अंतर्वसना कहानी की अगली किश्त-
एक बार सभी लोग किसी शादी में गये हुए थे, लेकिन मैं और जेठ जी नही जेया पाए. मुझे पहले से पता था की सब लोग शाम तक ही लौट कर आएँगे. और वो मंत एंड था, तो जेठ जी का ऑफीस से तोड़ा जल्दी आना भी पक्का था.
उसी सोच में मैने अपनी अलमारी से एक ख़ास गहरी लाल जोर्जेट सारी निकली. पतला, शियर फॅब्रिक जो मेरी हर कर्व को सॉफ्ट्ली हाइलाइट करता है. जब भी मैं इस कपड़े को पहनती हू, मेरी अपनी बॉडी का हर कोना ज़िंदा हो जाता है. मेरे मॅन में सिर्फ़ एक ख़याल था – “आज जेठ जी ज़रूर नोटीस करेंगे…”
सारी मैने जान के थोड़ी नाभि के नीचे बाँधी थी, जिससे कमर का झुकाव और हिप्स का राउंडनेस और ज़्यादा निकल के आ रहा था. ब्लाउस डीप कट था, अंदर ब्रा नही पहनी थी. जब मैं खुद को आईने में देखी, तो अपने उभरते बूब्स और ब्लाउस के टाइट फिटिंग से निकलती क्लीवेज को देख के मैं खुद ही तोड़ा थरथराई. मुझे लगा – “अगर मैं अपने आप से इतनी अफेक्टेड हो रही हू… तो जेठ जी पर क्या असर होगा?”
जब वो घर आए… उनकी आँखें मुझ पर अटक गयी. वो सीधे मुझे घूरते रहे. उनकी आँखों में शरम नही थी… सिर्फ़ एक प्यासी सी चाहत थी. जैसे मेरी एक झलक ने उनके अंदर कुछ जगा दिया हो.
मैं उनकी आँखों में आँखों डाल कर हल्की सी मुस्कुराइ. मैने तोड़ा नज़ाकत से कहा, “अछा हुआ आप जल्दी आ गयी. कब से घर पर अकेली बोर हो रही थी.”
वो एग्ज़ाइट्मेंट में बोले, “कहाँ गये सब?”
मैने धीमी सेडक्टिव वाय्स में कहा- “आप भूल गये आज सब को शादी में जाना था.”
जेठ जी ने नॉटी आवाज़ में कहा, “सपना… तुम क्यूँ नही गयी?”
मैं कुछ बोल नही पाई, पर मेरी आँखें सब कह गयी थी. जब मैं खाना परोस रही थी, तो हर बार झुकते वक़्त ब्लाउस का क्लीवेज और गहरा दिख रहा था. मैं जान कर उनकी तरफ झुकती थी, और हर मूव्मेंट में उन्हें टीज़ करती थी.
जब वो खा रहे थे, मैं उनके सामने स्लॅब सॉफ करने लगी – बॅक उनकी तरफ, टाइट बॅकलेस ब्लाउस और लो-ड्रेप्ड सारी में मेरी कमर सीधा उनकी आँखों के सामने थी. मुझे पता था… उनकी साँस रुकी हुई थी. और मुझे वो बेचैनी चाहिए थी.
खाना ख़तम करके वो मेरे बिल्कुल पीछे आ गये… और मुझे गेंट्ली पकड़ लिया. उनका हाथ मेरी कमर पर गया, उनका स्पर्श एक तेज़ बिजली जैसे जिस्म में दौड़ गया. मैं एक पल के लिए तितका गयी, मेरी साँसें तेज़ हो गयी.
मैने दर्र, उत्तेजना और एक अजीब सी चुभन के साथ अपनी तेज़ साँसें को कंट्रोल करते कहा- “जेठ जी… ये… ये क्या कर रहे है आप? कोई आ जाएगा!”
जेठ जी ने मेरी कमर को कस्स कर पकड़ते हुए, धीमी, गरम आवाज़ में बोले- “आज कोई नही आएगा, सपना. आज सिर्फ़ हमारी बारी है… तुम्हारी प्यास बुझाने की.”
वो मुझे पीछे से पकड़ कर मेरी गर्दन, रलोब और मेरी नंगी बॅक पर किस करने लगे. हर एक च्छुअन से मेरा जिस्म काँप उठता, लेकिन मॅन का एक कोना गिल्ट से भर गया था. आँखों में आँसू आ गये… पता नही वो दर्र के थे, या इस रिश्तों के बंधन के टूटने की चुभन के. मैं अपने आप से लड़ रही थी.
