अब मुझे रोहिणी की छूट पेलते-पेलते लगभग एक महीना हो गया था. उस रंडी को मेरे लंड की ऐसी लत लगी थी की वो बिना चुड़े नही रह पाती थी. कभी-कभी तो दिन में पार्लर से लौट कर सीधा मेरे फ्लॅट आ जाती थी, और फिर हम चुदाई में ऐसे लग जाते की ना दिन देखते ना रात.
वो तो मुझे बोल रही थी की मैं उसके फ्लॅट पर ही शिफ्ट हो जौ, या उसको अपने फ्लॅट पर रहने डू. मैने उसे छोड़-छोड़ कर उसकी छूट उसकी गांद सब खोल कर रख दिए थे. हर बार उसकी छूट भर देता था अपने माल से.
अब सिर्फ़ प्रेग्नेन्सी के पॉज़िटिव रिज़ल्ट का ही वेट था उसे, जो की हम सौ तका शुवर थे पॉज़िटिव ही होगा. क्यूंकी महीने भर में एक भी दिन ऐसा नही गया जब उसकी छूट ना छोड़ी हो मैने, और हर पोज़िशन में छोड़ी थी. मैने सेक्स एक्सपर्ट्स के वीडियोस देखे, जिनमे प्रेग्नेन्सी के लिए बेस्ट पोज़िशन्स बताई थी. फिर उन सारी पोज़िशन्स में छोड़ा.
उसके फ्लॅट के हर कोने में हर जगह छोड़ा था उसको, और अपने फ्लॅट पर भी, और फ्लॅट के बाहर भी. जहाँ-जहाँ शिखा को छोड़ा था, वहीं-वहीं रोहिणी को भी छोड़ा, और रोहिणी तो बिना किसी नाटक के चूड़ने को रेडी भी हो जाती थी.
वो बस अब मेरे बच्चे की मा बनना चाहती थी. इसलिए जो मैं बोलता था, बड़े शौंक से करती थी. और ऐसा नही था की मैं बस उसकी छूट या उसकी गांद के लिए उसे इस्तेमाल करता था. मैं प्रॉपर उसका ध्यान भी रखता था खाने पीने का, आंड एवेरितिंग. एक दिन जब हम मिशनरी में चुदाई कर रहे थे-
रोहिणी: ऑश विवेक, कितने दीनो से तुम मेरी ले रहे हो. पर आज भी जब तुम छोड़ते हो, तो मा कसम ऐसा लगता है जैसे आज ही सील तोड़ी हो तुमने. तुम बहुत बेरेहमी से पेलते हो लंड छूट में. और अब तो तुम ये एक्सट्रा डॉटेड कॉंडम लगा कर छोड़ने लगे हो, तो ये तो मेरी छूट छ्चील देता है.
विवेक: मज़ा तो आता है ना भाभी आपको?
रोहिणी: विवेक एक रिक्वेस्ट मानोगे मेरी? मुझे अब तुम भाभी मत बोला करो प्लीज़. अब तुम मुझे बीवी बोला करो छोड़ते टाइम प्लीज़.
विवेक: अछा जी, तो मेरी बीवी बनना है? पर उसके लिए तो मुझे आप की माँग भरनी पड़ेगी ना भाभी जी.
रोहिणी तुरंत उठी और कॉंडम उतरा लंड से, और जो तोड़ा बहुत प्रेकुं जैसा लंड से निकल रहा था, उसे हाथ में लिया. फिर उससे अपनी माँग भर ली.
रोहिणी: लो भर ली मैने तुम्हारे नाम से माँग विवेक. अब तो मैं बीवी हुई ना तुम्हारी?
हम दोनो ही हस्स पड़े. फिर मैने उसे उठाया, और हम पॅशनेट्ली किस करने लगे. फिर एक तंग उठा कर रोहिणी की अपनी कमर में घुमा ली, और वहीं खड़े-खड़े उसे छोड़ने लगा.
रोहिणी: आहह छोड़ो मेरे सैयाँ, छोड़ो अपनी बीवी की छूट. हाए रे कितना तगड़ा है मेरे मर्द का लंड. उफ़फ्फ़ रे मैया छोड़ो, छोड़ डालो पूरा एम्म्म.
विवेक: तेरी छूट भी कमाल की है बीवी. मेरे लंड को महसूस ही नही होता की पुरानी छूट पेल रहा है. हर दिन एक नयी छूट का एहसास देती है मुझे मेरी बीवी की छूट.
