भाभी की चुदाई करके स्पर्म पिलाया

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की कैसे मैने अपना लंड भाभी की छूट के एंड तक उतार दिया, और ऐसे ही उतार कर खड़ा रहा. अब आयेज-

उसकी चीख निकल गयी: अहह जाआंणन्न्, नही. मा आ आ. निकाल लो तुम तो बाहर. मुझे नही करवाना, बहुत दुख रहा है.

मैने उसकी नही सुनी और अब मैं उसके उपर आ कर उसके होंठो को चूमने लगा. फिर धीरे से अपना लंड आयेज-पीछे करने लगा. उसको पता भी नही चला इसका, और मैं उसे छोड़ते रहा. क्यूंकी वो होंठो को चूसने में बिज़ी हो गयी थी, और मैं उसकी छूट में अपना लंड पूरा उतार चुका था, और आयेज-पीछे करे जेया रहा था.

फिर मैं उठा और उसकी दोनो टाँगें उठा कर अपने कंधे पर रखी. उसके बाद मैने ज़ोर का धक्का दिया. मेरा लंड उसकी बच्चेड़नी में जेया टकरा बैठा. उसकी हालत खराब हो गयी और वो चीखने लगी.

मैने 3-4 शॉट्स ऐसे ही ज़ोर से मारे, जो सीधे उसकी बच्चेड़नी में लगे, और उसकी चीखे बंद नही होने दी. फिर उसने मुझे पैरों से धक्का कर पीछे कर दिया और मेरा लंड उसकी छूट से बाहर
आ गया. अब वो ज़ोर की साँसें लेने लगी, और पड़े-पड़े मुझे देखने लगी.

कुछ पल मैं मेरे लंड से खेलने लगा, और मेरा लंड खड़ा करके फिर से उसके करीब आया. तो उसने कहा, “ज़रा धीरे करो, मुझे लग गया है अंदर. दुख रहा है पेट में.”

मैने कहा: अछा ठीक है, अब से धीरे करूँगा.

और मैं फिर से उसकी छूट में लंड डाल कर उसे छोड़ने लगा. इस बार मैं धीरे-धीरे छोड़ रहा था. उसे अछा फील हो रहा था. आख़िर इतने दीनो बाद वो कोई लंड अपनी छूट में ले रही थी.

वो मुझसे बोली, “आज तुमने मुझे बहुत खुशी दी है. मैं बहुत दीनो से तड़प रही थी. मुझे रोज़ मेरी छूट में जलन होती थी. लेकिन क्या कर सकती थी?”

मैने कहा, “अब तो रोज़ देगी ना मेरी जान? टेन्षन मत लो, अब तुम्हे रोज़ मैं ऐसे ही छोड़ा करूँगा. अगर तुम पहले मान जाती तो हम कब का कर लेते और साथ में रोज़ाना करते.”

भाभी, “हा तुम सही कह रहे हो. लेकिन अब हो गया है तो मुझे बहुत अछा लग रहा है. और इस सब की वजह तुम हो मेरे प्यारे देवर जी (और मुस्कुरा दी).”

मैं, “अछा पातिदेव, मेरे राजा, ब सीधे देवर? क्या बात है, बहुत जल्दी पलटी मारी तूने तो मेरी भाभी.”

और उपर गिर कर उसके होंठ के करीब आ कर, “मुझे अब तेरा पति बनना है. और तेरे बच्चो का बाप भी बनना है. बोल बनेगी मेरे बच्चो की मा. बोल देगी मेरे बच्चो को जानम? पिलाएगी तेरा ये दूध मेरे बच्चो को? बोल ना?”

वो कुछ नही बोली और कुछ देर बाद बोली: सोचेंगे, अभी तुम जल्दी से करो. मुझे जाना भी है. आज लाते कर रहे हो.

मैने कहा, “अभी कहाँ, अभी तो मेरा पानी निकालने वाला है. बोल कहा निकालु? कल तो तूने मेरा पानी पी लिया था, आज भी पीले ना.”

भाभी: कल तूने धक्के से मेरे गले में अपना लंड डाल दिया था, और मुझे दबाए रखा था. इसलिए मुझे मजबूरन पीना पड़ा था.

मैं: टू आज बिना मजबूरी के तू मेरा पानी नही पी सकती?पीले ना.

उसने कुछ देर सोचने के बाद कहा: ठीक है पी लूँगी.