मैं रुकने की कोशिश कर रही थी और आँखों से आँसू तपाक रहे थे. मैने धीमी सहमी हुई आवाज़ में कहा, “नही… ये… ये ग़लत है… मैं आपके भाई की बीवी हू… ये रिश्तों की मर्यादा तोड़ रहा है…”
जेठ जी ने मेरे कान के पास अपनी गरम साँस भेजते हुए, हल्का सा काँपते हुए कहा- “सपना, मैं भी जानता हू ये आसान नही है. पर जो तेरी आँखों में दर्द और प्यास देखी है ना… वो सिर्फ़ कोई अपना ही समझ सकता है. तुम अकेली हो… और मैं भी…”
मुझे सीधा कर दिया उन्होने. मेरी आँखों में आँसू थे — शरम के, दर्द के… और हा, प्यास के भी. आज पहली बार किसी गैर मर्द ने मुझे इस तरह च्छुआ था, और वो भी मेरा जेठ… लेकिन मेरा जिस्म… वो सारा विरोध भूल गया था.
उन्होने मेरा सर अपनी तरफ उठाया और मेरे होंठो को चूसने लगे. मैं रोकती रही अपने आप को, पर जैसे मेरी बॉडी उनके होंठो के आयेज पिघल गयी थी. जब उन्होने सारी के उपर से मेरे बूब्स को दबाया, तो एक ज़बरदस्त झटका मेरी रीढ़ की हड्डी तक गया.
मेरे होंठो से एक गहरी सिसकारी निकल गयी. मैं उनके किस में खो गयी थी, जीभ उनकी जीभ से टकरा रही थी, गिल्ट के साथ एक अंजानी सुकून भी था, जैसे अंदर की सारी भूख, सारी प्यास, आज बुझने वाली हो.
कुछ 10 मिनिट बाद जब हमारी किस टूटी, तब मैं उनसे लिपट कर शर्मा गयी. मेरी साँसें उनके सीने पे पद रही थी, और दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था… जैसे कुछ ग़लत कर दिया हो, पर मॅन यूयेसेस ग़लती में ही खो गया हो.
उन्होने मुझे धीरे से गोदी में उठाया, मैने अपनी बाहें उनके गले में डाल दी. मेरी आँखें उनकी आँखों से नही मिल पा रही थी. वो बिना कुछ बोले मुझे बेडरूम ले आए. अंदर एक अजीब सी घबराहट थी, लेकिन उससे ज़्यादा एक गहरी प्यास.
उन्होने मुझे बेड पर लिटाया. उनकी आँखें मेरी तरफ एक अलग ही नज़र से देख रही थी. धीरे से उनका हाथ मेरे पेट पर फिरा… एक हल्की सी काँप उठी मैं. फिर वो मेरे गला, गर्दन, पीठ और कमर पर किस करने लगे. हर टच में जैसे मेरी साँसों की स्पीड बढ़ रही थी. मैं कभी अपने पैर जोड़ लेती, कभी उनके हाथ पकड़ने लगती… पर रोकती नही थी.
मेरी आँखें बंद थी, लेकिन हर जगह उनका स्पर्श महसूस कर रही थी. उनकी किस्सस के साथ मेरी सिसकारियाँ निकल रही थी. दिल कह रहा था की बस यहीं पल रुक जाए.
फिर वो मेरे पास लेट गये. उन्होने मुझे अपने उपर खींच लिया. उनका चेहरा मेरे बिल्कुल सामने था. उनके होंठ मेरे लिप्स को चूसने लगे. मैं अब उन्हे पूरा सपोर्ट कर रही थी. अपने हाथो से उनका चेहरा पकड़ के उन्हे चूमना शुरू किया. कभी हल्की सी बीते, तो कभी चीक पे नर्मी से किस. मेरी हर साँस उनके साथ जुड़ती जेया रही थी.
मुझे समझ आ रहा था. मैं उनके लिए पूरी तरह से रेडी थी. अंदर गिल्ट था, पर अब उससे ज़्यादा एक औरत का प्यासा टन था, जो सिर्फ़ प्यार नही, पर अब छूट में लंड माँग रहा था. वो पलट गये, और धीरे से मेरे उपर आ कर बैठ गये.
उनकी आँखों में कुछ अलग ही था, जैसे मुझे पूरा का पूरा समेत लेना चाहते हो. उन्होने अपने हाथो से मेरा पल्लू हटा दिया. मेरे ब्लाउस के अंदर कुछ नही था, और ब्लाउस खुद इतना टाइट था की मेरी साँसों के साथ सीने का हर उभार उनके सामने स्पष्ट हो गया था.
