भाभी के लिए हुई हवस भारी नज़र

मेरा नाम कारण है और मैं अल्लहाबाद में रहता हू. मैं 35 साल का हू, और डिवोर्स्ड हू. हमारे घर में हमारे पिता जी प्रताप (55), भाई प्रेम (26), उसकी वाइफ मृणालिनी (20), और मैं (35) एक साथ रहते है.

कहानी पर आने से पहले मैं सब के बारे में तोड़ा बता डू. हमारे पिता जी ने कपड़े का बिज़्नेस सेट-उप किया और खुद की ज़िंदगी हमारे पालन पोषण में लगा दी. हमारी मा के देहांत के बाद उन्होने खुद को बिज़्नेस में झोंक दिया, और खुद के बारे में कुछ नही सोचा.

मेरी शादी कराई, पर कुछ परिवारिक कार्नो के चलते वो ज़्यादा दिन चल नही पाई, और हमारा डाइवोर्स हो गया. फिर मैं भी बिज़्नेस में लग गया. कुछ दीनो पहले ही मेरे छ्होटे भाई की शादी, मृणालिनी से हुई है, जो की अल्लहाबाद के एक छ्होटे से गाओं से आती है.

मेरे डाइवोर्स के बाद हम सिंपल लड़की ढूँढ रहे थे, जो की घर में शांति और समृद्धि बनाए रखे. इसी खोज में हमे मृणालिनी मिली. अब ज़्यादा टाइम वेस्ट ना करते हुए मैं कहानी पर आता हू.

ये कहानी है एक परिवार में प्यार की, आपसी समझ की. ये सारी बातें प्रेम द्वारा मृणालिनी को भी बताई गयी थी. हमारे परिवार में मृणालिनी एक महिला सदस्या थी, बाकी सभी पुरुष थे. ये अब मृणालिनी पर था की परिवार को कैसे संभालना था.

मृणालिनी के बारे में बता डू तोड़ा, रंग गोरा, हाइट 5’2″, फिगर 38-30-42. स्लिम थी, बुत उसके बूब्स और गांद मस्त भरे हुए थे. और वो घर में सारी में ही रहती थी. हमारा छ्होटा सा कपड़े का बिज़्नेस है, और हम छ्होटे से टू भक घर में रेंट पर रहते है.

शादी के बाद हमारे यहाँ हनिमून जैसा कुछ नही हुआ. प्रेम मृणालिनी को लेकर घर आ गया, और हमने घर पर ही छ्होटी सी रिसेप्षन पार्टी दे दी, जहाँ सभी रिलेटिव्स आए थे. रिसेप्षन के दिन हमने प्रेम का कमरा साजवा दिया था, की वो अपना हनिमून माना सके.

प्रेम के कमरे से ही लग कर हमारा कमरा था, जिसमे मैं और पिता जी रहते थे. रिसेप्षन के बाद हम फ्लॅट में आए और थकान के कारण कब नींद पद गयी पता ही नही चला. प्रेम कुछ दीनो के लिए घर पर ही था, और हम और पिता जी, दुकान संभाल रहे थे. मृणालिनी हमारे खाने-पीने का अछा ध्यान रख रही थी. और घर का माहौल पहले से बहुत अछा हो गया था.

बुत एक रात जब मैं दुकान से आया, तो लाते हो गया था. 11:00 बाज चुके थे. पिता जी सो गये थे, और प्रेम और मृणालिनी भी डिन्नर कर चुके थे. मैने डिन्नर किया और सोने चला गया. पर मुझे नीड नही आ रही थी. तभी मैने कुछ फुसफुसाने की आवाज़ सुनी, जैसे रूको अभी नही, भैया जाग रहे होंगे, थोड़ी देर में. मैने ध्यान नही दिया और मोबाइल चलाने लगा.

तभी मृणालिनी की ज़ोर से आवाज़ आई: आअहह मॅर गयी, प्लीज़ रूको-रूको, प्लीज़, आआहह.

मुझे लगा जैसे वो बेड से गिर गयी है.

मैने प्रेम को आवाज़ लगाई: सब ठीक है प्रेम, क्या हुआ?

कुछ देर तक कोई रेस्पॉन्स नही आया. फिर प्रेम ने रिप्लाइ किया-

प्रेम: कुछ नही भैया. वो मृणालिनी को पैर में लग गयी है गाते से. कोई बात नही, सब ठीक है.

ये सुन कर मैने भी रिप्लाइ किया: ओक ठीक है, सो जाओ.

तब तक मेरे दिमाग़ में कुछ ऐसा-वैसा नही चल रहा था. नेक्स्ट रात फिर वैसा ही हुआ.