फिर मैने उसे सीधा बेड से उठा कर ज़मीन पर बिता दिया और उसके मूह में लंड दे कर कहा: इसे चूस ले मेरी जान.

और उसका मूह खुलवा कर उसके मूह में अपना लंड डाल दिया, और उसके मूह में अंदर-बाहर करने लगा. मैने उसका मूह पकड़ लिया, और उसके मूह को आचे से छोड़ने लगा. मेरे मूह से आ आ की आवाज़ निकालने लग गयी थी. कुछ देर में मैने उससे कहा-

मैं: आने वाला है, मूह खोलो.

उसने अपना मूह पूरा खोला और कहा: आओ जल्दी से.

मैने अपना लंड हिलना शुरू कर दिया, और कुछ ही देर में मैने ज़ोर की धार छ्चोढी जो सीधे उसके मूह पर गिरी. इस तरह मैने मेरा पानी उसके मूह में पूरा भर दिया. इतना गाढ़ा और तोड़ा सफेद-पीले कलर का माल मैने उसके मूह में डाल दिया और कहा थोड़ी देर ऐसे ही रख. उसने वैसा ही किया. फिर मैने बेड पर पड़ा अपना फोन उठाया और उसकी ऐसे ही मूह खुला करके फोटो लेली, और उसके नंगे बदन की भी फोटो लेली.

फिर उससे कहा: अब से मैं रोज़ तेरी ऐसे ही फोटो खींचा करूँगा. अब पीले इसे.

और उसने आँखें बंद करके मेरा सारा का सारा माल पी लिया. फिर पी लार अपनी जीभ बाहर निकालने लगी, जैसे उसे खट्टा लगा हो. मैने उसे उठाया और बेड पर बिता दिया. फिर कुछ देर वो और में एक-दूसरे को ऐसे ही देखते रहे.

दोनो नंगे और एक-दूसरे की आँखों में आँखें डाल कर देखने लगे. हमारे मूह पर हल्की सी मुस्कान थी, जैसे सेक्स के बाद एक-दूसरे को देख शरमाते है.

मैं उसके करीब आया और उसके होंठो को चूम लिया, और उसके बूब्स को दबाने लगा. उसने भी मेरा साथ नही छ्चोढा और वो भी मुझे चूमे जेया रही थी. कुछ देर में हमने कपड़े पहने और जाने से पहले एक-एक किस और की.

फिर मैने कहा: अब कल तेरी गांद भी मारूँगा मेरी जान, तू रेडी रहना.

उसने कुछ नही कहा और जाने लगी तो मैने उसे रोक कर उसे अपनी और खींचा. फिर उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे दबोच लिया और कहा-

मैं: मॅन तो कर रहा है तुझे जाने ना डू मेरी जान, और यहीं मेरे पास सुला लू, पर क्या करू?

उसने कहा: डेक्ते है, अभी जाने दो मुझे. 12:30 आम हो गये है. चाची उठी और उन्होने मुझे इस वक्त कमरे में नही देखा, तो कहीं बाहर आ कर ढूँढने ना लग जाए. फिर मेरा निकलना बी मुश्किल हो जाएगा.

मैने उसे एक किस की और कपड़े पहनने में मदद करने लगा.

वो कपड़े पहनते हुए कहने लगी: क्या बात है, आज ज़िद नही कर रहा है की में रुक जौ या यहीं सो जाओ तेरे साथ? उपर से मेरी सारी पहनने में मदद भी कर रहा है.

मैने कहा: इतना बेकार नही हू. मेरे लिए निकली है, तो क्या इतना भी नही कर सकता तुम्हारे लिए?

उसने सारी पहन ली और जाने वाली थी.

तो मैने उससे कहा: बस एक और किस डोगी क्या?

तब भाभी: मुझे पता था की कुछ बाकी रह गया है तेरा. हा ठीक है कर ले, आजा.

फिर मैने उसके करीब आ कर उसको बाहों में कॅसा, और उनके होंठ पर अपने होंठ रख कर उसे एक लंबी वाली किस की. फिर उसके ब्लाउस से थोड़े उसके बूब्स उपर आ रहे थे. मैने वहाँ भी 2-3 किस्सस की. फिर उसको छ्चोढ़ दिया की अब जाओ.

