथों से ही काम चलाना पड़ेगा … और तुम क्या करोगी? तुम्हारे हस्बैंड भी तो नहीं हैं … तुम भी तो अकेली हो.
इस पर भाभी बोली- वीडियो पे आओ.

अब हम लोग वीडियो चैट करने लगे. मेरी एक बियर खत्म हो चुकी थी, मैं दूसरी पी रहा था. मुझे हल्का हल्का सुरूर शुरू हो गया था.

आप लोग समझ सकते हो कि दो जवान शादीशुदा प्राणी, एक की बीवी नहीं और एक का पति नहीं … क्या सीन बनता है.

मैंने भाभी से कहा- यार अनीता, तुम आज बहुत सेक्सी लग रही हो … मन कर रहा है कि बस अभी आ जाऊं तुम्हारे पास.
भाभी बोली- आज मन किया तुम्हारा … हम लोग कितने दिन से बातें कर रहे हैं.
मैंने कहा- हां यार आज तुमको नाइटी में देखा, तो कण्ट्रोल नहीं हो रहा. तुम्हारे पास आने को तो मैं न जाने कब से तरस रहा हूँ. मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई बोलने की, पर आज न जाने कहां से हिम्मत आ गयी, सो बोल दिया.

भाभी बोली- अब हिम्मत आ गयी है, तो तुम भी आ जाओ.
मैंने कहा- सच बोलो … यार मैं आ जाऊं?
भाभी बोली- मैं तो कब से तुमसे मिलना चाह रही हूँ … लेकिन कभी तुमने बोला ही नहीं.
मैंने कहा- सोच लो … मैं अभी आ जाऊंगा.
भाभी बोली- आओ न … रोका किसने है.
मैंने कहा- अपना नंबर दो और अपना एड्रेस बताओ … मैं अभी दस मिनट में पहुँचता हूँ.

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उसने अपना नंबर दिया और एड्रेस भी.

मैंने फ़ोन किया और पूछा- बियर पियोगी न?
भाभी बोली- बस तुम आ जाओ, इधर सब है … हस्बैंड का स्टॉक रहता है … कभी कभी हम दोनों पीते हैं.

मैंने बाइक निकाली और कुछ ही मिनट में पहुंच गया. बड़ा ही मस्त घर था. शनिवार की ये रात मुझे और भी गर्म कर रही थी. आज मेरे साथ कुछ अच्छा होने वाला था.

मैं जैसे ही पंहुचा, वो मेरे गले लग गयी उसके मस्त चूचे मेरे सीने में गड़ने लगे. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और एक दूसरे के होंठों को ऐसे चूसने लगे, जैसे जन्मों के दो प्यासे मिले हों.

करीब दस मिनट तक होंठों को चूसते हुए मैं उसके मम्मों को दबाता रहा. बीच बीच में ऊपर से ही चूत को मसलता रहा.
अनीता बहुत गर्म हो चुकी थी और बीच बीच में मेरा लंड जो कि एकदम टाइट था, उसको भी वो सहला रही थी.

हम दोनों अलग हुए. मैंने दो बियर पी रखी थीं, तो मस्त सुरूर था. वो भी व्हिस्की के दो पैग मार चुकी थी, तो वो भी मस्त मूड में थी.

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