रोहिणी: हा मैं अब बस सारी की सारी तुम्हारी हू मेरे राजा. मेरे सैयाँ तुम जो बोलॉगे मैं करूँगी, जैसे मेरी लेना चाहो, जहाँ लेना चाहो, वहाँ चुड जौंगी तुमसे. बस मुझे छोड़ना नही छ्चोढना. मैं तुम्हारे लंड के बिना नही रह सकती मेरे सैयाँ.
अब मैने सोचा की जब ये इतनी पागल हो ही गयी थी, तो क्यूँ ना एक चान्स लेकर देखा जाए. फिर मैने उसे बेड के कॉर्नर पर लिटाया, और एक तकिया लगाया कमर से. फिर लंड पेला छूट में और बूब्स पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे. वो फुल मज़े ले रही थी चुदाई के.
विवेक: बीवी मेरी हेल्प करो, बहुत दीनो से एक बात है मेरे मॅन में.
रोहिणी: बोलो मेरे सैयाँ, क्या आअहह चाहिए तुम्हे एम्म एसस्स फुक्कक.
विवेक: सिद्धि की छूट दिलवा दो बीवी.
रोहिणी: क्या! सिद्धि भाभी की छूट! शिखा की मम्मी है वो, याद है ना?
रोहिणी एक-दूं से उठ गयी, और चुदाई रोक दी उसने और मुझे घूर्ने लगी.
रोहिणी: तुम्हारा दिमाग़ तो ठीक है ना विवेक? ये क्या बोल रहे हो?
विवेक: हा मुझे सिद्धि को छोड़ना है, और मुझे ये भी याद है की वो शिखा की मा है. वो ही शिखा जो मेरे लंड की दीवानी है, रांड़ है मेरी. और कुछ?
रोहिणी: पागल हो गये हो तुम पुर. पहले बेटी छोड़ी, अब मा भी छोड़नी है तुम्हे?
विवेक: हा, तो उसमे क्या प्राब्लम है?
रोहिणी: प्राब्लम ये है बच्चे, की वो शादी-शुदा है, एक बेटी है उसकी.
विवेक: शादी-शुदा तो तू भी थी ना मेरी जान. बेटा तो तेरा भी है.
रोहिणी: मैं शादी-शुदा थी. मेरा हज़्बेंड इस दुनिया में नही है अब, और मेरा बेटा भी मेरे पास नही है. पर उनका हज़्बेंड ज़िंदा है. उनके साथ रहता है, और उनकी बेटी भी उनके साथ रहती है. अछा एक बात बताओ, तुम सिद्धि को पटाओगे कैसे?
विवेक: उसमे तू है ना मेरी रंडी, हेल्प करने को.
रोहिणी: मैं? मैं क्या हेल्प कर सकती हू? और चलो एक बार को मान लो मैं बोल भी डू उनको, तो भी क्या वो मान जाएगी? वो अपने हज़्बेंड से बहुत खुश है.
विवेक: अजी घंटा खुश है वो उस नमार्द मदरचोड़ से. 2 मिनिट भी तो छोड़ नही पाता है साला गान्डू. इतना अछा माल है सिद्धि. बहनचोड़ मुझे मिल जाए छोड़ने को, तो हफ्ते भर बेडरूम से ना निकलु.
ये बोलते-बोलते मेरा लंड झटके मारने लगा, तो रोहिणी को पकड़ा, और वैसे ही बैठे हुए ही उसकी छूट में पेल दिया.
रोहिणी: आहह आआए रीए मा. तुम्हे कैसे आहह पता की वो एम्म 2 मिनिट भी नही छोड़ते सिद्धि भाभी को?
फिर मैने उसे शिखा के बर्तडे का क़िस्सा सुनाया.
रोहिणी: पर एम्म मेरी जब भी बात हुई है एम्म्म उनसे, आअहह मा उन्होने तो सब अछा ही बताया है.
विवेक: अब कोई औरत ये तो नही बोलेगी की मेरी छूट बहुत प्यासी है. हज़्बेंड बुझा ही नही पाता है मेरी प्यास.
रोहिणी: पर वो बहुत प्यार करती है भैसाहब से विवेक. जब उनका आक्सिडेंट हुआ था, तो हफ्ते भर व्रत किया था उनकी अच्छी हेल्त के लिए, और वो कभी कुछ ग़लत नही बोलती है भैसाहब के लिए.