मृणालिनी की ज़ोर से आवाज़ आई: आअहह, आअहह, मॅर गयी, प्लीज़-प्लीज़.

इस बार मैने कुछ नही बोला, और सुनने की कोशिश की. पिता जी सो चुके थे. ऐसा लगा जैसे दोनो सेक्स कर रहे थे, पर आचे से हो नही पा रहा था. मृणालिनी ह, आअहह कर रही थी, और प्रेम कुछ दबी आवाज़ में बोल रहा था जैसे-

प्रेम: रंडी, मेरा लॉडा छूट में ले, और ले, अंदर तक ले.

मृणालिनी बोल रही थी: छोड़ो मुझे प्लीज़, आअहह. मेरे बूब्स दब्ाओ, मुझे मज़ा आ रहा है.

और ऐसा कुछ 1 बजे से 3 बजे तक चला. ये सुन कर मेरा लॉडा खड़ा हो गया था. मैने भी अपने लॉडा निकाला और हिलने लगा, और मूठ मार कर सो गया.

ऐसे ही लगभग डेली वो लोग सेक्स करते 1 बजे से 3 बजे के बीच में, और मैं भी उनको सुनता था. मुझमे भी कामुक भावना जाग गयी थी, और मैं मृणालिनी को वैसी नज़र से देखने लगा. जब भी मुझे मौका मिलता मैं उसकी बूब्स, क्लीवेज और गांद पर नज़र फेरता रहता था. और मुझे लगता था जैसे उसे भी ये पता चल रहा था की मैं उसे ताड़ता हू.

एक रात जब मैं डिन्नर करके सोने जेया रहा था, तब मैं देखा की प्रेम और मृणालिनी का कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ था, और मृणालिनी बिना पल्लू के सो रही थी. उसके बड़े-बड़े चूचे सॉफ चमक रहे थे. मेरा मॅन किया की जेया कर दबा डू, चूस लू, खा जौ, और छोड़-छोड़ कर उसको पागल कर डू. फिर मेरी नज़र प्रेम पर पड़ी. वो भी सो चुका था. भाई का ध्यान आते ही मैने सोचा ये सब ग़लत है, और सोने चला गया.

अगले दिन मुझे उठने में लाते हो गया, और मेरे से पहले प्रेम और पिता जी दुकान पर जेया चुके थे. मेरी नींद खुली तो देखा की 10 बाज चुके थे. बुत ये पहला दिन था जब मैं घर पर मृणालिनी के साथ अकेला था. मृणालिनी ने मुझे नाश्ते का पूछा, और मैं बोला-

मैं: नहा कर आता हू, फिर नाश्ता करूँगा.

मुझे याद है उस दिन मृणालिनी ने लाल रंग की सारी पहनी थी, और लाल ही कलर की ब्लाउस पहनी थी, जो ट्रॅन्स्परेंट थी. बुत अंदर ब्रा नही दिख रही थी. मैं भी जब नहा कर निकला, तो सिर्फ़ टवल लगा कर नाश्ता करने आ गया और त.व. पर न्यूज़ लगा दी. मृणालिनी नाश्ता लेकर आई, और मुझे दिया.

मैं उसे हवस की नज़रों से निहार रहा था. क्या चूची थी, क्या कमर थी, और क्या गांद थी. उसने मुझे नाश्ता दिया, और बोली-

मृणालिनी: आपकी तबीयत अगर ठीक नही है तो आज दुकान मत जाइए.

मैने भी मौका देख कर बोला: हा आज घर पर ही रुक जाता हू.

मेरा लंड खड़ा हो चुका था, और मृणालिनी को पेलने के लिए सलामी दे रहा था. मृणालिनी मेरे सामने सोफा पर बैठ कर टीवी देख रही थी. उसकी नज़र मेरे टवल पद पड़ी, पर उसने अनदेखा कर दिया, और मुस्कुरा कर अंदर रोटी लाने के बहाने चली गयी.

उस दिन मैं घर पर ही रहा, और टवल में ही था. मृणालिनी के साथ लंच किया और देखा की मृणालिनी मेरे लंड को बार-बार देख रही थी. मुझे समझ नही आया की क्या करू. बुत मैं समझ गया था की मौका था, और घर पर ही प्यास बुझाई जेया सकती थी.

अगली बार पढ़िए कैसे मेरे ब्रदर की वाइफ ने मुझे अपनी तरफ आकर्षित करके मेरे साथ सेक्स किया.

मेरा नाम है कारण प्रसाद, और कोई भी मदद के लिए आप मेरे पास मेसेज कर सकते है

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