उसने गाते खोल कर इधर-उधर देखा, और निकल गयी. मैं गाते लगा कर अपने बेड पर आ कर बैठ गया. लेकिन मुझे अब ज़ोरो की सस्यू लगी थी, तो मैं उठ कर बाहर वाले बातरूम की और गया अपना शॉर्ट्स पहन कर. छ्होटी भाभी का रूम उधर ही था. मैं बातरूम में जेया कर सस्यू करके निकला, और अपने रूम की और आने लगा, तो मुझे उनकी खिड़की से कुछ परछाई दिखी.

फिर मैं तोड़ा उनके रूम के करीब गया, तो मुझे अंदर से आवाज़े सुनने लगी “आह बेबी, और ज़ोर से करो आ, फाड़ दो मेरी छूट. रुकना मत” ऐसी आवाज़े सुनाई दी. मैं समझ गया आज भाई भाभी की खूब ज़ोर से ले रहा था. क्यूंकी भाई 7 दिन के लिए तौर पे जो जेया रहा था, तो फुल जोश में छ्होटी भाभी की छूट छोड़ रहा था.

मैं कुछ देर वही सुनता रहा और बीच-बीच में भाई भी बोलने लगा: आज तो तेरी छूट लेने में मज़ा ही आ गया. आज तेरी छूट को फाड़ दूँगा. क्या छूट है तेरी, मज़ा ही गया बेबी. और ले मेरा लंड. साली रंडी मेरी. तेरी छूट है की गरम भट्टी? कितनी गरम है. कितनी गर्मी है तेरी छूट में. ले मेरा लंड. समा ले अपनी छूट में.

ऐसी बात चल रही थी. मेरा तो वहीं खड़ा हो गया. मैं तुरत वहाँ से निकल गया की भागो नही तो कोई देखा लेगा अभी. फिर कमरे में आ कर, छ्होटी भाभी की चुदाई सोच कर दिमाग़ खराब होते जेया रहा था. मेरे दिमाग़ में वही सब घूम रहा था की कैसे मेरी छ्होटी भाभी भाई से अपनी छूट मरवा रही थी.

वो गाली देकर बात कर रही थी. मेरा लंड बैठने का नाम नही ले रहा था. मैने कुछ भी करके अपने आप को कंट्रोल करके सोना चाहा, लेकिन मेरा लंड मेरी बात ही नही मान रहा था. फिर मैं उसे पिल्लो में दबा कर सो गया.

सुबह जल्दी उठा मैं और सीधे बातरूम की और गया. मुझे सस्यू लगी थी ज़ोरो की. वहाँ बातरूम की दीवारों से कुछ थोड़ी डोर 3-4 कॉंडम पड़े थे, जो पुर पानी से भरे थे. मैने सोचा रात को भाई ने भाभी की छूट मार कर उन्हे बाहर फेंका होगा. कॉंडम का साइज़ तो छ्होटा लग रहा था मुझे. मैने सोचा कहीं भाई का लंड इतना बड़ा तो नही है.

फिर मैं सस्यू करके लौट आया और अपना मूह धो कर हॉल में आ कर बैठ गया. वहाँ मेरी चाची हाथ में छाई का कप लेकर आई और कहा-

चाची: अर्रे आज तो तू जल्दी उठ गया. क्या हुआ, नीड नही आई क्या?

मैने कहा: नही, कल रात को जल्दी सो गया था, तो जल्दी नींद खुल गयी.

वो मुझसे बात करने लग गयी. थोड़ी ही देर में छ्होटी भाभी अपने बाल बाँधते हुए उनके कमरे से बाहर आई. उन्होने नीले डार्क रंग की सारी पहनी हुई थी, जो थोड़ी ऐसी हो गयी थी जैसे बिना प्रेस की हो.

फिर बाल बाँधते हुए हमे देखते हुए बाहर बातरूम की तरफ निकल गयी. कुछ देर में मेरी बड़ी भाभी भी आ गयी उनके बच्चे को साथ लेकर, उसको रेडी करके स्कूल के लिए. फिर उन्होने मुझे देखा. मैने उनको देखा. तो हम दोनो आपस में देख कर हल्का सा मुस्कुरा दिए. भाभी फिर वहाँ से उनके बच्चे को छ्चोढने स्कूल चली गयी.

भाई ने भी अपनी पॅकिंग कर ली थी, और बाहर आते हुए कहा: आज से 7 दिन तक तुझे ही शॉप संभालनी है.

मैने ओके बोल दिया और मैं उन्हे छ्चोढने उनके दोस्त के घर लेकर निकल गया.

आयेज की कहानी अगले पार्ट में.

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