उनकी नज़र मेरी क्लीवेज पर जेया टिकती, जैसे वहाँ ही डूब जाना चाहते हो. वो झुक कर ब्लाउस के उपर से मेरी सीने के बीच किस करने लगे. उँकदे होंठो का गरम स्पर्श मेरे रोम-रोम को जगा रहा था. मैं आँखें बंद करके बस उनके होंठो की गर्मी महसूस कर रही थी. मेरे अंदर की बेचैनी बढ़ चुकी थी.
फिर वो धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरक गये. उनका चेहरा मेरे पेट पर था अब. उन्होने वहाँ भी किस करना शुरू किया, हल्की-हल्की जीभ से मेरे नेवेल के आस-पास घूमने लगे, और फिर एक पल में उनकी जीभ मेरी नाभि के अंदर… आ… मैं एक थरथराहट से भर गयी थी. जैसे हर नर्मी में उनका जुनून च्छूपा हो.
ये सब तो मैने कभी महसूस ही नही किया था. ये तो कोई अलग ही दुनिया थी. अपने पति के साथ कभी इतना पॅशन नही देखा था. ये तो एक बेशरम सी चाहत थी, जो मुझे अंदर तक गीला कर रही थी.
मैं भी अब उनके बालों में हाथ फिरने लगी. कभी उनके सर को अपनी नाभि पर दबाने लगती, जैसे मैं भी उन्हे अपने अंदर घुसा लेना चाहती थी. मैं अपनी साँसों से सुलग रही थी… पूरी तरह उनकी चाहत में भीग चुकी थी.
और फिर… उन्होने मुझे धीरे से खड़ा किया. उनकी उंगलियाँ मेरी सारी के पल्लू तक पहुँच चुकी थी, और बिना कुछ बोले उन्होने सारी खोलनी शुरू कर दी. मैने भी उनका साथ दिया. मेरे हाथ हल्के-हल्के काँप रहे थे, पर उनकी च्चती की गर्मी के सामने मेरी झिझक पिघलने लगी थी.
अब मैं उनके सामने सिर्फ़ एक टाइट ब्लाउस और सॅटिन सिल्क का पेटिकोट पहने खड़ी थी. मेरी साँसों का उतार-चढ़ाव मुझे खुद सुनाई दे रहा था. इतनी नंगी सी कभी किसी के सामने नही खड़ी हुई थी, वो भी जेठ जी के सामने. शरम से मेरी आँखें झुक गयी थी. लेकिन मेरी छूट में जो गर्मी थी, वो मेरी शरम से कहीं ज़्यादा तेज़ थी.
वो आयेज बढ़े, और उन्होने मुझे कमर से पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया. उनका हाथ मेरे पेटिकोट के उपर से मेरी गांद की गोलाई पर फिसलने लगा, जैसे हर कर्व को महसूस करना चाहते हो. मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ गयी. मेरी कमर हल्की सी थरथरा गयी. सिसकारियाँ मेरी ज़बान तक आ चुकी थी, पर मैं चुप थी. बस आँखें बंद करके उनके टच में खो गयी थी.
फिर उन्होने मुझे धीरे से बेड पर लिटा दिया, मेरी आँखों में झाँकते रहे, जैसे कुछ पूछना चाहते हो. मैं बस उन्हे देख रही थी, आँखों से हा कह रही थी.
वो अपनी शर्ट के बटन खोलने लगे एक-एक करके. और मैं बिना झिझक उनकी बॉडी को घूर रही थी. उनके छ्चाटी के मसल्स, उनके हाथ, वो च्छूपी हुई मर्दानगी, सब कुछ मुझे खींच रहा था अपनी तरफ. उनके जिस्म से एक अलग ही गर्मी निकल रही थी, जैसे बस मुझे अपने अंदर समा लेना चाहते हो.
वो मेरे पास आए, उनकी आँखों में शिद्दत थी, और उन्होने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “सपना, तुम बहुत खूबसूरत हो. तुम्हारी ये फिगर… ये आँखें… मुझे पागल कर रही है. सच में, तुम मेरी हर रात की ख्वाहिश बन गयी हो.”
उन्होने मेरे ब्लाउस का हुक खोला और मुझे उपर से नंगा कर दिया. मैने शर्मा कर दोनो हाथो से अपने बूब्स च्छूपा लिए, पर उन्होने मेरे हाथो को हटा दिया और अपना मूह मेरे बूब्स पर दबा दिया और किस करने लगे. वो मेरे बूब्स मसल रहे थे और साथ में निपल चूस रहे थे, जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी मा का दूध पी रहा हो.
मैं मदहोश हो गयी थी. मेरी आँखें बंद हो गयी और मैने अपने आप को पूरी तरह उनके हवाले कर दिया.
इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा.