भाभी के यौवन का भोग

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम विहान है. यह बात दो महीने पहले की है. मैं दिल्ली अपनी कोचिंग के लिए आया था, काफी रूम देखे लेकिन कोई पसन्द नहीं आया. आखिर में एक फ्लैट अच्छा लगा, वहां के मकान मालिक एक बुजुर्ग दंपत्ति थे. उनका एक बेटा था, जो जयपुर में नौकरी करता था और उसकी बीवी यानि अंकल आंटी की बहू, उनके साथ ही रहती थी. उनकी बहू यानि भाभी बहुत सुंदर और दिखने में बड़ी ही कामुक थीं. मैंने अंकल से रूम को किराए पर लेने की बात करते हुए उन्हें अपने बारे में बताया.

चूंकि मैं एक बहुत अच्छे कॉलेज से पढ़ा था, इसलिए कॉलेज का नाम सुनते ही वो प्रभावित हो गए. उन्होंने मुझसे कुछ बातें पूछी और रूम की बात फाइनल हो गई. अगले दिन मैं वहां शिफ्ट हो गया.
कुछ दिन बीत गए, मैंने किसी से ज्यादा बात नहीं की.

फिर एक दिन जो अंकल थे यानि भाभी के ससुर, उनकी तबीयत खराब हो गई. घर पर उनका बेटा नहीं था. वो सिर्फ रविवार को आता था.. तो भाभी ने मुझसे उनको अस्पताल ले जाने को कहा. मैं और भाभी उनको अस्पताल ले गए और एडमिट करा दिया. डॉक्टर ने कुछ देर बाद कहा कि सब नार्मल है.
इस कारण हमने भैया को बुलाना जरूरी नहीं समझा और हम सब घर वापस आ गए.

मैंने उस दिन भाभी से पहली बार बात की थी.
अगले दिन से मैं जब भी भाभी को देखता, तो हम दोनों ही मुस्कुरा देते.

एक दिन मैं छत पर खड़ा था, शाम का वक़्त था. भाभी कपड़े लेने छत पे आई थीं. उन्होंने मुझसे पूछा कि कैसी चल रही है तैयारी विहान?
मैंने बोला- बस भाभी.. सब अच्छा चल रहा है.
इस तरह हम दोनों की बातें शुरू हो गईं. हमने खूब बातें की, तभी आंटी ने भाभी को आवाज लगाई और भाभी चली गईं.

उस दिन भाभी की साड़ी बहुत कामुक लग रही थीं. उनकी पतली कमर और काली आंखों पर मेरा दिल आ गया था. भाभी के बोबे बहुत बड़े और गोल थे. उनकी तस्वीर मेरे आंखों में बस गई. उस दिन रात को मैंने भाभी के यौवन का भोग, अपने दिमाग में उनकी चूचियों को रख कर और हाथों के सहारे लंड को हिला कर किया. मतलब भाबी की जवानी को याद करके मुठ मारी.

यह कहानी भी पड़े  भाभी ने सेक्स की गोली खिलाकर चूत चुदवाई

अगली सुबह भाभी को झुक कर झाड़ू लगाते देखा, तो भाभी की उठी हुई गांड देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं बस यूं ही उनकी हिलती हुई गांड को देखता रहा. उसी दिन से मेरे मन में भाभी के यौवन को भोगने की प्यास जाग गई. मैं उनके यौवन का भोग करके अपनी कामुकता को पूरी करना चाहता था. मैं भाभी को याद कर करके लंड हिलाने लगा.

बाद में मौके मिलते ही उनसे बात करता, पर ये सब काफी नहीं था. मुझे तो पूरा सुख लेना था. मैंने भाभी से बात की लेकिन वो बहुत कम बाहर आती थीं और मेरा रूम काफी साइड में था.

मैंने शाम को भाभी से बोला कि मेरा मोबाइल रूम में मिल नहीं रहा है, क्या आप कॉल कर देंगी.
भाभी ने अपना फ़ोन दिया और मैंने कॉल किया. अब मेरे पास भाभी का पर्सनल नंबर आ गया था.

रात को मैंने भाभी को मैसेज किया, उन्होंने मेरी व्हाट्सअप प्रोफाइल पिक्चर की तारीफ की. तो मैंने कहा- आपसे अच्छी नहीं है.
बस यूं ही व्हाट्सअप पर बातें होने लगीं. मैंने भाभी से सब कुछ पूछ लिया. भैया बहुत कम आते थे इसलिए भाभी थोड़ा उदास रहती थीं.

मैंने एक दिन भाभी के फिगर की तारीफ कर दी तो बोलीं कि लगता है विहान पढ़ाई में ध्यान नहीं है तुम्हारा?
मैं जरा मुस्कुरा दिया तो फिर बोलीं कि मजाक कर रही हूँ और थैंक्स कह दिया.
बस मेरा हौसला बढ़ने लगा. भाभी खुद मुझसे बहुत बातें करती थीं.

एक दिन रात काफी हो चुकी थी, भाभी और मैं बात करते करते सेक्स के टॉपिक पे आ गए. भाभी सेक्स के बारे में बहुत जानती थीं. मैंने उनकी पसंद की सेक्स पोजीशन पूछी, तो वो बोलीं कि सेक्स बहुत कम हुआ है.. तुम्हारे भैया शादी के कुछ दिन तक तो करते रहे थे, फिर जॉब के कारण सिर्फ जब आते हैं.. तब ही हो पाता है, वो भी ज्यादा नहीं.

यह कहानी भी पड़े  बरसात की रात एक लड़की के साथ

मैंने पूछा- भाभी आप सेक्स मूवी देखती हो?
वो बोलीं- पहले देखती थी, लेकिन शादी बाद नहीं देखी.
मैंने कुछ नहीं कहा तो उन्होंने पूछा कि क्या आपके पास सेक्स मूवीज हैं?
तो मैंने भाभी को मूवीज के स्क्रीन शॉट भेजे, बस भाभी और मैं कामुकता में खो गए. अब हम दोनों सेक्स चैट करने लगे.

उस दिन से मेरी कामुकता बहुत बढ़ गई मुझे अब बस भाभी को चोदना था. मैंने बोला कि अकेले में मिलते हैं.
वो बोलीं- विहान ये गलत है और मम्मी पापा दिन भर यहीं होते हैं.

कुछ दिन बीते, हम फोन पे भी सेक्स चैट करने लगे. भैया जब भी आते मेरी कामुकता बढ़ जाती. मेरे दिमाग में भाभी के यौवन ने कब्जा कर लिया था. मुझे उस आनन्द का भोग करना था.
आखिरकार वो दिन आ ही गया, जिसके इंतजार में मैंने अपने लंड को हिला हिला कर अपनी कामुकता दूर की थी. अंकल और आंटी को कहीं रिश्तेदारी में जाना था और शाम को भैया आने वाले थे. इसलिए वो अकेले निकल गए, भाभी को घर ही छोड़ गए.. क्योंकि वो अगले दिन आ ही जाने वाले थे. इस तरह हमारे पास शाम तक का टाइम था. भैया शनिवार की शाम को आते थे.

Pages: 1 2 3

error: Content is protected !!