विवेक: तू ये सब छ्चोढ़ साली रांड़. ये बता मुझे उसकी छूट दिला पाएगी या नही?
और मैने उसके बूब्स पकड़ कर उसे तोड़ा पीछे झुकाया, और ज़ोर-ज़ोर से धक्के पेलने लगा.
रोहिणी: आहह आहह मा ह्म उम्म और ज़ोर से करो हा हा. एस्स, ये तुम इतना अछा छोड़ते हो ना, की मुझे ना करने की हिम्मत ही नही हो रही है. मैं प्रॉमिस नही करती पर कोशिश करूँगी, एम्म और ज़ोर लगाओ सैयाँ जी. ऐसे छूट नही दिलवा रही रे, अया मैं सिद्धि भाभी की.
विवेक: छूट तो दिलवाएगी तू, चाहे ऐसे या वैसे. और वैसे भी, अब तो तू प्रेग्नेंट हो जाएगी, तो फिर मेरे लंड का ख़याल रखने को कोई तो छूट हो ना, मेरी बीवी.
रोहिणी: अर्रे तो शिखा है ना मेरे बलम जी. क्यूँ रिस्क ले रहे हो? शिखा की छूट, और गांद के मज़े लो ना. अभी तो जवान है वो, खूब मज़े देगी.
विवेक: नही मुझे सिद्धि को पेलना है बस. साली पर दिल आ गया है मेरा. तू ना मिलती तो अब तक तो उसे छोड़ दिया होता.
ये बोलते-बोलते मुझे पता ही नही चला के मैने कब ताबड़तोड़ धक्के पेलने शुरू कर दिए रोहिणी की छूट में. वो भी बिना कुछ बोले बस होंठ दबाए चुदाई के मज़े ले रही थी.
विवेक: आअहह क्या छूट है तेरी. सिद्धि ले, ले मेरा लोड्ा पूरा खा ले साली. कसम से तेरी छूट छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा है सिद्धि, मेरी रंडी.
रोहिणी: हा विवेक, मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा तुम्हारे लंड से चुड कर. छोड़ो अपनी सिद्धि की छूट हाए रे कुत्ते, और ज़ोर से पेलो मा मेरी छूट गयी एम्म विवेक छोड़ो अपनी सिद्धि को म्म्म्मम.
हम दोनो ही एक साथ झड़ने लगे, और इस बार दोनो का ही माल पहले से ज़्यादा निकला. मैं वहीं उनके उपर गिर पड़ा, और 10-15 मिनिट तक वैसे ही हम दोनो तेज़-तेज़ साँसे लेते रहे.
विवेक: बीवी बोलो ना दिलवावगी अपने हज़्बेंड को सिद्धि की छूट?
रोहिणी: अब तो दिलवनी ही पड़ेगी यार. तुमने इतना मज़ा दिया है और अपने बच्चे की मा भी बनाओगे तो तुम्हारे लिए एक छूट तो जुगाड़ करनी ही पड़ेगी. पर प्लीज़ यार सिद्धि और शिखा के चक्कर में मेरी चूत को मत भूल जाना.
विवेक: भूल गयी क्या बीवी?
रोहिणी: क्या सैयाँ?
विवेक (उसके बूब्स पकड़ कर): मुझे तुम्हारा दूड्दू पीना है तो कैसे भूलूंगा तुम्हे?
फिर हम दोनो हग करके वैसे ही नंगे सो गये. क्यूंकी पता था की उठ कर फिरसे चुदाई करेंगे छूट और गांद की.
अगले 2 महीने भाभी को पीरियड नही हुए, तो कन्फर्म हो गया की वो प्रेग्नेंट थी. भाभी भी बहुत खुश थी, और अब वो प्लॅन्स बना रही थी की प्रेग्नेन्सी की बात कैसे च्छुपाई जाए. क्यूंकी जब पेट निकलेगा तब सब को पता चल जाएगा.
तो उन्होने डिसाइड किया की वो यहाँ की ब्रांच में नया स्टाफ अपायंट करेंगी, और पुराना स्टाफ नयी जगह कहीं शिफ्ट करेगी 1-2 महीने में, जब तक पेट से प्रेग्नेन्सी का पता नही चलता. और इधर वो सिद्धि को पाटने का भी आइडिया सोचने लगी.
अब अगले पार्ट्स में देखेंगे सिद्धि की छूट मिलती है या नही. आप सभी के कॉमेंट्स का वेट करूँगा. फीडबॅक दीजिएगा,